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धान उपार्जन व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने राज्यभर में सघन कार्रवाई

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अवैध परिवहन, भंडारण व मिलिंग पर प्रशासन सख़्त, कई जिलों में बड़ी कार्रवाई

रायपुर- छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और किसान-केंद्रित बनाए रखने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ शासन द्वारा अवैध धान परिवहन, भंडारण, विक्रय एवं मिलिंग अनियमितताओं के विरुद्ध राज्यभर में व्यापक और सघन अभियान चलाया जा रहा है। शासन के स्पष्ट निर्देशों के अनुरूप राजस्व, खाद्य, मंडी एवं पुलिस विभाग की संयुक्त टीमों द्वारा अंतर्राज्यीय सीमाओं, धान खरीदी केंद्रों, राइस मिलों एवं संदिग्ध स्थलों पर सतत निगरानी रखते हुए कठोर कार्रवाई की जा रही है, ताकि धान उपार्जन का लाभ केवल वास्तविक किसानों तक ही सुनिश्चित हो सके।

खाद्य सचिव रीना कंगाले ने कहा कि राज्य सरकार धान उपार्जन व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और किसान-हितैषी बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता, अवैध परिवहन, भंडारण, बिक्री अथवा मिलिंग को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने  कहा कि शासन का स्पष्ट निर्देश है कि धान उपार्जन का लाभ केवल वास्तविक किसानों को ही मिले। बिचौलियों, फर्जी टोकन, मिलावट, अंतर्राज्यीय अवैध परिवहन और कस्टम मिलिंग में गड़बड़ी करने वालों के विरुद्ध प्रारंभिक स्तर पर ही सख़्त कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि राज्यभर में राजस्व, खाद्य, मंडी और पुलिस विभाग की संयुक्त टीमों द्वारा सतत निगरानी एवं भौतिक सत्यापन किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जहाँ कहीं भी नियमों का उल्लंघन पाया जाएगा, वहाँ संबंधित व्यक्ति, संस्था अथवा मिल संचालक के विरुद्ध छत्तीसगढ़ चावल उपार्जन आदेश 2016, आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 एवं अन्य प्रासंगिक कानूनी प्रावधानों के अंतर्गत कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। खाद्य सचिव ने दोहराया कि किसानों के हितों की रक्षा और धान खरीदी व्यवस्था की शुचिता बनाए रखना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

इसी क्रम में महासमुंद जिले में कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के निर्देशानुसार अवैध धान परिवहन पर बड़ी कार्रवाई करते हुए सरायपाली विकासखंड अंतर्गत रेहटीखोल क्षेत्र में बीती रात संयुक्त टीम द्वारा एक ट्रक से 694 बोरा धान जब्त किया गया। जब्त धान का कुल वजन लगभग 319 क्विंटल पाया गया। जांच के दौरान यह पाया गया कि उक्त ट्रक में उड़ीसा से छत्तीसगढ़ की ओर बिना किसी वैध दस्तावेज के धान का परिवहन किया जा रहा था। परिवहन से संबंधित आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाने पर धान से भरे ट्रक को मौके पर ही जब्त कर आगे की वैधानिक कार्रवाई हेतु थाना सिंघोड़ा के सुपुर्द किया गया। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अंतर्राज्यीय सीमाओं पर अवैध धान परिवहन रोकने के लिए सतत निगरानी रखी जा रही है तथा संदिग्ध वाहनों की गहन जांच की जा रही है, ताकि धान खरीदी प्रणाली की शुचिता बनी रहे।

धान उपार्जन व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के तहत धमतरी जिले में गंभीर अनियमितता पाए जाने पर प्राथमिक कृषि सहकारी साख समिति मर्यादित मोहदी के समिति प्रबंधक एवं ऑपरेटर को सेवा से पृथक कर दिया गया है। निरीक्षण के दौरान मिलावटयुक्त धान, टोकन का दुरुपयोग एवं अवैध बिक्री के प्रकरण सामने आए थे। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि धान उपार्जन व्यवस्था में गड़बड़ी करने वालों के विरुद्ध प्रारंभिक स्तर पर ही कठोर कार्रवाई की जा रही है, ताकि उपार्जन का लाभ केवल वास्तविक किसानों तक ही सीमित रहे और बिचौलियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

इसी प्रकार  13 जनवरी 2026 को बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में राजस्व, खाद्य एवं मंडी विभाग की संयुक्त टीम ने ग्राम बिलारी (सोनाखान) में अवैध रूप से परिवहन किए जा रहे 75 कट्टा धान सहित एक पिकअप वाहन जब्त कर पुलिस थाना सलीहा-बिलाईगढ़ के सुपुर्द किया।

सरगुजा जिले में कलेक्टर के निर्देशन में राइस मिलों का सघन भौतिक सत्यापन किया गया। जांच में राजेश राइस मिल खोडरी एवं सिद्धिविनायक राइस मिल दरिमा में धान की भारी कमी पाई गई। कस्टम मिलिंग आदेश 2016 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत संबंधित मिलों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

महासमुंद जिले में अलग-अलग स्थानों पर की गई कार्रवाई के दौरान संयुक्त टीम द्वारा कुल 217 कट्टा धान एवं एक पिकअप वाहन जब्त किया गया। अवैध परिवहन एवं भंडारण के मामलों में मंडी अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किए जा रहे हैं। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में महासमुंद जिले में अब तक की गई कार्रवाई में बीते दो दिनों में कुल 2986 कट्टा अवैध धान जब्त किया गया है। कलेक्टर द्वारा अंतर्राज्यीय जांच चौकी टेमरी, नर्रा एवं खट्टी सहित धान खरीदी केंद्रों का औचक निरीक्षण कर सख़्त निर्देश दिए गए हैं। पिथौरा, बसना एवं सरायपाली क्षेत्रों में अलग-अलग प्रकरणों में बड़ी मात्रा में अवैध एवं संदिग्ध धान जब्त कर संबंधित विभागों को कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। कई मामलों में धान को पुलिस थाना के सुपुर्द किया गया है।

बिलासपुर जिले में धान उठाव में गंभीर गड़बड़ी सामने आने पर अमरनाथ एग्रो प्रोडक्ट राइस मिल पर बड़ी कार्रवाई करते हुए मिल को सील किया गया तथा संचालक के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई है। मौके से 54 हजार क्विंटल से अधिक धान जब्त किया गया, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 16 करोड़ रुपये है। भौतिक सत्यापन में कस्टम मिलिंग के लिए जारी धान की तुलना में हजारों क्विंटल धान की कमी पाई गई। दो दिनों तक चली गहन जांच के बाद अनियमितता की पुष्टि होते ही तत्काल कार्रवाई की गई। खाद्य विभाग के अनुसार बिलासपुर जिले में अब तक 56 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य का धान जब्त किया जा चुका है। यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ चावल उपार्जन आदेश 2016 के उल्लंघन के अंतर्गत की गई है। जिला प्रशासन ने दो टूक कहा है कि धान खरीदी, परिवहन, भंडारण एवं मिलिंग में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों, संस्थाओं एवं मिल संचालकों के विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

चावल निर्यातकों को दी बड़ी सौगात, मंडी शुल्क में छूट की अवधि एक साल बढ़ाई गई

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इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट में मुख्यमंत्री साय ने की घोषणा 

ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है- मुख्यमंत्री साय 

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के नीजि  रिसॉर्ट में आयोजित इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने  चावल निर्यातकों को बड़ी सौगात दी है। मंडी शुल्क में छूट की अवधि एक साल बढ़ाई है। इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट के दौरान सीएम साय ने की घोषणा से चावल निर्यातकों और किसान दोनों के लिए बड़ी सौगात है। साथ ही कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के क्षेत्रीय कार्यालय का भी शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है और दंतेवाड़ा में ऑर्गेनिक चावल की खेती हो रही है, जिसे और प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है।

छतीसगढ़ से चावल के एक्सपोर्ट को मिलेगा बढ़ावा 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट का यह दूसरा संस्करण अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस आयोजन में 12 देशों के बायर्स तथा 6 देशों के एम्बेसी प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति से छत्तीसगढ़ को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने में मदद मिलेगी। उन्होंने छत्तीसगढ़ की पावन धरती पर सभी विदेशी मेहमानों का स्वागत एवं अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने छत्तीसगढ़ को सोच-समझकर “धान का कटोरा” कहा था और आज प्रदेश इस नाम की सार्थकता सिद्ध कर रहा है। चावल छत्तीसगढ़ के खानपान का अभिन्न हिस्सा रहा है और यहां हजारों किस्मों की धान की प्रजातियां उगाई जाती हैं। सरगुजा अंचल के सुगंधित जीराफूल और दुबराज जैसे चावलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इनकी खुशबू दूर से ही पहचान में आ जाती है।  छतीसगढ़ से चावल के एक्सपोर्ट को बढ़ावा मिलेगा। चावल निर्यातक लंबे समय से मंडी शुल्क में छूट की मांग कर रहे थे। पिछले साल भी सरकार ने दी थी, छूट दिसंबर 2025 में मंडी शुल्क में छूट की अवधि खत्म हो रही थी।

छत्तीसगढ़ से 90 देशों को करीब एक लाख टन चावल का किया जा रहा है निर्यात 

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की नई औद्योगिक नीति के अंतर्गत लघु उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे चावल के प्रसंस्करण और निर्यात को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ से वर्तमान में लगभग 90 देशों को करीब एक लाख टन चावल का निर्यात किया जा रहा है। सरकार निर्यातकों के सहयोग के लिए सदैव तत्पर है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में किसानों से 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी की जा रही है। पिछले वर्ष 149 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई थी और इस वर्ष भी खरीदी में वृद्धि की संभावना है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने केंद्र व राज्य शासन द्वारा किसानों के हित में संचालित योजनाओं की जानकारी भी साझा की। 

मुख्यमंत्री ने चावल पर केन्द्रित प्रदर्शनी का किया अवलोकन

इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट के दौरान मुख्यमंत्री साय ने चावल पर केन्द्रित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने विभिन्न किस्मों के चावल, क्षेत्र विशेष में उत्पादित प्रजातियों, चावल उत्पादन में हो रहे नवाचारों तथा आधुनिक तकनीक के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाने के प्रयासों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने शासकीय स्टालों का भी निरीक्षण कर चावल के उत्पादन और विपणन को बढ़ावा देने से जुड़े कार्यों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे नवाचारों से चावल की पैदावार में वृद्धि होगी, जिससे किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, एपिडा के चेयरमेन अभिषेक देव, छत्तीसगढ़ राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष कांति लाल, राम गर्ग, देश भर से आये मिलर्स, चावल व्यवसायी एवं स्टेक होल्डर्स उपस्थित रहे।


कृषि विभाग के समन्वित प्रयासों से किसानों के समृद्धि के द्वार खुले

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विभिन्न नवाचारी योजनाओं से आर्थिक उन्नति की दिशा में कारगर पहल

महासमुंद- महासमुंद जिले में कृषि विकास को गतिशील एवं लाभकारी बनाने के लिए केन्द्र सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। आधुनिक सिंचाई तकनीकों के विस्तार से लेकर किसानों को प्रत्यक्ष लाभ पहुँचाने वाली योजनाओं तक, जिले ने लक्ष्य प्राप्ति में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि तथा राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के सफल क्रियान्वयन ने कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के साथ जल संरक्षण, फसल उत्पादकता वृद्धि और किसानों की आर्थिक उन्नति की दिशा में विशेष योगदान दिया है।

जिले में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत वर्ष 2024-25 में जिले ने उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की है। निर्धारित 151 हेक्टेयर सिंचाई लक्ष्य के विरुद्ध 84 कृषकों के खेतों में 149.66 हेक्टेयर क्षेत्र में ड्रिप एवं स्प्रिंकलर के माध्यम से सिंचाई व्यवस्था स्थापित की गई। लक्ष्य के लगभग पूर्ण होने से किसानों को आधुनिक सिंचाई सुविधाओं का महत्वाकांक्षी लाभ मिला है। वर्ष 2025-26 के लिए कृषि विभाग ने कुल 264 हेक्टेयर क्षेत्र में सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली विस्तार का लक्ष्य रखा है, जिसमें 235 हेक्टेयर क्षेत्र में ड्रिप सिंचाई तथा 29 हेक्टेयर क्षेत्र में स्प्रिंकलर सिंचाई स्थापित की जाएगी। इस योजना से जल संरक्षण, फसलों की उत्पादकता वृद्धि और कृषि लागत में कमी की दिशा में प्रगति होगी।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना अंतर्गत जिले में 1,26,234 किसानों को योजना का लाभ प्रदान किया जा रहा है और पात्र किसानों के पंजीयन की प्रक्रिया निरंतर जारी है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त के तहत जिले में 25.25 करोड़ रूपए की राशि किसानों को उनके खाते में प्राप्त हुई है। जिले में 1,39,063 किसानों का लैंड सीडिंग का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। इसी प्रकार 1,37,835 किसानों की आधार सीडिंग तथा 1,40,733 किसानों का ई-केवाईसी पूरा हो चुका है। जिले में 1,461 पात्र पीव्हीटीजी हितग्राही इस योजना के अंतर्गत पंजीकृत हैं।

इसी तरह राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत वर्ष 2025-26 में 1,920 हेक्टेयर क्षेत्र में मिलेट्स रागी फसल प्रदर्शन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके अलावा 1,320 हेक्टेयर में मक्का, 260 हेक्टेयर में उड़द एवं मूंग, 50 हेक्टेयर में मूंगफली तथा 20-20 हेक्टेयर में सूरजमुखी एवं तिल फसल प्रदर्शन किया जाएगा। साथ ही 250 हेक्टेयर क्षेत्र में शैलो ट्यूबवेल सब्सिडी प्रदान करने का लक्ष्य भी रखा गया है।

छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी व्यवस्था: पारदर्शी, सरल और किसान-केंद्रित प्रणाली से किसानों में बढ़ा उत्साह

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रायपुर-प्रदेश में किसानों की समृद्धि और कृषि को नई दिशा देने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा लागू की गई समर्थन मूल्य पर धान खरीदी व्यवस्था अब और अधिक पारदर्शी, सरल एवं किसान-केंद्रित बन चुकी है। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए धान खरीदी का शुभारंभ 15 नवंबर से पूरे छत्तीसगढ़ में हो चुका है, जिसके उत्साहजनक परिणाम सामने आ रहे हैं।

धमतरी जिले में धान खरीदी के प्रति किसानों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। जिले के 100 उपार्जन केंद्रों में 19 नवंबर तक 3 हज़ार 431 किसानों से कुल 1 लाख 56 हज़ार 761 क्विंटल धान खरीदा जा चुका है। यह व्यवस्था किसानों के बढ़ते भरोसे को और मजबूत करता है।

इसी भरोसे की आवाज बने ग्राम संबलपुर उपार्जन केंद्र में धान बेचने पहुंचे किसान दीपेश कुमार देवांगन। उन्होंने बताया कि इस वर्ष धान बेचने की प्रक्रिया पहले से कहीं अधिक सुगम और पारदर्शी है। ऑनलाइन टोकन सिस्टम ने उनके लंबे इंतजार की समस्या को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। निर्धारित समय पर टोकन मिलने से न भीड़ होती है और न ही अव्यवस्था का सामना करना पड़ता है।

दीपेश ने इस बार 76 क्विंटल धान बेचा है, जो पिछले वर्ष की मात्रा के लगभग बराबर है। उनका कहना है कि पिछले वर्ष समय पर भुगतान मिलने से खेती के कार्यों में बड़ा लाभ हुआ था, और इस वर्ष भी उन्हें शीघ्र भुगतान की उम्मीद है। धान बेचकर प्राप्त धन को वे कृषि सुधार, बीज-खाद की खरीदी और पारिवारिक आवश्यकताओं में उपयोग करते हैं।

केंद्र की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए दीपेश ने कहा कि अब हमें बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। यहाँ व्यवस्था अनुकरणीय है और कर्मचारियों का सहयोग प्रशंसनीय। हमारी मेहनत का सही मूल्य मिल रहा है।

दीपेश की तरह हंसराज, शत्रुघन सहित अन्य किसानों ने भी खरीदी व्यवस्था में आए सकारात्मक बदलावों की प्रशंसा की। उनका मानना है कि इस वर्ष प्रशासन द्वारा किए गए सुधारों के कारण प्रक्रिया अत्यंत सहज हो गई है—बेहतर व्यवस्थापन, त्वरित मापन, ऑनलाइन पारदर्शिता और अधिकारियों की सतत निगरानी ने किसानों का भरोसा कई गुना बढ़ाया है।

सरकार और जिला प्रशासन के ये प्रयास न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी बड़ा कदम साबित हो रहे हैं। किसानों ने अपेक्षा जताई कि ऐसी पारदर्शी और विश्वसनीय व्यवस्था आगे भी इसी तरह जारी रहेगी।

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