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अवैध रेत उत्खनन पर बड़ी कार्रवाई : तीन चैन माउंटेन मशीन और एक हाईवा वाहन जप्त

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर खनिजों के अवैध उत्खनन एवं परिवहन के विरुद्ध लगातार जारी है अभियान

केंद्रीय खनि उड़नदस्ता एवं जिला स्तरीय संयुक्त टीम की कार्रवाई

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में खनिज संसाधनों के अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में खनिज विभाग की केंद्रीय खनि उड़नदस्ता एवं जिला स्तरीय संयुक्त टीम द्वारा जिला गरियाबंद में बड़ी कार्रवाई की गई है।

खनिज विभाग के सचिव और संचालक के निर्देशानुसार केंद्रीय खनि उड़नदस्ता की संयुक्त टीम ने दिनांक 08 जून 2026 को औचक निरीक्षण के दौरान जिला गरियाबंद के तहसील राजिम अंतर्गत ग्राम कुरुसकेरा स्थित पैरी नदी में गौण खनिज साधारण रेत के अवैध उत्खनन एवं मशीनों के माध्यम से नियम विरुद्ध रेत उत्खनन का मामला पाया। जांच के दौरान खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 21 के तहत कार्रवाई करते हुए तीन चैन माउंटेन मशीनों को जप्त कर सील किया गया। साथ ही खदान संचालक एवं मशीन मालिकों को जवाब प्रस्तुत करने हेतु नोटिस जारी किया गया है। इसके अतिरिक्त अवैध रेत परिवहन में संलिप्त एक हाईवा वाहन को भी जप्त कर राजिम थाना में सुरक्षार्थ खड़ा कराया गया है।

कार्रवाई के दौरान केंद्रीय खनि उड़नदस्ता की संयुक्त जांच टीम तथा जिला स्तरीय अधिकारियों की टीम उपस्थित रही।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि राज्य सरकार प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा खनिज संपदा के नियमानुसार उपयोग के लिए प्रतिबद्ध है। अवैध उत्खनन एवं परिवहन में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा तथा दोषियों पर नियमानुसार कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। खनिज साधन विभाग के सचिव ने कहा कि प्रदेश में खनिज संसाधनों के अवैध दोहन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सतत निगरानी की जा रही है। विभागीय अमला एवं उड़नदस्ता दलों को नियमित निरीक्षण और त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

खारंग नदी क्षेत्र में हादसे पर प्रशासन सख्त, अवैध उत्खनन पर लगातार कार्रवाई

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ट्रैक्टर पलटने की घटना की जांच पूरी, अवैध रेत उत्खनन पर कड़ी निगरानी

रायपुर- बिलासपुर जिले के खारंग नदी क्षेत्र में हुई दुर्घटना की जांच के बाद खनिज विभाग और जिला प्रशासन ने अवैध रेत उत्खनन पर सख्त रुख अपनाया है। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर संबंधित वाहन मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी गई है, वहीं छत्तीसगढ राज्य में अवैध खनन, परिवहन और भंडारण के विरुद्ध लगातार अभियान चलाया जा रहा है।

बिलासपुर जिले के खनिज अमले द्वारा खारंग नदी क्षेत्र में हुई दुर्घटना की विस्तृत जांच की गई। जांच के दौरान ग्राम गढ़वट में सरपंच, पंचगण एवं ग्रामीणों की उपस्थिति में घटना स्थल का निरीक्षण किया गया। जांच में सामने आया कि 8-9 अप्रैल की मध्य रात्रि में दो युवक नदी क्षेत्र में गए थे, जहां ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटने की घटना हुई। इस घटना में एक युवक की मृत्यु हो गई, जबकि दूसरा घायल हुआ। मौके पर प्रत्यक्षदर्शी नहीं मिले, बल्कि ग्रामीणों से मिली जानकारी के आधार पर घटना की पुष्टि हुई।

प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित ट्रैक्टर-ट्रॉली ग्राम गढ़वट निवासी तोषण कुमार कश्यप के नाम से जुड़ी है। इस आधार पर पुलिस थाना रतनपुर में वाहन मालिक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 105 एवं 238(बी) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि दोनों युवक नदी क्षेत्र में रेत उत्खनन के उद्देश्य से गए थे। हालांकि घटना स्थल पर अवैध उत्खनन के प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं मिले, लेकिन क्षेत्र में बनाए गए कच्चे मार्ग और ट्रैक्टर के आवागमन के संकेत पाए गए।

खनिज विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिले में अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। वर्ष 2024-25 में  गढ़वट और आसपास के इलाके में कुल 47 प्रकरण दर्ज कर लगभग 6.95 लाख रुपये की वसूली की गई, जबकि वर्ष 2025-26 में अब तक 22 प्रकरण दर्ज कर 3.19 लाख रुपये से अधिक की कार्रवाई की जा चुकी है। पूर्व में भी गढ़वट क्षेत्र में अवैध परिवहन के मामलों में ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त कर प्रकरण दर्ज किए गए थे। विभाग द्वारा पंचायत स्तर पर भी अवैध उत्खनन रोकने के लिए समय-समय पर निर्णय और जागरूकता प्रयास किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अवैध खनन किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संबंधित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है और दोषियों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई जारी रहेगी।

जिला प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने की गई कार्रवाई- ग्राम समोदा में हटाई गई अवैध कब्जा

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दुर्ग- जिले के जनपद पंचायत दुर्ग के अतंर्गत ग्राम समोदा में जिला प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई की गई, अवैध कब्जों पर जेसीबी के माध्यम से शासकीय भूमि रिक्त कराई गई। कलेक्टर अभिजीत सिंह के निर्देश पर अतिरिक्त तहसीलदार क्षमा यदु द्वारा राजस्व अमले और पुलिस विभाग के सहयोग से ग्राम समोदा राजस्व निरीक्षक मंडल जेवरा सिरसा तहसील व जिला दुर्ग के अतंर्गत शासकीय घास भूमि खसरा नम्बर 778 रकबा 0.13 हेक्टेयर भूमि पर किये गये अवैध पक्का दुकान निर्माण, टीन सेड लगाकर दुकान निर्माण तथा सीमेंट पोल लगाकर किया गया तार घेरा को हटाने की कार्रवाई की गई। 

ग्राम के ही ब्रजेश ताम्रकार पिता गिरजाशंकर ताम्रकार द्वारा उक्त शासकीय भूमि पर अतिक्रमण कर निर्माण कार्य किया गया था। अतिक्रमण हटाने के दौरान राजस्व निरीक्षक रेखा शुक्ला, पटवारी चन्द्रिका प्रसाद खरें, शत्रुहन मिश्रा, अनिता साहू, संदीप देशमुख और पुलिस विभाग के अधिकारी तथा पंचायत जनप्रतिनिधि एवं स्थानीय ग्रामीणजन मौजूद थे। 




जनजाति समाज की जमीनों पर अवैध कब्जे, CM के निर्देश पर सख्त कार्रवाई शुरू

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रायपुर- मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के निर्देश पर छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में पंडो जनजाति की जमीनों पर अवैध कब्जे के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू हुई है। भू-राजस्व संहिता की धारा 170(बी) के तहत मामला दर्ज कर SDM ने नोटिस जारी किया गया, जिसमें 20 मार्च को सुनवाई निर्धारित की गई है।


 घटना का विवरण 

पंडो जनजाति, जो विशेष पिछड़ी जनजाति (PVTG) के रूप में राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र माने जाते हैं, उनकी पुश्तैनी जमीनों पर गैर-आदिवासी लोगों द्वारा कब्जा और अवैध नामांतरण का मामला सामने आया है। सूरजपुर और बलरामपुर जैसे जिलों में राजस्व कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से यह हेराफेरी हुई, जहां 1 से 5 एकड़ तक जमीन लीज के नाम पर हस्तांतरित कर ली गई। 

 जांच के लिए कानूनी आधार 

छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 170(बी) आदिवासी भूमि के गैर-आदिवासियों को बिना कलेक्टर की अनुमति हस्तांतरण को अवैध घोषित करती है। ऐसे मामलों में जमीन मूल मालिक को वापस की जा सकती है, और दोषियों पर विभागीय कार्रवाई हो सकती है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर SDM ने तत्काल नोटिस जारी कर 20 मार्च को सुनवाई तय की, जिसमें कब्जा हटाने और नामांतरण रद्द करने पर फैसला होगा। 

त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई 

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद कमिश्नर और कलेक्टर  ने जांच के आदेश दिए हैं, जिसमें पटवारी व अन्य राजस्व अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल शामिल है। पंडो समाज ने ज्ञापन सौंपकर जमीन वापसी और दोषियों पर सख्ती की मांग की है, अन्यथा आंदोलन की चेतावनी दी। यह कार्रवाई आदिवासी भूमि सुरक्षा के लिए राज्य स्तर पर निगरानी बढ़ाने का संकेत देती है।

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