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एनबीए ने लाभ-साझेदारी ढांचे के तहत 45 दिनों में ₹2.40 करोड़ की राशि प्राप्त की

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राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) ने जैविक संसाधनों के संरक्षण और उनके उपयोग से उत्पन्न लाभों के निष्पक्ष और समान वितरण को सुनिश्चित करने के अपने दायित्व को आगे बढ़ाते हुए, पिछले 45 दिनों में एक्सेस एंड बेनिफिट-शेयरिंग (ABS) ढांचे के तहत ₹2.40 करोड़ की राशि प्राप्त की है। यह राशि बीज तथा पशु आहार/कॉस्मेटिक क्षेत्रों से संबंधित संस्थाओं द्वारा जैविक संसाधनों के अनुसंधान और वाणिज्यिक उपयोग हेतु प्राप्त दस आवेदनों से प्राप्त हुई है।

लाभ-साझेदारी योगदान विभिन्न कृषि जैविक संसाधनों के उपयोग से प्राप्त हुआ है, जिनमें धान, प्याज, करेला, सरसों, कपास, लौकी, बैंगन, मिर्च, खीरा, भिंडी, तोरई, टमाटर और समुद्री शैवाल की किस्में/हाइब्रिड शामिल हैं। ₹2.30 करोड़ की एक बड़ी राशि एम/एस पायनियर ओवरसीज कॉर्पोरेशन से सरसों और धान के हाइब्रिड के वाणिज्यिक उपयोग के लिए प्राप्त हुई है। शेष राशि एम/एस ईस्ट वेस्ट सीड्स इंडिया प्रा. लि., एम/एस एडवांटा एंटरप्राइजेज लि., एम/एस टोकिता सीड इंडिया प्रा. लि., एम/एस एवेलो इंक और एम/एस सी6 एनर्जी प्रा. लि. से प्राप्त हुई है। इन जैविक संसाधनों का उपयोग उन्नत और हाइब्रिड बीज किस्मों सहित कृषि आधारित उत्पादों के विकास के लिए किया गया, जिससे कृषि अर्थव्यवस्था को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिला है।

ABS तंत्र के तहत, लाभ संबंधित संस्थानों, स्थानीय समुदायों, किसानों, जैव विविधता प्रबंधन समितियों आदि के साथ साझा किया जाएगा, जिन्होंने बीजों की मूल किस्में प्रदान की थीं। यह प्रणाली आजीविका संवर्धन को समर्थन देती है और जमीनी स्तर पर जैव विविधता के संरक्षण और सतत उपयोग को प्रोत्साहित करती है।

हाल के वर्षों में, NBA ने अनुपालन को आसान बनाने और व्यवसाय करने में सुगमता को बढ़ावा देने के लिए सरल और पारदर्शी प्रक्रियाएं शुरू की हैं, साथ ही यह सुनिश्चित किया है कि जमीनी स्तर के समुदायों के हित सुरक्षित रहें। बीज क्षेत्र ABS ढांचे के तहत अग्रणी योगदानकर्ता के रूप में उभरा है। प्राधिकरण सभी हितधारकों, विशेषकर विभिन्न क्षेत्रों की कंपनियों को जैव विविधता अधिनियम, 2002 के प्रावधानों का अनुपालन करने और जैव विविधता संरक्षण तथा लाभ-साझेदारी में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करता है।

उल्लेखनीय है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में वर्तमान तक NBA ने बीज क्षेत्र से ₹3.42 करोड़ की राशि प्राप्त की है। नवीनतम प्राप्ति के साथ, NBA द्वारा अब तक प्राप्त कुल ABS राशि ₹266 करोड़ (लगभग 29 मिलियन अमेरिकी डॉलर) को पार कर चुकी है। इसमें से ₹83 करोड़ केवल बीज क्षेत्र से प्राप्त हुए हैं, जिससे यह रेड सैंडर्स के बाद दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता बन गया है।

NBA जैव विविधता पर कन्वेंशन (CBD) और नागोया प्रोटोकॉल के तहत भारत की प्रतिबद्धताओं को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है तथा राष्ट्रीय जैव विविधता लक्ष्यों और कुनमिंग–मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचे के लक्ष्य-13 को प्राप्त करने में योगदान दे रहा है, जो ABS तंत्र के लिए विधायी उपायों पर जोर देता है।


रेड सैंडर्स संरक्षण के लिए NBA ने 6.2 करोड़ रुपये जारी किए

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राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) ने जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के अंतर्गत प्रवेश और लाभ साझा करने (ABS) तंत्र के तहत 11.12.2025 को लाभार्थियों को 6.2 करोड़ रुपये जारी किए। यह धनराशि लुप्तप्राय रेड सैंडर्स (Pterocarpus santalinus) के संरक्षण का समर्थन करेगी और पाँच राज्यों में किसानों तथा वन-निर्भर समुदायों की आजीविका को सशक्त बनाएगी।

ABS निधि राज्य वन विभागों, राज्य जैव विविधता बोर्डों तथा रेड सैंडर्स उगाने वाले किसानों को जारी की गई है, जो इस स्थानिक और वैश्विक रूप से महत्वपूर्ण प्रजाति की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यह नवीनतम वितरण रेड सैंडर्स के सतत संरक्षण और जिम्मेदार उपयोग को आगे बढ़ाएगा।

जारी किए गए 6.2 करोड़ रुपये में से:

  • तेलंगाना के किसानों को 17.8 लाख रुपये

  • आंध्र प्रदेश के किसानों को 1.1 करोड़ रुपये

  • तमिलनाडु वन विभाग को 2.98 करोड़ रुपये

  • कर्नाटक वन विभाग को 1.05 करोड़ रुपये

  • महाराष्ट्र वन विभाग को 69.2 लाख रुपये

  • तेलंगाना वन विभाग को 5.8 लाख रुपये
    इसके अतिरिक्त, संबंधित राज्य जैव विविधता बोर्डों के बीच 16 लाख रुपये साझा किए गए हैं।

इस नई किश्त के साथ, रेड सैंडर्स संरक्षण के लिए ABS के तहत कुल वितरण 101 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। अब तक, 216 किसान— जिनमें 198 आंध्र प्रदेश और 18 तमिलनाडु के हैं— रेड सैंडर्स ABS तंत्र से लाभान्वित हुए हैं। इसके अलावा आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और ओडिशा के वन विभाग और राज्य जैव विविधता बोर्ड भी लाभान्वित हुए हैं।

यह धनराशि निम्न कार्यों के लिए उपयोग की जाएगी:

  • अग्रिम पंक्ति संरक्षण

  • गश्त और निगरानी अवसंरचना सुदृढ़ीकरण

  • शोध-आधारित वानिकी पद्धतियाँ

  • समुदाय-आधारित आजीविका कार्यक्रमों का विस्तार

  • रेड सैंडर्स उत्पादकों की सामाजिक-आर्थिक क्षमता में सुधार

इस रिलीज़ के साथ, NBA की कुल ABS वितरण राशि 127 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है, जो जैव संसाधनों से जुड़े न्यायपूर्ण और समान लाभ-साझाकरण के क्रियान्वयन में भारत की वैश्विक नेतृत्व क्षमता को दर्शाती है। यह कार्रवाई राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति और कार्य योजना 2024–2030 तथा कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचा के तहत लक्ष्य-13 तथा लक्ष्य-19 प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देती है।

यह वितरण इस बात का प्रमाण है कि जैविक विविधता अधिनियम के ABS प्रावधान संरक्षण को एक सतत आजीविका अवसर में कैसे बदल सकते हैं। ये प्रयास भारत की इस नेतृत्व क्षमता को प्रदर्शित करते हैं कि वह ABS सिद्धांतों को व्यावहारिक और परिणामोन्मुखी तरीके से लागू कर रहा है—जो पर्यावरणीय सुरक्षा और सतत आजीविका दोनों को सुदृढ़ करता है।

उत्तर प्रदेश और सिक्किम की जैव विविधता प्रबंधन समितियों को राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण द्वारा ₹18.3 लाख की राशि जारी

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राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) ने उत्तर प्रदेश और सिक्किम के जैव विविधता प्रबंधन समितियों (बीएमसी) को ₹18.3 लाख की राशि जारी की है। यह राशि जैव विविधता अधिनियम, 2002 के अंतर्गत प्रवेश और लाभ-साझेदारी (Access and Benefit Sharing) व्यवस्था के तहत प्रदान की गई है।

यह धनराशि संबंधित राज्य जैव विविधता बोर्डों के माध्यम से सीधे दो बीएमसी को हस्तांतरित की गई —

  1. नर्राऊ ग्राम जैव विविधता प्रबंधन समिति, आक्राबाद कौल तहसील, अलीगढ़ जिला, उत्तर प्रदेश, और

  2. लामपोखरी झील क्षेत्र जैव विविधता प्रबंधन समिति, अरितार, सिक्किम।

उत्तर प्रदेश में एक कंपनी ने नर्राऊ गांव से लिग्नोसेल्यूलोसिक बायोमास से किण्वनीय यौगिक (fermentable compounds) बनाने के लिए फसल सामग्री का उपयोग किया। वहीं सिक्किम में एक अन्य कंपनी ने लामपोखरी झील क्षेत्र की मिट्टी और जल नमूनों से सूक्ष्मजीवों (microorganisms) तक पहुंच प्राप्त की, जिन्हें अनुसंधान उद्देश्य के लिए प्रयोग किया गया।

इन निधियों के माध्यम से, एनबीए स्थानीय समुदायों को जैव विविधता संरक्षण और अपने प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए सशक्त बना रहा है।

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