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केंद्रीय आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने जे.जे. अस्पताल में उन्नत यूनानी शोध केंद्र का उद्घाटन किया, यूनानी दिवस 2026 समारोह में हुए शामिल

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मुंबई- केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने मुंबई के जे.जे. अस्पताल परिसर में क्षेत्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (RRIUM) के नवीनीकरण किए गए को-लोकेशन सेंटर का उद्घाटन किया। इसके साथ ही उन्होंने यूनानी दिवस 2026 समारोह और “यूनानी चिकित्सा में नवाचार और प्रमाण आधारित अभ्यास” विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन की अध्यक्षता भी की। यह दो दिवसीय कार्यक्रम आयुष मंत्रालय के तहत केंद्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान परिषद (CCRUM) द्वारा आयोजित किया गया है।


3.84 करोड़ रुपये की लागत से हुआ उन्नयन

1984 में स्थापित RRIUM को-लोकेशन सेंटर को लगभग 3.84 करोड़ रुपये की लागत से उन्नत किया गया है, जिससे नैदानिक सेवाओं, शोध सुविधाओं और रोगी देखभाल को बेहतर बनाया जा सके। यह उन्नयन जे.जे. अस्पताल परिसर में यूनानी चिकित्सा को मजबूत करने और आधुनिक चिकित्सा प्रणाली के साथ साक्ष्य-आधारित अनुसंधान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया है।

प्रधानमंत्री मोदी के विजन को बताया प्रेरणा

उद्घाटन समारोह में प्रतापराव जाधव ने कहा कि जे.जे. अस्पताल में यूनानी शोध केंद्र का उन्नयन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस संकल्प को दर्शाता है, जिसमें पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को आधुनिक और रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य ढांचे का महत्वपूर्ण स्तंभ बनाने का लक्ष्य है।

उन्होंने कहा कि यूनानी और आधुनिक चिकित्सा को एक ही छत के नीचे लाकर मरीजों को सुरक्षित, प्रभावी और समग्र उपचार उपलब्ध कराया जाएगा, जो वैज्ञानिक अनुसंधान और प्रमाणों पर आधारित होगा।

नवाचार और वैज्ञानिक प्रमाण पर जोर

राष्ट्रीय सम्मेलन के विषय पर बोलते हुए मंत्री ने कहा कि नवाचार और प्रमाण यूनानी चिकित्सा के भविष्य के दो प्रमुख स्तंभ हैं। उन्होंने शोधकर्ताओं से जीनोमिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक डायग्नोस्टिक्स जैसी तकनीकों का उपयोग कर यूनानी अवधारणाओं और उपचारों की वैज्ञानिक समझ को गहरा करने का आह्वान किया।

महाराष्ट्र की भूमिका महत्वपूर्ण

महाराष्ट्र सरकार के सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटिल ने यूनानी दिवस के आयोजन और उन्नत सुविधा के उद्घाटन की सराहना करते हुए इसे आम लोगों के लिए किफायती और जन-केंद्रित स्वास्थ्य सेवा की दिशा में बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि यूनानी चिकित्सा विशेष रूप से गरीब और वंचित वर्गों के लिए प्रभावी और सस्ती उपचार प्रणाली प्रदान करती है।

यूनानी चिकित्सा में पिछले दशक में उल्लेखनीय प्रगति

आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि पिछले दशक में यूनानी चिकित्सा में अनुसंधान, रोगी देखभाल और संस्थागत विकास के क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि मंत्रालय विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के साथ मिलकर यूनानी चिकित्सा के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक स्थापित करने पर काम कर रहा है।

भारतीय चिकित्सा प्रणालियों की ‘एकता में विविधता’

राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा प्रणाली आयोग (NCISM) की अध्यक्ष डॉ. मनीषा वी. कोठेकर ने कहा कि यूनानी, आयुर्वेद, सिद्ध और सोवा-रिग्पा चिकित्सा प्रणालियाँ “एकता में विविधता” की भावना का प्रतीक हैं, जो समाज के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए कार्य करती हैं।

महत्वपूर्ण पहल और समझौते

कार्यक्रम के दौरान यूनानी चिकित्सा पर वीडियो टीज़र, CCRUM प्रकाशनों का विमोचन, सहयोगी वेब पोर्टल और मोबाइल ऐप लॉन्च, एक अंतरराष्ट्रीय और आठ राष्ट्रीय समझौता ज्ञापनों (MoUs) का आदान-प्रदान तथा मानव स्वभाव (मिज़ाज-ए-इंसान) के आकलन के लिए प्रश्नावली जारी की गई। RRIUM मुंबई की जैव रसायन और पैथोलॉजी प्रयोगशाला को NABL प्रमाणन भी प्राप्त हुआ।


9वां सिद्ध दिवस 3 जनवरी 2026 को चेन्नई में आयोजित: “वैश्विक स्वास्थ्य के लिए सिद्ध” थीम के साथ भव्य समारोह

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भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा अपने संस्थानों—राष्ट्रीय सिद्ध चिकित्सा संस्थान (NIS) और केंद्रीय सिद्ध अनुसंधान परिषद (CCRS)—तथा तमिलनाडु सरकार के भारतीय चिकित्सा एवं होम्योपैथी निदेशालय के सहयोग से 9वां सिद्ध दिवस 3 जनवरी 2026 को कलाईवनार अरंगम, चेन्नई में मनाया जाएगा। इस वर्ष समारोह की थीम “वैश्विक स्वास्थ्य के लिए सिद्ध” (Siddha for Global Health) रखी गई है। यह आयोजन सिद्ध चिकित्सा के जनक माने जाने वाले महर्षि अगस्त्य की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है। सिद्ध दिवस प्रतिवर्ष 6 जनवरी को मनाया जाता है।

भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन 9वें सिद्ध दिवस समारोह की अध्यक्षता एवं उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर प्रतापराव जाधव, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), आयुष मंत्रालय एवं राज्य मंत्री, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार;मा. सुब्रमणियन, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण मंत्री, तमिलनाडु सरकार; पद्म वैद्य राजेश कोटेचा, सचिव, आयुष मंत्रालय, भारत सरकार; डॉ. पी. सेंथिल कुमार, प्रधान सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, तमिलनाडु सरकार; तथा एम. विजयलक्ष्मी, निदेशक, भारतीय चिकित्सा एवं होम्योपैथी निदेशालय, तमिलनाडु सरकार की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी।

इस समारोह में तमिलनाडु एवं अन्य राज्यों से सिद्ध चिकित्सा के चिकित्सक, वैज्ञानिक, शिक्षाविद्, शोधार्थी और छात्र बड़ी संख्या में भाग लेंगे। सिद्ध वैधानिक निकायों के वरिष्ठ सदस्य, NIS और CCRS के शोधकर्ता, आयुष मंत्रालय तथा तमिलनाडु सरकार के अधिकारी भी इसमें शामिल होंगे। चेन्नई और पलायमकोट्टई स्थित सरकारी सिद्ध मेडिकल कॉलेजों तथा तमिलनाडु और केरल के स्व-वित्तपोषित सिद्ध कॉलेजों के स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध छात्र भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहेंगे।

इस अवसर पर आयुष मंत्रालय सिद्ध चिकित्सा के क्षेत्र में असाधारण और सराहनीय योगदान के लिए पांच प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों को सम्मानित करेगा।

9वां सिद्ध दिवस निवारक स्वास्थ्य, अनुसंधान और वैश्विक कल्याण में सिद्ध चिकित्सा के योगदान को प्रदर्शित करेगा। इसका उद्देश्य जागरूकता बढ़ाना और स्वास्थ्य सेवा वितरण, शोध सहयोग तथा शैक्षणिक उन्नयन में सिद्ध की भूमिका को सुदृढ़ करने हेतु सरकार के निरंतर प्रयासों की पुनः पुष्टि करना है। यह आयोजन आयुष मंत्रालय की उस प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करता है, जिसके अंतर्गत भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्वास्थ्य ढांचे में बढ़ावा देना, नवाचार को सशक्त करना तथा सिद्ध चिकित्सा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक पहचान दिलाना शामिल है।

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