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दुर्व्यवहार अथवा उत्पीड़न की शिकायत मिलते ही हो तत्काल कार्रवाई, दोषी किसी भी सूरत में बख्शे न जाएं - मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश के आवासीय विद्यालयों और छात्रावासों में अध्ययनरत बालिकाओं की सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए सभी जिला कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं।


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट कहा है कि बच्चों की सुरक्षा और गरिमा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। दुर्व्यवहार, उत्पीड़न अथवा असुरक्षित वातावरण से संबंधित किसी भी शिकायत को पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ लेते हुए तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आवासीय विद्यालय और छात्रावास बच्चों के लिए केवल अध्ययन के स्थान नहीं, बल्कि उनके घर की तरह हैं। माता-पिता अपने बच्चों को विश्वास के साथ इन संस्थानों में भेजते हैं। इस विश्वास की रक्षा करना शासन-प्रशासन और संस्थान से जुड़े प्रत्येक अधिकारी-कर्मचारी की जिम्मेदारी है। बच्चों को सुरक्षित, भयमुक्त और गरिमापूर्ण वातावरण उपलब्ध कराना हर परिस्थिति में सुनिश्चित किया जाए।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बीजापुर जिले के एकलव्य आवासीय विद्यालय में छात्राओं के साथ कथित दुर्व्यवहार संबंधी समाचार पर संज्ञान लेते हुए जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को मामले की गंभीरता से जांच कर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। जांच में जो भी तथ्य सामने आएं, उनके आधार पर बिना किसी विलंब के विधिसम्मत कार्रवाई की जाए। यदि किसी स्तर पर शिकायत की अनदेखी, उसे दबाने का प्रयास अथवा कर्तव्य में लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित जिम्मेदारों की जवाबदेही भी तय की जाए।

मुख्यमंत्री साय ने इस प्रकरण के संदर्भ में सभी जिलों को व्यापक सतर्कता बरतने के निर्देश देते हुए कहा कि जिले में संचालित बालिका छात्रावासों, आश्रमों और आवासीय विद्यालयों का नियमित निरीक्षण किया जाए। कलेक्टर यह सुनिश्चित करें कि इन संस्थानों में सुरक्षा संबंधी निर्धारित व्यवस्थाओं और प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन हो रहा है। छात्रावासों में अधीक्षकों एवं अन्य जिम्मेदार कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति, परिसर की सुरक्षा व्यवस्था तथा बच्चों की शिकायतों के निराकरण की व्यवस्था की भी समीक्षा की जाए।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि बच्चों से जुड़ी शिकायतों के मामले में केवल शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई करने तक व्यवस्था सीमित नहीं रहनी चाहिए। नियमित निरीक्षण, सतत संवाद और प्रभावी निगरानी के माध्यम से ऐसी परिस्थितियों को पहले ही पहचानने और रोकने की व्यवस्था विकसित की जाए। विद्यालय एवं छात्रावास प्रबंधन को भी यह स्पष्ट रूप से बताया जाए कि बच्चों की सुरक्षा के प्रति किसी भी प्रकार की उदासीनता गंभीरता से ली जाएगी।

मुख्यमंत्री साय ने जिला कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देशित किया है कि बालिकाओं के साथ दुर्व्यवहार, उत्पीड़न अथवा उन्हें डराने-धमकाने जैसी किसी भी शिकायत की सूचना मिलने पर संबंधित विभाग और पुलिस प्रशासन आपसी समन्वय के साथ तत्काल कार्रवाई करें। आवश्यक होने पर पीडि़त छात्राओं को काउंसलिंग एवं अन्य जरूरी सहायता भी उपलब्ध कराई जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी बेटियां निर्भय होकर पढ़ें, आगे बढ़ें और अपने सपनों को पूरा करें, इसके लिए सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है। प्रदेश के प्रत्येक आवासीय विद्यालय और छात्रावास में बच्चों की सुरक्षा, सम्मान और गरिमा सर्वाेपरि है। इस दिशा में लापरवाही बरतने वाले किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

महाराष्ट्र सड़क हादसे में छत्तीसगढ़ के 8 लोगों की मौत, मृतकों में बच्चे भी शामिल

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जताया शोक, मृतकों के परिवारों के लिए राहत की घोषणा

रायपुर- महाराष्ट्र में हुए भीषण सड़क हादसे में छत्तीसगढ़ के 8 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों में बच्चे भी शामिल हैं। हादसे की खबर सामने आने के बाद छत्तीसगढ़ में शोक की लहर है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई है। उन्होंने पीड़ित परिवारों को राहत देने की घोषणा की है। राज्य सरकार की ओर से प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

हादसे के कारणों और मृतकों से जुड़ी अन्य जानकारी जुटाई जा रही है। प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों से संपर्क कर आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ में सुरक्षा ऑडिट के आदेश, हॉस्टल से लेकर स्कूल और कोचिंग संस्थानों तक होगी जांच

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में विद्यार्थियों और युवाओं की सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हॉस्टल, पीजी, स्कूल और कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं। इस पहल का उद्देश्य संस्थानों में मौजूद सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करना और संभावित जोखिमों को समय रहते दूर करना है।

सुरक्षा व्यवस्था की होगी व्यापक समीक्षा

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद संबंधित विभागों और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा इन संस्थानों में सुरक्षा इंतजामों की जांच की जाएगी। ऑडिट के दौरान भवन की स्थिति, आपातकालीन निकास, अग्नि सुरक्षा व्यवस्था, बिजली से जुड़े सुरक्षा मानक और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की समीक्षा पर जोर रहेगा।

विद्यार्थियों की सुरक्षा पर विशेष फोकस

हॉस्टल, पीजी और कोचिंग संस्थानों में बड़ी संख्या में विद्यार्थी और युवा रहते या पढ़ाई करते हैं। ऐसे स्थानों पर किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम होना जरूरी है। सरकार की इस पहल का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि संस्थान सुरक्षा मानकों का पालन कर रहे हैं और वहां रहने वाले विद्यार्थियों को सुरक्षित वातावरण मिल रहा है।

खामियां मिलने पर कार्रवाई की तैयारी

सुरक्षा ऑडिट के दौरान यदि किसी संस्थान में गंभीर खामियां सामने आती हैं, तो उन्हें दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं। प्रशासन की ओर से संस्थानों को सुरक्षा मानकों के अनुरूप व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जाने की संभावना है।

मुख्यमंत्री के इस निर्देश को विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब आने वाले दिनों में सुरक्षा ऑडिट की रिपोर्ट और उसके आधार पर होने वाली कार्रवाई पर नजर रहेगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भंडारा सड़क दुर्घटना पर जताया गहरा शोक

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मुख्यमंत्री के निर्देश पर घायलों और प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए अधिकारियों की टीम रवाना

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने महाराष्ट्र के भंडारा जिले में नागपुर-रायपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर हुई भीषण सड़क दुर्घटना में छत्तीसगढ़ के नागरिकों के असामयिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

मुख्यमंत्री साय ने दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोकसंतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार एवं स्थानीय प्रशासन से निरंतर समन्वय किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि घायलों के समुचित उपचार और प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के लिए छत्तीसगढ़ से अधिकारियों की एक टीम घटनास्थल के लिए भेज दी गई है। छत्तीसगढ़ सरकार इस कठिन समय में प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है और उन्हें हरसंभव सहायता प्रदान की जाएगी।

हिड़मा जैसे कुख्यात नक्सली को आदर्श मानने वाले ही दिमागी नक्सली - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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हिंसा और नक्सलवाद का महिमामंडन करने वाली मानसिकता भी समाज के लिए घातक : मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय

मुख्यमंत्री ने कहा - बस्तर अब भय और हिंसा से निकलकर शांति, विश्वास और विकास की नई राह पर

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने एक निजी चैनल के साक्षात्कार के दौरान कहा कि  नक्सलवाद के समर्थन में बात करने वाले और कुख्यात नक्सली हिड़मा , जिसने सैकड़ो निर्दोषों की हत्या की,  उसे आदर्श मानने वाले ही दिमागी नक्सली हैं । 

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ नक्सलवाद के लंबे और पीड़ादायक दौर से बाहर निकलकर शांति, विश्वास और विकास की नई राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। हमारे सुरक्षाबलों के अदम्य साहस, केंद्र और राज्य सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति तथा बस्तर के लोगों के सहयोग से नक्सलवाद समाप्ति की ओर है। अब आवश्यकता इस बात की भी है कि हिंसा और नक्सलवाद को वैचारिक समर्थन देने तथा उसका महिमामंडन करने वाली मानसिकता को समाज स्पष्ट रूप से अस्वीकार करे।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज भी कुछ लोग ऐसे कुख्यात नक्सलियों को अपना आदर्श मानते हैं, जिनके हाथ निर्दोष नागरिकों और सुरक्षाबलों के खून से रंगे रहे हैं। हिड़मा जैसे नक्सलियों ने हिंसा और आतंक के माध्यम से बस्तर की अनेक पीढ़ियों को भय, अभाव और पिछड़ेपन में रखने का काम किया। ऐसे लोगों का महिमामंडन करना, उनके समर्थन में नारे लगाना या उन्हें नायक के रूप में प्रस्तुत करना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं ठहराया जा सकता।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बंदूक उठाकर निर्दोष लोगों की जान लेने वाला व्यक्ति किसी समाज का आदर्श नहीं हो सकता। नक्सली हिंसा में बस्तर ने अपने हजारों निर्दोष नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और बहादुर जवानों को खोया है। अनेक परिवारों ने अपनों को खोने का दर्द सहा, बच्चों से उनके माता-पिता छिने और विकास की संभावनाओं को दशकों तक बाधित किया गया। इस पीड़ा को नजरअंदाज कर हिंसा के जिम्मेदार लोगों का गुणगान करना बस्तर के पीड़ित परिवारों और शहीद जवानों के बलिदान का भी अपमान है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नक्सलवाद केवल बंदूक और जंगलों तक सीमित चुनौती नहीं है। हिंसा को उचित ठहराने, लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति अविश्वास पैदा करने और नक्सली हिंसा के जिम्मेदार लोगों को नायक के रूप में स्थापित करने वाली सोच भी उतनी ही चिंताजनक है। लोकतंत्र में प्रत्येक व्यक्ति को अपनी बात रखने और असहमति व्यक्त करने का अधिकार है, लेकिन हिंसा का समर्थन और निर्दोष लोगों की हत्या करने वालों का महिमामंडन किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि आज बस्तर की पहचान बदल रही है। जिस क्षेत्र को कभी नक्सली हिंसा, बारूदी सुरंगों और भय के कारण जाना जाता था, वहां अब स्कूलों की घंटियां सुनाई दे रही हैं, सड़कें बन रही हैं, स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंच रही हैं, युवाओं को शिक्षा और रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं तथा दूरस्थ गांव शासन की योजनाओं और विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर के युवा अब बंदूक नहीं, किताब, कलम, कौशल और रोजगार चाहते हैं। वे अपने सपनों को साकार करना चाहते हैं और देश-प्रदेश की प्रगति में भागीदार बनना चाहते हैं। हमारी सरकार का संकल्प है कि बस्तर के प्रत्येक युवा को आगे बढ़ने का अवसर मिले और प्रत्येक परिवार तक विकास तथा सुशासन का लाभ पहुंचे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के विरुद्ध लड़ाई केवल सुरक्षा की लड़ाई नहीं थी, बल्कि बस्तर के भविष्य को बचाने की लड़ाई थी। हमारे जवानों ने अपने प्राणों की परवाह किए बिना इस लड़ाई को निर्णायक मुकाम तक पहुंचाया है। अब समाज की जिम्मेदारी है कि हिंसा की विचारधारा को किसी भी स्वरूप में महिमामंडित न होने दे।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ शांति, लोकतंत्र और विकास के मार्ग पर आगे बढ़ चुका है। नक्सलवाद और हिंसा के लिए नए छत्तीसगढ़ में कोई स्थान नहीं है। बस्तर की नई पीढ़ी के आदर्श वे लोग होने चाहिए जो शिक्षा, सेवा, परिश्रम, नवाचार और राष्ट्र निर्माण के माध्यम से समाज को आगे बढ़ा रहे हैं, न कि वे जिन्होंने बंदूक और हिंसा के सहारे निर्दोष लोगों का जीवन छीना।

उन्होंने कहा कि बस्तर में शांति की स्थापना केवल सरकार या सुरक्षाबलों की उपलब्धि नहीं, बल्कि वहां के नागरिकों के साहस और विश्वास की जीत है। अब इस शांति को स्थायी बनाते हुए बस्तर को विकास, पर्यटन, शिक्षा, रोजगार और समृद्धि की नई पहचान देना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

छत्तीसगढ़ की खेल प्रतिभाओं को तलाशने, तराशने और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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रायपुर- हॉकी के महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद की जयंती और राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर में आयोजित राज्य खेल अलंकरण समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेश के खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों का सम्मान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। सरकार का उद्देश्य इन प्रतिभाओं को पहचानना, उन्हें बेहतर प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराना तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए मंच उपलब्ध कराना है।

126 खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों को राज्य खेल अलंकरण

पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री साय ने वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के लिए कुल 126 उत्कृष्ट खिलाड़ियों एवं प्रशिक्षकों को राज्य खेल अलंकरण से सम्मानित किया।

इसके अलावा 540 अन्य खिलाड़ियों को भी नगद प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। इस तरह समारोह में कुल 666 खिलाड़ियों एवं प्रशिक्षकों को सम्मानित करते हुए लगभग 1 करोड़ 74 लाख 19 हजार रुपये की पुरस्कार एवं प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई।

मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि मैदान पर खिलाड़ी का परिश्रम, अनुशासन और संघर्ष केवल उसकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं होता, बल्कि उसकी सफलता से पूरे छत्तीसगढ़ और देश का गौरव बढ़ता है।

खिलाड़ियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने पर भी जोर

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता केवल खिलाड़ियों को पुरस्कार देने तक सीमित नहीं है। खिलाड़ियों के भविष्य को सुरक्षित और बेहतर बनाना भी सरकार की जिम्मेदारी है।

इसी दिशा में राज्य सरकार ने पिछले तीन वर्षों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को राज्य खेल अलंकरण से सम्मानित किया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के 156 उत्कृष्ट खिलाड़ियों की सूची हाल ही में जारी की गई है, जिससे उनके लिए शासकीय सेवा में नियुक्ति का रास्ता खुला है।

सरकार के इस कदम से खिलाड़ियों को खेलों में बेहतर प्रदर्शन करने के साथ-साथ भविष्य को लेकर भी सुरक्षा और भरोसा मिलने की उम्मीद है। इससे युवाओं के बीच खेल को एक बेहतर करियर विकल्प के रूप में अपनाने का विश्वास मजबूत होगा।

बस्तर और जनजातीय क्षेत्रों की प्रतिभाओं पर विशेष फोकस

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। जरूरत है कि इन प्रतिभाओं को समय रहते पहचाना जाए और उन्हें उचित प्रशिक्षण, संसाधन और प्रतिस्पर्धा का अवसर दिया जाए।

इसी सोच के साथ राज्य सरकार द्वारा बस्तर ओलंपिक का आयोजन किया जा रहा है। इसके साथ ही सरगुजा ओलंपिक के माध्यम से भी स्थानीय युवाओं को अपनी खेल प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर दिया गया है।

छत्तीसगढ़ में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का आयोजन भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रहा है। इन आयोजनों के जरिए ग्रामीण, आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों के खिलाड़ियों को बड़े स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच मिल रहा है।

मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन पर 100 करोड़ रुपये

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य सरकार खेलों के विकास के लिए पांच प्रमुख मिशनों पर काम कर रही है। इनमें मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन भी शामिल है, जिसके लिए 100 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है।

इस मिशन का उद्देश्य केवल खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन करना नहीं है, बल्कि खिलाड़ियों के लिए एक ऐसी पूरी व्यवस्था तैयार करना है जिसमें—

  • प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान हो,

  • उन्हें बेहतर और आधुनिक प्रशिक्षण मिले,

  • आवश्यक खेल संसाधन उपलब्ध हों,

  • खेल अधोसंरचना मजबूत हो,

  • अनुभवी प्रशिक्षकों का सहयोग मिले,

  • और खिलाड़ियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पहुंचने का अवसर मिले।

मुख्यमंत्री के अनुसार सरकार की कोशिश है कि प्रतिभाशाली खिलाड़ी केवल संसाधनों या अवसरों की कमी के कारण पीछे न रह जाएं।

मजबूत हो रही खेल अधोसंरचना

राज्य सरकार खेलों के लिए बेहतर अधोसंरचना विकसित करने पर भी जोर दे रही है। खासतौर पर जनजातीय और दूरस्थ क्षेत्रों में मौजूद युवाओं को आधुनिक सुविधाएं और प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।

सरकार का मानना है कि यदि स्थानीय स्तर पर ही खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं और प्रशिक्षण मिल जाएं तो छत्तीसगढ़ से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी बड़ी संख्या में तैयार किए जा सकते हैं।

छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी बड़े मंचों पर बना रहे पहचान

छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी लगातार राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। समारोह में उपमुख्यमंत्री एवं खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव ने बिलासपुर खेल अकादमी की गीता यादव और मधु सिदार के एशिया कप के लिए भारतीय टीम में चयन का उल्लेख करते हुए इसे प्रदेश के लिए गौरव का विषय बताया।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है और सरकार खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

सरकार का लक्ष्य—हर प्रतिभा को मिले अवसर

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ में खेलों को केवल मनोरंजन या प्रतियोगिता तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे युवाओं के करियर और भविष्य निर्माण का महत्वपूर्ण माध्यम बनाया जाएगा।

सरकार की कोशिश है कि प्रदेश के गांवों, आदिवासी अंचलों और दूरदराज के क्षेत्रों में छिपी प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें उचित प्रशिक्षण और सुविधाएं दी जाएं। इसके बाद उन्हें जिला, संभाग और राज्य स्तर से आगे बढ़ाते हुए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया जाए।

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ सरकार की खेल नीति का फोकस अब केवल खिलाड़ियों को सम्मानित करने पर नहीं, बल्कि प्रतिभा की खोज से लेकर प्रशिक्षण, संसाधन, रोजगार और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच की पूरी व्यवस्था तैयार करने पर दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन, बस्तर ओलंपिक, सरगुजा ओलंपिक और खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स जैसी पहलों के जरिए सरकार प्रदेश के युवाओं में खेल संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

मुख्यमंत्री का संदेश साफ है—छत्तीसगढ़ की कोई भी प्रतिभा केवल अवसर और संसाधनों की कमी के कारण पीछे नहीं रहेगी।

शिक्षा समाज के विकास का मूल मंत्र, भावी पीढ़ी को शिक्षित करना हम सभी की जिम्मेदारी : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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मुख्यमंत्री कंवर समाज के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों के शपथ ग्रहण एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम में हुए शामिल

मुख्यमंत्री ने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को दिलाई सामाजिक सेवा और दायित्वों के निर्वहन की शपथ

जनजातीय समाज के सर्वांगीण विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता से कर रही कार्य

नक्सलवाद से मुक्त हो रहे बस्तर में विकास ने पकड़ी रफ्तार, जनजातीय युवाओं के लिए खुल रहे नए अवसर

कंवर समाज के विभिन्न सामुदायिक भवनों के निर्माण एवं जीर्णोद्धार के लिए 1.55 करोड़ रुपए से अधिक की राशि देने की घोषणा

‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत मुख्यमंत्री ने कंवर समाज के सामुदायिक भवन परिसर में लगाया सिंदूर का पौधा

रायपुर- शिक्षा समाज के विकास का मूल मंत्र है। किसी भी समाज की प्रगति उसकी भावी पीढ़ी को मिलने वाली शिक्षा, संस्कार और अवसरों पर निर्भर करती है। समाज का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे और प्रत्येक बच्चे की प्रतिभा को आगे बढ़ने का अवसर मिले, यह हम सभी की साझा जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषक सभागार में आयोजित छत्तीसगढ़ प्रदेश कंवर समाज विकास समिति के प्रदेश अध्यक्ष सहित नवनिर्वाचित पदाधिकारियों के शपथ ग्रहण एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि कंवर समाज का इतिहास गौरवशाली रहा है। संत गहिरा गुरु जैसे महान संतों और समाज के पुरोधाओं ने शिक्षा, संस्कार, सेवा और सामाजिक एकता का जो मार्ग दिखाया है, उसी पर आगे बढ़ते हुए नई पीढ़ी के उज्ज्वल भविष्य के लिए मिलकर काम करना होगा।

मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को सामाजिक सेवा और अपने दायित्वों के निष्ठापूर्वक निर्वहन की शपथ दिलाई। कार्यक्रम के प्रारंभ में उन्होंने प्रकृति शक्ति तथा कंवर समाज के पुरोधाओं को नमन किया। इस अवसर पर समाज के युवक-युवतियों ने आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं।

मुख्यमंत्री साय ने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि समाज द्वारा सौंपा गया दायित्व समाज को आगे ले जाने का अवसर है। उन्होंने कहा कि सभी पदाधिकारी निष्ठा, समर्पण और सामूहिक भावना के साथ समाज के शैक्षणिक, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक उत्थान के लिए कार्य करें।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कंवर समाज के पदाधिकारियों का पूरा निर्वाचन निर्विरोध और सर्वसम्मति से संपन्न होना समाज की एकता और संगठन की मजबूती का प्रमाण है। समाज की यही एकजुटता उसकी सबसे बड़ी शक्ति है और इसे आने वाली पीढ़ियों तक और मजबूत बनाकर पहुंचाना होगा। उन्होंने स्मरण किया कि एक समय कंवर समाज अलग-अलग इकाइयों में बंटा हुआ था, लेकिन वरिष्ठजनों और समाज के पुरोधाओं के प्रयासों से सभी को एक सूत्र में जोड़ा गया। उन्होंने महाराष्ट्र से आए कंवर समाज के प्रतिनिधियों और सगा-बंधुओं का भी छत्तीसगढ़ में आत्मीय स्वागत किया।

शिक्षा से खुलते हैं जीवन में आगे बढ़ने के अनेक रास्ते

मुख्यमंत्री साय ने समाज के प्रबुद्धजनों से शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल शासकीय नौकरी प्राप्त करना नहीं है। एक सफल उद्यमी, व्यापारी, समाजसेवी, जनप्रतिनिधि, उद्योगपति और जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए भी अच्छी शिक्षा आवश्यक है। शिक्षा व्यक्ति को निर्णय लेने की क्षमता देती है और समाज को प्रगति की दिशा दिखाती है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बच्चों और युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध करा रही है। प्रदेश में 17 प्रयास विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। समाज के सक्षम और प्रबुद्ध लोगों की भी जिम्मेदारी है कि वे जरूरतमंद परिवारों के बच्चों की शिक्षा में सहयोग करें और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें।

मोदी की गारंटी से जनकल्याण को मिली नई गति

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी के अंतर्गत किए गए वादों को तेजी से पूरा करने का प्रयास किया है। सरकार गठन के दूसरे ही दिन 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति दी गई। प्रदेश में प्रतिदिन लगभग 1600 आवास बनाए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि किसानों से किए गए वादे के अनुरूप 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से तथा प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान खरीदी की जा रही है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से लगभग 70 लाख माताओं-बहनों को प्रतिमाह एक हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी जा रही है और अब तक 19 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि उनके खातों में अंतरित की जा चुकी है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि तेंदूपत्ता संग्राहकों के हित में चरण पादुका योजना पुनः प्रारंभ की गई है और तेंदूपत्ता संग्रहण पारिश्रमिक 4 हजार रुपए से बढ़ाकर 5 हजार 500 रुपए प्रति मानक बोरा किया गया है। प्रदेश के लगभग भूमिहीन कृषि मजदूरों को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपए की सहायता दी जा रही है। मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना से बुजुर्गों की तीर्थयात्रा की इच्छा पूरी की जा रही है। श्री रामलला दर्शन योजना के माध्यम से पिछले ढाई वर्षों में 50 हजार से अधिक श्रद्धालु अयोध्या में प्रभु श्रीराम के दर्शन कर चुके हैं।

जनजातीय समाज का सम्मान और विकास सरकार की प्राथमिकता

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय अंचलों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और जनजातीय परिवारों के जीवन स्तर में सुधार के लिए अभूतपूर्व कार्य किए जा रहे हैं। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के 6 हजार 661 गांवों को शामिल किया गया है।

विशेष पिछड़ी जनजातियों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रधानमंत्री जनमन योजना के माध्यम से सड़क, आवास, बिजली, राशन कार्ड और नल से जल जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम जनमन के अंतर्गत देशभर में बन रही लगभग 4 हजार किलोमीटर सड़कों में से 2 हजार किलोमीटर से अधिक सड़कें छत्तीसगढ़ में बन रही हैं। विशेष पिछड़ी जनजातियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 57 एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर पहुंचकर स्वास्थ्य परीक्षण और उपचार की सुविधा दे रही हैं।

नक्सलवाद से मुक्त हो रहे बस्तर में विकास की नई सुबह

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर का एक बड़ा भू-भाग चार दशकों से अधिक समय तक नक्सलवाद की त्रासदी के कारण विकास की मुख्यधारा से पीछे रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति तथा हमारे सुरक्षा बलों के अदम्य साहस से नक्सलवाद के उन्मूलन की दिशा में ऐतिहासिक सफलता मिली है। जिन क्षेत्रों में कभी विकास कार्य चुनौतीपूर्ण थे, आज वहां सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार जैसी बुनियादी सुविधाएं तेजी से पहुंच रही हैं।

उन्होंने कहा कि नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से ढाई वर्षों में 500 से अधिक गांवों तक बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया गया है। बस्तर में व्यापक स्वास्थ्य अभियान के तहत 34 लाख लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया और गंभीर अथवा लंबे समय से बीमार 40 हजार से अधिक लोगों को बेहतर उपचार के लिए रेफर किया गया है। शांति और विश्वास के नए वातावरण के साथ बस्तर में शिक्षा, रोजगार, स्वरोजगार और उद्यमिता के नए अवसर भी खुल रहे हैं।

प्राकृतिक संसाधनों की समृद्धि बनेगी विकसित छत्तीसगढ़ की ताकत

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ खनिज, वन और प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर राज्य है। प्रदेश में आयरन ओर, कोयला, बॉक्साइट, लिथियम, टिन, सोना और हीरा जैसे बहुमूल्य खनिज संसाधन उपलब्ध हैं। बस्तर की वनोपज के वैल्यू एडिशन पर विशेष जोर दिया जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों की आय बढ़े और रोजगार के नए अवसर तैयार हों।

उन्होंने कहा कि कृषि और सिंचाई के क्षेत्र में भी तेजी से अधोसंरचना का विस्तार किया जा रहा है। किसानों के खेतों तक सिंचाई सुविधा पहुंचाने के लिए पिछले ढाई वर्षों में 11 हजार करोड़ रुपए से अधिक की नई सिंचाई परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है। विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करने के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता से काम कर रही है और इस अभियान में समाज के प्रत्येक वर्ग का योगदान महत्वपूर्ण है। उन्होंने कंवर समाज से शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और सेवा के साथ प्रदेश के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूर्व राज्यसभा सांसद नंदकुमार साय ने कहा कि कंवर समाज छत्तीसगढ़ की जनजातीय समाज व्यवस्था का महत्वपूर्ण घटक है। शिक्षा समाज और प्रदेश की प्रगति का आधार है। कोई भी बालक-बालिका शिक्षा से वंचित न रहे, इसके लिए समाज को सामूहिक प्रयास करना होगा। उन्होंने कहा कि कंवर समाज सहित प्रदेश की 42 जनजातियों का छत्तीसगढ़ के विकास में महत्वपूर्ण योगदान है। समाज को शैक्षणिक, आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ाने के लिए संगठित होकर कार्य करने की आवश्यकता है।

कंवर समाज विकास समिति के अध्यक्ष हरवंश सिंह मिरी ने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पद के साथ समाज की एकता, सेवा, शिक्षा, संस्कार और उत्थान की बड़ी जिम्मेदारी जुड़ी होती है। नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को समाज के नवनिर्माण और विकास की नई संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि निर्माणाधीन कंवर भवन भविष्य में समाज के शैक्षणिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और संगठनात्मक विकास का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।

सामुदायिक भवनों के लिए 1.55 करोड़ रुपए से अधिक की सौगात

मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम में कंवर समाज के विभिन्न सामुदायिक भवनों के निर्माण, विकास और जीर्णोद्धार के लिए 1 करोड़ 55 लाख रुपए से अधिक की राशि प्रदान करने की घोषणा की। इनमें रायपुर के लाभांडी में नवनिर्माणाधीन कंवर भवन के विकास एवं आवश्यक अधोसंरचना के लिए 70 लाख रुपए, राजनांदगांव के छुरिया परिक्षेत्र में कंवर समाज भवन के लिए 25 लाख रुपए, कंवर पैंकरा समाज सर्कल तमोरा में सामुदायिक शेड के लिए 10 लाख रुपए, ग्राम खैरझिटी में आदिवासी कंवर (पैंकरा) समाज के सामाजिक भवन के लिए 10 लाख रुपए, महासमुंद जिले के पथरी परिक्षेत्र के ग्राम नरतोरा में सामाजिक भवन के लिए 10 लाख रुपए, ग्राम झलप में सामाजिक भवन के निर्माण एवं जीर्णोद्धार के लिए 20 लाख रुपए तथा गरियाबंद जिले के ग्राम जोजरा में कंवर समाज भवन निर्माण के लिए 10 लाख रुपए शामिल हैं।

‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में लगाया सिंदूर का पौधा

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने लाभांडी स्थित कंवर समाज के नवनिर्माणाधीन सामुदायिक भवन परिसर में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत सिंदूर का पौधा लगाया। मुख्यमंत्री के साथ समाज के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों, वरिष्ठ सगा-जनों और प्रबुद्धजनों ने भी पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण और अधिक से अधिक पौधे लगाने का संदेश दिया।

इस अवसर पर पूर्व मंत्री ननकीराम कंवर, महासचिव शिव कुमार कंवर, कार्यकारी अध्यक्ष थान सिंह दीवान, महिला प्रभाग की अध्यक्ष  सविता साय, कोषाध्यक्ष प्रेम सिंह कंवर, आर.के. साय, भीम सिंह कंवर सहित कंवर समाज के वरिष्ठजन, पदाधिकारी और बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित थे।

दिल्ली प्रवास के बाद रायपुर लौटे CM साय, निवेश और प्रश्नपत्र लीक मामले पर दिया बड़ा बयान

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 रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय दो दिवसीय दिल्ली प्रवास के बाद शनिवार को रायपुर लौट आए। दिल्ली प्रवास के दौरान उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा समेत कई केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात की और छत्तीसगढ़ के विकास तथा प्रदेश से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।


रायपुर पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री साय ने अपने दिल्ली दौरे की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि उन्हें इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम के कार्यक्रम में शामिल होने का अवसर मिला। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में व्यापार और उद्योग के क्षेत्र में निवेश की अपार संभावनाएं हैं। राज्य सरकार निवेश को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब तक 800 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आ चुका है। सरकार आने वाले समय में निवेशकों के लिए नए अवसर उपलब्ध कराने और बेहतर कारोबारी माहौल तैयार करने की दिशा में काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्योग और व्यापार के क्षेत्र में निवेश बढ़ने से प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

बिहार के मुख्यमंत्री को छत्तीसगढ़ आने का निमंत्रण

दिल्ली प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बिहार के मुख्यमंत्री से भी मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने उन्हें छत्तीसगढ़ आने का निमंत्रण दिया। मुख्यमंत्री ने बताया कि कई केंद्रीय मंत्रियों को भी छत्तीसगढ़ आने का आमंत्रण दिया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में केंद्रीय मंत्री प्रदेश के दौरे पर आएंगे।

प्रश्नपत्र लीक मामले में सख्त कार्रवाई के निर्देश

वहीं, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर मुख्यमंत्री साय ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने बताया कि पुलिस ने मामले में अब तक 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है और जांच जारी है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि प्रकरण में जो भी व्यक्ति शामिल पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि परीक्षाओं की निष्पक्षता और विद्यार्थियों के भविष्य के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। जांच के दौरान यदि अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

स्वतंत्रता दिवस समारोह : मुख्यमंत्री साय ने पुलिस परेड ग्राउंड पर किया ध्वजारोहण, परेड की ली सलामी

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हर्षाेल्लास के साथ मनाया गया आजादी का 80वां पर्व

17 प्लाटूनों ने परेड में किया आकर्षक मार्च पास्ट 

उत्कृष्ट दलों को मिले पुरस्कार 

रायपुर- राजधानी रायपुर के पुलिस परेड ग्राउंड में स्वतंत्रता दिवस का आयोजन पूरे हर्षाेल्लास और गरिमा के साथ संपन्न हुआ। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सुबह 9 बजे ध्वजारोहण किया और परेड की सलामी ली। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की जनता के नाम अपने संदेश का वाचन भी किया।

समारोह में 17 प्लाटूनों ने भव्य मार्च पास्ट कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह मार्च पास्ट भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी विमल कुमार पाठक के नेतृत्व में हुई। इस बार बिहार प्रदेश की पुलिस टुकड़ी आमंत्रित वर्ग में परेड में शामिल हुई। परेड के टूआईसी निशांत गौरव कुर्रे थे। परेड में सीमा सुरक्षा बल,  सीआरपीएफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ, एसएसबी, छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (पुरुष-महिला), छत्तीसगढ़ पुलिस, जेल पुलिस, नगर सेना (पुरुष-महिला), एनसीसी (बालक-बालिका), बैण्ड प्लाटून, घुड़सवार दल और डॉग स्क्वॉड शामिल रहे। समारोह में महिला बैग पाईपर बैंड दल ने भी आकर्षक प्रस्तुती दी। 

स्वतंत्रता दिवस समारोह की परेड में उत्कृष्ट दलों को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सम्मानित किया। केन्द्रीय बलों के वर्ग में भारत तिब्ब्त सीमा पुलिस की टुकड़ी को पहला स्थान मिला। आईटीबीपी के दल को पांच हजार रूपए और ट्रॉफी देकर सम्मानित किया गया।  दूसरे स्थान पर सीमा सुरक्षा बल और तीसरे स्थान पर केन्द्रिय रिजर्व पुलिस बल का दल रहा। सीमा सुरक्षा बल की टुकड़ी को तीन हजार रूपए और सीआरपीएफ की टुकड़ी को दो हजार रूपए नकद राशि के साथ ट्राफी प्रदान कर सम्मानित किया गया। 


राज्य बलों के वर्ग में पहला स्थान छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (महिला) को प्राप्त हुआ। विजेताओं को पांच हजार रूपए और ट्रॉफी देकर सम्मानित किया गया। छत्तीसगढ़ जेल पुलिस का दल दूसरे स्थान पर रहा, जिसे तीन हजार रूपए और ट्रॉफी देकर सम्मानित किया गया। छत्तीसगढ़ सशस्त्र पुलिस बल (पुरूष) ने तीसरा स्थान प्राप्त किया, जिन्हें दो हजार रूपए की नकद राशि और ट्रॉफी से नवाजा गया। 

कंटीजेंट एनसीसी वर्ग में पहला स्थान एनसीसी गर्ल्स और दूसरा स्थान एनसीसी बॉयज के दल को मिला। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दोनों दल कमांडरों को ट्रॉफी प्रदान कर प्रोत्साहित किया। इस अवसर पर परेड-टू-आईसी निशांत गौरव कुर्रे, परेड कमांडर विमल कुमार पाठक, महिला बैग पाईपर दल की कमांडर  सोनबती ठाकुर, घुड़सवार दल के कमांडर अनिल यादव, श्वान दल के कमांडर  राज कपूर सहित परेड प्रस्तुतियोजन के लिए डॉ. अनुराधा दुबे और मनीष परमानंद को भी प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए।


देश की आजादी में छत्तीसगढ़ के वीर नायकों का योगदान नई पीढ़ी तक पहुंचाना हमारा दायित्व : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्वतंत्रता दिवस पर सात दिवसीय छायाचित्र प्रदर्शनी का किया शुभारंभ

स्वतंत्रता संग्राम की गौरवगाथा से विकसित छत्तीसगढ़ की नई तस्वीर तक को एक मंच पर समेट रही प्रदर्शनी

‘वंदे मातरम्’ की 150 वर्षों की गौरवशाली यात्रा, स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान और सुशासन की उपलब्धियों का सजीव प्रदर्शन

ऐतिहासिक टाउन हॉल और शहीद स्मारक के संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने की 50-50 लाख रुपये देने की घोषणा

मुख्यमंत्री ने कहा - अपनी विरासत को सहेजते हुए विकास की नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा छत्तीसगढ़

21 अगस्त तक प्रतिदिन सुबह 10.30 से रात 8 बजे तक आम नागरिक कर सकेंगे प्रदर्शनी का अवलोकन

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आज राजधानी रायपुर के कचहरी चौक स्थित ऐतिहासिक टाउन हॉल में जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित सात दिवसीय छायाचित्र प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़ के योगदान, अमर सेनानियों के शौर्य एवं बलिदान, ‘वंदे मातरम्’ की 150 वर्षों की गौरवशाली यात्रा और राज्य में सुशासन एवं विकास की उपलब्धियों को समेटे यह प्रदर्शनी अतीत के गौरव से वर्तमान की उपलब्धियों और भविष्य की आकांक्षाओं तक छत्तीसगढ़ की यात्रा को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर रही है।

मुख्यमंत्री साय ने प्रदर्शनी के विभिन्न खंडों का अवलोकन किया और वहां प्रदर्शित दुर्लभ छायाचित्रों, दस्तावेजों एवं सूचनात्मक सामग्री में विशेष रुचि दिखाई। उन्होंने कहा कि देश की स्वतंत्रता के लिए छत्तीसगढ़ की धरती के अनेक वीर सपूतों ने संघर्ष और बलिदान किया। उनके योगदान और राष्ट्रभक्ति की प्रेरक गाथाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना हमारा दायित्व है। ऐसी प्रदर्शनियां युवाओं को अपने गौरवशाली इतिहास से परिचित कराने के साथ उनमें राष्ट्रप्रेम, कर्तव्यबोध और देश के प्रति समर्पण की भावना को और मजबूत करती हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रदर्शनी केवल इतिहास का स्मरण नहीं कराती, बल्कि विरासत से प्रेरणा लेकर विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के निर्माण के संकल्प को भी सुदृढ़ करती है। एक ओर इसमें स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और बलिदान की अमर गाथाएं हैं, तो दूसरी ओर जनकल्याणकारी योजनाओं, सुशासन, आधुनिक अधोसंरचना और नई तकनीक के माध्यम से बदलते छत्तीसगढ़ की तस्वीर भी दिखाई गई है।

‘वंदे मातरम्’—राष्ट्रजागरण के अमर स्वर की 150 वर्षों की यात्रा

प्रदर्शनी का विशेष आकर्षण राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की 150 वर्षों की गौरवशाली यात्रा पर केंद्रित खंड है। इसमें ‘वंदे मातरम्’ की रचना से लेकर स्वतंत्रता आंदोलन में इसके राष्ट्रजागरण के मंत्र के रूप में स्थापित होने तक की यात्रा को ऐतिहासिक संदर्भों और छायाचित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।

स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान ‘वंदे मातरम्’ ने देशवासियों को एक सूत्र में बांधने और मातृभूमि के लिए त्याग एवं बलिदान की भावना जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके स्वर ने स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों में नई ऊर्जा का संचार किया। 150 वर्ष की इस ऐतिहासिक यात्रा को प्रदर्शनी में विशेष स्थान देकर नई पीढ़ी को ‘वंदे मातरम्’ के राष्ट्रभाव और उसके ऐतिहासिक महत्व से परिचित कराया गया है।

छत्तीसगढ़ के वीर सेनानियों की संघर्ष और बलिदान की गौरवगाथा

प्रदर्शनी में स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़ की भूमिका को विस्तार से प्रदर्शित किया गया है। प्रदेश के स्वतंत्रता सेनानियों, जननायकों और अमर बलिदानियों के योगदान से जुड़े दुर्लभ छायाचित्र, दस्तावेज और ऐतिहासिक प्रसंग यहां दर्शकों को स्वतंत्रता आंदोलन के उस दौर से रूबरू कराते हैं, जब छत्तीसगढ़ की धरती पर भी ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष और जनजागरण की आवाज बुलंद हुई थी।

महात्मा गांधी के छत्तीसगढ़ प्रवास तथा यहां के सामाजिक एवं राष्ट्रीय आंदोलनों से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों को प्रदर्शनी में विशेष स्थान दिया गया है। इन ऐतिहासिक दस्तावेजों के माध्यम से नई पीढ़ी यह जान सकेगी कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़ का योगदान कितना व्यापक और गौरवपूर्ण रहा है।

टाउन हॉल और शहीद स्मारक के लिए 50-50 लाख रुपये की घोषणा

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर की दो महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहरों - टाउन हॉल और शहीद स्मारक - के संरक्षण, साज-सज्जा एवं नवीनीकरण के लिए 50-50 लाख रुपये प्रदान करने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीद स्मारक राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीरों की स्मृतियों को संजोए हुए है, जबकि ऐतिहासिक टाउन हॉल रायपुर की समृद्ध विरासत और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इन धरोहरों का संरक्षण हमारी गौरवशाली विरासत के प्रति सम्मान की अभिव्यक्ति है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ‘विरासत से विकास तक’ की सोच के साथ आगे बढ़ रही है। हमारा प्रयास है कि आधुनिक विकास की गति के साथ प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों की गरिमा भी अक्षुण्ण रहे। इन स्थलों को बेहतर स्वरूप मिलने से नई पीढ़ी अपने इतिहास, संस्कृति और बलिदान की परंपरा को और निकटता से जान सकेगी।

योजनाओं ने बदली जिंदगी - महिलाओं से किसानों और युवाओं तक विकास की झलक

प्रदर्शनी का एक महत्वपूर्ण खंड राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और उनसे आम नागरिकों के जीवन में आए सकारात्मक बदलावों पर केंद्रित है। इसमें महिलाओं, किसानों, युवाओं, श्रमिकों और जरूरतमंद परिवारों के जीवन को बेहतर बनाने वाली योजनाओं एवं पहलों को छायाचित्रों और सूचनात्मक सामग्री के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है।

महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण, कृषक उन्नति योजना से किसानों को मिल रहे संबल तथा प्रधानमंत्री आवास योजना से जरूरतमंद परिवारों के पक्के घर के सपने के साकार होने की तस्वीर यहां दिखाई गई है। युवाओं के लिए शिक्षा, कौशल, रोजगार एवं नए अवसरों के विस्तार और श्रमिकों सहित विभिन्न वर्गों के लिए संचालित कल्याणकारी योजनाओं को भी प्रमुखता से स्थान दिया गया है।

प्रदर्शनी यह संदेश देती है कि सुशासन का वास्तविक उद्देश्य योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाकर उसके जीवन में सकारात्मक और स्थायी बदलाव लाना है।

सुशासन और आधुनिक अधोसंरचना से उभरते विकसित छत्तीसगढ़ की तस्वीर

प्रदर्शनी में राज्य की विकास यात्रा को भी प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है। डिजिटल पंजीयन के माध्यम से प्रशासन में पारदर्शिता, सुशासन तिहार के माध्यम से जनसमस्याओं के समाधान, हरित छत्तीसगढ़ की दिशा में किए जा रहे प्रयास तथा शिक्षा और अधोसंरचना के विस्तार की झलक यहां देखने को मिलती है।

बेहतर सड़क एवं रेल संपर्क, औद्योगिक अधोसंरचना, निवेश और रोजगार के नए अवसरों सहित विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे बदलावों को भी प्रदर्शित किया गया है। इस प्रकार प्रदर्शनी छत्तीसगढ़ के गौरवशाली अतीत और तेजी से आकार लेते भविष्य को एक साथ प्रस्तुत करती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष से हमें राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों की प्रेरणा मिलती है और यही प्रेरणा विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में हमारी ऊर्जा बनती है।

एआई से जुड़ा विरासत और पर्यटन का अभिनव अनुभव

प्रदर्शनी में आधुनिक तकनीक और छत्तीसगढ़ की विरासत का अभिनव संगम भी आकर्षण का केंद्र है। विशेष एआई आधारित पहल के माध्यम से आगंतुक प्रदेश के प्रमुख तीर्थ और पर्यटन स्थलों की पृष्ठभूमि के साथ अपनी डिजिटल तस्वीर तैयार करा सकते हैं। विशेष रूप से बच्चों और युवाओं में इसे लेकर उत्साह देखा जा रहा है।

इस पहल के माध्यम से तकनीक का उपयोग कर नई पीढ़ी को प्रदेश की पर्यटन, सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत से रोचक तरीके से जोड़ने का प्रयास किया गया है। आगंतुक इन डिजिटल तस्वीरों को प्रदर्शनी की स्मृति के रूप में भी प्राप्त कर सकते हैं।

विजिटर डायरी और विशेष डॉक्यूमेंट्री भी बनी आकर्षण का केंद्र

प्रदर्शनी स्थल पर रखी गई विजिटर डायरी में आगंतुक स्वतंत्रता दिवस, राष्ट्रप्रेम और छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा से जुड़े अपने विचार एवं अनुभव दर्ज कर सकते हैं। राज्य की उपलब्धियों, जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास यात्रा पर आधारित विशेष डॉक्यूमेंट्री फिल्म का भी प्रदर्शन किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने विजिटर बुक में अपने विचार दर्ज करते हुए प्रदेशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित प्रदर्शनी की सराहना करते हुए कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान और शासन की योजनाओं एवं उपलब्धियों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का यह उपयोगी प्रयास है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों, विशेषकर युवाओं और विद्यार्थियों से प्रदर्शनी देखने की अपील करते हुए कहा कि अपने इतिहास और विरासत को जानना हमें वर्तमान के प्रति अपने कर्तव्यों का बोध कराता है और बेहतर भविष्य के निर्माण की प्रेरणा देता है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार आर. कृष्णा दास, विधायक पुरंदर मिश्रा, जनसंपर्क आयुक्त रजत बंसल, कलेक्टर गौरव सिंह, अपर संचालक उमेश मिश्रा, संजीव तिवारी,  आलोक देव सहित जनसंपर्क विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

उल्लेखनीय है कि कचहरी चौक स्थित ऐतिहासिक टाउन हॉल में यह सात दिवसीय प्रदर्शनी 15 से 21 अगस्त 2026 तक प्रतिदिन सुबह 10.30 बजे से रात 8 बजे तक आम नागरिकों के अवलोकन के लिए खुली रहेगी।

80वें स्वतन्त्रता दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय राजधानी रायपुर के मुख्य कार्यक्रम में करेंगे ध्वजारोहण

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केन्द्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू बिलासपुर, उपमुख्यमंत्री अरूण साव दुर्ग और विजय शर्मा बस्तर में फहराएंगे ध्वज

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह राजनांदगांव जिला मुख्यालय में करेंगे ध्वजारोहण

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आगामी 15 अगस्त, को 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राज्य स्तरीय समारोह में राजधानी रायपुर के पुलिस मैदान में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे और परेड की सलामी लेंगे। वहीं मुख्यालय जिला बिलासपुर में केन्द्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, दुर्ग में उप मुख्यमंत्री अरुण साव तथा बस्तर में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा मुख्य समारोह में ध्वजारोहण करेंगे।

सामान्य प्रशासन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, राजनांदगांव में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, सरगुजा में आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम, महासमुंद में खाद्य मंत्री दयालदास बघेल, दंतेवाड़ा में वन मंत्री केदार कश्यप, कबीरधाम में उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहपण करेंगे। इसी प्रकार रायगढ़ में वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, कांकेर में राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, सूरजपुर में महिला एवं बाल विकास मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े, जांजगीर-चांपा में कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री गुरू खुशवंत साहेब, जशपुर में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, बालोद में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव, बलौदाबाजार में सांसद बृजमोहन अग्रवाल, बेमेतरा में सांसद विजय बघेल, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में सांसद संतोष पांडेय ध्वजारोहण करेंगे।

इसी प्रकार कोंडागांव में सांसद भोजराज नाग, बलरामपुर में सांसद चिंतामणि महाराज, सारंगढ़-बिलाईगढ़ में सांसद  राधेश्याम राठिया, गरियाबंद में सांसद रूपकुमारी चौधरी, सक्ती में सांसद  कमलेश जांगड़े, बीजापुर में सांसद महेश कश्यप, सुकमा में राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह और मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी में राज्यसभा सांसद  लक्ष्मी वर्मा ध्वजारोहण करेंगे।

जिला कोरबा में विधायक अमर अग्रवाल, धमतरी में विधायक अजय चंद्राकर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में विधायक धरमजीत सिंह, मुंगेली जिला मुख्यालय में विधायक पुन्नूलाल मोहले, कोरिया में विधायक भैय्या लाल राजवाड़े और नारायणपुर जिला मुख्यालय में विधायक लता उसेंडी स्वतंत्रता दिवस समारोह में ध्वजारोहण करेंगे। इस अवसर पर समस्त मुख्य अतिथि जनता के नाम मुख्यमंत्री के संदेश का वाचन करेंगे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय छत्तीसगढ़ में पहली बार आयोजित स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव में हुए शामिल

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खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में राज्य के पदक विजेता खिलाड़ियों को दी प्रोत्साहन राशि

खेल और खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने छत्तीसगढ़ में गंभीरता से हो रहे काम, उत्कृष्ट खेल मिशन के लिए इस साल 100 करोड़ का प्रावधान - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 

राज्य में खेलों के विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव - साय

कॉन्क्लेव के सुझावों और निष्कर्षों को शामिल कर बनाएंगे प्रभावी कार्ययोजना - उप मुख्यमंत्री  अरुण साव

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा आयोजित स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव के समापन सत्र में शामिल हुए। उन्होंने राजधानी रायपुर के एक निजी होटल में आयोजित कॉन्क्लेव में विगत मार्च-अप्रैल में छत्तीसगढ़ में हुए देश के पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में राज्य के लिए पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को प्रोत्साहन राशि प्रदान की। छत्तीसगढ़ में पहली बार इस स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया था, जिसमें विभिन्न सत्रों में देशभर से आए खेल प्रशासकों, नीति निर्माताओं, स्पोर्ट्स साइंटिस्ट्स, नामचीन खिलाड़ियों, विशेषज्ञों और खेल संघों के पदाधिकारियों ने छत्तीसगढ़ में खिलाड़ियों के लिए बेहतर सुविधाओं, खेल प्रतिभाओं की खोज, प्रशिक्षण और सुदृढ़ खेल अधोसंरचना के रोडमैप पर दिनभर मंथन किया।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए कहा कि विशेषज्ञों के बीच आज दिनभर हुए गंभीर विचार-विमर्श से राज्य में खेल और खिलाड़ियों की बेहतरी के कार्यों को सार्थक एवं प्रभावी दिशा मिलेगी। राज्य में खेलों के विकास के लिए यह कॉन्क्लेव मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि खेल और खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने छत्तीसगढ़ में गंभीरता से काम हो रहे हैं। उत्कृष्ट खेल मिशन के अंतर्गत खेल अधोसंरचना को मजबूत करने इस साल के बजट में 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। हमने हाल ही में प्रदेशभर के 156 उत्कृष्ट खिलाड़ियों की सूची को मंजूरी दी है, जिन्हें आगे जाकर सरकार नौकरी में लाभ देगी। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि खिलाड़ियों को खेलने के लिए अच्छा मंच उपलब्ध कराने बस्तर ओलंपिक, सरगुजा ओलंपिक और खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के आयोजन राज्य में हुए हैं। बस्तर ओलंपिक में करीब चार लाख और सरगुजा ओलंपिक में लगभग साढ़े तीन लाख खिलाड़ियों ने भागीदारी की है। राज्य की खेल प्रतिभाओं को उचित अवसर और संसाधन देने की आवश्यकता है। इसके लिए हम लोग सक्रियता से काम कर रहे हैं।

उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव कहा कि यह कॉन्क्लेव छत्तीसगढ़ को खेलों के क्षेत्र में अग्रणी बनाने में बहुत मददगार होगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य में खेल और खिलाड़ियों की तरक्की और बेहतरी के लिए लगातार काम हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की भौगोलिक परिस्थितियों में प्राकृतिक, शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत युवा निकलते हैं। प्राथमिक कक्षाओं से ही बच्चों की खेल प्रतिभा को पहचान कर उन्हें तराशने और संवारने की कार्ययोजना पर हम काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज विशेषज्ञों के जो अमूल्य सुझाव और मार्गदर्शन प्राप्त हुए हैं, उन पर निश्चित रूप से अमल किया जाएगा। आज के निष्कर्षों को शामिल कर हम विस्तृत कार्ययोजना बनाएंगे और उसे प्रभावी तरीके से क्रियान्वित करेंगे।

खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार, संचालक तनुजा सलाम, ओलंपियन जिन्सन जॉनसन, प्रख्यात शिक्षाविद एवं खेल वैज्ञानिक डॉ. रत्नेश सिंह, छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के महासचिव विक्रम सिसोदिया, हाई परफॉर्मेंस एनॉलिस्ट रोनक कोठारी, पीईएफआई के राष्ट्रीय सचिव डॉ. पियूष जैन, खेलो इंडिया के उप महानिदेशक मयंक श्रीवास्तव और पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर राजेश चौहान सहित प्रदेश के अनेक खिलाड़ी, प्रशिक्षक, सभी जिलों के खेल अधिकारी एवं खेल संघों के पदाधिकारी बड़ी संख्या में कॉन्क्लेव में शामिल हुए।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में पदक जीतने वाले 11 खिलाड़ियों और 3 टीमों को मिली प्रोत्साहन राशि, छत्तीसगढ़ ने 3 स्वर्ण, 10 रजत और 6 कांस्य पदकों सहित जीते थे कुल 19 पदक

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव के समापन सत्र में इस साल छत्तीसगढ़ में हुए खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में राज्य के लिए पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को प्रोत्साहन राशि प्रदान की। मुख्यमंत्री साय ने इस वर्ष 3 अप्रैल को खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के समापन समारोह में राज्य के लिए पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की थी। छत्तीसगढ़ ने 3 स्वर्ण, 10 रजत और 6 कांस्य पदकों सहित कुल 19 पदक जीते थे।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में निकिता ने भारोत्तोलन में स्वर्ण पदक जीता था। वहीं रिषिका कश्यप ने भारोत्तोलन, अनुष्का भगत ने तैराकी, लक्ष्मण सोढ़ी, अभिषेक, डमरू कुमार, गजेन्द्र ठाकुर और तिलक बारसे ने एथलेटिक्स में रजत पदक जीते थे। मनीष कुमार ने एथलेटिक्स, निखिल खलको ने तैराकी और लक्की बाबू ने भारोत्तोलन में कांस्य पदक जीते थे।

मुख्यमंत्री ने स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ी को दो लाख रुपए, रजत पदक विजेताओं को डेढ़ लाख रुपए और कांस्य पदक विजेताओं को एक लाख रुपए के चेक प्रदान किए। वहीं टीम खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली महिला फुटबॉल टीम को 22 लाख रुपए, रजत पदक विजेता पुरूष फुटबॉल टीम को साढ़े 16 लाख रुपए तथा कांस्य पदक जीतने वाली पुरूष हॉकी टीम को 9 लाख रुपए की राशि दी गई।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने एकलव्य के विद्यार्थियों का बढ़ाया उत्साह

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जनजातीय प्रतिभाओं के सपनों को नई उड़ान: मुख्यमंत्री साय ने नीट सफल विद्यार्थियों से किया आत्मीय संवाद

खूब पढ़िए, आगे बढ़िए और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में भागीदार बनिए - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

जनजातीय युवाओं की नई पहचान बन रहे एकलव्य विद्यालय: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

एकलव्य की तरह लक्ष्य साधिए, सफलता निश्चित मिलेगी - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

अच्छा आचरण और सेवा भाव ही एक डॉक्टर की सबसे बड़ी पहचान है - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित एकलव्य संवाद कार्यक्रम में प्रदेश के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों से नीट-2026 में सफल विद्यार्थियों से आत्मीय चर्चा की। मुख्यमंत्री साय ने सभी विद्यार्थियों को उनकी उल्लेखनीय सफलता पर बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं और कहा कि यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़, विशेषकर जनजातीय समाज के लिए गर्व का विषय है। 

उन्होंने कहा कि एकलव्य विद्यालयों के विद्यार्थियों ने यह सिद्ध कर दिया है कि अवसर, संसाधन और संकल्प मिलने पर प्रतिभा किसी भी परिस्थिति की मोहताज नहीं होती।

सफलता का सबसे बड़ा मंत्र निरंतर अभ्यास और आत्मविश्वास - मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आपके विद्यालय का नाम 'एकलव्य' है और भारतीय इतिहास में एकलव्य का स्थान अद्वितीय है। उन्होंने गुरु द्रोणाचार्य को अपना आदर्श मानकर कठिन परिस्थितियों में भी निरंतर साधना और समर्पण के बल पर धनुर्विद्या में असाधारण दक्षता प्राप्त की। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि उसी प्रकार आप भी अथक परिश्रम, अनुशासन और दृढ़ निश्चय के साथ अपने जीवन का लक्ष्य प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि सफलता का सबसे बड़ा मंत्र निरंतर अभ्यास और आत्मविश्वास है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि खूब पढ़िए, आगे बढ़िए और और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में भागीदार बनिए।

मुख्यमंत्री साय ने विद्यार्थियों को संत कबीर के प्रसिद्ध दोहे "गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूँ पाय; बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय" का उल्लेख करते हुए गुरु के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि गुरु का स्थान ईश्वर से भी श्रेष्ठ माना गया है, क्योंकि गुरु ही हमें ज्ञान देकर जीवन का सही मार्ग दिखाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने गुरुजनों का सदैव सम्मान करने और उनसे प्राप्त ज्ञान को समाज के हित में उपयोग करने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भारत सरकार द्वारा देशभर में एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं और छत्तीसगढ़ के लिए यह गर्व की बात है कि प्रदेश में  एकलव्य विद्यालय संचालित हैं, जहां जनजातीय समुदाय के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि एकलव्य की तरह लक्ष्य साधिए, सफलता निश्चित मिलेगी। उन्होंने कहा कि नीट जैसी कठिन राष्ट्रीय परीक्षा में सफलता प्राप्त करना आपके परिश्रम, आपके माता-पिता के आशीर्वाद और गुरुजनों के समर्पण का परिणाम है। उन्होंने इस अवसर पर सभी अभिभावकों और शिक्षकों को भी बधाई दी।

मुख्यमंत्री साय ने विद्यार्थियों से कहा कि डॉक्टर का स्थान समाज में अत्यंत सम्माननीय होता है। भगवान हमें जन्म देते हैं, लेकिन डॉक्टर जीवन की रक्षा करते हैं और लोगों को नया जीवन प्रदान करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे केवल कुशल चिकित्सक ही नहीं, बल्कि संवेदनशील, सहृदय और विनम्र डॉक्टर भी बनें। उन्होंने कहा कि मरीज के प्रति मधुर व्यवहार और संवेदनशीलता भी उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कई बार डॉक्टर का अपनापन ही मरीज को मानसिक शक्ति प्रदान करता है।

शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन, विद्यार्थियों के लिए बढ़े अवसरएकलव्य संवाद के दौरान धमतरी जिले से आए छात्र राधेश्याम के प्रश्न का उत्तर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन आया है। पहले विद्यालयों की संख्या सीमित थी और छात्रों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, जबकि आज सरकार गांव-गांव तक शिक्षा पहुंचाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों का व्यापक विस्तार किया गया है तथा प्रत्येक विकासखंड में महाविद्यालय स्थापित करने की दिशा में कार्य हो रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य निर्माण के समय प्रदेश में केवल एक मेडिकल कॉलेज था, जबकि आज निजी एवं शासकीय संस्थानों सहित 15 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं और पांच नए शासकीय मेडिकल कॉलेज प्रारंभ किए जा रहे हैं, जिससे मेडिकल शिक्षा की सीटों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ में आईआईटी, ट्रिपल आईटी, राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, केंद्रीय विश्वविद्यालय सहित अनेक उच्च शिक्षण संस्थान विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करा रहे हैं। विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति, शिक्षा ऋण तथा मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान जैसी अनेक सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए दिल्ली में स्थापित ट्राइबल यूथ हॉस्टल की क्षमता 50 से बढ़ाकर 200 सीट कर दी गई है, जहां विद्यार्थियों को निःशुल्क आवास एवं भोजन की सुविधा के साथ यूपीएससी, मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि इस वर्ष ट्राइबल यूथ हॉस्टल से 13 विद्यार्थियों ने संघ लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण की है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेशभर में 34 नालंदा परिसर स्थापित किए गए हैं, जहां विद्यार्थी सप्ताह के सातों दिन चौबीसों घंटे ऑनलाइन और ऑफलाइन अध्ययन सामग्री के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण के लिए सरकार संसाधनों की कोई कमी नहीं आने देगी। उन्होंने बताया कि श्रम विभाग द्वारा श्रमिक परिवारों के बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए प्रतिवर्ष दो लाख रुपये तक की सहायता उपलब्ध कराई जाती है तथा विदेशों में अध्ययन करने वाले पात्र विद्यार्थियों का व्यय भी सरकार वहन करती है।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076  सुशासन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल - मुख्यमंत्री

गरियाबंद जिले से आए विद्यार्थी अवधेश कुमार के प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने हाल ही में प्रारंभ की गई मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 की जानकारी देते हुए कहा कि यह सुशासन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इसके माध्यम से प्रदेश का कोई भी नागरिक अपनी समस्या, सुझाव अथवा शिकायत सीधे शासन तक पहुंचा सकता है। उन्होंने बताया कि इसके लिए  लगभग आठ हजार अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि यदि छात्रावास अथवा अध्ययन से संबंधित कोई समस्या हो तो वे भी हेल्पलाइन के माध्यम से शासन को अवगत करा सकते हैं। उन्होंने बताया कि अल्प अवधि में ही इस व्यवस्था को व्यापक जनसमर्थन मिला है और लोग बिजली, पानी, नामांतरण, खाता विभाजन, सीमांकन सहित अनेक समस्याओं के समाधान के लिए इसका प्रभावी उपयोग कर रहे हैं।

महासमुंद जिले की छात्रा मंजुला के प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने कहा कि अब प्रदेश में मेडिकल शिक्षा हिंदी माध्यम में भी उपलब्ध कराई जा रही है। जिन विद्यार्थियों को अंग्रेजी भाषा में कठिनाई होती है, उनके लिए हिंदी में पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराई गई हैं ताकि भाषा किसी भी प्रतिभाशाली विद्यार्थी की प्रगति में बाधा न बने।

राजनांदगांव जिले के विद्यार्थी देवानंद द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं के संबंध में पूछे गए प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार छात्रवृत्ति, शिक्षा ऋण तथा मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान के माध्यम से आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है, जिससे आर्थिक अभाव किसी भी विद्यार्थी के सपनों के बीच बाधा न बने।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा और विकास की नई इबारत

कांकेर जिले की छात्रा कशिश नेताम द्वारा दूरस्थ वनांचलों में शिक्षा सुविधाओं के संबंध में पूछे गए प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर अंचल लंबे समय तक नक्सलवाद से प्रभावित रहा, जिससे विकास कार्य बाधित हुए। लेकिन पिछले ढाई वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति, सुरक्षा बलों के साहस और स्थानीय जनता के सहयोग से नक्सलवाद समाप्त हुआ है। अब बस्तर में तेजी से सड़कें, विद्यालय, स्वास्थ्य संस्थान और अन्य बुनियादी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर संभाग में बंद पड़े विद्यालयों को पुनः संचालित किया जा रहा है तथा नए विद्यालय भी स्थापित किए जा रहे हैं। जावंगा एजुकेशन हब की तर्ज पर नारायणपुर जिले के जगरगुंडा और ओरछा में आधुनिक एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अपने क्षेत्र में उपलब्ध हो सके।

सुकमा जिले की छात्रा अंकिता के प्रश्न पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरकार मेडिकल शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को हरसंभव सहयोग उपलब्ध करा रही है। इसलिए विद्यार्थियों का भी दायित्व है कि वे अपनी शिक्षा का लाभ प्रदेश और समाज को दें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक डॉक्टर के निर्माण में सरकार बड़े पैमाने पर संसाधन निवेश करती है और सरकार चाहती है कि प्रदेश के युवा चिकित्सक छत्तीसगढ़ में रहकर विशेषकर दूरस्थ एवं आदिवासी अंचलों के लोगों की सेवा करें। उन्होंने बताया कि दूरस्थ क्षेत्रों में कार्यरत डॉक्टरों को अतिरिक्त वेतन और अन्य सुविधाएं भी प्रदान की जाती हैं।

जनसेवा को पूजा मानकर पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ कार्य करना प्रदान करता है ऊर्जा - मुख्यमंत्री

अपने सार्वजनिक जीवन और स्वास्थ्य संबंधी दिनचर्या पर विद्यार्थियों के प्रश्न का उत्तर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वे पिछले लगभग 35 वर्षों से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि जनसेवा को पूजा मानकर पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ कार्य करना ही उन्हें ऊर्जा प्रदान करता है। उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित योग, व्यायाम, संतुलित आहार और अनुशासित जीवनशैली अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का निवास होता है और अनुशासित जीवन ही दीर्घकालिक सफलता का आधार है।

कार्यक्रम के समापन पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सभी विद्यार्थियों को पुनः शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे अपनी प्रतिभा, ज्ञान और संस्कार के बल पर समाज की सेवा करें तथा विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सक्रिय भागीदार बनें। उन्होंने कहा कि आपकी सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी और आप सभी अपने उत्कृष्ट आचरण, सेवा भावना तथा समर्पण से प्रदेश का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित करेंगे।

गांवों के समग्र विकास से ही विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प होगा साकार : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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मुख्यमंत्री साय  ने जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में दिए विकास के स्पष्ट मंत्र

विकसित भारत जी राम जी योजना, लखपति दीदी, पीएम आवास और पीएम सूर्यघर योजना को गांव-गांव तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के निर्देश

अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे योजनाओं का लाभ, यही सुशासन की कसौटी - मुख्यमंत्री साय

रायपुर- ग्राम पंचायतों को केवल योजनाओं के क्रियान्वयन की इकाई नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन, आर्थिक समृद्धि और आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के केंद्र के रूप में विकसित करना होगा। यदि ग्राम पंचायतें सशक्त हों, गांव आत्मनिर्भर बनें और प्रत्येक ग्रामीण विकास की प्रक्रिया का सहभागी बने, तभी विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प वास्तविक रूप ले सकेगा।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज नवा रायपुर स्थित एसआईआरडी परिसर, निमोरा में आयोजित प्रदेश के सभी जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक एवं कार्यशाला को संबोधित करते हुए यह बात कही। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुशासन का वास्तविक अर्थ यही है कि शासन की योजनाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। ग्राम पंचायतें जनभागीदारी के माध्यम से आत्मनिर्भर गांव बनाने का सबसे प्रभावी मंच हैं। अधिकारियों को संवेदनशीलता, ईमानदारी और सेवा भाव के साथ कार्य करते हुए ग्रामीणों का विश्वास जीतना होगा।

मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों से कहा कि शासकीय योजनाओं की वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी, जब उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और गांव का प्रत्येक नागरिक स्वयं विकास यात्रा का सक्रिय भागीदार बने। उन्होंने प्रत्येक जिले में ऐसे गांवों की पहचान करने के निर्देश दिए, जहां जनभागीदारी, स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग और प्रभावी योजना के माध्यम से आदर्श विकास मॉडल विकसित किए जा सकें।

विकसित भारत जी राम जी योजना से ग्रामीण विकास को मिलेगी नई गति

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि 1 जुलाई से लागू विकसित भारत जी राम जी योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने वाली महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजना के माध्यम से रोजगार सृजन के साथ-साथ स्थायी परिसंपत्तियों और गुणवत्तापूर्ण अधोसंरचना का निर्माण प्राथमिकता से किया जाए।

इसके माध्यम से जल संरक्षण, कृषि, ग्रामीण अधोसंरचना, आजीविका और सामुदायिक परिसंपत्तियों के निर्माण को नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर प्रबंधन बने प्राथमिकता

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण विकास केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए। जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य, कृषि उत्पादकता, पशुपालन, मत्स्य पालन तथा स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों का वैज्ञानिक उपयोग ही स्थायी विकास का आधार है। उन्होंने प्रत्येक जिले में स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप जल संरक्षण की कार्ययोजना तैयार करने तथा वर्षा जल संचयन एवं भूजल संवर्धन को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

10.40 लाख से अधिक महिलाएं बनीं लखपति दीदी, अब लक्ष्य करोड़पति दीदी

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण को नई दिशा मिली है। छत्तीसगढ़ में अब तक 10 लाख 40 हजार से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। अब सरकार उन्हें उद्यमिता, कौशल विकास और स्वरोजगार से जोड़कर बड़ी संख्या में करोड़पति दीदी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

उन्होंने जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को निर्देश दिए कि पात्र महिलाओं की पहचान कर उन्हें स्व-सहायता समूहों, कौशल विकास, आजीविका गतिविधियों और नई औद्योगिक नीति से उत्पन्न अवसरों से जोड़ा जाए।

बस्तर के अंतिम गांव तक पहुंचे विकास की रोशनी

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से बस्तर संभाग के अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में विकास कार्य सर्वोच्च प्राथमिकता से किए जाएं। उन्होंने कहा कि जिन गांवों तक कभी पहुंचना कठिन था, वहां अब सड़क, बिजली, आवास, राशन, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं तेजी से पहुंच रही हैं। सरकार का लक्ष्य विकास की रोशनी अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है।

पीएम आवास और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन पर जोरमुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना के निर्माण कार्यों में तेजी लाने तथा सभी पात्र हितग्राहियों को समय पर लाभ दिलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन सहित सभी योजनाओं के भुगतान में किसी भी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए तथा पंचायत स्तर पर प्रभावी निगरानी व्यवस्था विकसित की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। पंचायत स्तर पर इसका व्यापक प्रचार-प्रसार कर अधिक से अधिक परिवारों को सौर ऊर्जा से जोड़ा जाए। किसानों और ग्रामीण परिवारों को सौर पंप तथा अन्य सौर ऊर्जा योजनाओं का अधिकतम लाभ दिलाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन का उद्देश्य केवल अपने सीमित उत्तरदायित्व का निर्वहन मात्र न होकर के समाज में ऐसा सकारात्मक परिवर्तन लाना होना चाहिए, जिसे आने वाली पीढ़ियां भी याद रखें। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रसेवा का जो आदर्श प्रस्तुत किया है, उससे प्रेरणा लेकर प्रत्येक अधिकारी को अपनी जिम्मेदारी को समाज निर्माण का अवसर मानना चाहिए।

एक व्यक्ति का संकल्प पूरे समाज की तस्वीर बदल सकता है

मुख्यमंत्री साय ने पद्मश्री पोपटराव पवार के हिवड़े बाजार मॉडल का उल्लेख करते हुए कहा कि दृढ़ इच्छाशक्ति, ईमानदार नेतृत्व और जनसहभागिता के माध्यम से किसी भी गांव का कायाकल्प किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि समाज में परिवर्तन लाने के लिए हमेशा बड़ी संख्या की आवश्यकता नहीं होती। यदि एक व्यक्ति भी संकल्प लेकर आगे बढ़ता है, तो पूरा समाज उसके साथ खड़ा हो जाता है।

मुख्यमंत्री ने वर्ष 1999 की अपनी पहली मुलाकात को याद करते हुए बताया कि जब वे पहली बार सांसद बने थे, तब युवा सांसदों के मार्गदर्शन के लिए पोपटराव पवार को आमंत्रित किया गया था। उस समय एक युवा सरपंच के रूप में उन्होंने हिवड़े बाजार के परिवर्तन की जो कहानी सुनाई थी, वही आज पूरे देश के लिए आदर्श ग्राम विकास का मॉडल बन चुकी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चित्रकूट स्थित दीनदयाल शोध संस्थान में नानाजी देशमुख द्वारा विकसित ग्राम विकास मॉडल तथा ओडिशा में डॉ. अच्युत सामंत द्वारा शिक्षा के माध्यम से किए गए सामाजिक परिवर्तन से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रत्येक जिले की स्थानीय परिस्थितियों, संसाधनों और आवश्यकताओं के अनुरूप विकास का अपना मॉडल तैयार किया जाए, जिससे स्थायी और समावेशी विकास सुनिश्चित हो सके।

हिवड़े बाजार मॉडल ने दिखाया जनभागीदारी की ताकत

कार्यशाला में पद्मश्री पोपटराव पवार ने हिवड़े बाजार के परिवर्तन की यात्रा साझा करते हुए बताया कि वर्ष 1989 में गांव जल संकट, पलायन, बेरोजगारी और सामाजिक समस्याओं से जूझ रहा था। जनसहभागिता, अनुशासन, जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन के माध्यम से गांव का व्यापक विकास किया गया। आज गांव में पलायन समाप्त हो चुका है, बीपीएल परिवार नहीं हैं, प्रतिदिन लगभग पांच हजार लीटर दूध का संग्रहण होता है तथा प्रति व्यक्ति आय लगभग नौ लाख रुपये तक पहुंच चुकी है।

बैठक में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह, संचालक प्रियंका ऋषि महोबिया, सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी अमरजीत सिन्हा, प्रदेश के सभी जिलों के जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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