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देहरादून में स्वामी राम हिमालयन यूनिवर्सिटी के 8वें दीक्षांत समारोह को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने संबोधित किया

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केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज देहरादून स्थित स्वामी राम हिमालयन यूनिवर्सिटी के 8वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए छात्रों को उनकी शैक्षणिक यात्रा पूरी करने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह वर्षों की मेहनत और समर्पण का परिणाम है और यह सेवा व जिम्मेदारी के नए चरण की शुरुआत भी है।

मंत्री नड्डा ने छात्रों से चिकित्सा पेशे के उच्चतम आदर्शों को अपनाने, निरंतर उत्कृष्टता के लिए प्रयास करने और मानवता की सेवा में अपने ज्ञान और कौशल को समर्पित करने का आह्वान किया।

उन्होंने पिछले 11 वर्षों में भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में हुई बड़ी प्रगति का उल्लेख करते हुए बताया कि देश में AIIMS की संख्या 6 से बढ़कर 23 हो गई है। उन्होंने बताया कि संस्थागत प्रसव दर लगभग 89% तक पहुँच गई है, मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है, और भारत ने वैश्विक औसत से तेज़ी से पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में कमी दर्ज की है।

केंद्रीय मंत्री ने कोविड-19 टीकाकरण अभियान, आयुष्मान भारत योजना, आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च में कमी, टीबी और मलेरिया नियंत्रण, तथा 1.82 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की स्थापना जैसी उपलब्धियों को भी रेखांकित किया।

उन्होंने कहा कि भारत की स्वास्थ्य प्रणाली की असली ताकत समर्पित और संवेदनशील चिकित्सा पेशेवरों में निहित है।



AFMS, AIIMS और स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुरू किया भारत का पहला AI-आधारित डायबिटिक रेटिनोपैथी सामुदायिक स्क्रीनिंग कार्यक्रम

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सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं (AFMS) ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेत्र विज्ञान केंद्र (RPC), एम्स तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) की ई-हेल्थ AI इकाई के सहयोग से मधुमेह जनित रेटिनोपैथी (Diabetic Retinopathy–DR) के लिए भारत का पहला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सामुदायिक स्क्रीनिंग कार्यक्रम 16 दिसंबर, 2025 को नई दिल्ली में शुरू किया। यह पहल मधुमेह से होने वाली नेत्र बीमारियों की शीघ्र पहचान को सुदृढ़ करने और रीयल-टाइम राष्ट्रीय स्वास्थ्य इंटेलिजेंस ढांचे के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

कार्यक्रम का उद्घाटन आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल), नई दिल्ली में डायरेक्टर जनरल, सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाएं, सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरिन तथा आरपीसी, एम्स की प्रमुख प्रो. राधिका टंडन द्वारा किया गया। यह सहयोग AFMS की व्यापक क्लिनिकल पहुंच, एम्स की अकादमिक नेतृत्व क्षमता और MoHFW की डिजिटल नवाचार विशेषज्ञता को एक साथ लाकर एक बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती का समाधान प्रस्तुत करता है।

यह कार्यक्रम मधुनेत्रAI (MadhuNetrAI) पर आधारित है—जो आरपीसी, एम्स द्वारा विकसित एक वेब-आधारित AI टूल है। यह प्लेटफॉर्म हैंडहेल्ड फंडस कैमरों से ली गई रेटिनल छवियों की स्वचालित स्क्रीनिंग, ग्रेडिंग और ट्रायजिंग को सक्षम बनाता है, जिससे प्रशिक्षित चिकित्सा अधिकारी, नर्सिंग स्टाफ और स्वास्थ्य सहायक समुदाय स्तर पर स्क्रीनिंग कर सकते हैं। साथ ही, यह प्रणाली रोग की व्यापकता और भौगोलिक वितरण पर रीयल-टाइम डेटा उपलब्ध कराती है, जिससे साक्ष्य-आधारित योजना और नीति निर्माण में सहायता मिलती है।

पायलट चरण के अंतर्गत AFMS इस पहल को पुणे, मुंबई, बेंगलुरु, धर्मशाला, गया, जोरहाट और कोच्चि—इन सात स्थानों पर लागू करेगा, जो महानगरीय, ग्रामीण, पहाड़ी, तटीय और दूरस्थ क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं। प्रत्येक स्थल से चयनित कर्मियों को आरपीसी, एम्स में गहन प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसके बाद बड़े पैमाने पर सामुदायिक स्क्रीनिंग की जाएगी।

जिन मरीजों में डायबिटिक रेटिनोपैथी की पहचान होगी, उन्हें उचित मधुमेह प्रबंधन के लिए संदर्भित किया जाएगा, जबकि दृष्टि-घातक DR मामलों को नामित जिला अस्पतालों में विट्रियो-रेटिना विशेषज्ञों के पास भेजा जाएगा। जिला स्वास्थ्य प्रशासन रेफरल तंत्र का समन्वय करेगा और DR प्रबंधन को मौजूदा गैर-संचारी रोग (NCD) कार्यक्रमों के साथ एकीकृत करेगा, ताकि निरंतर देखभाल सुनिश्चित हो सके।

उद्घाटन अवसर पर कार्यक्रम की कार्यप्रणाली और संचालन दिशानिर्देशों का विवरण देने वाली एक कम्पेंडियम भी जारी की गई। सहयोग स्थापित करने में आर्मी हॉस्पिटल (R&R) के नेत्र विज्ञान विभागाध्यक्ष एवं परामर्शदाता ब्रिगेडियर एस. के. मिश्रा के योगदान को सराहा गया। यह पहल विस्तारणीय और दोहराने योग्य मॉडल के रूप में परिकल्पित है, जो AFMS, एम्स और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के संयुक्त प्रयासों से सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों में AI-सक्षम समाधानों के प्रभावी एकीकरण का उदाहरण प्रस्तुत करती है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने पूरे भारत में CPR जागरूकता सप्ताह 2025 का सफल आयोजन किया

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स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने 13 से 17 अक्टूबर 2025 तक पूरे भारत में CPR जागरूकता सप्ताह का आयोजन किया

उद्देश्य:

इस पहल का उद्देश्य सार्वजनिक समझ और व्यावहारिक क्षमता को बढ़ाना था, विशेष रूप से Compression-only Cardiopulmonary Resuscitation (CPR) के क्षेत्र में। इसका लक्ष्य नागरिकों को हृदयाघात और अन्य चिकित्सा आपात स्थितियों में त्वरित बाईस्टैंडर हस्तक्षेप के महत्व के प्रति जागरूक करना था।

हालांकि CPR जीवन रक्षक साबित हो चुका है, भारत में बाईस्टैंडर CPR की दरें वैश्विक मानकों से कम हैं। इस सप्ताह-लंबे अभियान के माध्यम से मंत्रालय ने व्यापक CPR प्रशिक्षण, जागरूकता और व्यवहारिक तत्परता को बढ़ावा देने का प्रयास किया।

मुख्य उद्देश्य:

  • CPR के महत्व पर सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाना।

  • विभिन्न हितधारकों के माध्यम से व्यावहारिक प्रशिक्षण और प्रदर्शन प्रदान करना।

  • युवाओं की भागीदारी और समुदायिक तैयारी को प्रोत्साहित करना।

  • डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करके व्यापक सार्वजनिक पहुँच और सहभागिता सुनिश्चित करना।

कार्यान्वयन:

इस पहल को पूरे देश में कई हितधारकों के समन्वित प्रयासों के माध्यम से लागू किया गया।

  • राज्य और संघ शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग ने क्षेत्र स्तर पर प्रशिक्षण और जागरूकता गतिविधियाँ आयोजित की।

  • केंद्रीय मंत्रालय/संस्थान जैसे गृह मंत्रालय, रक्षा, श्रम एवं रोजगार, युवा मामले, खेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी, उच्च शिक्षा, स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता, रेलवे, स्वास्थ्य अनुसंधान और NDMA ने विभिन्न समाज वर्गों तक पहुंच सुनिश्चित की।

  • केंद्रीय सरकारी अस्पताल, AIIMS, राष्ट्रीय महत्व के संस्थान और मंत्रालय के अंतर्गत स्वायत्त संस्थान प्रशिक्षण और जागरूकता सत्र आयोजित किए।

  • भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी ने राज्य, संघ शासित प्रदेश और जिला स्तर पर सामुदायिक CPR प्रशिक्षण में योगदान दिया।

  • पेशेवर संगठन अपने राज्य अध्यायों के माध्यम से प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए।

  • डिजिटल पहुँच और युवा सहभागिता को MyGov और MyBharat प्लेटफॉर्म के माध्यम से बढ़ावा दिया गया।

अभियान की प्रमुख गतिविधियाँ:

  • उद्घाटन लाइव प्रण और CPR प्रदर्शन में 14,701 प्रतिभागियों ने ECHO प्लेटफॉर्म और YouTube Live के माध्यम से भाग लिया।

  • डिजिटल प्रण में 79,870 नागरिकों ने CPR जागरूकता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता ली।

  • “CPR तकनीक और बाईस्टैंडर की भूमिका” पर पैनल चर्चा में AIIMS नई दिल्ली, Dr. RML Hospital, Safdarjung Hospital और SGT Medical College के 6 विशेषज्ञ शामिल हुए। 10,129 प्रतिभागियों ने ECHO और YouTube Live के माध्यम से सत्र में भाग लिया।

  • देश भर में Compression-only CPR का व्यापक प्रशिक्षण आयोजित किया गया, जिसमें कुल 6,06,374 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

  • निर्माण भवन में केंद्रीय कर्मचारियों, CISF कर्मियों, हाउसकीपिंग स्टाफ और विभिन्न मंत्रालयों के अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए, जिनमें 264 प्रतिभागियों ने लाभ लिया।

  • 16 अक्टूबर को PMO के 70 अधिकारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया।

  • MyGov और MyBharat प्लेटफॉर्म पर CPR क्विज़ आयोजित की गई, जिसमें 36,040 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

  • Volunteer for Bharat पहल के तहत 368 युवाओं ने सप्ताह भर CPR जागरूकता में सक्रिय योगदान दिया।

  • सोशल मीडिया और डिजिटल गतिविधियों के माध्यम से व्यापक जागरूकता उत्पन्न की गई, जिसमें CPR पर शैक्षिक वीडियो और विशेषज्ञ साक्षात्कार शामिल थे।

  • 13 अक्टूबर को सचिव (स्वास्थ्य) की उपस्थिति में CPR का लाइव प्रदर्शन कई समाचार एजेंसियों द्वारा कवरेज किया गया। 19 अक्टूबर को DD News पर “Total Health – Medical Emergency” विशेष कार्यक्रम प्रसारित हुआ।

परिणाम:

इन बहुआयामी गतिविधियों के माध्यम से 7,47,000 से अधिक नागरिकों को शामिल किया गया और 6,06,374 प्रतिभागियों को देश भर में व्यावहारिक CPR प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

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