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सीएसआर साझेदारी से पोषण और बाल विकास कार्यक्रमों को मिलेगी नई गति

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महिला एवं बाल विकास विभाग ने उद्योगों के साथ बनाई दीर्घकालिक सहयोग की रणनीति

"आप सबके सहयोग से हम स्वर्णिम छत्तीसगढ़ बनाएंगे" – प्रमुख सचिव शहला निगार

आंगनबाड़ी केंद्रों के उन्नयन, कुपोषण उन्मूलन, महिला सशक्तिकरण और नवाचार आधारित परियोजनाओं पर विस्तृत मंथन

रायपुर- महिला एवं बाल विकास विभाग ने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के माध्यम से राज्य में पोषण, बाल विकास एवं महिला सशक्तिकरण कार्यक्रमों को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। इसी उद्देश्य से आज सिविल लाइंस स्थित सर्किट हाउस में विभाग और विभिन्न औद्योगिक संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ राज्य स्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए दीर्घकालिक सहयोग की रणनीति पर विस्तृत चर्चा हुई।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव शहला निगार ने कहा कि महिलाओं और बच्चों का समग्र विकास राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। शासन द्वारा संचालित योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाने में उद्योगों की सामाजिक भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सीएसआर सहयोग के माध्यम से पोषण, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल, महिला सशक्तिकरण, आंगनबाड़ी केंद्रों के सुदृढ़ीकरण तथा नवाचार आधारित गतिविधियों को नई ऊर्जा मिलेगी। उन्होंने उद्योगों से विभाग के साथ दीर्घकालिक साझेदारी विकसित करने का आह्वान करते हुए कहा, "आप सबके सहयोग से हम स्वर्णिम छत्तीसगढ़ बनाएंगे।"

महिला एवं बाल विकास विभाग की संचालक डॉ. रेणुका श्रीवास्तव ने कहा कि विभाग तीन प्रमुख आयामों—महिला सशक्तिकरण, बच्चों का संरक्षण तथा बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण—पर निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि सीएसआर सहयोग के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों में आधारभूत सुविधाओं का विकास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सामग्री, डिजिटल संसाधन, पोषण संवर्धन, स्वच्छ पेयजल, खेल सामग्री, स्वच्छता सुविधाएं तथा नवाचार आधारित गतिविधियों का विस्तार किया जा सकता है।

बैठक में विभाग द्वारा तैयार की गई संभावित सीएसआर परियोजनाओं की विस्तृत प्रस्तुति भी दी गई। इसमें कुपोषण उन्मूलन, आंगनबाड़ी केंद्रों का उन्नयन, पोषण वाटिका एवं मुनगा पौधारोपण, प्रारंभिक बाल विकास गतिविधियां, दिव्यांग अनुकूल सुविधाएं, किशोरियों के स्वास्थ्य एवं पोषण कार्यक्रम तथा क्षमता निर्माण जैसे विषयों को प्राथमिकता दी गई।

बैठक के दौरान उद्योगों के प्रतिनिधियों ने विभाग के प्रस्तावों में रुचि व्यक्त करते हुए विभिन्न योजनाओं में सहयोग की संभावनाओं पर अपने सुझाव साझा किए। यह निर्णय लिया गया कि विभाग और उद्योगों के बीच नियमित समन्वय स्थापित कर प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान की जाएगी तथा चरणबद्ध तरीके से सीएसआर परियोजनाओं को क्रियान्वित किया जाएगा।

बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि सीएसआर सहयोग केवल अधोसंरचना विकास तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बच्चों के समग्र विकास, गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा, पोषण, डिजिटल सशक्तिकरण, नवाचार और सामुदायिक सहभागिता को भी बढ़ावा देगा। विभाग इसके लिए उद्योगों के साथ नियमित संवाद, समन्वय एवं समीक्षा की प्रभावी व्यवस्था विकसित करेगा।

उल्लेखनीय है कि सीएसआर सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा 'पंखुड़ी' पोर्टल विकसित किया गया है। वहीं राज्य शासन द्वारा 'सर' (State CSR) पोर्टल का संचालन किया जा रहा है, जिसके माध्यम से विभागीय प्राथमिकताओं और सीएसआर परियोजनाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा रहा है।

एसईसीएल की प्रमुख सीएसआर योजना 'एसईसीएल के सुश्रुत' को भारत के राजपत्र में अधिसूचित किया गया

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कोयला मंत्रालय के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ स्थित कोल इंडिया की सहायक कंपनी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। कंपनी की प्रमुख कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) योजना 'एसईसीएल के सुश्रुत' भारत के किसी भी कोल पीएसयू की पहली सीएसआर योजना बन गई है, जिसे भारत के राजपत्र (Gazette of India) में अधिसूचित किया गया है।

कोयला मंत्रालय ने आधार (लक्षित वितरण वित्तीय एवं अन्य सब्सिडी, लाभ एवं सेवाएं) अधिनियम, 2016 तथा आधार प्रमाणीकरण (सुशासन, सामाजिक कल्याण, नवाचार एवं ज्ञान) नियम, 2020 के तहत इस योजना के लाभार्थियों के लिए आधार प्रमाणीकरण की अनुमति प्रदान करते हुए राजपत्र अधिसूचना जारी की है।

इस अधिसूचना के माध्यम से लाभार्थियों को स्वैच्छिक आधार प्रमाणीकरण के जरिए पारदर्शी, प्रभावी और लक्षित तरीके से लाभ उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही, जो लाभार्थी आधार का उपयोग नहीं करना चाहते, उनके लिए सरकार द्वारा अनुमोदित वैकल्पिक पहचान दस्तावेजों की भी व्यवस्था की गई है।

वर्ष 2023 में शुरू की गई 'एसईसीएल के सुश्रुत' योजना, एसईसीएल की प्रमुख सीएसआर पहल है। इसके तहत कंपनी के परिचालन क्षेत्रों के मेधावी विद्यार्थियों को नीट (NEET) की निःशुल्क आवासीय कोचिंग उपलब्ध कराई जाती है, ताकि वे चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में अपना करियर बना सकें।

इस योजना ने लगातार उत्कृष्ट परिणाम दिए हैं।

पहला बैच (2023–24):

  • 40 में से 39 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा उत्तीर्ण की।

  • 11 विद्यार्थियों को एमबीबीएस (MBBS) में प्रवेश मिला।

  • 2-2 विद्यार्थियों को बीडीएस (BDS), बीएएमएस (BAMS) तथा बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी (BPTH) में प्रवेश प्राप्त हुआ।

  • 2 विद्यार्थियों ने छत्तीसगढ़ एवं मध्य प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में वेटरनरी पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्राप्त किया।

दूसरा बैच (2024–25):

  • 40 में से 31 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा उत्तीर्ण की।

  • विद्यार्थियों को एमबीबीएस, बीडीएस, बीएएमएस तथा बैचलर ऑफ फिशरीज साइंस (B.F.Sc.) जैसे पाठ्यक्रमों में सरकारी संस्थानों में प्रवेश मिला।

यह राजपत्र अधिसूचना 'एसईसीएल के सुश्रुत' योजना के विकास में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे योजना की संस्थागत व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी तथा लाभार्थियों के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही और सुविधाजनक पहुंच सुनिश्चित होगी।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले 'एसईसीएल के सुश्रुत' भारत सरकार के डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) पोर्टल पर सूचीबद्ध होने वाली किसी भी कोल पीएसयू की पहली और एकमात्र सीएसआर योजना भी बन चुकी है। यह इसकी मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था तथा तकनीक आधारित पारदर्शी सेवा वितरण के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

'एसईसीएल के सुश्रुत' के माध्यम से एसईसीएल खनन क्षेत्रों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को बेहतर अवसर प्रदान करते हुए देश के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए भविष्य के योग्य चिकित्सकों और स्वास्थ्य पेशेवरों को तैयार करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

राष्ट्रीय CSR शिखर सम्मेलन 2026 में उपराष्ट्रपति का संबोधन

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज भारत मंडपम, नई दिल्ली में टाइम्स ऑफ इंडिया समूह द्वारा आयोजित राष्ट्रीय CSR शिखर सम्मेलन 2026 को संबोधित किया।

उपराष्ट्रपति ने इस सम्मेलन के आयोजन के लिए टाइम्स ऑफ इंडिया समूह की सराहना करते हुए कहा कि जब संस्थान, नेतृत्व और विचार एक साथ आते हैं, तो समाज और राष्ट्र सामूहिक रूप से आगे बढ़ते हैं। उन्होंने इस परिवर्तनशील दौर में सहयोग की महत्ता पर जोर दिया।

भारत की प्रगति और आर्थिक विकास

उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले दशक में भारत की प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत दुनिया की 10वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है और जल्द ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है।

उन्होंने बताया कि संरचनात्मक सुधार, समावेशी विकास, डिजिटल कनेक्टिविटी, वित्तीय समावेशन और बुनियादी ढांचे के विकास से 25 करोड़ से अधिक लोग अत्यधिक गरीबी से बाहर आए हैं और देशभर में आकांक्षाएं बढ़ी हैं।

CSR की भूमिका

उन्होंने कहा कि विकास के अगले चरण के लिए सरकार, उद्योग और नागरिक समाज के बीच गहरी साझेदारी आवश्यक है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) अब केवल एक सहायक गतिविधि नहीं, बल्कि राष्ट्रीय प्रगति का केंद्रीय तत्व है।

उन्होंने CSR को वह क्षेत्र बताया जहां उद्यमिता और संवेदना का मिलन होता है, जहां बैलेंस शीट मानव कहानियों से जुड़ती है और विकास उद्देश्य प्राप्त करता है।

आत्मनिर्भर और विकसित भारत की दृष्टि

उपराष्ट्रपति ने आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत @2047 के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि विकास व्यापक, समावेशी और टिकाऊ होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि CSR:

  • सार्वजनिक शिक्षा को मजबूत कर सकता है

  • दूरदराज क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बना सकता है

  • उद्योग-संगत कौशल विकास को बढ़ावा दे सकता है

  • महिला उद्यमिता को समर्थन दे सकता है

  • नवीकरणीय ऊर्जा और जलवायु लचीलापन बढ़ाकर हरित संक्रमण को तेज कर सकता है

जिम्मेदार पूंजीवाद और राष्ट्र निर्माण

उपराष्ट्रपति ने कहा कि CSR केवल कानूनी अनुपालन नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता है।
उन्होंने कहा कि ईमानदार करदाता देशभक्त नागरिकों में शामिल हैं और जब कॉर्पोरेट भारत समाज, युवाओं, नवाचार और स्थिरता में निवेश करता है, तो वह सामाजिक पूंजी का निर्माण करता है और दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित करता है।

उन्होंने कहा कि भारत अब तकनीक अपनाने वाला देश नहीं, बल्कि नवाचार करने वाला देश बन रहा है और उसे दुनिया के लिए नवाचार करने का लक्ष्य रखना चाहिए।

नीतिगत सुधार और सहयोग

उन्होंने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, डिजिटल गवर्नेंस और जीएसटी जैसे सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे प्रणाली में विश्वास और पारदर्शिता बढ़ी है।
हालांकि, उन्होंने कहा कि केवल नीतियां राष्ट्र को नहीं बदल सकतीं; सरकार, उद्योग और नागरिक समाज के समन्वय से ही परिवर्तन संभव है।

लाभ और उद्देश्य का संतुलन

उपराष्ट्रपति ने जिम्मेदार पूंजीवाद पर जोर देते हुए कहा कि लाभ और उद्देश्य दोनों साथ-साथ चलने चाहिए।
उन्होंने कहा कि वैध लाभ समाज कल्याण की प्रतिबद्धता के साथ अर्जित होना चाहिए और नवाचार, समावेशन, विकास और स्थिरता एक-दूसरे को मजबूत करें।

मीडिया और लोकतंत्र

उपराष्ट्रपति ने मीडिया से विकास से जुड़ी सकारात्मक कहानियों को अधिक स्थान देने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में लोगों को केंद्र में रखा जाना चाहिए और प्रगति की सकारात्मक कहानियों से लोगों का विश्वास मजबूत होता है।

उन्होंने चुनावी प्रक्रियाओं के महत्व और “एक राष्ट्र, एक चुनाव” की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे मजबूत निर्णय लेने और दीर्घकालिक नीतिगत फोकस संभव होगा।


Kharod Blood Donate Camp : सबसे बड़ा पुण्य का कार्य है रक्तदान : एडिशनल एसपी, खरौद के तिवारीपारा में वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू की स्मृति में आयोजित हुआ रक्तदान शिविर

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जांजगीर-चाम्पा- धार्मिक नगरी खरौद के तिवारीपारा स्थित मिडिल स्कूल परिसर में वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू की स्मृति में 'रक्तदान शिविर' आयोजित किया गया. इस दौरान एडिशनल एसपी उमेश कश्यप, भाजपा पामगढ़ मण्डल अध्यक्ष यशवंत साहू, खरौद की पार्षद नीलम यादव विशेष रूप से मौजूद थे. रक्तदान का यह शिविर, शिवरीनारायण के संकट मोचन ब्लड सेंटर के सहयोग से लगा था, जहां 30 रक्तदाताओं ने रक्तदान किया, जिसमें 5 युवाओं ने पहली बार रक्तदान किया और ब्लड डोनेट कर वे काफी खुश नजर आए. 

इस दौरान एडिशनल एसपी उमेश कश्यप ने कहा कि रक्तदान को महादान कहा जाता है और सबसे बड़ा पुण्य का कार्य रक्तदान है. खरौद के शिविर में युवाओं ने रक्तदान किया है और समाज को बड़ा संदेश दिया है. उन्होंने कहा कि रक्तदान से शरीर को लाभ होता है. ऐसे में युवाओं को रक्तदान करने हमेशा आगे रहना चाहिए. कश्यप ने वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू की स्मृति में आयोजित रक्तदान शिविर को लेकर कहा कि यही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि है. आज वे हमारे बीच नहीं है, लेकिन उनकी याद में यह पुनीत कार्य हो रहा है, यह अच्छी पहल है. 

इस मौके पर वरिष्ठ नागरिक उग्रसेन साहू, बिसम्भर प्रसाद साहू, वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू आयोजन समिति के संयोजक राजकुमार साहू, संकट मोचन ब्लड सेंटर के संचालक गोविंद साहू, युवा जागरण समिति के अध्यक्ष जागेश्वर साहू, शिवरीनारायण के कान्हा यादव, भाजपा के युवा नेता रामकृष्ण सोनी, पूर्व पार्षद धनंजय रात्रे, इंदलदेव सेवा समिति के कृष्णकुमार आदित्य, दीपक देवांगन, हेमंत साहू, गोपाल यादव, लव सोनी, फिरत आदित्य, रमा आदित्य, बलराम आदित्य, संकुल समन्वयक उपेंद्र सिंह ध्रुव, मिडिल स्कूल की प्रधानपाठक सरोज यादव, प्रायमरी स्कूल की प्रधानपाठक रश्मि कश्यप, शिक्षक नीलकमल साहू, रविशंकर यादव, गौतम शर्मा, हीरालाल साहू, मिथलेश साहू, रमाशंकर यादव, प्रकाश तिवारी, कैलाश थवाईत, हेमंत साहू, दीनदयाल साहू समेत अन्य लोग मौजूद थे.


अखबार वितरकों को किया कैप और दस्ताने वितरण,ठंड से बचाव के लिए पीपला फाउंडेशन द्वारा अभिनव पहल

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आरंग- मंगलवार को स्वयंसेवी संस्था पीपला वेलफेयर फाउंडेशन ने लगातार बढ़ रही कंपकंपाती ठंड को देखते हुए नगर के अखबार वितरकों को सिर व कान ढकने वाले  विशेष टोपी एवं हाथों के लिए दस्ताना वितरण किया। जिससे उन्हें ठंड से राहत मिल सके।इस अवसर पर फाऊंडेशन के पदाधिकारियों ने कहा मीडिया देश का चौथा स्तंभ है।हर क्षेत्र में मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण है।अखबार वितरण करने वाले युवा सर्दी,गर्मी, बरसात,सभी मौसम में प्रातः से ही उठकर अखबारों का वितरण करते हैं। घर घर   जाकर सुबह-सुबह अखबार पहुंचाते है‌। लोगों को भी सुबह-सुबह अखबारो का इंतजार रहता है। वितरकों को अखबारों को समय पर लोगों तक पहुंचाना चुनौती भरा कार्य होता है। इसलिए उन्हें ठंड से बचाव के लिए विशेष टोपी व दस्ताना वितरण किया गया। ज्ञात हो कि यह संस्था ठंड को देखते हुए वस्त्र दान अभियान चला रहे हैं। जिसके तहत् जरूरत मंदों को कंबल वितरण किया जा रहा है।जिसे काफी सराहा जा रहा है। वहीं पीपला की पहल का वरिष्ठ पत्रकार पवन साहू सहित सभी अखबार वितरकों ने सराहना करते हुए आभार जताया है। वितरण में प्रमुख रूप से फाउंडेशन से दूजेराम धीवर, महेन्द्र कुमार पटेल,कोमल लाखोटी, संजय मेश्राम,अभिमन्यु साहू, प्रतीक टोंड्रे, दुर्गेश निर्मलकर सहित नगर के अखबार वितरक उपस्थित थे।


विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति हेतु सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) और भारतीय कॉरपोरेट कार्य संस्थान (IICA) के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर

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नई दिल्ली-सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने 31 अक्टूबर, 2025 को भारतीय कॉरपोरेट कार्य संस्थान (Indian Institute of Corporate Affairs – IICA), जो कि कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्था है, के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।

इस समझौते का उद्देश्य एक व्यापक सतत विकास लक्ष्य (SDG) संरेखण रूपरेखा (Comprehensive SDG Alignment Framework) विकसित करना है, जो राष्ट्रीय, राज्य, ESG (Environmental, Social, Governance) और CSR (Corporate Social Responsibility) संकेतकों को एकीकृत करते हुए “विकसित भारत” (Viksit Bharat) के विज़न को साकार करने की दिशा में कार्य करेगा।

IICA की भूमिका और नेतृत्व

IICA में यह सहयोग महानिदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री ज्ञानेश्वर कुमार सिंह के गतिशील नेतृत्व में आरंभ किया गया है। श्री सिंह ने IICA की ESG, CSR और जिम्मेदार व्यवसाय आचरण (Responsible Business Conduct) से संबंधित रणनीतिक पहलों को राष्ट्रीय विकास एजेंडे के साथ जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

हस्ताक्षर समारोह में उपस्थित प्रमुख गणमान्य व्यक्तियों में शामिल थे —

  • किशोर बाबुराव सुरवाडे, अतिरिक्त महानिदेशक, क्षमता विकास प्रभाग, MoSPI

  • डॉ. गरिमा दाधिच, सहयोगी प्राध्यापक एवं प्रमुख, स्कूल ऑफ बिजनेस एनवायरनमेंट, IICA

  • रुचिका गुप्ता, उप महानिदेशक, सामाजिक सांख्यिकी प्रभाग, MoSPI

  • शिवनाथ सिंह जादावत, निदेशक, प्रशिक्षण इकाई, क्षमता विकास प्रभाग, MoSPI

  • डॉ. जियाउल हक, निदेशक, सामाजिक सांख्यिकी प्रभाग, MoSPI
    साथ ही MoSPI और IICA के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।

राष्ट्रीय संकेतक रूपरेखा (NIF) और सहयोग की दिशा

राष्ट्रीय संकेतक रूपरेखा (National Indicator Framework – NIF), जो भारत की सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्रगति की निगरानी का प्रमुख आधार है, इस सहयोग की नींव बनेगी।

इस रूपरेखा के आधार पर, यह पहल एक ऐसी प्रणाली विकसित करेगी जो राज्य स्तर के संकेतकों को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप बनाएगी तथा उनमें ESG और CSR आयामों को भी एकीकृत करेगी।

इस एकीकृत दृष्टिकोण के माध्यम से राष्ट्रीय, राज्य एवं कॉरपोरेट सतत विकास ढाँचों के बीच समन्वय स्थापित किया जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि व्यवसायों की CSR और ESG पहलें राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के SDG लक्ष्यों के साथ प्रभावी रूप से जुड़ी हों।

विकसित भारत की दिशा में एकीकृत प्रयास

NIF–SIF (National Indicator Framework – State Indicator Framework) के बीच इस समन्वय से प्रमाण-आधारित नीतिनिर्माण (Evidence-Based Policymaking) को सशक्त किया जाएगा, सतत कॉरपोरेट सहभागिता को बढ़ावा मिलेगा और विकसित भारत के विज़न को साकार करने की दिशा में सुसंगत एवं समावेशी SDG निगरानी और कार्यान्वयन को गति मिलेगी।


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