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भारत की डिजिटल पहचान सुरक्षा को मजबूत करने के लिए UIDAI–NFSU साझेदारी

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भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण और राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय ने डिजिटल फॉरेंसिक्स, साइबर सुरक्षा और उन्नत तकनीकी अनुसंधान के क्षेत्रों में पाँच वर्षीय संरचित सहयोग स्थापित करने के लिए समझौता किया है।

यह समझौता ज्ञापन (MoU) दोनों प्रमुख राष्ट्रीय संस्थानों को एक साथ लाकर UIDAI के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर—जो भारत की डिजिटल पहचान प्रणाली की आधारशिला है—की साइबर सुरक्षा और मजबूती को और सुदृढ़ करेगा।

MoU का आदान-प्रदान UIDAI के सीईओ विवेक चंद्र वर्मा और NFSU के गुजरात कैंपस के निदेशक प्रो. (डॉ.) एस.ओ. जुनारे के बीच किया गया। इस अवसर पर UIDAI के उप महानिदेशक अभिषेक कुमार सिंह सहित दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

यह सहयोग छह प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित रहेगा:

  • शैक्षणिक एवं व्यावसायिक विकास

  • सूचना सुरक्षा और सिस्टम की अखंडता

  • फॉरेंसिक इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रयोगशाला उत्कृष्टता

  • साइबर सुरक्षा गतिविधियों के लिए तकनीकी सहयोग

  • तकनीकी परामर्श एवं अनुसंधान (जैसे AI, ब्लॉकचेन, डीपफेक डिटेक्शन, क्रिप्टोग्राफी)

  • प्लेसमेंट और आउटरीच के अवसर

UIDAI के सीईओ विवेक चंद्र वर्मा ने कहा, “यह सहयोग भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा, मजबूती और फॉरेंसिक क्षमताओं को और सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे डिजिटल पहचान प्रणालियों की सुरक्षा और भी सुनिश्चित होगी।”


आधार विज़न 2032: डिजिटल पहचान के भविष्य को सुरक्षित और सशक्त बनाने की दिशा में UIDAI की पहल

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तेजी से बदलते तकनीकी और नियामक परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने ‘आधार विज़न 2032’ के तहत एक व्यापक रणनीतिक और तकनीकी समीक्षा की शुरुआत की है, ताकि आने वाले दशक में आधार के विकास की दिशा तय की जा सके।

आधार विज़न 2032

यह दूरदर्शी रोडमैप आधार की तकनीकी नींव को और मज़बूत करेगा, उभरते डिजिटल नवाचारों को समाहित करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि भारत का डिजिटल पहचान प्लेटफ़ॉर्म मज़बूत, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार बना रहे। UIDAI का तकनीकी ढांचा, जो आधार सेवाओं की रीढ़ है और देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था को गति देता है, अब एक बड़े उन्नयन के दौर से गुज़रने वाला है।

इस महत्वाकांक्षी परिवर्तन को दिशा देने के लिए, UIDAI ने नीलकंठ मिश्रा (अध्यक्ष, UIDAI) की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति गठित की है। इस समिति में शिक्षा, उद्योग और प्रशासन से जुड़े प्रमुख विशेषज्ञों और नेताओं को शामिल किया गया है, जो आधार के नवाचार रोडमैप को सशक्त बनाने के लिए रणनीतिक दिशा प्रदान करेंगे।

समिति के सदस्य:

भुवनेश कुमार (सीईओ, UIDAI), विवेक राघवन (सह-संस्थापक, Sarvam AI), धीरज पांडे (संस्थापक, Nutanix), सासिकुमार गणेशन (हेड ऑफ इंजीनियरिंग, MOSIP), राहुल मथन (पार्टनर, Trilegal),नवीन बुधिराजा (सीटीओ एवं हेड ऑफ प्रोडक्ट्स, Vianai Systems), डॉ. प्रभाहरन पूर्णचंद्रन (प्रोफेसर, अमृता यूनिवर्सिटी), प्रो. अनिल जैन (मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी), प्रो. मयंक वत्सा (आईआईटी जोधपुर), और अभिषेक कुमार सिंह (उप महानिदेशक, UIDAI)।

समिति ‘आधार विज़न 2032’ दस्तावेज़ तैयार करेगी, जिसमें अगली पीढ़ी की आधार आर्किटेक्चर की रूपरेखा प्रस्तुत की जाएगी। यह रूपरेखा भारत के डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम (DPDP Act) और वैश्विक गोपनीयता एवं साइबर सुरक्षा मानकों के अनुरूप होगी।

प्रमुख तकनीकी फोकस:

आधार विज़न 2032 ढांचा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ब्लॉकचेन, क्वांटम कंप्यूटिंग, उन्नत एन्क्रिप्शन और अगली पीढ़ी की डेटा सुरक्षा जैसी अत्याधुनिक तकनीकों पर केंद्रित होगा। इससे आधार न केवल साइबर सुरक्षा खतरों के प्रति अधिक मज़बूत बनेगा, बल्कि भविष्य की बढ़ती मांगों के अनुरूप लचीला और तकनीकी रूप से सक्षम भी रहेगा।

इस पहल के माध्यम से UIDAI ने तकनीकी उत्कृष्टता, नवाचार और जनविश्वास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है। ‘आधार विज़न 2032’ न केवल तकनीकी नेतृत्व को बनाए रखने की दिशा में एक कदम है, बल्कि यह आधार को एक सुरक्षित, समावेशी और नागरिक-केंद्रित डिजिटल पहचान प्रणाली के रूप में सशक्त बनाने की दिशा में एक निर्णायक पहल है।

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