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एक जिला, एक उत्पाद: ग्रामीण कौशल से राष्ट्रीय गौरव तक

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मुख्य बातें (Key Takeaways)

  • ODOP स्थानीय कारीगरों को सशक्त बनाकर पारंपरिक कला और कौशल को पुनर्जीवित करता है।

  • यह पहल पूरे देश में फैल चुकी है और 770 से अधिक जिलों को आर्थिक केंद्र में बदल चुकी है।

  • उत्तर प्रदेश से शुरू हुई यह पहल अब देश की सबसे प्रमुख स्थानीय आर्थिक परिवर्तन योजना बन चुकी है।

  • GeM-ODOP बाज़ार जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर ODOP उत्पादों को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित किया जा रहा है।

परिचय: जहां से स्थानीय कला ने राष्ट्रीय क्रांति की शुरुआत की

उत्तर प्रदेश के मोरादाबाद में सदियों से कारीगर पीढ़ियों से पीढ़ियों तक पीतल के बर्तन बनाते आए हैं। छोटे-छोटे कार्यशालाओं में काम करने वाले ये कारीगर अक्सर अपनी कला के बावजूद दुनिया से दूर रह जाते थे।

लेकिन 2018 में एक नई शुरुआत हुई। राज्य सरकार के नेतृत्व में शुरू की गई एक अभिनव योजना के तहत मोरादाबाद के पीतल उद्योग को उस जिले की विशिष्ट पहचान के रूप में चुना गया—One District One Product (ODOP) के तहत।

यह विचार जितना सरल था, उतना ही क्रांतिकारी भी—हर जिले की एक विशिष्ट वस्तु को पहचान देना, उसे ब्रांडिंग, मार्केटिंग, संस्थागत समर्थन और visibility देना, और उस समुदाय को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना।

आज मोरादाबाद के हस्तशिल्प अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंचों पर प्रदर्शित होते हैं। स्थानीय गौरव बढ़ा, आय में वृद्धि हुई और वह जिला आर्थिक दृष्टि से एक मॉडल बन गया।

मोरादाबाद एक अपवाद नहीं रहा; यह ODOP की बड़ी कहानी की पहली कड़ी बन गया। दिसंबर 2025 तक ODOP राष्ट्रीय स्तर पर अपनाई जा चुकी है और 770 से अधिक जिलों तक पहुंच चुकी है, जिससे लाखों कारीगर, उद्यमी और किसान लाभान्वित हुए हैं।

जो शुरुआत उत्तर प्रदेश से हुई, वह अब देश की सबसे प्रशंसित स्थानीय आर्थिक परिवर्तन पहल बन चुकी है।

ODOP: विकास और समृद्धि का इंजन

संतुलित क्षेत्रीय विकास

ODOP का उद्देश्य हर जिले की विशिष्ट आर्थिक क्षमता को पहचान कर उसे विकसित करना है, ताकि क्षेत्रीय असंतुलन घटे और समावेशी विकास सुनिश्चित हो।

कारीगरों और उत्पादकों का सशक्तिकरण

ODOP किसानों, कारीगरों, बुनकरों और स्थानीय उत्पादकों को आत्मनिर्भर बनाकर रोजगार सृजन को बढ़ावा देता है।

निर्यात को बढ़ावा

ODOP उत्पादों को वैश्विक बाजारों में पहचान दिलाकर निर्यात को बढ़ावा मिलता है।

संस्कृति और विरासत का संरक्षण

परंपरागत कला और शिल्प को संरक्षित करते हुए यह योजना सांस्कृतिक विरासत को भी बचाती है।

आर्थिक प्रभाव और रोजगार

ODOP ने स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाने और आय में वृद्धि करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

वैश्विक पहचान

ब्रांडिंग, प्रदर्शनियों और वैश्विक प्लेटफॉर्म के माध्यम से ODOP उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है।

जिलों को विकास का इंजन बनाना

ODOP को DPIIT (Department for Promotion of Industry and Internal Trade) द्वारा संचालित किया जाता है। इसका लक्ष्य हर जिले की अनूठी आर्थिक क्षमता को पहचान कर उसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ना है।

इस पहल के तहत राज्य और केंद्र सरकार मिलकर जिला प्रशासन के साथ काम करते हैं। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा क्षेत्र में उपलब्ध पारिस्थितिकी तंत्र के आधार पर उत्पाद चुने जाते हैं और DPIIT को सूची भेजी जाती है।

अब तक 1200 से अधिक ODOP उत्पाद DPIIT के डिजिटल पोर्टल पर सूचीबद्ध किए जा चुके हैं, जिनमें वस्त्र, खाद्य पदार्थ, हस्तशिल्प और खनिज शामिल हैं।

ई-कॉमर्स के जरिए बाजार विस्तार: GeM-ODOP बाज़ार

सरकार ने ODOP उत्पादों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़कर उनकी पहुंच बढ़ाई है। GeM-ODOP बाज़ार जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर ODOP उत्पादों को प्रदर्शित कर देश भर में और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बिक्री को बढ़ावा दिया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश: देश के लिए उदाहरण

ODOP की शुरुआत करने वाला उत्तर प्रदेश इस योजना के तहत सबसे बड़े बदलाव का अनुभव कर रहा है।

UPITS 2025 (Uttar Pradesh International Trade Show) में ODOP को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस अवसर पर ODOP को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की सफलता को सराहा।

ODOP पवेलियन में 466 स्टॉल लगाए गए और ₹20.77 करोड़ के व्यापार सौदे हुए।

महाकुंभ 2025 में ODOP ने एक प्रमुख मंच के रूप में अपनी पहचान बनाई। 6,000 वर्ग मीटर के प्रदर्शनी क्षेत्र में पूरे देश के कारीगरों ने अपनी कला दिखाई।

इसमें शामिल प्रमुख हस्तशिल्प:

  • बनारसी ब्रोकैड

  • कुशीनगर कालीन

  • फिरोजाबाद कांच

  • वाराणसी लकड़ी के खिलौने

  • धातु हस्तशिल्प

  • उत्तर प्रदेश के 75 GI टैग्ड उत्पाद (34 काशी क्षेत्र से)

उत्तर प्रदेश में ODOP के प्रभाव (Impact)

  • निर्यात में 76% वृद्धि, 2017-18 के ₹88,967 करोड़ से बढ़कर 2023-24 में ₹1.71 लाख करोड़

  • ODOP मार्जिन मनी योजना के तहत ₹6,000 करोड़ के प्रोजेक्ट स्वीकृत

  • ODOP कौशल विकास और टूलकिट वितरण योजना के तहत 1.25 करोड़ से अधिक कारीगरों को प्रशिक्षण और आधुनिक उपकरण दिए गए

PM Ekta Malls: कारीगरी की विरासत के प्रतीक

PM Ekta Malls (Unity Malls) ODOP, GI और हस्तशिल्प उत्पादों को प्रदर्शित और बेचने के लिए विशेष रूप से बनाए जा रहे हैं। हर राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के लिए स्थान आरक्षित किया जाएगा ताकि वे अपने उत्पादों को एक राष्ट्रीय मंच पर दिखा सकें।

मुख्य विशेषताएँ (Highlights)

  • सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए अलग-अलग स्थान

  • ₹5,000 करोड़ का ब्याज रहित समर्थन, जिसमें हर राज्य को कम से कम ₹100 करोड़

  • 27 राज्यों में 29 Unity Malls को मंजूरी

  • आधुनिक सुविधाओं सहित आकर्षक वास्तुकला, अनुभव क्षेत्र, थिएटर, फूड कोर्ट

  • PPP मॉडल पर काम, राज्य की मालिकाना और पेशेवर प्रबंधन

  • ODOP को राष्ट्रीय सांस्कृतिक केंद्र और वैश्विक बाजार का मंच बनाना

ODOP का वैश्विक विस्तार

ODOP भारत के जिलों को वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदानकर्ता बनाने में भी मदद कर रहा है।

क्या आप जानते हैं?

  • ODOP वॉल SARAS Aajeevika Stores जैसे प्लेटफॉर्म पर जिला-विशिष्ट उत्पादों को प्रदर्शित करता है।

  • 80+ भारतीय मिशनों ने ODOP उत्पादों को विदेशों में प्रदर्शनों, स्टोरों या डिप्लोमैटिक गिफ्टिंग के माध्यम से बढ़ावा दिया है।

  • G-20 बैठकों में ODOP उत्पादों को उपहार के रूप में शामिल किया गया।

  • तीन अंतरराष्ट्रीय स्टोर्स में ODOP उत्पादों की बिक्री हो रही है:

    • सिंगापुर (Mustafa Centre और Kashmir Heritage)

    • कुवैत (Hakimi Centre)

निष्कर्ष: जिले की कहानी विश्व मंच पर चमक रही है

ODOP की कहानी भारत की कहानी है—वह कहानी जो पारंपरिक कारीगरी, जीवटता और आत्मनिर्भरता की है। मोरादाबाद के चमकते पीतल से लेकर PM Ekta Malls की शेल्फ तक, ODOP ने स्थानीय कौशल को राष्ट्रीय गौरव और वैश्विक अवसर में बदल दिया है।

अब “एक जिला, एक उत्पाद” केवल एक योजना नहीं रह गई; यह लाखों आशाओं का प्रतीक बन चुकी है, जो अपने गाँव से निकलकर विश्व मंच पर चमक रही है। जैसे-जैसे नए बाजार खुलते हैं और PM Ekta Malls उभरते हैं, भारत की स्थानीय गलियाँ आत्मविश्वास के साथ दुनिया के मंच पर कदम रख रही हैं, और हर कारीगर के सपने साकार हो रहे हैं।


केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने नागालैंड में हथकरघा एवं हस्तशिल्प पर उच्चस्तरीय कार्यबल की बैठक में भाग लिया

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केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने आज नागालैंड के माननीय मुख्यमंत्री नेफियू रियो द्वारा बुलाई गई हथकरघा एवं हस्तशिल्प पर उच्चस्तरीय कार्यबल की बैठक में भाग लिया। बैठक में पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार, असम की खेल एवं युवा कल्याण मंत्री नंदिता गारलोसा, मिज़ोरम के वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री एफ. रोडिंगलियाना, पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के सचिव, मणिपुर सरकार तथा वस्त्र मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में हथकरघा और हस्तशिल्प के लिए क्लस्टर-आधारित विकास दृष्टिकोण पर चर्चा की गई, जिसका उद्देश्य संपूर्ण मूल्य श्रृंखला को सशक्त बनाते हुए कारीगरों के लिए टिकाऊ और लाभकारी आजीविका सुनिश्चित करना है। इस दृष्टिकोण में मास्टर कारीगर प्रशिक्षण के माध्यम से कौशल उन्नयन, गुणवत्ता परीक्षण एवं प्रमाणन, टिकाऊ प्राकृतिक रेशों और प्राकृतिक रंगों को बढ़ावा देना तथा घरेलू व निर्यात बाजारों के लिए ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से एकीकरण शामिल है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस बात पर जोर दिया कि वस्त्र मंत्रालय को हथकरघा और हस्तशिल्प के परिप्रेक्ष्य से नेतृत्व करते हुए एक स्पष्ट संरचना विकसित करनी चाहिए—शुरुआत में एक हथकरघा और एक हस्तशिल्प उत्पाद को चुनकर सफलता का मॉडल प्रस्तुत किया जाए। चर्चा में आगे बढ़ने की रणनीति पर विचार किया गया, जिसकी शुरुआत क्लस्टरों में कारीगरों की पहचान से होगी।

यह भी रेखांकित किया गया कि मूल्य श्रृंखला का विकास बाजार की मांग को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए और उत्पादन श्रृंखला उसी के अनुरूप स्थापित हो—उल्टा नहीं। उत्पादों के अंतिम स्तर पर भिन्नता (डिफरेंशिएशन) भी रणनीति का हिस्सा होनी चाहिए, जो बाजार और खरीदारों को मूल्य श्रृंखला से जोड़कर संभव है। एमडीओएनईआर, वस्त्र मंत्रालय, राज्य सरकारों और निजी क्षेत्र सहित सभी हितधारकों की आवश्यक हस्तक्षेपों की पहचान पर भी जोर दिया गया।

चर्चा में मैदानी स्तर पर हैंडहोल्डिंग के महत्व को रेखांकित करते हुए प्रत्येक क्लस्टर में एक हथकरघा/हस्तशिल्प संसाधन व्यक्ति की तैनाती तथा बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूपता सुनिश्चित करने के लिए खरीदार प्रतिनिधि की उपस्थिति का प्रस्ताव रखा गया।

दीर्घकालिक प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए सिंधिया ने कहा, “सभी हितधारकों को मूल्य श्रृंखला में लाने से अगले 2–3 वर्षों में कारीगरों की आय में वृद्धि दिखाई देगी। हमारा अंतिम उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यह परियोजना बुनकरों और कारीगरों को दीर्घकालिक लाभ दे। हथकरघा और हस्तशिल्प हमारी कला और भारत की संपदा हैं—हस्तनिर्मित उत्पादों का मूल्य आज बहुमूल्य रत्नों के समान बढ़ रहा है। भारत को इस विरासत का संरक्षण ही नहीं, बल्कि इसे कारीगरों के लिए वास्तव में लाभकारी भी बनाना चाहिए।”

केंद्र ने कमलादेवी चट्टोपाध्याय क्राफ्ट लेक्चर सीरीज का उद्घाटन किया

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वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हैंडिक्राफ्ट) कार्यालय ने आज अंतर्राष्ट्रीय क्राफ्ट कॉम्प्लेक्स (द कुंज), नई दिल्ली में एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट (EPCH) के सहयोग से कमलादेवी चट्टोपाध्याय क्राफ्ट लेक्चर सीरीज के पहले संस्करण का शुभारंभ किया। इस अवसर पर पद्म भूषण से सम्मानित श्री राजीव सेठी ने "हैंडमेड फॉर जन-नेक्स्ट" विषय पर मुख्य व्याख्यान दिया। इस कार्यक्रम में विकास आयुक्त (हैंडिक्राफ्ट) अमृत राज, विकास आयुक्त (हैंडलूम) डॉ. एम. बीना, पूर्व अध्यक्ष EPCH श्री रवी के पास्सी, अतिरिक्त कार्यकारी निदेशक EPCH राजेश रावत सहित 100 से अधिक प्रतिभागी उपस्थित थे, जिनमें प्रमुख डिजाइनर, विद्वान, शिल्प गुरु और राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता शामिल थे।

यह व्याख्यान श्रृंखला भारत के हस्तकला और हथकरघा परंपराओं को पुनर्जीवित करने में अग्रणी भूमिका निभाने वाली कमलादेवी चट्टोपाध्याय की दूरदर्शी विरासत को समर्पित है। उनका जीवन पर्यंत कार्य कारीगरों को सशक्त बनाने, देशी शिल्प को बढ़ावा देने और भारतीय हस्तकला को वैश्विक मंच पर स्थापित करने में सहायक रहा।

राजीव सेठी ने उद्घाटन व्याख्यान में यह सवाल उठाया कि आज के युग में हाथ से बनने वाली चीज़ों की प्रासंगिकता क्या है और इसकी उम्र-पुरानी ताकतें आधुनिक चुनौतियों जैसे पलायन और सांस्कृतिक समानिकीकरण का सामना कैसे कर सकती हैं। उन्होंने हाथ की सूक्ष्मता, कौशल और संवेदनशीलता को रचनात्मक शक्ति बताया, जिसे कोई मशीन पूरी तरह से दोहरा नहीं सकती। उन्होंने यह भी बताया कि हाथ से बनने वाले शिल्प में कम यांत्रिकीकरण, स्थानीय आजीविका और महिलाओं एवं हाशिए पर रहने वाले समुदायों के सशक्तिकरण के माध्यम से स्थिरता जुड़ी होती है।

इस अवसर पर अमृत राज ने कहा कि यह व्याख्यान श्रृंखला याद दिलाती है कि भारत के लाखों कारीगर समावेशी, सतत विकास और वैश्विक हस्तकला उत्कृष्टता में हमारी दृष्टि के केंद्र में हैं। उन्होंने कहा कि यह श्रृंखला कमलादेवी जी की उस दृष्टि का सम्मान है, जिसमें शिल्प को शिक्षा, आजीविका और राष्ट्रनिर्माण के साथ जोड़ा गया।

विकास आयुक्त (हैंडिक्राफ्ट) कार्यालय भारत सरकार की केंद्रीय एजेंसी है, जो कारीगर और शिल्प आधारित गतिविधियों के विकास, विपणन और निर्यात के लिए जिम्मेदार है। यह शिल्प रूपों और कौशल के संवर्धन में भी सहायक है।

केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने ‘क्राफ्टेड फॉर द फ्यूचर’ प्रदर्शनी का उद्घाटन, भारतीय शिल्प परंपराओं को मिली वैश्विक पहचान

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केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने आज नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय में “क्राफ्टेड फॉर द फ्यूचर (Crafted for the Future)” प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। वस्त्र मंत्रालय के अंतर्गत हस्तशिल्प आयुक्त (DC Handicrafts) के कार्यालय की इस पहल का उद्देश्य भारत की समृद्ध शिल्प परंपराओं को उजागर करना और सतत एवं समकालीन जीवन में उनकी प्रासंगिकता को प्रदर्शित करना है।

उद्घाटन समारोह में वस्त्र मंत्रालय की हस्तशिल्प आयुक्त अमृत राज, संयुक्त राष्ट्र आवासीय समन्वयक कार्यालय (भारत) की चीफ ऑफ स्टाफ राधिका कौल बत्रा, पारिस्थितिकी पुनर्स्थापक सुश्री पद्मावती द्विवेदी तथा ‘गिव मी ट्रीज़ ट्रस्ट’ के संस्थापक स्वामी प्रेम परिवर्तन (पीपल बाबा) सहित अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

इस अवसर पर गिरिराज सिंह ने कहा कि आज का युवा पारंपरिक शिल्प को समझ रहा है और उसे वैश्विक दर्शकों के अनुरूप समकालीन उत्पादों के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। उन्होंने कहा कि कारीगरों को हर संभव सुविधा उपलब्ध कराने और भारत के विविध शिल्पों को विश्व पटल तक पहुंचाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

“क्राफ्टेड फॉर द फ्यूचर” दस दिवसीय प्रदर्शनी राष्ट्रीय हस्तशिल्प सप्ताह का हिस्सा है और यह 21 दिसंबर 2025 तक आम जनता के लिए निःशुल्क प्रवेश के साथ खुली रहेगी। ‘वीव द फ्यूचर’ श्रृंखला के तीसरे संस्करण के रूप में यह प्रदर्शनी दैनिक जीवन की भौतिक संस्कृति पर विशेष जोर देती है—जहां समुदायों, उनके पर्यावरण और रोज़मर्रा के जीवन को आकार देने वाली सामग्रियों के बीच गहरे संबंध को दर्शाया गया है। देशभर के कारीगरों और सामग्री नवोन्मेषकों को सामने लाकर यह पहल पारिस्थितिक संतुलन, क्षेत्रीय पहचान और गहन सामग्री ज्ञान पर आधारित प्रथाओं को प्रदर्शित करती है।

कार्यक्रम में बोलते हुए अमृत राज ने कहा कि भारत की शिल्प परंपराओं को जीवित रखना केवल स्मृतियों को संजोना नहीं है, बल्कि शिल्प को एक जीवंत शक्ति के रूप में पहचानना है, जो हमारे भविष्य को आकार दे रही है।

‘क्राफ्टेड फॉर द फ्यूचर’ प्रदर्शनी में आगंतुकों के लिए कई विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं, जिनके माध्यम से वे भारत की भौतिक संस्कृति की उत्पत्ति, प्रक्रियाओं और समकालीन संभावनाओं को करीब से अनुभव कर सकते हैं। प्रदर्शनी में शामिल हैं—

  • रोज़मर्रा की सामग्रियों की यात्रा को दर्शाने वाले इमर्सिव इंस्टॉलेशंस

  • स्थानीय और पुनर्योजी सामग्रियों पर काम करने वाले कारीगरों और समूहों का क्यूरेटेड शिल्प बाज़ार

  • सामग्री की उत्पत्ति और शिल्प प्रक्रियाओं पर दैनिक फिल्म स्क्रीनिंग, प्रदर्शन और संवाद

  • सिरेमिक, कढ़ाई, ऊन, बांस, प्राकृतिक रंग, खाद्य परंपराओं आदि पर कारीगरों, डिज़ाइनरों और विशेषज्ञों द्वारा संचालित हैंड्स-ऑन कार्यशालाएं (कार्यशालाओं के लिए पंजीकरण आवश्यक)

यह आयोजन सामग्री की उत्पत्ति और शिल्प-आधारित पारिस्थितिक ज्ञान प्रणालियों के प्रति जन सहभागिता को प्रोत्साहित करता है तथा यह समझ विकसित करता है कि कैसे सामग्रियों और उनके निर्माताओं के साथ जागरूक संबंधों के माध्यम से एक सतत भविष्य का निर्माण किया जा सकता है।

पीएम विश्वकर्मा योजना के कारीगरों को ऑनलाइन बाजार तक पहुँच के लिए अमेज़न के साथ समझौते के माध्यम से सशक्त बनाया गया

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सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) मंत्रालय ने Amazon Seller Services Private Ltd. के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे PM विश्वकर्मा योजना में पंजीकृत कारीगरों को ऑनलाइन बाजार तक पहुँच प्राप्त होगी, उनके उत्पादों की दृश्यता बढ़ेगी और पूरे भारत में ग्राहक आधार का विस्तार होगा। यह MoU निर्माण भवन, नई दिल्ली में MSME विकास आयुक्त कार्यालय और Amazon टीम द्वारा किया गया।

PM विश्वकर्मा योजना, जिसे 17 सितंबर 2023 को लॉन्च किया गया था, कारीगरों को समग्र सहायता प्रदान करती है। यह योजना कौशल प्रशिक्षण और आधुनिक उपकरणों के माध्यम से उत्पाद की गुणवत्ता सुधारने, बाज़ार पहुंच बढ़ाने, ऋण तक पहुँच सुनिश्चित करने और गुरु-शिष्य परंपरा के तहत पारंपरिक कौशल को सशक्त बनाने पर केंद्रित है।

इस साझेदारी के तहत:

  • Amazon योग्य विश्वकर्मा कारीगरों को अपने ऑनलाइन मार्केटप्लेस पर ऑनबोर्ड करेगा।

  • MoMSME आवश्यक अनुमतियों, पंजीकरण और स्पष्टताओं में सहायता प्रदान करेगा।

  • Amazon के करिगर पहल के माध्यम से हस्तशिल्प उत्पादों की दृश्यता और डिजिटलीकरण को मजबूत किया जाएगा।

यह सहयोग पारंपरिक कारीगरों की उपस्थिति को डिजिटल ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बढ़ाने, उनके उत्पादों को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करने, और Viksit Bharat और Atmanirbhar Bharat की दृष्टि को साकार करने में महत्वपूर्ण कदम है।

PM विश्वकर्मा योजना के लाभार्थी 10 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में आयोजित Amazon Smbhav Summit 2025 में भी शामिल हुए, जहां उन्होंने पहल के बारे में जानकारी प्राप्त की और कारीगरों से जुड़ने के अवसरों का पता लगाया।

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