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सीआरपीएफ कैंप में हुआ राष्ट्रीय गीत वन्दे मातरम् का सामूहिक गायन, भारतीय राष्ट्रवाद में वंदे मातरम् गीत की भूमिका अहम

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आरंग। राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के आह्वान पर संपूर्ण देश में प्रथम चरण में 7 से 14 नवंबर तक राष्ट्रीय गीत का सामूहिक रूप से गायन व अन्य देशभक्ति कार्यक्रम आयोजित किया जा रहे हैं। जिसके तहत् सीआरपीएफ कैंप भिलाई में 7 नवम्बर को सामूहिक रूप से राष्ट्रीय गीत का गायन किया गया।

इस अवसर पर उप महानिरीक्षक अजय कुमार सिंह, ग्रुप केंद्र, सीआरपीए आरंग, रायपुर ने सभी अधिकारियों एवं जवानों के साथ वंदे मातरम का सामूहिक गायन किया एवं अपने संबोधन में कहा कि वंदे मातरम् भारत का राष्ट्रीय गीत है, 

जिसने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यह गीत बंकिम चंन्द्र चट्टोपाध्याय द्वारा संस्कृत और बंगाली मिश्रित भाषा में रचा गया था। यह गीत पहली बार 1882 में उनके प्रसिद्ध बंगाली उपन्यास "आनंद मठ" में एक अंतर्निहित गीत के रुप में प्रकाशित हुआ था। वंदे मातरम का अर्थ है– "मैं तुम्हें नमन करता हूँ, माँ"। यह गीत पहली बार 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में रवींद्रनाथ टेगोर के द्वारा गाया गया था।

24 जनवरी 1950 को भारत की संविधान सभा ने इसे भारत के राष्ट्रीय गीत के रुप में अपनाया और इसे राष्ट्रगान 'जन गण मन' के बराबर का दर्जा दिया। इस गीत के पूर्ण संस्करण को गाने में लगभग 65 सेकंड से 1 मिनट 5 सेकंड तक समय लगता है। यह गीत भारतीय राष्ट्रवाद और देश के प्रति प्रेम और भक्ति का एक शक्तिशाली प्रतीक हैं। 

इस कार्यक्रम में कमांडेंट अजय कुमार सिंह, उपकमांडेंट अजय सिंह, प्रियरंजन गुप्ता, सहायक कमांडेंट जावेद हुसैन, प्रवीण मोरे, लोकनाथन डी, निरीक्षक बाबूलाल गुर्जर, उपनिरीक्षक बृंदावन दहायत, उपनिरीक्षक ( महिला) बबीता दत्ता , वैशाली चौहान,एवं अन्य जवानों इत्यादि की उपस्थिति रही। उक्त कार्यक्रम के क्रियान्वयन व संचालन में अहम् भूमिका उप कमांडेंट अजय सिंह की रही।

अंत में सभी अधिकारियों व जवानों ने नई दिल्ली प्रसारित प्रधानमंत्री के कार्यक्रम को देखा और उनका संदेश सुना। इस अवसर पर बड़ी संख्या में सीआरपीएफ के अधिकारी, कर्मचारी व जवानों की उपस्थिति रही।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय का किया लोकार्पण

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रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज छत्तीसगढ़ की रजत जयंती समारोह के अवसर पर शहीद वीर नारायण सिंह आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्मारक सह संग्रहालय का लोकार्पण किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को संग्रहालय को उत्कृष्टता के साथ मूर्त रूप देने के प्रयासों के लिए बधाई और शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि संग्रहालय में छत्तीसगढ़ के वीर सेनानियों का देश के लिए योगदान जीवंत रूप में प्रदर्शित हो रहा है। यह आने वाली पीढ़ियों को हमारे वीर नायकों के शौर्य और बलिदान से परिचित कराता रहेगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि जनजातीय वर्गों की ऐतिहासिक गौरवगाथा, शौर्य और बलिदान का प्रतीक यह संग्रहालय-सह-स्मारक अब जनसमर्पित हो रहा है। यह संग्रहालय नई पीढ़ियों को हमारे पुरखों की वीरगाथाओं को अविस्मरणीय बनाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने संग्रहालय की विशेषताओं की जानकारी दी। बोरा ने बताया कि शहीद वीर नारायण सिंह आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्मारक सह संग्रहालय 50 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया गया है। यहां 14 गैलरियों में अंग्रेजी हुकूमत काल के जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की लगभग 650 मूर्तियाँ स्थापित की गई हैं। जनजातीय विद्रोहों को आसानी से समझाने के लिए डिजिटल माध्यमों की भी व्यवस्था की गई है।

परिसर में शहीद वीर नारायण सिंह जी की प्रतिमा का अनावरण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संग्रहालय परिसर में शहीद वीर नारायण सिंह जी की प्रतिमा का अनावरण किया। इस अवसर पर ‘ई-पुस्तिका आदि शौर्य’ का विमोचन भी किया गया।

प्रधानमंत्री मोदी ने शहीद वीर नारायण सिंह जी के वंशजों से मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना। उन्होंने संग्रहालय परिसर में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण भी किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने ‘जशप्योर ब्रांड’ की कलाकृतियों की सराहना की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जशपुर जिले की महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा निर्मित ‘जशप्योर ब्रांड’ के अंतर्गत तैयार किए गए उत्पादों — महुआ लड्डू, महुआ कैंडी, महुआ टी, महुआ हेक्टर संग्रह आदि का अवलोकन किया और उनकी गुणवत्ता की सराहना की। उन्होंने जशपुर की पारंपरिक हस्तकला ‘छिंद कांसा टोकरी’ (हाथ से बनी बांस/छिंद की टोकरियाँ) के बारे में जानकारी ली और स्थानीय संसाधनों से बनी इस कलाकृति की प्रशंसा की।

इस अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम, राज्य के अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास मंत्री रामविचार नेताम, केंद्रीय राज्य मंत्री (जनजातीय कार्य) दुर्गा दास उइके, केंद्रीय सचिव (जनजातीय कार्य मंत्रालय) रंजना चोपड़ा, प्रमुख सचिव (अनुसूचित जनजाति) सोनमणि बोरा, निदेशक (केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय) दीपाली मसीरकर, आयुक्त डॉ. सारांश मित्तर, टीआरटीआई संचालक हिना अनिमेष नेताम, शहीद वीर नारायण सिंह जी के वंशज तथा विभिन्न राज्यों के जनजातीय कार्य एवं अनुसंधान संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

आदिवासी गौरव, शौर्य एवं बलिदान का प्रतीक है यह संग्रहालय

नवा रायपुर अटल नगर में स्थापित यह भव्य और आकर्षक संग्रहालय आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की शौर्यगाथा को सजीव रूप में प्रस्तुत करता है। यह संग्रहालय इस संदेश को जीवंत करता है कि अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध विद्रोह करने का साहस सबसे बड़ी शक्ति है। 

यह प्रदेश का पहला संग्रहालय है, जो विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के शौर्य और बलिदान को समर्पित है। यह स्मारक-सह-संग्रहालय आने वाली पीढ़ियों को अपने पुरखों के संघर्षों और बलिदानों की स्मृति से जोड़े रखेगा।

50 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित यह संग्रहालय 14 गैलरियों में विभाजित है, जिनमें अंग्रेजी शासन काल में हुए विभिन्न आदिवासी विद्रोहों के 650 से अधिक मूर्तिशिल्प प्रदर्शित किए गए हैं। जनजातीय विद्रोहों को सहज रूप में समझाने के लिए यहां डिजिटल माध्यमों का भी प्रयोग किया गया है।

यह संग्रहालय केवल आदिवासी समाज ही नहीं, बल्कि सभी वर्गों के लिए प्रेरणादायी है। यह देश-विदेश के आगंतुकों को छत्तीसगढ़ की समृद्ध परंपरा, शौर्य और संस्कृति से परिचित कराएगा।

आधुनिक तकनीक से सुसज्जित संग्रहालय

यह स्मारक-सह-संग्रहालय छत्तीसगढ़ के आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के इतिहास पर गहन अध्ययन और शोध के बाद VFX टेक्नोलॉजी और प्रोजेक्शन वर्क के माध्यम से तैयार किया गया है।

आगंतुकों को प्रत्येक दीर्घा में आदिवासी विद्रोह का विवरण डिजिटल बोर्ड पर उपलब्ध रहेगा। वे संग्रहालय में प्रदर्शित मूर्तियों और घटनाओं को जीवंत रूप में अनुभव कर सकेंगे। प्रत्येक दीर्घा के सामने लगे स्कैनर से मोबाइल द्वारा कोड स्कैन कर संबंधित जानकारी तुरंत प्राप्त की जा सकती है।

16 गैलरियों में जीवंत हुआ इतिहास

संग्रहालय में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान छत्तीसगढ़ में हुए प्रमुख आदिवासी विद्रोहों — हल्बा विद्रोह, सरगुजा विद्रोह, भोपालपट्टनम विद्रोह, परलकोट विद्रोह, तारापुर विद्रोह, लिंगागिरी विद्रोह, कोई विद्रोह, मेरिया विद्रोह, मुरिया विद्रोह, रानी चौरिस विद्रोह, भूमकाल विद्रोह, सोनाखान विद्रोह, झंडा सत्याग्रह और जंगल सत्याग्रह — के वीर नायकों के संघर्ष और शौर्य के दृश्य 14 गैलरियों में सजीव रूप से प्रदर्शित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त जंगल सत्याग्रह और झंडा सत्याग्रह पर दो अलग-अलग गैलरियाँ भी निर्मित की गई हैं।





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