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बस्तर ओलंपिक बना छत्तीसगढ़ की नई पहचान, प्रधानमंत्री मोदी ने सदन में किया उल्लेख

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नई दिल्ली/रायपुर- छत्तीसगढ़ का 'बस्तर ओलंपिक' अब राज्य की नई पहचान बन चुका है, जिसका उल्लेख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज संसद में किया। उन्होंने इसे नक्सलवाद के खिलाफ ऐतिहासिक कदम बताते हुए बस्तर के युवाओं की प्रतिभा को राष्ट्रीय मंच पर उभरने का प्रतीक कहा। 

 पीएम मोदी का सदन में उल्लेख 

राज्यसभा में अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने कहा- "बस्तर ओलंपिक ने नक्सल प्रभावित क्षेत्र को खेलों की धरती बना दिया है। यह लाखों आदिवासी युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ रहा है।" उन्होंने बस्तर को "भय से भविष्य की ओर" बदलते क्षेत्र के रूप में चित्रित किया, जहां 3.91 लाख खिलाड़ियों ने भाग लिया। 




देखिए VIDEO : PM मोदी ने क्या कुछ कहा सदन में



बस्तर ओलंपिक की सफलता 

2025-26 सत्र में आयोजित इस मेगा इवेंट में एथलेटिक्स, कबड्डी, खो-खो समेत 11 खेल हुए।  गृह मंत्री अमित शाह ने पूर्व समापन में इसे "नक्सलवाद के अंतिम कील" कहा था, जो 2026 तक नक्सल मुक्त बस्तर का संकेत देता है।  अब सरगुजा ओलंपिक भी शुरू हो चुका है। राज्य सरकार की पहल 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे युवा सशक्तिकरण का मॉडल बताया। बस्तर ओलंपिक ने 'खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स' की राष्ट्रीय मान्यता भी पाई।  यह आयोजन विकास, शांति और खेल को जोड़ते हुए छत्तीसगढ़ को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है।

अमित शाह ने आज छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में बस्तर ओलिंपिक के समापन समारोह को संबोधित किया

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रायपुर- केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में बस्तर ओलिंपिक के समापन समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

इस अवसर पर केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि हमने तय किया था कि 31 मार्च, 2026 से पहले पूरे देश से लाल आतंक को खत्म कर देंगे और आज बस्तर ओलंपिक- 2025 में हम इस कगार पर खड़े हैं। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष नवंबर-दिसंबर तक बस्तर ओलंपिक-2026 के समय तक पूरे भारत और छत्तीसगढ़ से लाल आतंक समाप्त हो चुका होगा औऱ नक्सलमुक्त बस्तर आगे बढ़ रहा होगा।

अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में हमने यह संकल्प लिया है कि पूरे बस्तर और भारत को नक्सलमुक्त कराना है। उन्होंने कहा कि हमें यहीं नहीं रुकना बल्कि कांकेर, कोंडागांव, बस्तर, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर और दंतेवाड़ा के 7 ज़िलों का संभाग बस्तर, दिसंबर 2030 दिसंबर तक देश के सबसे अधिक विकसित आदिवासी संभाग बनेगा। उन्होंने कहा कि बस्तर के हर व्यक्ति को रहने के लिए घर, बिजली, शौचालय, नल से पीने का पानी, गैस सिलिंडर, 5 किलो अनाज और 5 लाख तक का मुफ्त इलाज, बस्तर के घर घर में पहुचाने का संकल्प हमारी सरकार का संकल्प है। शाह ने कहा कि हमने अगले पांच साल में बस्तर को देश का सबसे विकसित आदिवासी संभाग बनाने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि इसमें प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार और श्री विष्णुदेव साय जी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार कंधे से कंधा मिलाकर बस्तर को विकसित बस्तर बनाने के लिए मिलकर आगे बढ़ेंगे।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि बस्तर का हर गांव सड़क से जुड़ेगा, वहां बिजली होगी, 5 किलोमीटर के क्षेत्र में बैंकिंग सुविधाएं होंगी और सबसे घने पीएचसी/सीएचसी का नेटवर्क बनाने का काम भी हमारी सरकार करेगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में वन उपज की प्रोसेसिंग के लिए कोऑपरेटिव आधार पर यूनिट्स लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बस्तर के सातों ज़िले सभी आदिवासी ज़िलों में सबसे अधिक दूध उत्पादन कर डेयरी के माध्यम से अपनी आय बढ़ाने वाले ज़िले बनेंगे। उन्होंने कहा कि बस्तर में नए उद्योग, उच्च शिक्षा की व्यवस्था, भारत में सबसे अच्छा स्पोर्ट्स संकुल और अत्याधुनिक अस्पताल की व्यवस्था भी हम करेंगे। शाह ने कहा कि कुपोषण के लिए भी यहां विशेष स्कीम चलाई जाएगी। उन्होंने कहा कि जिन्होंने आत्मसमर्पण किया है और जो नक्सलवाद के कारण घायल हुए हैं, उनके लिए एक बहुत आकर्षक पुनर्वसन योजना भी हम लाएंगे। गृह मंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि नक्सलवाद समाप्त हो क्योंकि नक्सलवादी इस क्षेत्र के विकास पर नाग बनकर फन फैलाए बैठे हैं। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद समाप्त होने के साथ ही इस क्षेत्र में विकास की एक नई शुरूआत होगी और प्रधानमंत्री मोदी जी और विष्णुदेव जी के नेतृत्व में यह सबसे विकसित क्षेत्र बनेगा।

अमित शाह ने कहा कि बस्तर ओलंपिक-2025 में सात ज़िलों की सात टीमें और एक टीम आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की थी। उन्होंने कहा कि जब 700 से अधिक सरेंडर्ड नक्सलियों ने इन खेलों में भाग लिया तो यह देखकर बहुत अच्छा लगा। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के झांसे में आकर उनका पूरा जीवन तबाह हो जाता और हथियार डालकर मुख्यधारा में आने वाले ऐसे 700 से अधिक युवा आज खेल के रास्ते पर आए हैं। शाह ने दोहराया कि 31 मार्च, 2026 को यह देश नक्सलवाद से मुक्त हो जाएगा। उन्होंने हिंसा में लिप्त नक्सलियों से अपील करते हुए कहा कि अब भी गुमराह होकर हमारे ही जो लोग हाथ में हथियार लेकर बैठे हैं, वो हथियार डाल दें, पुनर्वसन नीति का फायदा उठाएं, अपने और अपने परिवार के कल्याण के बारे में सोचें और विकसित बस्तर के संकल्प के साथ जुड़ जाएं। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद से किसी का भला नहीं होता, न हथियार उठाने वाले लोगों का, न आदिवासियों और न सुरक्षाबलों का भला होता है। उन्होंने कहा कि सिर्फ शांति ही विकास का रास्ता प्रशस्त कर सकती है।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि आत्मसमर्पण कर चुके 700 नक्सलियों ने इन खेलों में खिलाड़ी के रूप में सामने आकर पूरे देश के लिए बहुत बड़ा उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि इन खिलाड़ियों ने भय की जगह आशा चुनी, विभाजन की जगह एकता का रास्ता चुना और विनाश की जगह विकास का रास्ता चुना है और यही प्रधानमंत्री मोदी जी की नए भारत और विकसित बस्तर की संकल्पना है। उन्होंने कहा कि हमारे बस्तर की संस्कृति दुनियाभर में सबसे अधिक समृद्ध संस्कृति है। उन्होंने कहा कि सभी जनजातियों का खानपान, परिवेश, कला, वाद्य, नृत्य और पारंपरिक खेल सिर्फ छत्तीसगढ़ की नहीं बल्कि पूरे भारत की सबसे समृद्ध विरासत है।

अमित शाह ने कहा कि हाल ही में छत्तीसगढ़ सरकार ने आधुनिक रिकॉर्डिंग स्टूडियो बनाकर यहां के पारंपरिक गीतों को सहेजने का काम किया है। उन्होंने कहा कि ऐसे कई परंपरागत उत्सव और त्योहार जो नक्सलवाद के लाल आतंक के साए में समाप्त होने की कगार पर थे, उन्हें भी आगे बढ़ाया गया है। उन्होंने कहा कि आज जिन खिलाड़ियों ने बस्तर ओलंपिक में भाग लिया है, उनकी प्रतिभा को पहचानने के लिए स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अधिकारियों  की एक टीम यहां आई है। शाह ने कहा कि इन खिलाड़ियों की प्रतिभा को पहचानकर आने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स और ओलंपिक खेलों में बस्तर के खिलाड़ी खेलें, वहां तक ले जाने की व्यवस्था हमारी सरकार ने की है। शाह ने कहा कि पिछले वर्ष बस्तर ओलंपिक में 1 लाख 65 हज़ार खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था, जबकि इस वर्ष  3 लाख 91 हज़ार खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया है, जो लगभग ढाई गुना की वृद्धि है और बहनों की प्रतिभागिता में लगभग तीन गुना वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि यह उत्साह देखकर आने वाले दिनों में प्रधानमंत्री मोदी जी ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के लिए छत्तीसगढ़ को चुना है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि बस्तर अब बदल रहा है और बस्तर अब भय नहीं भविष्य का पर्याय बन चुका है, जहां गोलियों की गूंज सुनाई देती थी, वहां आज स्कूल की घंटियां बज रही हैं। जहां सड़क बनाना एक सपना था, वहां आज रेलवे ट्रैक और राजमार्ग बिछाए जा रहे हैं, जहां लाल सलाम के नारे लगते थे, वहां आज भारत माता की जय के नारे लगते हैं। उन्होंने कहा कि हम सब विकसित बस्तर के लिए कृत संकल्पित हैं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार ने मुठभेड़ों में नक्सलियों को मारने का लक्ष्य नही रखा था, क्योंकि 2000 से अधिक नक्सली युवाओं ने सरेंडर भी किया है। उन्होंने कहा कि हमारे आदिवासी समाज के प्रमुखों ने इसमें बहुत बड़ा योगदान दिया है, उनके मार्गदर्शन ने नक्सली युवाओं को ढांढस भी बंधाया है और हिम्मत भी दी है। गृह मंत्री ने समाज के प्रमुखों और समाजसेवकों से अपील करते हुए कहा कि जो लोग आज भी हथियार लेकर घूम रहे हैं, वे उन्हें समझाकर समाज की मुख्यधारा वापिस में लाने का काम करें।

बस्तर ओलंपिक के संभाग स्तरीय प्रतियोगिताओं का आयोजन 11 से 13 दिसम्बर तक

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उप मुख्यमंत्रीद्वय अरुण साव और विजय शर्मा ने तैयारियों की समीक्षा की

आयोजन से जुड़े सभी विभागों को उत्कृष्ट और पुख्ता तैयारियों के निर्देश, स्थानीय लोगों के साथ ही ज्यादा से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय खिलाड़ियों को बस्तर ओलंपिक से जोड़ने कहा

संभाग स्तरीय स्पर्धाओं में 3500 खिलाड़ी दिखाएंगे अपना कौशल और दमखम, नक्सल पीड़ित और पुनर्वासित नक्सली भी करेंगे भागीदारी

रायपुर-उप मुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा ने बस्तर ओलंपिक-2025 के संभाग स्तरीय प्रतियोगिताओं के आयोजन की तैयारियों की समीक्षा की। संभागीय मुख्यालय जगदलपुर में 11 दिसम्बर से 13 दिसम्बर तक इसका आयोजन किया जाएगा। बस्तर ओलंपिक के जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं के तीन हजार विजेता खिलाड़ी संभाग स्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग लेंगे। करीब 500 नक्सल पीड़ित और पुनर्वासित नक्सली भी इन स्पर्धाओं में हिस्सेदारी करेंगे। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के रायपुर के सिविल लाइन स्थित निवास कार्यालय में हुई बैठक में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार भी शामिल हुए। संभागायुक्त डोमन सिंह और पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी. के साथ बस्तर संभाग के सभी जिलों के कलेक्टर, जिला पंचायतों के सीईओ तथा खेल अधिकारी बैठक में वर्चुअली शामिल हुए।

उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव ने बैठक में कहा कि बस्तर ओलंपिक केवल खेलों का आयोजन नहीं है, बल्कि विकास और खेल का संगम है। यह बस्तर के युवाओं के सशक्तीकरण और उनमें नेतृत्व के विकास की पहल है। राज्य सरकार बस्तर के युवाओं को खेल, संस्कृति और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना चाहती है। उन्होंने संभाग स्तरीय प्रतियोगिताओं के सफल और उत्कृष्ट आयोजन के लिए सभी विभागों को परस्पर समन्वय के साथ पुख्ता तैयारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रतिभागियों के लिए की जा रही व्यवस्थाओं में किसी भी तरह की कमी या खामी नहीं छोड़ते हुए आयोजन स्थलों, खेल प्रबंधन, आवास, साफ-सफाई, भोजन, परिवहन, सुरक्षा, सांस्कृतिक कार्यक्रमों इत्यादि के लिए उत्कृष्ट व्यवस्थाएं बनाने को कहा। साव ने कहा कि बस्तरवासियों के साथ ही देश और दुनिया में बस्तर ओलंपिक का बहुत अच्छा और सकारात्मक संदेश जाना चाहिए।

उप मुख्यमंत्री तथा गृह मंत्री विजय शर्मा ने बस्तर ओलंपिक के आयोजन से जुड़े सभी विभागों और अधिकारियों को इसे यादगार बनाने अपनी-अपनी भूमिका और कार्यों के अनुरूप दायित्वों का गंभीरता व सक्रियता से वहन करने के निर्देश दिए। उन्होंने बस्तर के युवाओं को खेलों से जोड़ने तथा उनकी ऊर्जा को रचनात्मक कार्यों में लगाने के लिए प्रेरित करने स्थानीय लोगों के साथ ही ज्यादा से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय खिलाड़ियों को बस्तर ओलंपिक के संभाग स्तरीय आयोजन से जोड़ने को कहा। उन्होंने अधिकारियों को पिछले बस्तर ओलंपिक के विजेताओं और इस बार के विजेताओं को यूथ-आइकॉन बनाकर ज्यादा से ज्यादा गतिविधियों में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा जिससे अन्य लोग भी प्रेरित हों। 

बस्तर जिले के प्रभारी खेल अधिकारी ऋषिकेश तिवारी ने बैठक में बताया कि बस्तर ओलंपिक में भाग लेने के लिए संभाग के सभी 32 विकासखंडों के कुल तीन लाख 91 हजार से अधिक प्रतिभागियों ने अपना पंजीयन कराया था। विकासखंड स्तरीय प्रतियोगिताओं के दस हजार से अधिक विजेता खिलाड़ियों ने जिला स्तरीय स्पर्धाओं में भागीदारी की। जिला स्तरीय आयोजनों के करीब तीन हजार विजेता संभाग स्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग लेंगे। संभाग स्तरीय स्पर्धाओं में लगभग 500 नक्सल पीड़ित और पुनर्वासित नक्सली भी हिस्सेदारी करेंगे। 11 खेलों एथलेटिक्स, तीरंदाजी, बैडमिंटन, फुटबॉल, हॉकी, वेटलिफ्टिंग, कराटे, कबड्डी, खो-खो, वॉलीबॉल और रस्साखींच में ये अपना खेल कौशल दिखाएंगे। 

तिवारी ने बताया कि बस्तर ओलंपिक के संभाग स्तरीय आयोजन के दौरान जगदलपुर के सिटी ग्राउंड में फुटबॉल, व्हॉलीबॉल, कराटे, वेटलिफ्टिंग एवं बैडमिंटन स्पर्धाएं होगी। पंडरीपानी स्थित खेलो इंडिया सेंटर में हॉकी के मैच होंगे। वहीं धरमपुरा स्थित क्रीड़ा परिसर में कबड्डी, खो-खो, आर्चरी, एथलेटिक्स और रस्साकसी की प्रतियोगिताएं होंगी। खेल एवं युवा कल्याण विभाग की संचालक तनूजा सलाम, उप संचालक  रश्मि ठाकुर एवं अन्य विभागीय अधिकारी भी बैठक में मौजूद थे।

प्रदेश से नक्सलवाद का खात्मा और विकास की नई राह: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम ने बढ़ाया लोगों का सरकार पर विश्वास | 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद समाप्त करने का लक्ष्य

रायपुर-मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सुदर्शन चैनल द्वारा आयोजित कार्यक्रम में दिए गए साक्षात्कार के दौरान कहा कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद को समाप्त करना, लोगों का विश्वास जीतना और विकास की दिशा में आगे बढ़ना राज्य सरकार के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। उन्होंने बताया कि सरकार नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के जीवन स्तर को सुधार रही है। अब तक कई गांव पुनः आबाद हो चुके हैं और आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को रोजगार से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि निर्दोष लोगों की सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी है और नक्सलवाद को 31 मार्च 2026 तक समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए सरकार बनने के बाद ज्वाइंट टास्क फोर्स का गठन किया गया है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ बस्तर के लोगों तक पहुँच रहा है। वनांचल में तेंदूपत्ता खरीदी सहकारी समितियों के माध्यम से की जा रही है। नक्सलवादी विचारधारा से लोगों को बाहर निकालकर विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम का आयोजन किया गया। बस्तर ओलंपिक में 1 लाख 65 हजार प्रतिभागियों की भागीदारी ने यह सिद्ध कर दिया कि बस्तरवासी विकास की राह पर आगे बढ़ना चाहते हैं।

विदेश यात्रा का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जापान में 24 से 31 अगस्त तक आयोजित छत्तीसगढ़ पवेलियन के माध्यम से राज्य की कला, संस्कृति और संभावनाओं को प्रस्तुत किया गया। निवेशकों को नई उद्योग नीति से अवगत कराया गया, जिसमें रोजगार सृजन को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में उद्योग और निवेश की अपार संभावनाएँ हैं। राज्य की 44 प्रतिशत वन आच्छादित भूमि आयुर्वेद और हर्बल उत्पादों के क्षेत्र में विशाल अवसर प्रदान करती है। स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी राज्य ने बड़ी प्रगति की है—वर्तमान में 15 मेडिकल कॉलेज, आईआईटी, एनआईटी, आईआईएम और नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी जैसे संस्थान कार्यरत हैं।

मुख्यमंत्री ने लोगों से आग्रह किया कि गायों को लावारिस न छोड़ा जाए, क्योंकि इससे सड़क दुर्घटनाएँ बढ़ती हैं। उन्होंने कहा कि गौवंश की रक्षा सबकी जिम्मेदारी है और गोचर भूमि पर अवैध कब्जों को हटाने के लिए सख्त कार्रवाई की जा रही है।

अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संकल्प है। इसी के अनुरूप अंजोर विजन-2047 (छत्तीसगढ़ विजन) तैयार किया गया है, जो राज्य के सर्वांगीण विकास का रोडमैप है। उन्होंने आह्वान किया कि सभी लोग मिलकर विकसित छत्तीसगढ़ बनाने में योगदान दें।


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