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अहमदाबाद में खाद्य प्रसंस्करण पर दक्षिण एशियाई उच्च स्तरीय नीति संवाद का शुभारंभ, रोजगार सृजन और सतत विकास पर जोर

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अहमदाबाद- भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) ने विश्व बैंक समूह की अगुवाई वाली SAPLING पहल के सहयोग से अहमदाबाद, गुजरात में “रोजगार सृजन और सतत विकास के लिए खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा: दक्षिण एशिया में मूल्य संवर्धन के नए अवसर” विषय पर दो दिवसीय क्षेत्रीय उच्च स्तरीय नीति संवाद का शुभारंभ किया।

इस दो दिवसीय सम्मेलन में दक्षिण एशियाई देशों के लगभग 200 प्रतिभागी शामिल हुए हैं, जिनमें नीति निर्माता, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, विकास साझेदार, नवाचारकर्ता, शोधकर्ता, स्टार्टअप्स तथा विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हैं। सम्मेलन का उद्देश्य खाद्य प्रसंस्करण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाना तथा क्षेत्र में लचीली, समावेशी और टिकाऊ खाद्य प्रणालियों का विकास करना है।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवानने कहा कि भारत तेजी से वैश्विक खाद्य प्रसंस्करण केंद्र के रूप में उभर रहा है। उन्होंने मूल्य संवर्धन, तकनीकी नवाचार और क्षेत्रीय सहयोग को दक्षिण एशिया की खाद्य अर्थव्यवस्था को बदलने का प्रमुख आधार बताया।

चिराग पासवान ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण कृषि और समृद्धि के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु है, जो रोजगार सृजन, फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान में कमी, किसानों की आय बढ़ाने तथा खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने की अपार क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि भारत की नीतिगत पहलें और अवसंरचना विकास के प्रयास वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी खाद्य मूल्य श्रृंखलाओं के निर्माण में सहायक सिद्ध हो रहे हैं।

गुजरात सरकार के कृषि मंत्री जीतुभाई वघानी ने विभिन्न देशों की भागीदारी का स्वागत करते हुए खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को कृषि परिवर्तन का प्रमुख इंजन बताया। उन्होंने गुजरात में राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (NIFTEM) का परिसर स्थापित करने की वकालत की, ताकि कृषि और उद्योग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सके।

उद्घाटन सत्र में विश्व बैंक के भारत के कार्यवाहक कंट्री डायरेक्टर पॉल प्रोसी, गेट्स फाउंडेशन की भारत कंट्री डायरेक्टर अर्चना व्यास तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के सचिव अविनाश जोशी सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

सम्मेलन के दौरान निम्नलिखित प्रमुख विषयों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है—

  • दक्षिण एशिया में खाद्य प्रसंस्करण की संभावनाओं को बढ़ावा देना

  • कृषि आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत बनाना

  • असंगठित खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों का औपचारिककरण

  • तकनीक आधारित नवाचार और स्मार्ट प्रोसेसिंग

  • खाद्य सुरक्षा, गुणवत्ता और वैश्विक मानक

  • निवेश जुटाने और वित्तीय सहयोग को बढ़ावा देना

  • दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय सहयोग और नीतिगत समन्वय

कार्यक्रम में नेस्ले, बायर, राबोबैंक, अजीनोमोटो, आईटीसी, सेवा (SEWA), नाबार्ड तथा फूड इंडस्ट्री एशिया जैसी प्रमुख राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रतिनिधि भी भाग ले रहे हैं।

सम्मेलन के साथ एक इनोवेशन फेयर का भी आयोजन किया गया है, जिसमें कोल्ड चेन लॉजिस्टिक्स, डिजिटल ट्रेसबिलिटी, टिकाऊ पैकेजिंग, स्मार्ट प्रोसेसिंग तकनीक और भंडारण प्रणालियों से जुड़ी नवीन तकनीकों का प्रदर्शन किया जा रहा है।

इस अवसर पर खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय द्वारा तैयार कराई गई रिपोर्ट “भारत में खाद्य प्रसंस्करण के स्तर का आकलन” भी जारी की गई। रिपोर्ट के अनुसार देश में खाद्य प्रसंस्करण का स्तर वर्ष 2016 में लगभग 10 प्रतिशत से बढ़कर 2023 में करीब 17 प्रतिशत तक पहुंच गया है। अध्ययन में फल, सब्जी और डेयरी जैसे शीघ्र नष्ट होने वाले उत्पादों में मूल्य संवर्धन की व्यापक संभावनाओं को रेखांकित किया गया है।

यह संवाद विश्व बैंक समूह की AgriConnect और SAPLING पहल के अनुरूप आयोजित किया गया है, जिसका उद्देश्य नीतिगत सुधारों, निवेश और तकनीकी नवाचार के माध्यम से दक्षिण एशिया में टिकाऊ और पोषण-केंद्रित खाद्य प्रणालियों को बढ़ावा देना है।

कार्यक्रम से क्षेत्रीय सहयोग को मजबूती मिलने, निजी निवेश को प्रोत्साहन, एमएसएमई क्षेत्र के विकास तथा खाद्य प्रसंस्करण आधारित रोजगार सृजन के नए अवसर विकसित होने की उम्मीद जताई गई है।

झारखंड से ताज़े आमों की पहली वाणिज्यिक खेप यूनाइटेड किंगडम रवाना, कृषि निर्यात को मिला नया आयाम

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कृषि निर्यात के क्षेत्र में झारखंड के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority (एपीडा) ने राज्य से ताज़े आमों की पहली वाणिज्यिक खेप को यूनाइटेड किंगडम के लिए रवाना किया। इस अवसर पर 4 जून 2026 को कोलकाता में फ्लैग-ऑफ समारोह आयोजित किया गया।

यह खेप 1.5 मीट्रिक टन ताज़े अमरपाली आमों की है, जिन्हें झारखंड के सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड स्थित महिला संचालित किसान उत्पादक कंपनी (एफपीसी) बेउरा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड से प्राप्त किया गया है। इस खेप का निर्यात कोलकाता स्थित एम/एस जेजीबी एग्रोफ्रेश प्राइवेट लिमिटेड द्वारा लंदन, यूनाइटेड किंगडम भेजा जा रहा है।

इस निर्यात की पृष्ठभूमि में एपीडा द्वारा 5 मई 2026 को सिमडेगा जिले के किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), किसान उत्पादक कंपनियों (एफपीसी) तथा प्रगतिशील किसानों के लिए आयोजित एक निर्यातोन्मुखी क्षमता निर्माण कार्यक्रम रहा। कार्यक्रम में निर्यात संबंधी आवश्यकताओं, गुणवत्ता मानकों और वैश्विक बाजार अवसरों की जानकारी प्रदान की गई।

इसके बाद एपीडा ने बेउरा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड और एम/एस जेजीबी एग्रोफ्रेश प्राइवेट लिमिटेड के बीच समन्वय स्थापित कर जिले से निर्यात गुणवत्ता वाले आमों की खरीद सुनिश्चित कराई। वर्तमान खेप इसी पहल का परिणाम है।

इस पहल से किसान उत्पादक कंपनी की निर्यात मूल्य श्रृंखला में प्रत्यक्ष भागीदारी सुनिश्चित हुई है तथा इसके सदस्य किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच प्राप्त हुई है। एफपीसी से जुड़े किसानों को अपने उत्पाद के लिए घरेलू बाजार की तुलना में बेहतर मूल्य प्राप्त हुआ।

यह पहल क्षेत्र के किसान समूहों को गुणवत्तापूर्ण उत्पादन पद्धतियों को अपनाने, फसल कटाई के बाद बेहतर प्रबंधन तथा अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुपालन के लिए प्रोत्साहित करेगी।

झारखंड की अनुकूल कृषि-जलवायु परिस्थितियां बागवानी फसलों के उत्पादन के लिए उपयुक्त हैं। राज्य में उत्पादित अमरपाली आम अपनी गुणवत्ता और बाजार में स्वीकृति के लिए प्रसिद्ध हैं। इस खेप के साथ झारखंड भी उन राज्यों की सूची में शामिल हो गया है जो ताज़े फलों का निर्यात अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कर रहे हैं।

एपीडा कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए बाजार विकास, क्षमता निर्माण, गुणवत्ता सुधार, ट्रेसबिलिटी प्रणाली तथा निर्यात प्रोत्साहन गतिविधियों के माध्यम से सहयोग प्रदान करता है। साथ ही, यह महिला एवं जनजातीय किसान उत्पादक संगठनों सहित विभिन्न किसान समूहों की कृषि निर्यात में भागीदारी को भी प्रोत्साहित करता है।

झारखंड से ताज़े आमों की पहली वाणिज्यिक निर्यात खेप राज्य के किसान उत्पादक संगठनों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

परंपरागत खेती छोड़ फूलों की खेती अपनाई, कम लागत में मिला ज्यादा मुनाफा

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एक किसान की सफलता बनी प्रेरणा, गांव के अन्य किसान भी बढ़ा रहे कदम

रायपुर- परंपरागत खेती (गेहूं-धान) की तुलना में फूलों की खेती कम लागत में 3-4 गुना तक अधिक मुनाफा दे रही है। गेंदा, गुलाब और गुलदाउदी जैसे फूलों की 12 महीने मांग होने से किसान हर सीजन में बंपर कमाई कर रहे हैं। कम पूंजी से शुरू होकर, यह व्यवसाय प्रति हेक्टेयर लाखों रुपये का शुद्ध लाभ  दे रहा है, जिससे किसान आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रहे हैं।  शादी, पार्टी, त्यौहार और धार्मिक आयोजनों में फूलों की मांग साल भर बनी रहती है, जिससे अच्छी कीमतें मिलती हैं।

राज्य शासन की योजनाओं का लाभ लेकर रायगढ़ जिले के किसान अब परंपरागत खेती से आगे बढ़ते हुए उद्यानिकी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। इसी कड़ी में लैलूंगा विकासखंड के ग्राम गमेकेरा निवासी किसान ईश्वरचरण पैकरा ने राष्ट्रीय बागवानी मिशन से फूलों की खेती अपनाकर अपनी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि की है। किसान की सफलता आज सबके लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है।

ईश्वरचरण पैकरा पहले परंपरागत रूप से धान की खेती किया करते थे, जिसमें मेहनत के मुकाबले आय सीमित थी। वर्ष 2025-26 में उन्होंने उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में 0.400 हेक्टेयर भूमि पर गेंदा फूल की खेती शुरू की। विभाग द्वारा तकनीकी सहयोग एवं आवश्यक मार्गदर्शन मिलने से उन्होंने वैज्ञानिक पद्धति से खेती की, जिसका परिणाम बेहद सकारात्मक रहा। जहां पहले धान की खेती से उन्हें लगभग 11 क्विंटल उत्पादन मिलता था और सीमित आय होती थी, वहीं फूलों की खेती से उन्हें करीब 38 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ। इस उत्पादन से उनकी कुल आमदनी लगभग 3 लाख 4 हजार रुपये तक पहुंच गई। लागत निकालने के बाद उन्हें लगभग 2 लाख 59 हजार रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ, जो पारंपरिक खेती की तुलना में कई गुना अधिक है।

फूलों की खेती में सफलता मिलने के बाद ईश्वरचरण पैकरा का आत्मविश्वास बढ़ा है। वे बताते हैं कि कम समय में अधिक लाभ मिलने के कारण अब वे इस खेती को और विस्तार देने की योजना बना रहे हैं। उनके खेत में खिले गेंदा फूलों की रंगीन पंक्तियां आज उनकी मेहनत और सफलता की कहानी बयां करती हैं। उनकी इस उपलब्धि को देखकर गांव के अन्य किसान भी अब उद्यानिकी फसलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं और विभाग से संपर्क कर फूलों की खेती अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। इस प्रकार राज्य शासन की योजनाएं न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक हो रही हैं, बल्कि कृषि के स्वरूप में भी सकारात्मक बदलाव ला रही हैं।

भारत की खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय की प्रतिनिधिमंडल ने 'Africa Food 2025' में लिया भाग, अफ्रीका में व्यापार और निवेश के अवसरों पर चर्चा

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खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय (MoFPI) के प्रतिनिधिमंडल, जिसका नेतृत्व उप सचिव विवेक कुमार सिंह और उप सचिव अरुणव सेनगुप्ता ने किया, ने 11 से 13 दिसंबर 2025 तक त्यूनीस में आयोजित 'Africa Food 2025' में भाग लिया।

इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने इंडिया पविलियन में उद्योग हितधारकों के साथ सक्रिय बातचीत की और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में व्यापार और निवेश के अवसरों पर चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल ने त्यूनीशिया सरकार के प्रतिनिधियों और विभिन्न औद्योगिक संघों के साथ भी मुलाकात की, जिसका उद्देश्य द्विपक्षीय सहयोग और बाजार तक पहुंच को मजबूत करना था।

यात्रा के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने त्यूनीस के एक फूड टेस्टिंग लैब का भी दौरा किया और मूल्यवान सुझाव साझा किए, जिससे खाद्य सुरक्षा अवसंरचना और गुणवत्ता आश्वासन प्रणाली को मजबूत करने पर चर्चा में योगदान मिला।

इस भागीदारी से मंत्रालय के अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने, व्यापार संबंधों को सुदृढ़ करने और खाद्य सुरक्षा व प्रसंस्करण में वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने के प्रयासों की पुष्टि होती है।


FCI ने वर्ल्ड फूड इंडिया 2025 में OMSS (D) योजना के माध्यम से बनाई मजबूत उपस्थिति

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नई दिल्ली-फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) ने वर्ल्ड फूड इंडिया 2025, भारत मंडपम, नई दिल्ली में अपने प्रमुख बाज़ार हस्तक्षेप कार्यक्रम ओपन मार्केट सेल स्कीम (डोमेस्टिक), OMSS (D) को प्रदर्शित करके मजबूत और केंद्रित प्रभाव डाला। इस कार्यक्रम का आयोजन भारत सरकार के फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज मंत्रालय द्वारा किया गया, जिसमें खाद्य और कृषि व्यवसाय क्षेत्रों के वैश्विक हितधारकों ने भाग लिया। इस मंच ने FCI को OMSS (D) के प्रति जागरूकता बढ़ाने और भागीदारी को प्रोत्साहित करने का अवसर प्रदान किया।

FCI के इस कार्यक्रम में भाग लेने का मुख्य उद्देश्य यह दर्शाना था कि OMSS (D) खाद्यान्न की व्यापक उपलब्धता सुनिश्चित करने, कीमतों को नियंत्रित करने और छोटे/बड़े उपभोक्ताओं और विक्रेताओं को सीधे पहुंच प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। FCI ने अपने विशेष और जानकारीपूर्ण स्टॉल के माध्यम से योजना की संरचना, प्रभाव और लाभ को सरल और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत किया। आगंतुकों को पंजीकरण प्रक्रिया, ई-नीलामी तंत्र और योजना की पूरी प्रक्रिया के बारे में लाइव डेमो, प्रिंटेड सामग्री और व्यक्तिगत मार्गदर्शन के माध्यम से समझाया गया।

इस स्टॉल ने व्यापक जनसंपर्क आकर्षित किया और कार्यक्रम में प्रमुख आकर्षण का केंद्र बन गया। विक्रेता, फूड प्रोसेसर, थोक व्यापारी, छात्र और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि FCI टीम के साथ उत्साहपूर्वक जुड़े, जिन्होंने सभी प्रश्नों का उत्तर दिया और योजना की राष्ट्रीय महत्वता समझाई।

एक महत्वपूर्ण क्षण तब आया जब केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री, चिराग पासवान ने FCI स्टॉल का दौरा किया और OMSS पर इसके थीमेटिक फोकस की सराहना की। उन्होंने FCI के सार्वजनिक पहुँच प्रयासों और खाद्यान्न मूल्य स्थिरीकरण में योगदान की प्रशंसा की। मंत्री ने FCI द्वारा प्रस्तुत “Food for All, Life for All” विषय को भी सराहा, जो संगठन की खाद्य सुरक्षा और सार्वजनिक सेवा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

FCI स्टॉल की सफलता FCI दिल्ली क्षेत्र की समर्पित टीम के प्रयासों से संभव हुई, जिसका नेतृत्व Smt. K. P. Asha, जनरल मैनेजर (क्षेत्र) ने किया। टीम ने सुनिश्चित किया कि प्रस्तुति पेशेवर, सुगम और FCI के उद्देश्यों के अनुरूप हो।

स्टॉल का महत्व और बढ़ाने के लिए FCI के वरिष्ठ नेतृत्व ने भी भाग लिया। इसमें प्रमुख विभागों के कार्यकारी निदेशक, जैसे पर्सनल/सेल्स, स्टोरेज & कॉन्ट्रैक्ट/सिक्योरिटी, क्वालिटी कंट्रोल और नॉर्थ जोन, तथा चीफ जनरल मैनेजर और जनरल मैनेजर शामिल थे। उनकी भागीदारी ने संगठन की एकीकृत दृष्टि और सार्वजनिक संपर्क में उच्च स्तर की प्रतिबद्धता को दर्शाया।

OMSS के अलावा, स्टॉल ने FCI की व्यापक गतिविधियों जैसे MSP पर खरीद, वैज्ञानिक वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक्स और TPDS वितरण की झलक भी प्रस्तुत की। लाइव प्रदर्शन और डिजिटल टूल्स ने FCI की गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली और तकनीकी एकीकरण, जैसे AI-आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम और Depot Online System (DOS), को प्रदर्शित किया।

FCI की वर्ल्ड फूड इंडिया 2025 में भागीदारी न केवल जानकारीपूर्ण थी, बल्कि प्रभावशाली भी रही। इसने रचनात्मक संवाद, नए संपर्क और सार्वजनिक समझ को बढ़ाया कि कैसे FCI राष्ट्र की खाद्य अर्थव्यवस्था का समर्थन करता है। OMSS (D) पर ध्यान केंद्रित करना मूल्य संवेदनशीलता और बाजार स्थिरीकरण के संदर्भ में अत्यंत प्रासंगिक संदेश था।

इस कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति के माध्यम से FCI ने पारदर्शिता, दक्षता और नवाचार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और राष्ट्र की सेवा अपने स्थायी आदर्श वाक्य “Food for All, Life for All” के साथ जारी रखी।

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