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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ‘अविस्मरणीय यात्रा’ पुस्तक का किया विमोचन

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महिला पत्रकारों ने नारी शक्ति वंदन के संकल्प को महिला सशक्तिकरण की ओर बताया ऐतिहासिक कदम

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज विधानसभा स्थित  कार्यालय कक्ष में पत्रकार नीरा साहू द्वारा गुजरात यात्रा पर लिखी गई पुस्तक ‘अविस्मरणीय यात्रा’ का विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने  नीरा साहू को उनकी उत्कृष्ट रचना के लिए बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित महिला पत्रकारों ने मुख्यमंत्री का अभिनंदन करते हुए नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में विधानसभा में आयोजित विशेष सत्र एवं शासकीय संकल्प के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने इसे महिलाओं के सम्मान, सशक्तिकरण और अधिकारों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया, जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करेगी।

मुख्यमंत्री साय ने महिला पत्रकारों के अध्ययन भ्रमण की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक भ्रमण पत्रकारों की दृष्टि को व्यापक बनाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह यात्रा-वृत्तांत पर्यटन प्रेमियों के लिए एक उपयोगी मार्गदर्शिका सिद्ध होगा।

इस अवसर पर निशा द्विवेदी, चित्रा पटेल, लवलीना शर्मा, जनसंपर्क विभाग की उप संचालक डॉ. दानेश्वरी संभाकर, सहायक संचालक संगीता लकड़ा एवं आमना खातून सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।

उपराष्ट्रपति C. P. Radhakrishnan ने तमिल विरासत और महान विभूतियों पर आधारित 16 पुस्तकों का विमोचन किया

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भारत के उपराष्ट्रपति C. P. Radhakrishnan ने आज Publications Division, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा प्रकाशित 16 महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन Uparashtrapati Bhavan में किया। ये पुस्तकें प्रख्यात तमिल विद्वानों, विरासत, वास्तुकला, साहित्य, संस्कृति और सभ्यतागत चिंतन पर आधारित हैं।

इन प्रकाशनों में विविध विषयों को समाहित किया गया है, जिनमें Rameswaram — उत्तर से दक्षिण भारत तक आध्यात्मिक एकता का प्रतीक पवित्र तीर्थ; Sri Ramanuja का जीवन और दर्शन; नडुकल परंपरा; प्राचीन व्यापारिक केंद्र Arikamedu; नयनमारों और आलवारों की भक्ति साहित्य परंपरा; प्राकृतिक कृषि पद्धतियाँ; प्राचीन तमिल वाद्ययंत्र; तमिलनाडु के लोक देवता; उभरती वैज्ञानिक प्रौद्योगिकियाँ; तथा Meenakshi Amman Temple और Brihadeesvara Temple की स्थापत्य भव्यता शामिल हैं। इसके अतिरिक्त Manimekalai तथा महाविद्वान Mahavidwan Meenakshi Sundaram Pillai पर आधारित कृतियाँ भी इन पुस्तकों में सम्मिलित हैं।

उपराष्ट्रपति ने गर्व और प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि आज जारी की गई पुस्तकें तमिल सभ्यता की गहराई और विविधता को प्रतिबिंबित करती हैं, जिनमें मंदिर परंपराएँ, दर्शन, वास्तुकला, साहित्य, संगीत, विज्ञान, सामाजिक सुधार और आध्यात्मिक चिंतन का समावेश है।

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने Bankim Chandra Chatterjee पर आधारित एक पुस्तक का भी विमोचन किया, जो तमिल, अंग्रेज़ी और हिंदी भाषाओं में प्रकाशित हुई है। “वंदे मातरम्” के अमर शब्दों का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि इस गीत ने लाखों लोगों के हृदय में क्रांति की ज्योति प्रज्वलित की और असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि ये दो शब्द हमारी मातृभूमि की आत्मा, हमारी नदियों की शक्ति और हमारी धरती की सुगंध को अभिव्यक्त करते हैं।

उन्होंने तमिल को विश्व की प्राचीनतम शास्त्रीय भाषाओं में से एक बताते हुए कहा कि इसका दो सहस्राब्दियों से अधिक का साहित्यिक और दार्शनिक इतिहास है। आज प्रकाशित पुस्तकें तमिल ज्ञान परंपरा की बौद्धिक गहराई और सभ्यतागत निरंतरता को दर्शाती हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय मंदिर केवल पूजा के स्थान नहीं, बल्कि कला, वास्तुकला, संगीत, खगोलशास्त्र, गणित और सामाजिक संगठन के केंद्र रहे हैं। हमारे पूर्वज दर्शन, साहित्य, विज्ञान और सामाजिक सुधार के क्षेत्र में अद्वितीय थे।

उन्होंने कहा कि भारत अनेक भाषाओं का देश है, किंतु उसकी सभ्यतागत आत्मा एक है। विभिन्न भाषाओं, धर्मों और राजनीतिक विचारधाराओं के बावजूद भारत सांस्कृतिक रूप से एक राष्ट्र रहा है। “वसुधैव कुटुम्बकम्” और “याधुम ऊरे यावरुम केलिर” जैसी अवधारणाएँ इसी एकात्म भाव को व्यक्त करती हैं।

उन्होंने कहा कि Ramayana और Mahabharata का प्रसार भारत के प्रत्येक ग्राम तक स्वाभाविक रूप से हुआ। ये महाकाव्य थोपे नहीं गए, बल्कि साझा आध्यात्मिक चेतना के माध्यम से जन-जन द्वारा अपनाए गए।

प्रधानमंत्री Narendra Modi के वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि आर्थिक प्रगति के साथ सांस्कृतिक संरक्षण भी आवश्यक है। उन्होंने वैश्विक मंचों पर Thirukkural तथा Subramania Bharati का उल्लेख किए जाने की सराहना की।

उन्होंने मलेशिया के एक विश्वविद्यालय में Thiruvalluvar पीठ की स्थापना की घोषणा का स्मरण करते हुए Kashi Tamil Sangamam जैसी पहलों को राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि तमिल भाषा को वैश्विक स्तर पर सम्मान मिल रहा है तथा तमिल स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार किया जा रहा है। इनमें Pulithevar, Velu Nachiyar, Veerapandiya Kattabomman, Ondiveeran, Thiruppur Kumaran, Theeran Chinnamalai, Kuyili, Sundaralinganar तथा मरुदु बंधु प्रमुख हैं।

उन्होंने कहा कि प्रकाशन विभाग द्वारा प्रकाशित ये पुस्तकें केवल साहित्यिक कृतियाँ नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी के लिए पथप्रदर्शक दीप हैं। तीव्र परिवर्तनशील प्रौद्योगिकी युग में युवाओं को मजबूत जड़ों के साथ ऊँची उड़ान की आवश्यकता है। उन्होंने युवाओं से प्रतिदिन कम से कम एक घंटा पुस्तक-पठन के लिए समर्पित करने का आह्वान किया।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री Ashwini Vaishnaw, राज्य मंत्री L. Murugan, उपराष्ट्रपति के सचिव Amit Khare तथा प्रकाशन विभाग के प्रधान महानिदेशक Bhupendra Kainthola सहित अनेक विद्वान और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

अपने संबोधन के अंत में उपराष्ट्रपति ने कहा कि विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ते हुए आर्थिक उन्नति के साथ सांस्कृतिक शक्ति का सुदृढ़ होना भी अनिवार्य है।

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