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पूर्वोत्तर में एकीकृत पर्यटन विकास को गति: केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 4वीं उच्च-स्तरीय टास्क फोर्स बैठक में किया मार्गदर्शन

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केंद्रीय संचार और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री, ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने आज नई दिल्ली में आयोजित पर्यटन पर 4वीं उच्च-स्तरीय टास्क फोर्स (HLTF) बैठक में भाग लिया। इस बैठक की अध्यक्षता मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा ने की। इसमें त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा, सिक्किम के पर्यटन मंत्री त्शेरिंग टी. भूटिया, अरुणाचल प्रदेश के पर्यटन मंत्री पासंग दोर्जे सोना तथा पर्यटन मंत्रालय के संयुक्त सचिव एम.आर. सिनरेम भी उपस्थित रहे।

बैठक ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए एक एकीकृत और क्रियाशील पर्यटन ब्लूप्रिंट तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाया। इसमें प्राथमिकताओं को स्पष्ट करने, चुनौतियों की पहचान करने और राज्यों के बीच समन्वित कार्यान्वयन को तेज करने पर विशेष जोर दिया गया।

बैठक के प्रमुख बिंदु इस प्रकार रहे:

🌄 पर्यटन क्षमता को अनलॉक करने पर जोर

  • मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी को मजबूत करना

  • विश्वस्तरीय पर्यटन अवसंरचना का विकास

  • वैश्विक आकर्षण वाले प्रमुख पर्यटन स्थलों का निर्माण

  • एडवेंचर एवं इको-टूरिज्म को बढ़ावा

  • संस्कृति, प्रकृति और विरासत आधारित नए पर्यटन उत्पाद विकसित करना

🧭 कौशल विकास व सेवा मानकीकरण

  • स्थानीय युवाओं के लिए स्किलिंग इकोसिस्टम का विस्तार

  • सेवा मानकों को एकरूप करना

  • क्षमता-विकास को सुदृढ़ कर सतत उद्योग विकास को बढ़ावा

🌐 उत्तरी-पूर्व का एकीकृत ब्रांडिंग अभियान

  • पूर्वोत्तर भारत को एक प्रीमियम पर्यटन क्षेत्र के रूप में वैश्विक मंच पर स्थापित करना

  • नीतिगत प्रक्रियाओं को सरल बनाकर निजी निवेश आकर्षित करना

  • राज्यों के बीच मजबूत समन्वय से सहज पर्यटन सर्किट विकसित करना

🗣️ मंत्री सिंधिया के प्रमुख विचार

मंत्री सिंधिया ने कहा कि पूर्वोत्तर भारत, भारत की सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक धरोहर का शक्ति-केंद्र है और इसे देश के सबसे आकर्षक पर्यटन गंतव्यों में परिवर्तित किया जा सकता है। उन्होंने जोर दिया:

  • अंतिम मील कनेक्टिविटी का सुदृढ़ीकरण

  • स्थिरता-आधारित पर्यटन विकास

  • हर राज्य के प्रमुख त्योहारों का वार्षिक कैलेंडर तैयार करना

📝 अगले कदम

केंद्रीय मंत्री ने मेघालय सरकार से अनुरोध किया कि सभी सदस्यों की सुझावों को शामिल कर अंतिम HLTF रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।

यह बैठक पूर्वोत्तर क्षेत्र में टिकाऊ, समन्वित और व्यापक पर्यटन विकास की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हुई।

गंगटोक में आयोजित होगा उत्तर-पूर्व क्षेत्र का 13वां अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट 2025

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भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के लिए 13वां अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट (ITM) का आयोजन 13 से 16 नवंबर 2025 तक गंगटोक, सिक्किम में किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत करेंगे। इस अवसर पर सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग, अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू, उत्तर-पूर्वी राज्यों के पर्यटन मंत्री एवं पर्यटन मंत्रालय तथा राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे।

अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट, पर्यटन मंत्रालय की एक वार्षिक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य उत्तर-पूर्वी क्षेत्र — “भारत की अष्टलक्ष्मी” — की पर्यटन संभावनाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करना है। यह आयोजन क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विविधता और साहसिक पर्यटन की संभावनाओं को रेखांकित करते हुए सतत और समावेशी पर्यटन विकास को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है। गंगटोक में आयोजित यह 13वां संस्करण मंत्रालय की इस प्रतिबद्धता को दोहराता है कि उत्तर-पूर्व को ईको-टूरिज़्म, वेलनेस, संस्कृति और एडवेंचर के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित किया जाएगा।

गंगटोक में इस आयोजन का विशेष महत्व है। सिक्किम को सतत और जिम्मेदार पर्यटन का आदर्श राज्य माना जाता है। स्वच्छ प्राकृतिक सौंदर्य, जैविक खेती, आध्यात्मिक विरासत और जीवंत स्थानीय संस्कृति के कारण सिक्किम उस सामुदायिक और पर्यावरण-सचेत पर्यटन का उत्कृष्ट उदाहरण है जिसे मंत्रालय पूरे देश में प्रोत्साहित करना चाहता है। यह आयोजन मंत्रालय की ‘ट्रैवल फॉर लाइफ’ पहल के अनुरूप है।

13वें अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट में देश-विदेश से व्यापक भागीदारी होगी। 19 देशों (जैसे स्पेन, थाईलैंड, फ्रांस, रूस, जर्मनी, वियतनाम आदि) से प्रतिनिधि भाग लेंगे। इस कार्यक्रम में 39 अंतरराष्ट्रीय टूर ऑपरेटर, 5 अंतरराष्ट्रीय इन्फ्लुएंसर, 50 घरेलू खरीदार, 20 घरेलू इन्फ्लुएंसर एवं ट्रैवल मीडिया, और 91 घरेलू विक्रेता शामिल होंगे। आयोजन में तकनीकी सत्र, पैनल चर्चाएं, उत्पाद प्रस्तुतिकरण और B2B मीटिंग्स आयोजित की जाएंगी ताकि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन हितधारकों के बीच सहयोग को बढ़ावा मिल सके।

राज्य पर्यटन अधिकारियों के साथ चर्चाएं सिनेमैटिक टूरिज्म, होमस्टे, युवा उद्यमिता, डिजिटल नवाचार, स्थायित्व और साहसिक पर्यटन जैसे विषयों पर केंद्रित होंगी। कार्यक्रम में उत्तर-पूर्व की समृद्ध सांस्कृतिक और कलात्मक परंपराओं को भी प्रदर्शित किया जाएगा। साथ ही, प्रतिभागियों को गंगटोक और उसके आसपास के प्रमुख स्थलों जैसे रुमटेक मठ, दो द्रुल छोर्टेन और नामग्याल तिब्बतोलॉजी संस्थान के तकनीकी भ्रमण का अवसर भी मिलेगा।

उत्पाद प्रस्तुतियों में वन्यजीव और नदी क्रूज़ पर्यटन, त्योहारों, विरासत, हस्तशिल्प, खानपान और साहसिक गतिविधियों जैसे क्षेत्रों की संभावनाएं प्रदर्शित की जाएंगी। आयोजन के बाद, अंतरराष्ट्रीय और घरेलू प्रतिभागियों के लिए उत्तर-पूर्वी राज्यों के विभिन्न गंतव्यों की यात्राओं का आयोजन किया जाएगा ताकि वे क्षेत्र की सांस्कृतिक और प्राकृतिक संपदा का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त कर सकें।

गंगटोक में आयोजित 13वां अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट 2025, उत्तर-पूर्व की अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विविधता का उत्सव होने के साथ-साथ, सरकार की इस दृष्टि को भी सुदृढ़ करता है कि उत्तर-पूर्व को वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। अपनी शांत प्राकृतिक दृश्यों, जीवंत समुदायों और सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता के साथ, सिक्किम इस ऐतिहासिक आयोजन के लिए एक आदर्श पृष्ठभूमि प्रस्तुत करता है — जो एकता में विविधता और जिम्मेदार पर्यटन आधारित विकास की भावना का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल से पर्यटन के अंतर्राष्ट्रीय पटल पर उभर रहा है जशपुर

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 जर्मन मेहमानों को जशपुर की जनजातीय संस्कृति ने किया मंत्रमुग्ध

रायपुर-मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की प्रेरणा और राज्य सरकार की पर्यटन संवर्धन नीतियों के अंतर्गत जशपुर अब विश्व पर्यटन मानचित्र पर अपनी जगह बना रहा है। इसकी झलक हाल ही में तब देखने को मिली जब जर्मनी से आए पर्यटक बर्नहार्ड और  फ्रांजिस्का जशपुर की जनजातीय संस्कृति, कला और आत्मीयता से गहराई से प्रभावित हुए।

दोनों पर्यटकों ने क्षेत्रीय स्टार्टअप “ट्रिप्पी हिल्स” के अनुभवात्मक पर्यटन कार्यक्रम के तहत जनजातीय जीवन की बारीकियों को समझा। यात्रा की शुरुआत मलार समुदाय से हुई, जो अपने उत्कृष्ट हस्तनिर्मित आभूषणों और शिल्पकला के लिए प्रसिद्ध है। इन कारीगरों की रचनात्मकता ने विदेशी मेहमानों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा के गांव में उन्होंने पारंपरिक जीवनशैली और प्रकृति के साथ गहरे संबंध को महसूस किया। वहीं अगरिया समुदाय के दौरे में लौह गलाने की पारंपरिक तकनीक का जीवंत प्रदर्शन हुआ, जिसने दोनों अतिथियों को आश्चर्यचकित कर दिया। यात्रा का समापन स्थानीय हाट-बाजार में हुआ, जहाँ रंगीन वस्त्र, मिट्टी की खुशबू और पारंपरिक जनजातीय संगीत ने जशपुर की जीवंत सांस्कृतिक धड़कन को अभिव्यक्त किया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हमेशा इस बात पर बल दिया है कि जशपुर की जनजातीय संस्कृति केवल धरोहर नहीं, बल्कि पर्यटन विकास का सशक्त माध्यम भी है। उनके नेतृत्व में जशपुर में सड़क, संचार और सुविधाओं के प्रसार से नए पर्यटन मार्ग तैयार हो रहे हैं। “कल्चर देवी” और “अनएक्सप्लॉरड बस्तर” जैसे संगठनों के सहयोग से स्थानीय समुदायों को भी अपने हुनर को दुनिया के सामने लाने का अवसर मिला है। यह अनूठा सांस्कृतिक अनुभव इस बात का प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति अब वैश्विक आकर्षण का केंद्र बन रही है, जहाँ परंपरा, प्रकृति और आधुनिकता का सुंदर संगम नजर आता है।




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