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वाइस एडमिरल एएन प्रमोद, एवीएसएम, वाईएसएम ने 01 अगस्त 2026 को उप नौसेना प्रमुख (Deputy Chief of Naval Staff) का पदभार ग्रहण किया।

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38वें इंटीग्रेटेड कैडेट कोर्स, नौसेना अकादमी, गोवा के पूर्व छात्र वाइस एडमिरल एएन प्रमोद को 01 जुलाई 1990 को भारतीय नौसेना में कमीशन प्राप्त हुआ था। वे श्रेणी ‘A’ (CAT ‘A’) सी किंग एयर ऑपरेशंस ऑफिसर तथा संचार एवं इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (Communication and Electronic Warfare) विशेषज्ञ हैं। उन्होंने डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन तथा नेवल वॉर कॉलेज, गोवा से नेवल हायर कमांड कोर्स भी किया है।

36 वर्षों से अधिक के अपने विशिष्ट सैन्य करियर में उन्होंने समुद्र और तट—दोनों क्षेत्रों में कमान, संचालन, प्रशिक्षण और स्टाफ से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण दायित्व निभाए हैं। उनके प्रमुख समुद्री दायित्वों में गाइडेड मिसाइल विध्वंसक आईएनएस राजपूत के कार्यकारी अधिकारी (Executive Officer), पनडुब्बी रोधी युद्धक गश्ती पोत आईएनएस अभय, लैंडिंग शिप टैंक (लार्ज) आईएनएस शार्दुल तथा गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट आईएनएस सतपुड़ा की कमान शामिल है। उन्होंने गलवान घटना के बाद ऑपरेशन स्नो लेपर्ड के दौरान पश्चिमी बेड़े (Western Fleet) के फ्लीट ऑपरेशंस ऑफिसर के रूप में भी सेवाएं दीं। इसके अतिरिक्त उन्होंने वर्ष 1999 के ऑपरेशन विजय तथा वर्ष 2001 के ऑपरेशन पराक्रम में भी भाग लिया।

तटीय नियुक्तियों में उन्होंने श्री विजयपुरम स्थित नौसेना वायु स्टेशन आईएनएस उत्क्रोश के कमांडिंग ऑफिसर के रूप में कार्य किया तथा डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन में डायरेक्टिंग स्टाफ के रूप में भी सेवाएं दीं। नौसेना मुख्यालय में उनकी प्रमुख नियुक्तियों में संयुक्त निदेशक (नेवल एयर स्टाफ), निदेशक तथा प्रधान निदेशक (विमान अधिग्रहण) शामिल रहे। वे वर्ष 2006 से 2009 तक टैक्टिकल ऑडिट ग्रुप तथा वर्ष 2016 से 2019 तक भारतीय नौसेना की स्ट्रैटेजिक एंड ऑपरेशनल काउंसिल के सदस्य भी रहे।

रियर एडमिरल के पद पर पदोन्नति के बाद उन्होंने भारतीय नौसेना अकादमी के उप कमांडेंट, सहायक नौसेना प्रमुख (वायु) तथा फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग, महाराष्ट्र नौसैनिक क्षेत्र के रूप में दायित्व निभाए।

वाइस एडमिरल के पद पर पदोन्नति के उपरांत उन्होंने 13 दिसंबर 2023 से 31 जुलाई 2026 तक महानिदेशक नौसैनिक संचालन (Director General Naval Operations – DGNO) के रूप में कार्य किया। डीजीएनओ के रूप में वे ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय नौसेना की योजना, तैयारी और परिचालन तत्परता तथा पश्चिम एशिया में जारी संकट के दौरान समुद्री सुरक्षा अभियानों के संचालन में महत्वपूर्ण रूप से जुड़े रहे।

उनकी विशिष्ट सेवाओं और उत्कृष्ट परिचालन नेतृत्व के सम्मान में उन्हें वर्ष 2024 में अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM) तथा वर्ष 2025 में युद्ध सेवा पदक (YSM) से सम्मानित किया गया।

उन्होंने वाइस एडमिरल तरुण सोबती, यूवाईएसएम, एवीएसएम, वीएसएम का स्थान लिया है, जो 38 वर्षों से अधिक की विशिष्ट सेवा के बाद 31 जुलाई 2026 को सेवानिवृत्त हुए।

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