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उप-सभापति हरिवंश ने एआईपीओसी के पूर्ण सत्र में एआई की भूमिका पर दिया जोर

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लखनऊ- राज्यसभा के माननीय उप-सभापति हरिवंश ने मंगलवार को लखनऊ में आयोजित 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन (AIPOC) के पूर्ण सत्र को संबोधित किया। विभिन्न राज्यों से आए पीठासीन अधिकारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने विधायिकाओं को अधिक प्रभावी और दक्ष बनाने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की भूमिका पर प्रकाश डाला, साथ ही इस तकनीक को सटीक और विश्वसनीय बनाने के लिए आवश्यक कदमों की रूपरेखा भी प्रस्तुत की।

अपने संबोधन में हरिवंश ने संसद और राज्य विधानसभाओं के बीच अधिक समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इससे विधायिकाओं के संस्थागत ज्ञान का प्रभावी उपयोग संसद और राज्य विधानसभाओं—दोनों के लिए संभव हो सकेगा।

नीतियों तक समन्वित पहुंच और सामंजस्यपूर्ण सहयोग की परिकल्पना रखते हुए उन्होंने कहा, “विधायिकाएं सभी आधिकारिक नीति दस्तावेजों की संरक्षक होती हैं, जिनमें विधायी बहसें, बजट और अन्य महत्वपूर्ण अभिलेख शामिल हैं। ये दस्तावेज सदन के पटल पर रखे जाने के बाद सदन का हिस्सा बन जाते हैं। यह जानकारी अक्सर विभिन्न मंत्रालयों में बिखरी रहती है। संसद और राज्य विधानसभाएं एआई का उपयोग कर एक ऐसा मंच विकसित कर सकती हैं, जिससे ये सभी दस्तावेज आसानी से सुलभ हो सकें और विधायिका एक ज्ञान केंद्र के रूप में स्थापित हो सके।”

उन्होंने भारतीय संदर्भ के अनुरूप एआई विकसित करने के लिए एक ‘डेटा लेक’ की आवश्यकता पर भी जोर दिया, जिसमें देशभर की विधायी बहसों की विशिष्ट भाषा, शब्दावली और दस्तावेजों का उपयोग कर तकनीक को प्रशिक्षित किया जा सके।

उप-सभापति ने एआई के उपयोग में मानव निगरानी की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए एक हाइब्रिड तंत्र का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “संसदीय उपयोग के लिए एआई को उपयुक्त बनाने वाली बात केवल उसकी एल्गोरिदमिक क्षमता नहीं है, बल्कि वह ज्ञान है, जिस पर उसे प्रशिक्षित किया जाता है। संसदीय एआई को संसद के भीतर ही, सावधानीपूर्वक चयनित संसदीय डेटा से प्रशिक्षित किया जाना चाहिए। कौशल सीखे या आउटसोर्स किए जा सकते हैं, लेकिन ज्ञान संदर्भ-आधारित होता है और संस्था के भीतर गहराई से निहित रहता है।”

अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि संसद में एआई-सक्षम ट्रांसक्रिप्शन और विभिन्न भाषाओं में एक साथ अनुवाद जैसी सेवाओं का परीक्षण किया जा रहा है। वर्तमान में सांसद सदन के कार्यसूची और प्रशासनिक दस्तावेज अपनी पसंद की भाषा में प्राप्त कर सकते हैं, जो एआई के माध्यम से संभव हुआ है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रश्नकाल के लिए प्रश्नों की स्वीकार्यता की जांच, पूर्ववर्ती निर्णयों और मिसालों की खोज जैसे नियमित प्रशासनिक कार्य भी एआई की सहायता से किए जा सकते हैं।

इसके साथ ही हरिवंश ने विधायकों और कर्मचारियों के लिए अधिक जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि वे अपनी भूमिकाओं का प्रभावी ढंग से निर्वहन कर सकें।

सम्मेलन में डिजिटल उपकरणों के उपयोग के अलावा जवाबदेही को सुदृढ़ करने और विधायकों की क्षमता निर्माण जैसे विषयों पर भी चर्चा की गई। यह सम्मेलन 19 जनवरी को माननीय राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की उपस्थिति में प्रारंभ हुआ।

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