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World Tourism Day : छत्तीसगढ़ में पर्यटन की असीम संभावनाएं

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रायपुर :  प्रतिवर्ष 27 सितंबर को मनाए जाने वाले World Tourism Day पर अलग-अलग विषय निर्धारित किए जाते हैं ताकि विषय के अनुरूप पूरे वर्षभर, पर्यटन विकास के विभिन्न आयामों पर कार्य किया जा सके और साथ ही पर्यटन के प्रति आम लोगों में रुचि जागृत की जा सके... इसी क्रम में इस बार का विषय है पर्यटन और ग्रामीण विकास





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छत्तीसगढ़ के संदर्भ में यह विषय काफी उपयुक्त है, क्योंकि छत्तीसगढ़ के अधिकांश Tourism स्थल ग्रामीण इलाकों में स्थित है इसके साथ ही पर्यटन विभाग छत्तीसगढ़ शासन द्वारा विभिन्न पर्यटन विकास कार्यों के अलावा ग्रामीण पर्यटन पर आधारित विकास कार्य भी किए जा रहे हैं। जिसके अंतर्गत हाल ही में तीन इको-एथनिक रिसॉर्ट का लोकार्पण मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल द्वारा किया गया है





इन रिजॉर्ट्स को ग्रामीण परिवेश के अनुरूप ढाला गया है, ताकि पर्यटकों को उच्च स्तरीय सुविधा के साथ-साथ जनजातीय समुदाय की जीवन शैली को अनुभव करने का आनंद प्राप्त हो सके...





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कोरोना महामारी के वैश्विक संकट के इस दौर में केवल भारत ही नहीं बल्कि विश्व की अर्थ व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। किसी भी राज्य के आर्थिक विकास में पर्यटन की विशेष भूमिका होती है और वर्तमान दौर में Tourism उद्योग आर्थिक रूप से सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। लेकिन इन सबके बावजूद छत्तीसगढ़ शासन ने विकास की गति को अवरूद्ध नहीं होने दिया है। लॉकडाउन के विभिन्न चरणों के दौरान पर्यटन क्षेत्र को विकसित करने के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं..





छत्तीसगढ़ में पर्यटन विकास के साथ-साथ स्थानीय लोगों को रोजगार





 इन्हीं उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए Tourism की पर्यटन नीति 2020 तैयार की गई है। इस पर्यटन नीति के तहत मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ में पर्यटन विकास के साथ-साथ स्थानीय लोगों को रोजगार प्रदान करना, ग्रामीण पर्यटन का विकास करना स्थानीय लोगों को गाइड ट्रेनिंग प्रोग्राम के तहत पर्यटन उद्योग से जोड़ना है ताकि पर्यटन विकास के सार्थक परिणाम मिल सके। पर्यटकों के लिए होमस्टे की योजना पर कार्य किया जा रहा है, ताकि ग्रामीण अंचल और जनजाति समुदाय की जीवन शैली, परिवेश और स्थानीय खानपान से पर्यटकों को अनुभव प्राप्त हो सके।





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राज्य शासन की महत्वाकांक्षी योजना राम वन गमन पर्यटन परिपथ निर्माण के प्रथम चरण में 9 स्थलों का चयन कर विकास कार्यों हेतु  4 स्थलों का डीपीआर तैयार किया जा कर भगवान राम के ननिहाल चंदखुरी में विकास कार्य प्रारंभ किया जा चुका है। सिरपुर को बुद्धिस्ट सर्किट के रूप में विकसित किए जाने हेतु डीपीआर तैयार किया जा रहा है। 





ग्रामीण संस्कृति,रहन-सहन,खानपान और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए होम स्टे एवं ट्राइबल टूरिस्ट सर्किट के तहत पराठा को को सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए तैयारी की गई है। पर्यटन के क्षेत्र में आय के स्रोत बढ़ाने और स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए वाटर टूरिज्म और एडवेंचर टूरिज्म की गाइडलाइन तैयार की गई है,





जिसके तहत मुरूमसिल्ली डैम धमतरी, हसदेव बांगो डैम सतरेंगा- कोरबा, संजय गांधी जलाशय खुटाघाट रतनपुर, गंगरेल धमतरी, सरोधा डैम कबीरधाम, समोधा बैराज रायपुर, कोडार डैम रायपुर, मलानिया डैम गौरेला, दुधावा डैम कांकेर में वाटर टूरिज्म के विकास की पर्याप्त संभावनाओं को देखते हुए अध्ययन कर रिपोर्ट प्रस्तुत किया गया है। 





 राज्य में क्रूज टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए बोट्स और क्रूज के टेंडर की कार्रवाई की गई है। मां बमलेश्वरी मंदिर डोंगरगढ़ ष्प्रसाद योजनाष् के विकास के तहत भारत सरकार पर्यटन मंत्रालय से सैद्धांतिक अनुमोदन प्राप्त हो चुका है इसकी आगामी कार्रवाई पूर्णता की ओर है। सस्टेनेबल टूरिज्म और रिस्पांसिबल टूरिज्म की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ाने की योजना तैयार की गई जिसका क्रियान्वयन शीघ्र किया जाएगा।





कोरोना महामारी के संक्रमण काल के पश्चात पर्यटन को गति प्रदान





नेशनल काउंसिल फॉर होटल मैनेजमेंट एंड कैटरिंग टेक्नोलॉजी नई दिल्ली द्वारा होटल मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट (आईएचएम) रायपुर को हाल ही में मान्यता प्रदान करते हुए डिग्री एवं तीन प्रकार के डिप्लोमा कोर्स प्रारंभ करने की अनुमति दी गई है, जिसके तहत आगामी  1 अक्टूबर से अध्यापन कार्य प्रारंभ किए जाने हेतु वैकल्पिक तैयारियां पूर्ण कर ली गई है।





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इस तरह पर्यटन विभाग छत्तीसगढ़ शासन द्वारा कोरोना महामारी के संक्रमण काल के पश्चात पर्यटन को गति प्रदान करने के लिए लगातार प्रयास जारी है जिसका सुखद परिणाम निकट भविष्य में देखने को मिलेगा और राज्य के पर्यटन स्थलों को संपूर्ण सुख सुविधाओं के साथ वैश्विक स्तर पर पहचान मिलेगी।


Chhattisgarh News : केन्द्र सरकार का एक राष्ट्र-एक बाजार अध्यादेश किसानों के लिए अहितकारी : भूपेश बघेल

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रायपुर : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि केन्द्र सरकार का एक राष्ट्र-एक बाजार अध्यादेश किसानों के हित में नहीं है। इससे मंडी का ढांचा खत्म होगा, जो किसानों और व्यापारियों दोनों के लिए लाभप्रद नहीं है। अधिकांश कृषक लघु सीमांत है, इससे किसानों का शोषण बढ़ेगा। उनमें इतनी क्षमता नहीं कि राज्य के बाहर जाकर उपज बेच सके। किसानों को उनकी उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिलेगा। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा आवश्यक वस्तु अधिनियम में किए गए संशोधन से आवश्यक वस्तुओं के भंडारण एवं मूल्य वृद्धि के विरूद्ध कार्यवाही करने मे कठिनाई होगी। कान्ट्रैकेट फार्मिग से निजी कंपनियों को फायदा होगा। सहकारिता में निजी क्षेत्र के प्रवेश से बहुराष्ट्रीय कंपनिया, बड़े उद्योगपति सहकारी संस्थाओं पर कब्जा कर लेंगे और किसानों का शोषण होगा।





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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज अपने निवास कार्यालय से वीड़ियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले को 332.64 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात देने के बाद कार्यक्रम को मुख्य अतिथि की आसंदी से संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता विधानसभा अध्यक्ष चरण दास महंत ने की। कार्यक्रम में सभी मंत्रीगण, लोकसभा सांसद श्रीमती महंत एवं अन्य जनप्रतिनिधि कार्यक्रम में वीड़ियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।





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आम जनता के हितों का संरक्षण एवं उनकी खुशहाली सरकार की प्राथमिकता





मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि आम जनता के हितों का संरक्षण एवं उनकी खुशहाली हमारी सरकार की प्राथमिकता है। यह प्रेरणा हमें विरासत में मिली है। देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू से लेकर लाल बहादुर शास्त्री, श्रीमती इंदिरा गांधी की नीतियों और आदर्शों का अनुसरण करते हुए छत्तीसगढ़ सरकार गरीबों, मजदूरों, किसानों और आदिवासियों के बेहतरी के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि कोरोना आपदा काल में छत्तीसगढ़ सरकार ने लोगों को अपने जनहितैषी कार्यक्रमों एवं योजनाओं के जरिए 70 हजार करोड़ रूपए की सीधे मदद दी हैं। 





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देश और दुनिया कोरोना संकट से जूझ रही





आज देश और दुनिया कोरोना संकट से जूझ रही है। बहुत से देशों की राष्ट्रीय सरकारों ने किसानों, गरीबों और आपदा पीड़ितों के प्रति सहानुभूति का रवैया रखते हुए बीमारी के नियंत्रण में अच्छी सफलता हासिल की है। लेकिन हमारे देश ने जिस तरह से सर्जिकल स्ट्राइक के तरीके से नोटबंदी, जीएसटी और लॉकडाउन किया गया, उससे लगातार हालत खराब होती गई और सबका मिला-जुला असर कोरोना काल में राष्ट्रीय आपदा के रूप में सामने आया है। यदि केन्द्र सरकार रचनात्मक और सहानुभूतिपूर्ण रवैया रखती तो देश को आज जैसे दिन नहीं देखने पड़ते।





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मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने कोरोना काल में जो रचनात्मक नजरिया रखा उसके कारण हम किसानों, मजदूरों, गरीबों, ग्रामीणों, वन आश्रितों को 70 हजार करोड़ रू. की आर्थिक मदद कर पाए। उन्होंने कहा कि मुझे दुख होता है कि इस संकट काल में भी हमारे उन पुरखों के योगदान को भुलाने की कोशिश की जाती है, जिन्होंने देश को अपनी सही सोच और सही नेतृत्व से स्वावलंबी बनाया था।





भारत की परंपरागत कृषि को ‘‘हरित क्रांति’





मुख्यमंत्री ने कहा कि जब देश स्वतंत्र हुआ उस समय देश में कृषि एवं कृषकों की स्थिति अत्यंत खराब थी। भुखमरी की स्थिति में खड़े देश को आत्मनिर्भर बनाने अभियान चलाया गया। प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू ने आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 लागू किया, जिससे जमाखोरी एवं कालाबाजारी पर रोक लगी। प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के समय प्रमुख फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करने के लिए कृषि मूल्य आयोग गठित किया गया। प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने भारत की परंपरागत कृषि को ‘‘हरित क्रांति’’ में परिवर्तित कर दिया। उन्होंने कृषकों के लिए बैंक के द्वार खोलने के लिए बैंको का राष्ट्रीयकरण किया। 





किसानों को उनके उत्पादों का लाभकारी मूल्य दिलाने





मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर 1970 के दशक में एग्रीकल्चर प्रोडयूस मार्कटिंग (रेगुलेशन) ऐक्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके तहत किसानों को उनके उत्पादों का लाभकारी मूल्य दिलाने के लिए कृषि विपणन समितियां बनी थी। इन समितियों का उद्देश्य बाजार की अनिश्चितताओं सेे किसानों को बचाना और उनका शोषण रोकना था। इस एक्ट के द्वारा मंडी समितियों का गठन किया गया। इन मंडियों में कृषकों को उनकी उपज का सही मूल्य मिलता है। कृषक अपना प्रतिनिधि चुनते हैं, जो मंडी समिति का प्रबंधन करते हैं। 





मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि आज केन्द्र सरकार द्वारा विश्वव्यापी कोरोना संकट के समय के अवसर को अच्छा अवसर मानते हुए कृषकों के शोषण के लिए चार अध्यादेश लाया गया है। जिसके तहत एक राष्ट्र- एक बाजार के तहत एक्ट में संशोधन किया गया है। इसमें किसानों को देश के किसी भी हिस्से में अपनी उपज बेचने की छूट दी गई है। इसमें किसान और व्यापारी को उपज खरीदी-बिक्री के लिए राज्य की मंडी के बाहर टैक्स नहीं देना होगा अर्थात मंडी में फसलों की खरीदी-बिक्री की अनिवार्यता समाप्त हो जाएगी और निजी मंडियों को बढ़ावा मिलेगा।





मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी तरह आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 में संशोधन, खाद पदार्थों के उत्पादन और बिक्री को नियंत्रण मुक्त किया गया है। तिलहन, दलहन, आलू, प्याज जैसे उत्पादों से स्टाक सीमा हटाने का फैसला लिया गया है। कॉन्ट्रेक्ट फार्मिग और सहकारी बैंकों में निजी इक्विटी की अनुमति का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा स्पष्ट मत है कि कोरोना आपदा के समय में केन्द्र सरकार द्वारा जो अध्यादेश लाए गए हैं, उसका बहुत बुरा असर होगा।





मुख्यमंत्री ने कहा कि हम पुरजोर तरीके से केन्द्र सरकार के किसान विरोधी कानूनों का विरोध करेंगे। उन्होंने कहा कि आज देश के सामने दो मॉडल स्पष्ट हैं कि आपदा में जनसेवा के माध्यम से विश्वास जगाते हुए सबको साथ लेकर चलने वाला छत्तीसगढ़ी मॉडल     और दूसरा आपदा को मनमानी करने का अवसर मानने वाला केन्द्र सरकार का  मॉडल। उन्होंने कहा कि हमें अपने छत्तीसगढ़ी मॉडल पर भरोसा है, जिसने आपदा के समय में जरूरतमंदों को सीधे मदद पहुंचाने के साथ ही नवगठित जिला गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही के विकास को नया आयाम दिया है।


छत्तीसगढ़ न्यूज : नव गठित गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले को देंगे 332 करोड़ रूपए के विकास कार्यों की सौगात

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रायपुर : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कल 18 सितम्बर को नवगठित जिले गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही को 332 करोड़ 64 लाख रूपए के 208 विभिन्न विकास कार्यों की सौगात देंगे। इनमें 84 करोड़ 10 लाख रूपए के 29 कार्यों का लोकार्पण और 248 करोड़ 78 लाख रूपए के 179 कार्यो का भूमिपूजन शामिल हैं। मुख्यमंत्री रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय से प्रातः 11 बजे वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से लोकार्पण एवं शिलान्यास करेंगे। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता विधानसभा अध्यक्ष चरणदास महंत करेंगे।





गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के साधू हॉल गौरेला में आयोजित लोकार्पण एवं शिलान्यास समारोह में नव गठित जिले के प्रभारी मंत्री एवं राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे। समारोह में गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू, स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव, कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे, वन मंत्री मोहम्मद अकबर, स्कूल शिक्षा मंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम, उद्योग मंत्री कवासी लखमा, महिला एवं बाल विकास मंत्री अनिला भेंड़िया, नगरीय प्रशासन मंत्री शिवकुमार डहरिया, खाद्य मंत्री अमरजीत भगत, उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल, सांसद ज्योत्सना चरणदास महंत और जिला पंचायत बिलासपुर के अध्यक्ष अरूण चौहान भी शामिल होंगे।





84 करोड़ रुपए के 29 कार्यो का लोकार्पण





मुख्यमंत्री बघेल नवगठित जिले गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही में 84 करोड़ रुपए से अधिक के 29 कार्यो का लोकार्पण करेंगे। जिसमें 76 करोड़ 81 लाख रुपए की लागत से निर्मित रेलवे ओवरब्रिज, कंचनडीह-बारीउमरांव मार्ग पर सोननदी में 2 करोड़ 12 लाख रुपए की लागत से निर्मित उच्च स्तरीय पुल, ग्राम बगरा, बेलगहना गोरखपुर, पूटा, पटेल पारा, पंडरीपानी, जोरा डोंगरी में 45 लाख 15 हजार रुपए की लागत से निर्मित आंगनबाड़ी भवन, ग्राम तेंदूमुड़ा, अंधियारखोह, पण्डरीपानी, नवाटोला, करसींवा, नगवाही, लटाकेनीखुर्द, सिलपहरी आदि में 60 लाख रुपए से अधिक के बने पुलिया तथा पहुच मार्ग शामिल हैं.





ग्राम नगवाही, लटकोनीखुर्द, कोरकोटटोला, सिलपहरी में 19 लाख 35 हजार रुपए की लागत से निर्मित आंगनबाड़ी भवन, ग्राम मेढुका में 6 लाख रुपए का धान चबुतरा , मरवाही में 5 लाख रुपए का मुक्तिधाम,  लालपुर में शासकीय उद्यानिकी में 86.68 लाख रुपए का अहाता, गौरेला में 2 करोड़ रुपए के जैव विविधता संसाधन पार्क, धरमपानी में 73 लाख रुपए के वन चेतना केंद्र का पुनर्नवीनीकरण, जिला चिकित्सालय और मरवाही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 17 लाख 66 हजार रुपए की लागत से एक्स-रे मशीन की स्थापना सहित अन्य कार्य शामिल हैं।





248 करोड़ के 179 कार्यों का होगा भूमिपूजन





मुख्यमंत्रीबघेल गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही में 248 करोड़ 78 लाख रूपए के 179 कार्यों का भूमिपूजन भी करेंगे। जिन नए स्वीकृत कार्यों का शिलान्यास होगा उनमें मुख्य रूप से राजाडीह जलाशय निर्माण के लिए 12 करोड 22 लाख रूपए, घघरा उपर खुज्जी, गंगांपुर जलाशय और चौरसिया जलाशय की नहरों में में सीमेेंट कांक्रीट लायनिंग का कार्य के लिए 18 करोड रुपए, सोन नदी पर तीन पुल निर्माण के लिए 15 करोड़ रुपए, संयुक्त जिला कार्यालय भवन के लिए 24.94 करोड़ रुपए, सड़कों के चौड़ीकरण और मजबूतीकरण के 09 कार्यों के लिए 143 करोड़ 78 लाख रुपए, सड़क डामरीकरण के 12 कार्यों के लिए 8 करोड़ 40 लाख रूपए, मुख्यमंत्री सुगम सड़क योजना के तहत 20 कार्यों के लिए एक करोड़ 52 लाख,  04 नवीन विद्युत उपकेन्द्र बस्ती, आमाडांड, अधियाखोह के लिए 10 करोड़ 62 लाख रुपए, मरवाही, लालपुर, केवंची और खोड़री में कन्या छात्रावास के लिए 6 करोड़ 50 लाख रुपए, ग्राम डोंगरिया में एकलव्य विद्यालय में आवश्यक कार्यों के लिए 75 लाख रुपए, ग्राम निमधा, सकोला, कोडगार, सेमरदर्री, अण्डी, पेण्ड्रा, मुरमुर, बरौर, खोडरी, कोरजा, कोटमीकला, नेवसा, पेण्ड्रा, गौरेला, बचरवार, धनौली, बंशीताल, केंवची, पकरिया के विद्यालयों में दो करोड़ 78 लाख 51 हजार रुपए के विभिन्न कार्य शामिल हैं हैं.





साथ ही जनपद पंचायत गौरेला, मरवाही अंतर्गत सारबहरा, कुम्हारी में बैगा अध्ययन केन्द्र, करंमरा-धनौली, करहनिया कछार और महोरा में प्राथमिक शाला भवन, खैरझिटी पड़खुरी में माध्यमिक शाला भवन, सहित अन्य कार्य हेतु 88 लाख रुपए, जनपद पंचायत पेण्ड्रा, गौरेला अंतर्गत बम्हनी, झाबर, कुडकई, घाटबहरा, भाड़ी, पकरिया, खोडरी, बगरा, दौंजरा, डाहीबहरा, लालपुर में गौठान में चैन लिंक एवं फेंसिग कार्य 93 लाख रुपए, जनपद गौरेला, पेण्ड्रा और मरवाही के अंतर्गत बम्हनी, झाबर, घटबहरा, कुडकुई में बोरवेल निर्माण, कछार, मड़वाही, डोंगरिया, पिपरिया, खुरपा, नगवाही, पीपरडोल, नाका, रुमगा, उषाढ़, खुरपा में बोर खनन हेतु कुल 14 लाख 40 हजार रुपए, आमाडोब, आमगांव, अंधियारखेह, बगरा, बनझोरका, बेलपत, डाहीबहरा, दौंजरा, डुगरा, जोगीसार,, करगीखुर्द, खेडरी, कोटमीखुर्द, लमना, पकरिया, पूटा, सधवानी, टीकरखुर्द, उमरखोही, पीपरखुटी, कोरजा, ठेंगाडांड, गिरवर, हर्राटोला, पतराकोनी, पड़वनिया, धनौली, गांगपुर, देवरगांव में बोर खनन हेतु 29.58 लाख रुपए के में गोठान तथा जनपद पंचायत पेण्ड्रा अंतर्गत 50 लाख रुपए से अधिक का आरसीसी नाली निर्माण कार्य एवं ग्राम सधवानी में 5 लाख का उद्यान निर्माण कार्य शामिल है।


Godhan Nyay Yojna : किसान ने 15 दिन में गोबर बेच कर कमाया 44000 रूपये

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महासमुंद । छत्तीसगढ़

खेती किसानी और पशुपालन करने वाले लिंगराज आज खुशी से झूम रहा है। यह खुशी उसे गोधन न्याय योजना के जरिए मिली है। महासंमुद जिले के दूरस्थ गांव छिबर्रा के रहने वाले और खेती किसानी के साथ पशुपालन का काम करने वाले लिंगराज ने गोधन न्याय योजना के शुभारंभ 20 जुलाई से 4 अगस्त तक 15 दिनों में 221 क्विंटल गोबर बेचा। आज किसान के खाते में 44200 रूपए आने की सूचना उसे मोबाइल पर  एसएमएस (अलर्ट टोन्स) से मिली। तो खुशियों का ठिकाना नहीं रहा। लिंगराज ने सपने में भी नहीं सोचा था कि गोबर बेचने से 15 दिन में इतने पैसे मिल सकते हैं।

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लेकिन यह सब मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल की इस महात्वाकांक्षी योजना ने उसके और उसके जैसे हजारों पशुपालकों के सपने को साकार कर दिया। राज्य सरकार दो रूपये प्रतिकिलो की दर से गौठानों में पशुपालकों से गोबर खरीद रही है और वायदे के मुताबित 15 दिन के भीतर उसका भुगतान भी कर दिया। किसान गोपालक लिंगराज के पास खेती के अलावा 25 गाय है। जिसका दूध वह  आसपास के बाजार में बेचता है। लेकिन लाॅकडाउन के चलते उसका दूध ज्यादा नहीं बिक रहा था।  अब गोबर बेचने से उसकी दूध नहीं बिकने की भरपायी जरूर हो गयी है। इससे वह राहत महसूस कर रहा है।

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ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ सरकार की ‘‘गोधन न्याय योजना‘‘ का हरेली पर्व 20 जुलाई को शुरूआत हुई थी। जिले में इस योजना के शुरू होने से अब तक  15 दिन के भीतर जिले के 84 गौठानों में 1635 किसान, पशुपालकों ने 45551क्विंटल गोबर बेचा (विक्रय) किया है । इक्यासी (81) गौठान समिति द्वारा इसके एवज में 911186 रूपए का भुगतान जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक द्वारा पब्लिक फायनेंसीयल मेनेजमेंट सिस्टम (पीएफएमएस) से सभी 1635 किसान, पशुपालक को किया गया है ।

पीएफएमएस एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जिसके द्वारा ई-पेमेन्ट सब्सिडी का भुगतान डायरेक्ट बेनिफिट ट्रान्सफर (डीबीटी) से होता है। आपको बतादें कि जिले में 84 गौठानों में 78 ग्रामीण क्षेत्र के तथा 6 नगरीय निकाय क्षेत्र के है। इनमें अब तक  4 अगस्त कुल 1935 किसान, पशुपालक हितग्राहियों ने गोबर बेचने के लिए पंजीयन कराया है।

रियलिटी चेक:- जनसंपर्क अधिकारी जिला महासमुन्द की ओर से जारी इस खबर के तथ्यों की पड़ताल करने पर ज्ञात हुआ कि किसान लिंगराज ने पन्द्रह दिनों में 221 क्विंटल गोबर बेचा है।  जिसके एवज में उसे 2 रुपये प्रतिकिलो की दर से ऑनलाइन भुगतान किया गया है। चूंकि किसान के पास 25 मवेशी होने का खबर में उल्लेख है। जिसके अनुसार एक मवेशी प्रतिदिन करीब उनसठ किलो गोबर कैसे दे सकता है। जो आश्चर्यजनक और अविश्वसनीय है। इस संबंध में पूछने पर जनसंपर्क विभाग के महासमुन्द सहायक संचालक शशिरत्न पराशर का कहना हैं कि कृषि विभाग के उपसंचालक के द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार खबर प्रसारित किया गया हैं। संभवतः किसान ने महीनेभर का गोबर एकत्र करके अथवा पड़ोसियों का भी गोबर को  मिलाकर बेचा होगा। 

Chhattisgarh News : राजधानी में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल करेंगे ध्वजारोहण, स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजन के संबंध में राज्य शासन ने जारी किए दिशा-निर्देश

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रायपुर । छत्तीसगढ़

प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी प्रदेश में स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त गरिमामय तरीके से मनाया जाएगा। इस वर्ष कोविड-19 महामारी को ध्यान में रखते हुए विशेष सावधानी बरतते हुए आयोजन किए जाएंगे। राज्य शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने स्वतंत्रता दिवस समारोह के आयोजन के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए है। जिसके तहत भारत सरकार गृह मंत्रालय एवं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा कोविड-19 से बचाव हेतु जारी सभी निर्देशों का पालन एवं उपाय सुनिश्चित करते हुए कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।

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जारी निर्देश के तहत स्वतंत्रता दिवस का राज्य स्तरीय समारोह राजधानी रायपुर में स्थानीय पुलिस परेड ग्राउंड में आयोजित होगा जहां पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ध्वजारोहण करेंगे। ध्वजारोहरण उपरांत पुलिस एवं अर्द्धसैनिक बलों की टुकड़ियों द्वारा सलामी दी जायेगी। मुख्यमंत्री के द्वारा जनता के नाम संदेश दिया जाएगा। कार्यक्रम में कोरोना वारियर्स डॉक्टरों, पुलिस कर्मियों, स्वास्थ्य कर्मियों एवं स्वछता कर्मियों को विशेष रूप से आमंत्रित करते हुए उन्हें सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम में आने वाले सभी लोगों को मास्क पहनना और सामाजिक दूरी आदि का पालन करना अनिवार्य होगा।

इसी तरह जिला स्तर पर स्वतंत्रता दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के द्वारा ध्वजारोहरण किया जाएगा। इसके उपरांत पुलिस एवं नगर सैनिकों की टुकड़ियों द्वारा सलामी दी जाएगी। मुख्य अतिथि के द्वारा प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा जनता के नाम प्रेषित संदेश का वाचन किया जाएगा। जिला स्तरीय कार्यक्रम में भी कोरोना वारियर्स डॉक्टरों, पुलिस कर्मियों, स्वास्थ्य कर्मियों एवं स्वछता कर्मियों को विशेष रूप से आमंत्रित कर उन्हें सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम में आने वाले सभी लोगों को मास्क पहनना और सामाजिक दूरी आदि का पालन करना अनिवार्य होगा।

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स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर तहसील एवं जनपद स्तर पर सार्वजनिक समारोह आयोजित नहीं होंगे। जनपद कार्यालयों में जनपद अध्यक्ष एवं नगरीय निकायों में नगरीय निकाय के महापौर या अध्यक्षों द्वारा ध्वजारोहरण किया जाएगा। पंचायत मुख्यालयों में सरपंच द्वारा एवं बड़े गांवों में गांव के मुखिया द्वारा ध्वजारोहण किया जाएगा और सामूहिक रूप से राष्ट्रीय गान गाया जाएगा। सामान्य प्रशासन विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार राज्य, जिला, ब्लाक एवं पंचायत स्तर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में किसी भी स्थिति में स्कूली छात्र-छात्राओं को एकत्र नहीं किया जाएगा। आयोजित कार्यक्रमों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन नहीं किया जाएगा। गणमान्य अतिथियों को भी सीमित संख्या में आमंत्रित किया जाएगा। बैठक व्यवस्था में सामाजिक एवं व्यक्तिगत दूरी का विशेष रूप से पालन किया जाएगा।

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प्रदेश की राजधानी रायपुर एवं अन्य जिला मुख्यालयों में आयोजित होने वाले मुख्य समारोह प्रातः 9 बजे से शुरू होंगे। इसे देखते हुए रायपुर एवं अन्य जिला मुख्यालयों में स्थित शासकीय कार्यालयों को ध्वजारोहण प्रातः 8 बजे के पूर्व सम्पन्न कर लिए जाएंगे ताकि उन कार्यालयों के अधिकारी और कर्मचारी जिले के मुख्य समारोह में शामिल हो सके। सभी विभाग के कार्यालय प्रमुखों द्वारा उनके कार्यालय में ध्वजारोहरण का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके पश्चात् राष्ट्रीय गान जन-गण-मन गाया जाएगा। सभी शासकीय एवं सार्वजनिक भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाएगा। स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को रात्रि में प्रदेश के सभी शासकीय एवं सार्वजनिक भवनों तथा राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों पर रोशनी की जाएगी।
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