Media24Media.com: #AthletePerformance

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #AthletePerformance. Show all posts
Showing posts with label #AthletePerformance. Show all posts

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026: तैराकी में कर्नाटक का दबदबा, महिला वर्ग में ओडिशा चैंपियन, छत्तीसगढ़ 6वें स्थान पर

No comments Document Thumbnail

रायपुर- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स–2026 के अंतर्गत तैराकी प्रतियोगिताओं का आज समापन हुआ, जिसमें देशभर के खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। पुरुष वर्ग में कर्नाटक ने 123 अंकों के साथ ओवरऑल टीम चैंपियनशिप का खिताब जीता, जबकि असम 69 अंकों के साथ प्रथम रनरअप और ओडिशा 31 अंकों के साथ द्वितीय रनरअप रहा। वहीं महिला वर्ग में ओडिशा ने 102 अंकों के साथ शानदार प्रदर्शन करते हुए चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया, जबकि कर्नाटक 50 अंकों के साथ प्रथम रनरअप और मेजबान छत्तीसगढ़ 38 अंकों के साथ द्वितीय रनरअप रहा।

प्रतियोगिता के दौरान छत्तीसगढ़ की तैराक अनुष्का भगत ने लगातार चौथा रजत पदक जीतकर राज्य का मान बढ़ाया।

उन्होंने महिला 50 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक स्पर्धा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए यह उपलब्धि हासिल की, जिससे राज्य की पदक स्थिति और मजबूत हुई।

प्रतियोगिता में आयोजित विभिन्न स्पर्धाओं में भी खिलाड़ियों ने दमदार प्रदर्शन किया। पुरुष 100 मीटर फ्रीस्टाइल में कर्नाटक के धोनिश ने स्वर्ण, असम के फर्मिनो एमोन लालुंग ने रजत तथा कर्नाटक के कीर्थन शरथ ने कांस्य पदक जीता। महिला 100 मीटर फ्रीस्टाइल में ओडिशा की रितिका मिन्ज ने स्वर्ण, कृष्णा प्रिया नायक ने रजत और असम की वायोलिना क्रो ने कांस्य पदक प्राप्त किया।

इसी प्रकार पुरुष 50 मीटर बैकस्ट्रोक में असम के निबिर निलिम क्रो ने स्वर्ण, कर्नाटक के धोनिश ने रजत और ओडिशा के राजेश सोरेन ने कांस्य पदक हासिल किया, जबकि महिला 50 मीटर बैकस्ट्रोक में ओडिशा की अंजलि मुंडा ने स्वर्ण, छत्तीसगढ़ की अनुष्का भगत ने रजत और कर्नाटक की मेघांजली ने कांस्य पदक अपने नाम किया। रिले स्पर्धाओं में पुरुष 4×100 मीटर मेडले में कर्नाटक ने स्वर्ण, असम ने रजत और त्रिपुरा ने कांस्य पदक जीता, वहीं महिला 4×100 मीटर मेडले में ओडिशा ने स्वर्ण, त्रिपुरा ने रजत और गुजरात ने कांस्य पदक हासिल किया।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स–2026 में अब तक छत्तीसगढ़ ने कुल 8 पदक (1 स्वर्ण, 4 रजत और 3 कांस्य) अपने नाम किए हैं और राज्य पदक तालिका में छठे स्थान पर बना हुआ है। प्रतियोगिता में कर्नाटक और ओडिशा का दबदबा देखने को मिला, वहीं छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों ने भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत दिए हैं।

SAI ने नई दिल्ली में कॉम्बैट स्पोर्ट्स कोचों के लिए चार दिवसीय स्पोर्ट्स साइंस कार्यशाला का शुभारंभ किया

No comments Document Thumbnail

भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) ने नई दिल्ली स्थित अपने स्पोर्ट्स साइंस डिविजन में कॉम्बैट स्पोर्ट्स कोचों के लिए चार दिवसीय स्पोर्ट्स साइंस कार्यशाला का शुभारंभ किया।

इस कार्यशाला में बॉक्सिंग, कुश्ती और जूडो सहित प्रमुख कॉम्बैट स्पोर्ट्स क्षेत्रों के SAI कोच भाग ले रहे हैं। इसका उद्देश्य दैनिक कोचिंग प्रथाओं में खेल विज्ञान (Sports Science) का समावेश मजबूत करना है।

यह कार्यशाला इमर्सिव और प्रायोगिक (hands-on) कार्यक्रम के रूप में डिजाइन की गई है और इसमें प्रशिक्षण पद्धतियों में वैज्ञानिक सिद्धांतों के अनुप्रयोग पर ध्यान केंद्रित किया गया है, विशेष रूप से कॉम्बैट स्पोर्ट्स के लिए शक्ति और कंडीशनिंग मॉडलों पर।

कोचों को फंक्शनल स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, प्लायोमेट्रिक्स, पीरियडाइज्ड रेजिस्टेंस ट्रेनिंग प्रोग्राम और व्यायाम फिजियोलॉजी के मूल सिद्धांत, जो उच्च स्तरीय प्रदर्शन के लिए आवश्यक हैं, में प्रशिक्षित किया जा रहा है।

ब्रिगेडियर (डॉ.) बिभु कल्याण नायक, निदेशक-संयुक्त प्रमुख, स्पोर्ट्स साइंस डिविजन, SAI ने कहा,
“माननीय केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया और सचिव (खेल) ने लगातार जोर दिया है कि कोचों को खेल विज्ञान में प्रशिक्षित किया जाए ताकि ये सिद्धांत दैनिक प्रशिक्षण में लागू हों। ऐसे फोकस्ड engagements, जिन्हें स्पोर्ट्स साइंटिस्ट्स द्वारा समर्थन मिलता है, भारत के पदक संभावनाओं में सकारात्मक योगदान देंगे। हमारी दृष्टि एथलीट-केंद्रित, कोच-नेतृत्व और स्पोर्ट्स साइंस द्वारा समर्थित है।”

कार्यशाला में कॉम्बैट स्पोर्ट्स में आम चोटों, विशेषकर कंधे संबंधी चोटों, की रोकथाम और प्रबंधन पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इसमें साक्ष्य-आधारित वॉर्म-अप प्रोटोकॉल, स्ट्रेंथ और स्टेबिलिटी ट्रेनिंग और वैज्ञानिक लोड-मैनेजमेंट रणनीतियाँ शामिल हैं।

कार्यशाला में स्पोर्ट्स न्यूट्रिशन, रिकवरी साइंस, एंटी-डोपिंग जागरूकता और एप्लाइड स्पोर्ट्स साइकोलॉजी पर समर्पित मॉड्यूल भी शामिल हैं, जो दीर्घकालिक एथलीट प्रदर्शन और करियर लम्बाई के लिए समग्र दृष्टिकोण को मजबूत करते हैं।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए प्रो. (डॉ.) दीपक जोशी, निदेशक, स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर (SIC), वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज एवं सफदरजंग अस्पताल, नई दिल्ली ने कहा कि स्पोर्ट्स साइंस, स्पोर्ट्स मेडिसिन और चोट प्रबंधन का समन्वित समावेश एक एथलीट के करियर की दिशा बदल सकता है।

उन्होंने कहा,

“यह सहयोग भारत की खेल पारिस्थितिकी तंत्र के लिए वरदान साबित होगा। SAI द्वारा संदर्भित एथलीटों को प्राथमिक उपचार, निरंतर क्लिनिकल प्रबंधन और प्रशिक्षण एवं प्रतियोगिता में सहज वापसी का मार्ग मिलेगा।”

इस सहयोग को आगे बढ़ाते हुए, SAI और SIC के बीच स्मारक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए जाने की योजना है, जिसे माननीय युवा मामले और खेल मंत्री की प्राथमिक स्वीकृति मिली है।

इस प्रस्तावित ढांचे के तहत, SIC उन्नत खेल चिकित्सा और सर्जिकल हस्तक्षेप संभालेगा, जबकि SAI एप्लाइड स्पोर्ट्स साइंस, पुनर्वास और रिटर्न-टू-प्ले प्रोटोकॉल का प्रबंधन करेगा। इससे भारतीय एथलीटों को प्राथमिक देखभाल और सुरक्षित प्रतियोगिता में वापसी सुनिश्चित होगी।


Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.