Media24Media.com: #सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण

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सावन 2026 में दो ग्रहण का संयोग: क्या है खतरे की घंटी या सिर्फ खगोलीय घटना? जानें ज्योतिषीय मान्यताएं

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 नई दिल्ली। भगवान शिव को समर्पित सावन का महीना हिंदू धर्म में सबसे पवित्र माना जाता है। वर्ष 2026 में सावन 30 जुलाई से 28 अगस्त तक रहेगा। इस बार सावन के दौरान एक विशेष संयोग बन रहा है, क्योंकि इसी महीने सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण दोनों पड़ रहे हैं। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह किसी बड़े संकट या अशुभ संकेत का प्रतीक है? आइए जानते हैं धर्म, ज्योतिष और खगोल विज्ञान के नजरिए से इसका महत्व।


सावन में कब लगेंगे दोनों ग्रहण?

  • सूर्य ग्रहण: 12 अगस्त 2026 (अमावस्या)
    • समय: रात 8:04 बजे से 1:07 बजे तक
    • भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए सूतक काल मान्य नहीं होगा।
  • चंद्र ग्रहण: 28 अगस्त 2026 (सावन पूर्णिमा)
    • समय: सुबह 8:04 बजे से 11:22 बजे तक
    • यह भी भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए धार्मिक कार्यों पर कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा।

क्या सावन में दो ग्रहण अशुभ माने जाते हैं?

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, 15 दिनों के भीतर सूर्य और चंद्र ग्रहण का लगना विशेष संयोग माना जाता है। मान्यता है कि जब राहु और केतु कम समय के अंतराल में सूर्य और चंद्रमा दोनों को प्रभावित करते हैं, तो इसका असर विश्व स्तर पर बड़े बदलाव, राजनीतिक उथल-पुथल, आर्थिक चुनौतियों या प्राकृतिक घटनाओं के रूप में देखा जा सकता है।

हालांकि, इन मान्यताओं का वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। खगोल विज्ञान के अनुसार, सूर्य और चंद्र ग्रहण पूरी तरह प्राकृतिक और नियमित खगोलीय घटनाएं हैं।

क्या भारत पर पड़ेगा कोई प्रभाव?

क्योंकि दोनों ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देंगे, इसलिए पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इनका सूतक काल मान्य नहीं होगा। ऐसे में पूजा-पाठ, व्रत, शिव आराधना और अन्य धार्मिक कार्य सामान्य रूप से किए जा सकेंगे।

क्या सचमुच खतरे की घंटी है?

धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से इसे परिवर्तनकारी समय माना जा सकता है, लेकिन इसे निश्चित रूप से किसी आपदा या संकट का संकेत कहना उचित नहीं है। महाभारत काल से जुड़ी ग्रहण संबंधी कथाएं धार्मिक परंपराओं का हिस्सा हैं, जिनकी ऐतिहासिक या वैज्ञानिक पुष्टि नहीं है।

सावन में क्या करें?

  • भगवान शिव की विधिवत पूजा और जलाभिषेक करें।
  • महामृत्युंजय मंत्र या 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करें।
  • सकारात्मक सोच रखें और अफवाहों से बचें।
  • ग्रहण भारत में दिखाई न देने के कारण सामान्य धार्मिक गतिविधियां जारी रख सकते हैं।

नोट: ग्रहण से जुड़े शुभ-अशुभ प्रभाव मुख्य रूप से धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ग्रहण एक सामान्य खगोलीय घटना है, इसलिए इसे लेकर अनावश्यक भय या भ्रम की आवश्यकता नहीं है।

 
 
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