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छह महीने तक के शिशुओं के खाद्य उत्पादों में अतिरिक्त चीनी पर रोक का प्रस्ताव!

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भारत में शिशुओं के पोषण और खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव सामने आया है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने छह महीने तक के शिशुओं के लिए बनाए जाने वाले खाद्य उत्पादों में सुक्रोज (Sucrose) और फ्रक्टोज (Fructose) मिलाने पर रोक लगाने के लिए मसौदा संशोधन जारी किया है।

इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य शिशु के जीवन के शुरुआती महीनों में खाद्य उत्पादों के माध्यम से अनावश्यक अतिरिक्त शर्करा के सेवन को रोकना और शिशु आहार के पोषण मानकों को बेहतर बनाना है।

सबसे महत्वपूर्ण बात: यह अभी प्रस्तावित संशोधन है, अंतिम रूप से लागू नियम नहीं। मसौदे पर संबंधित पक्षों से 60 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियाँ आमंत्रित की गई हैं।

FSSAI का प्रस्ताव क्या है?

FSSAI देश में खाद्य पदार्थों की सुरक्षा और उनसे जुड़े मानकों को निर्धारित करने वाली प्रमुख नियामक संस्था है। इसके प्रस्तावित संशोधन का संबंध छह महीने तक के शिशुओं के लिए तैयार किए जाने वाले खाद्य उत्पादों से है।

मसौदे के अनुसार, इन उत्पादों में सुक्रोज और फ्रक्टोज मिलाने पर रोक लगाने का प्रस्ताव है।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिशुओं के लिए तैयार खाद्य पदार्थों में अनावश्यक रूप से चीनी न मिलाई जाए और उनके पोषण संबंधी मानक वैज्ञानिक जरूरतों के अनुरूप हों।

सुक्रोज और फ्रक्टोज क्या हैं?

सुक्रोज (Sucrose): यह सामान्य चीनी का प्रमुख प्रकार है, जिसका इस्तेमाल कई खाद्य पदार्थों को मीठा बनाने के लिए किया जाता है।

फ्रक्टोज (Fructose): यह एक प्रकार की सरल शर्करा है, जो फलों और कुछ अन्य खाद्य पदार्थों में प्राकृतिक रूप से पाई जाती है। इसका इस्तेमाल कुछ खाद्य उत्पादों को मीठा बनाने के लिए भी किया जाता है।

यहाँ एक जरूरी अंतर समझना चाहिए: प्रस्ताव का विषय शिशुओं के निर्धारित खाद्य उत्पादों में इन शर्कराओं को अलग से मिलाने पर रोक है। इसे सभी प्राकृतिक रूप से मौजूद शर्कराओं पर पूर्ण प्रतिबंध के रूप में नहीं समझना चाहिए।

शुरुआती उम्र में अतिरिक्त चीनी से बचाव क्यों जरूरी है?

शिशु के जीवन के शुरुआती महीने वृद्धि और विकास के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान उचित पोषण, उम्र के अनुरूप आहार और सुरक्षित खाद्य उत्पादों का विशेष महत्व होता है।

अतिरिक्त चीनी को सीमित रखने के पीछे कई कारण हैं:

  • पोषण की गुणवत्ता: शिशु के आहार में उसकी जरूरतों के अनुरूप पोषक तत्वों को प्राथमिकता देना महत्वपूर्ण है।

  • अनावश्यक मिठास से बचाव: खाद्य उत्पादों को मीठा बनाने के लिए अतिरिक्त शर्करा मिलाने की जरूरत पर सवाल उठता है, खासकर शुरुआती शिशु आहार में।

  • स्वास्थ्य के लिए बेहतर आदतें: जीवन के शुरुआती वर्षों में अत्यधिक मीठे खाद्य पदार्थों के संपर्क को सीमित रखना स्वस्थ खानपान की दिशा में उपयोगी हो सकता है।

  • खाद्य मानकों में सुधार: स्पष्ट नियामकीय मानक निर्माताओं को शिशु खाद्य उत्पादों की संरचना और गुणवत्ता के संबंध में दिशा दे सकते हैं।

ध्यान रहे, ये प्रस्ताव के पीछे के संभावित पोषण संबंधी उद्देश्य हैं। किसी खास उत्पाद के स्वास्थ्य प्रभाव का आकलन उसकी पूरी संरचना और शिशु की उम्र के आधार पर किया जाना चाहिए।

मसौदे पर 60 दिनों में सुझाव और आपत्तियाँ

FSSAI ने प्रस्तावित संशोधन पर संबंधित पक्षों से 60 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियाँ आमंत्रित की हैं।

इस प्रक्रिया में खाद्य उत्पाद निर्माता, पोषण विशेषज्ञ, स्वास्थ्य क्षेत्र के जानकार और अन्य संबंधित पक्ष मसौदे पर अपनी राय दे सकते हैं।

सुझावों और आपत्तियों पर विचार करने के बाद नियामक प्राधिकरण आगे की प्रक्रिया तय कर सकता है। इसलिए प्रस्तावित प्रावधानों और अंतिम अधिसूचित नियमों के बीच अंतर समझना जरूरी है।

अभी यह कहना सही नहीं होगा कि प्रतिबंध अंतिम रूप से लागू हो चुका है।

स्तनपान से जुड़ी सलाह भी महत्वपूर्ण

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की स्थापित सलाह के अनुसार, जीवन के पहले छह महीनों में शिशु के लिए केवल माँ का दूध सर्वोत्तम पोषण का आधार है, जब तक कोई चिकित्सकीय कारण अलग सलाह न दे। FSSAI का यह प्रस्ताव शिशु आहार के मानकों को मजबूत करने की व्यापक पहल से जुड़ा है। 

माता-पिता को शिशु के लिए कोई भी फॉर्मूला या अन्य खाद्य उत्पाद चुनते समय उसकी उम्र के अनुरूपता, पैकेज पर दिए निर्देश और बाल रोग विशेषज्ञ की सलाह का ध्यान रखना चाहिए। फॉर्मूला दूध की मात्रा या प्रकार में बदलाव केवल चीनी संबंधी खबर के आधार पर न करें।

खबर से जुड़ी मुख्य बातें

  • नियामक संस्था: भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI)

  • मसौदा संशोधन: Food Safety and Standards (Foods for Infant Nutrition) Amendment Regulations, 2026

  • प्रस्तावित बदलाव: छह महीने तक के शिशुओं के लिए बने उत्पादों में सुक्रोज और फ्रक्टोज मिलाने पर रोक।

  • आपत्ति और सुझाव: राजपत्र की प्रतियाँ जनता के लिए उपलब्ध होने की तारीख से 60 दिनों के भीतर।

  • वर्तमान स्थिति: मसौदा प्रस्ताव; अंतिम नियम के रूप में लागू होने की पुष्टि नहीं।

निष्कर्ष: शिशुओं के शुरुआती पोषण को लेकर यह प्रस्ताव खाद्य सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। अब इस पर प्राप्त सुझावों के बाद अंतिम नियम क्या रूप लेते हैं, इस पर नजर रहेगी।


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