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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शी पहल : 'सुघ्घर छत्तीसगढ़' अभियान से सुशासन का लाभ पहुंचेगा हर परिवार तक

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'नियद नेल्लानार' मॉडल का राज्यव्यापी विस्तार: 23 जिलों में 31 जनकल्याणकारी योजनाओं का होगा संतृप्तिकरण

तकनीक आधारित निगरानी, विभागीय अभिसरण और जन-केंद्रित सेवा प्रदाय से मजबूत होगा विकसित छत्तीसगढ़ का आधार

जन-जन तक सुशासन, घर-घर तक विकास : 'सुघ्घर छत्तीसगढ़' अभियान होगा प्रारंभ

जनकल्याणकारी योजनाओं के संतृप्तिकरण का प्रदेशव्यापी अभियान : 'सुघ्घर छत्तीसगढ़'

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार सुशासन को जन-जन तक पहुंचाने और प्रत्येक पात्र परिवार को शासन की योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। इसी उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा 'सुघ्घर छत्तीसगढ़' अभियान प्रारंभ किया जा रहा है। यह अभियान प्रदेश के 23 जिलों में 31 प्रमुख हितग्राहीमूलक योजनाओं के संतृप्तिकरण का व्यापक कार्यक्रम होगा, जिसके माध्यम से योजनाओं की पहुंच, प्रभावशीलता और पारदर्शिता को नई मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का आधार केवल अधोसंरचना का विकास नहीं, बल्कि प्रत्येक परिवार तक शासन की योजनाओं की प्रभावी और समयबद्ध पहुंच सुनिश्चित करना है। सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं संचालित करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उनके सकारात्मक परिणाम प्रत्येक परिवार के जीवन में दिखाई दें।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता ऐसी शासन व्यवस्था स्थापित करना है, जिसमें नागरिकों को योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए अनावश्यक भटकना न पड़े, बल्कि शासन स्वयं पात्र हितग्राहियों तक पहुंचे और उन्हें योजनाओं से जोड़े। 'सुघ्घर छत्तीसगढ़' इसी सोच का विस्तार है।

'नियद नेल्लानार' की सफलता से प्रेरित नई पहल

वर्ष 2024 से बस्तर संभाग  में संचालित 'नियद नेल्लानार' योजना ने शासन और जनता के बीच विश्वास का नया सेतु निर्मित किया है।अभिसरण आधारित सेवा प्रदाय के माध्यम से इस योजना ने दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों में शासन की उपस्थिति को मजबूत किया तथा पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित की।

योजना की सफलता को देखते हुए इसे 'नियद नेल्लानार 2.0' के रूप में 10 जिलों तक विस्तारित किया गया। अब इसी सफल मॉडल को प्रदेश के शेष 23 जिलों में लागू करते हुए 'सुघ्घर छत्तीसगढ़' अभियान प्रारंभ किया जा रहा है।

यह अभियान रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और सरगुजा संभाग के 23 जिलों में संचालित होगा और ग्रामीण परिवारों को शासन की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने का कार्य करेगा। 'सुघ्घर छत्तीसगढ़' अभियान अंतर्गत  रायपुर संभाग के रायपुर, बलौदाबाजार-भाटापारा, धमतरी एवं महासमुंद जिले; बिलासपुर संभाग के बिलासपुर, कोरबा, जांजगीर-चांपा, मुंगेली, रायगढ़, सक्ती, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही तथा सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले; दुर्ग संभाग के दुर्ग, बालोद, बेमेतरा, कबीरधाम (कवर्धा) एवं राजनांदगांव जिले तथा सरगुजा संभाग के सरगुजा, कोरिया, सूरजपुर, बलरामपुर-रामानुजगंज, जशपुर एवं मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले शामिल हैं।

सुशासन से संतृप्ति की ओर

'सुघ्घर छत्तीसगढ़' अभियान का मूल उद्देश्य विभिन्न विभागों की योजनाओं को एक साझा मंच पर लाकर पात्र हितग्राहियों तक उनका शत-प्रतिशत लाभ सुनिश्चित करना है।

'सुघ्घर छत्तीसगढ़' अभियान विभिन्न विभागों के बीच अभिसरण स्थापित करते हुए एक ऐसी व्यवस्था विकसित करेगा, जिसमें योजनाओं की जानकारी, पात्रता, प्रगति और संतृप्तिकरण की स्थिति एकीकृत रूप से उपलब्ध होगी।

31 जनकल्याणकारी योजनाओं का होगा संतृप्तिकरण

अभियान के अंतर्गत सामाजिक सुरक्षा, आवास, रोजगार, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, कृषि, कौशल विकास तथा बुनियादी नागरिक सेवाओं से जुड़ी 31 प्रमुख योजनाओं को शामिल किया गया है।

इनमें मनरेगा जॉब कार्ड, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, जल जीवन मिशन, राशन कार्ड एवं प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना, आयुष्मान भारत योजना, वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, दिव्यांग पेंशन, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, किसान क्रेडिट कार्ड, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, जननी सुरक्षा योजना, मिशन इंद्रधनुष, महतारी वंदन योजना, जन-धन योजना, कौशल विकास योजनाएं, श्रम कार्ड, वनाधिकार पट्टा, आधार कार्ड तथा विभिन्न प्रमाण-पत्र सेवाएं शामिल हैं।इन योजनाओं का उद्देश्य  परिवारों को सामाजिक सुरक्षा, आर्थिक सशक्तिकरण और जीवन स्तर में सुधार के अवसर उपलब्ध कराना है।

CHiPS विकसित करेगा अत्याधुनिक डिजिटल डैशबोर्ड

अभियान की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था होगी।

छत्तीसगढ़ इन्फोटेक प्रमोशन सोसायटी (CHiPS) द्वारा एक एकीकृत 'सुघ्घर छत्तीसगढ़ डैशबोर्ड' विकसित किया जाएगा। यह डैशबोर्ड राज्य, संभाग, जिला, विकासखंड, ग्राम पंचायत और ग्राम स्तर तक योजनाओं की प्रगति को रियल-टाइम में प्रस्तुत करेगा। डैशबोर्ड पर प्रत्येक योजना की संतृप्तिकरण स्थिति, शेष हितग्राहियों की संख्या तथा प्रगति का प्रतिशत उपलब्ध रहेगा। इससे निर्णय प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनेगी।

तीन चरणों में होगा अभियान का संचालन

अभियान का क्रियान्वयन सुव्यवस्थित रूप से तीन चरणों में किया जाएगा।पहले चरण में ग्रामवार आधारभूत सर्वेक्षण एवं डेटा मानचित्रण किया जाएगा। PDS डेटाबेस और विभागीय आंकड़ों के आधार पर संभावित परिवारों की पहचान कर योजनावार बेसलाइन तैयार की जाएगी।

दूसरे चरण में ग्राम, क्लस्टर एवं विकासखंड स्तर पर विशेष संतृप्तिकरण शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों के माध्यम से पात्र हितग्राहियों को योजनाओं से जोड़ा जाएगा तथा आवश्यक दस्तावेजों एवं सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।

तीसरे चरण में सतत निगरानी, समीक्षा और मूल्यांकन की प्रक्रिया के माध्यम से योजनाओं की प्रगति का आकलन किया जाएगा तथा आवश्यकतानुसार सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।

जिला प्रशासन निभाएगा महत्वपूर्ण भूमिका

अभियान के सफल संचालन में जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

जिला कलेक्टर जिला स्तरीय क्रियान्वयन के प्रमुख अधिकारी होंगे और आधारभूत सर्वेक्षण, शिविरों के आयोजन तथा संतृप्तिकरण की संपूर्ण प्रक्रिया की निगरानी करेंगे।

संभागायुक्त संभाग स्तर पर त्रैमासिक समीक्षा करेंगे, जबकि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समिति अभियान की प्रगति का नियमित मूल्यांकन करेगी।

'सुघ्घर छत्तीसगढ़' एक अभिसरण आधारित कार्यक्रम है। इसके लिए पृथक बजट शीर्ष निर्मित करने की आवश्यकता नहीं होगी। संबंधित विभाग अपनी स्वीकृत योजनागत निधियों का उपयोग करेंगे।

इसके अतिरिक्त CSR, जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) तथा अन्य संस्थागत स्रोतों के माध्यम से भी आवश्यक संसाधनों का अभिसरण किया जाएगा।

विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में नया अध्याय

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि 'सुघ्घर छत्तीसगढ़'  नागरिक-केंद्रित सुशासन की एक व्यापक पहल है। इसका उद्देश्य प्रत्येक परिवार तक विकास, सम्मान, सुरक्षा और समृद्धि के अवसरों की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करना है।

उन्होंने कहा कि जब शासन की प्रत्येक योजना अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगी, जब प्रत्येक पात्र परिवार योजनाओं के लाभ से जुड़कर अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन अनुभव करेगा, तभी सच्चे अर्थों में 'सुघ्घर छत्तीसगढ़' और 'विकसित छत्तीसगढ़' का संकल्प साकार होगा। यह अभियान प्रदेश में सुशासन के नए मानक स्थापित करते हुए विकास की यात्रा को और अधिक समावेशी, प्रभावी और जन-केंद्रित बनाएगा।

नीति आयोग की रिपोर्ट: देश में चमका छत्तीसगढ़ का उसूर ब्लॉक, मिला दूसरा स्थान

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के 'सुशासन' और जन- कल्याणकारी नीतियों का असर अब राज्य के सबसे दूरस्थ अंचलों में दिखने लगा है। इसी कड़ी में बीजापुर जिले से एक गौरवशाली खबर सामने आई है।


नीति आयोग द्वारा जारी देश के आकांक्षी ब्लॉकों की 'चैंपियंस ऑफ द क्वार्टर' (अक्टूबर- दिसंबर 2025) की रिपोर्ट में बीजापुर के उसूर ब्लॉक ने सेंट्रल जोन में पूरे देश में दूसरा स्थान हासिल कर प्रदेश का नाम रोशन किया है।


मुख्यमंत्री साय ने दी बधाई, कहा – यह जनता के भरोसे की जीत है

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि पर उसूर ब्लॉक और बीजापुर जिले के नागरिकों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं एवं जिला प्रशासन को बधाई दी। उन्होंने कहा, "उसूर ब्लॉक का राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा स्थान प्राप्त करना हमारे सुशासन और अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का प्रत्यक्ष प्रमाण है। बस्तर के सुदूर गांवों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना हमारी प्राथमिकता है। उसूर ने कठिन परिस्थितियों में जो कर दिखाया है, वह पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा है। यह सफलता जमीनी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, मितानिन बहनों, एएनएम और डॉक्टरों के समर्पण का परिणाम है। हमारा लक्ष्य अब देश में प्रथम स्थान हासिल करना है।"

मंत्री कश्यप ने जताया हर्ष, बढ़ाया हौसला

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री तथा जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में उसूर ब्लॉक की यह राष्ट्रीय सफलता बेहद गौरवशाली है। उन्होंने कहा, "यह इस बात का सीधा प्रमाण है कि हमारी सरकार की नीतियां प्रदेश के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पूरी प्रामाणिकता के साथ पहुंच रही हैं। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद स्वास्थ्य कर्मियों और जिला प्रशासन ने जो समर्पण दिखाया है, वह सराहनीय है। हमारा संकल्प बस्तर के हर गांव तक विकास की रोशनी पहुंचाना है।"

मंत्री कश्यप कहा कि कभी बुनियादी सुविधाओं से दूर माना जाने वाला उसूर ब्लॉक आज देश के लिए विकास का मॉडल बन गया है। इस सफलता का श्रेय जमीनी डॉक्टरों, एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और मितानिन बहनों की दिन-रात की मेहनत को जाता है।

विकास की नई इबारत: कड़े मानकों पर खरा उतरा उसूर

नीति आयोग ने स्वास्थ्य और सामाजिक विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण संकेतकों के आधार पर मूल्यांकन किया था, जिसमें उसूर ब्लॉक ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया:

1. संचारी रोगों पर नियंत्रण: मलेरिया, डेंगी और अन्य संचारी रोगों की रोकथाम के लिए सुदूर गांवों तक प्रभावी अभियान चलाया गया।
2. सुरक्षित मातृत्व: संस्थागत प्रसव की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई, जिससे शिशु और मातृ मृत्यु दर में भारी कमी आई।
3. सशक्त टीकाकरण कवच: बच्चों और गर्भवती महिलाओं के नियमित टीकाकरण के साथ एचपीवी टीकाकरण को जमीनी स्तर पर सफल बनाया गया।
4. गंभीर बीमारियों की जांच: बीपी, शुगर और कैंसर जैसी गैर-संचारी बीमारियों की मुफ्त जांच व उपचार की सुविधा गांव-गांव तक पहुंचाई गई।

अगला संकल्प: देश में हासिल करना है प्रथम स्थान

कलेक्टर विश्वदीप और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और प्रभारी मंत्री केदार कश्यप के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रीय गौरव पूरे जिले के लिए बड़ी प्रेरणा है। शासन और प्रशासन का अगला लक्ष्य स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को और निखारते हुए आगामी तिमाहियों में देश में पहला स्थान हासिल करना है, जिसके लिए काम तेज कर दिया गया है।

अंधेरे से उजाले की ओर: सुशासन ने बदली विशेष पिछड़ी जनजाति के दिव्यांग दंपति की जिंदगी

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ में सुशासन और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभाव का एक प्रेरणादायक उदाहरण बलरामपुर जिले से सामने आया है, जहां विशेष पिछड़ी जनजाति वर्ग के दृष्टिबाधित दंपति  कृष्णा पहाड़ी कोरवा और उनकी पत्नी अनिता के जीवन में सरकारी योजनाओं ने नई रोशनी भर दी है। यह कहानी न केवल मानवीय संवेदनशीलता को दर्शाती है, बल्कि राज्य सरकार की अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करती है।


ग्राम गोविंदपुर (सरगड़ी) निवासी इस दंपति के जीवन में वर्ष 2025 में राज्य स्थापना की रजत जयंती के अवसर पर एक ऐतिहासिक परिवर्तन आया, जब देश के प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने स्वयं उन्हें प्रधानमंत्री जनमन योजना अंतर्गत प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत निर्मित पक्के घर की चाबी सौंपी। वर्षों से कच्चे आवास और असुरक्षा में जीवन यापन कर रहे इस परिवार के लिए यह घर सम्मान और स्थायित्व का प्रतीक बन गया।

आवास के साथ ही आजीविका के क्षेत्र में भी इस दंपति ने आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत दोनों पति-पत्नी कार्यस्थलों पर श्रमिकों को पेयजल उपलब्ध कराने का कार्य कर रहे हैं। वर्ष 2024-25 में 86 दिनों का रोजगार और वर्तमान वित्तीय वर्ष में अब तक 14 दिनों का कार्य मिलने से उन्हें नियमित आय का स्रोत प्राप्त हुआ है, जिससे वे अपनी दैनिक जरूरतें सम्मानपूर्वक पूरी कर पा रहे हैं।

इसके अतिरिक्त, विभिन्न शासकीय योजनाओं ने इनके जीवन को सुरक्षा और स्थिरता प्रदान की है। अंत्योदय अन्न योजना के तहत खाद्यान्न की सुनिश्चित उपलब्धता, आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से निःशुल्क स्वास्थ्य उपचार की सुविधा तथा दिव्यांग पेंशन से नियमित आर्थिक सहयोग मिल रहा है। इन योजनाओं ने मिलकर इस परिवार को सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाया है।


संवेदनशील नेतृत्व की मिसाल: मुख्यमंत्री साय ने दिव्यांग चंदूलाल की सुनी पुकार, मिनटों में मिला समाधान

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के संवेदनशील और जनहितकारी शासन की एक भावुक झलक आज चंदखुरी में देखने को मिली, जब उन्होंने एक दिव्यांग ग्रामीण की समस्या को न केवल सुना, बल्कि मौके पर ही उसका समाधान सुनिश्चित कर मानवता और उत्तरदायी नेतृत्व का उदाहरण प्रस्तुत किया।

चंदखुरी निवासी दिव्यांग चंदूलाल वर्मा के लिए यह दिन जीवन का अविस्मरणीय क्षण बन गया। वे मुख्यमंत्री से मिलने की आशा लेकर कायस्थ मंगल भवन के लोकार्पण कार्यक्रम में पहुंचे थे। कार्यक्रम समाप्ति के बाद जब वे मुख्यमंत्री से मिलने के लिए आगे बढ़े, तो सुरक्षा कारणों से उन्हें रोक दिया गया।इसी दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की नजर उन पर पड़ी। उन्होंने तत्परता दिखाते हुए सुरक्षाकर्मियों को निर्देश दिया कि चंदूलाल वर्मा को मंच पर बुलाया जाए। यह एक छोटा-सा निर्णय था, लेकिन चंदूलाल के जीवन में बड़ा बदलाव लेकर आया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मिलते ही चंदूलाल ने अपनी व्यथा साझा की। उन्होंने बताया कि वे पहले राजमिस्त्री का कार्य करते थे, लेकिन शुगर की बीमारी और डायबिटिक फुट के कारण उनके पैरों में गंभीर समस्या हो गई, जिससे चलना-फिरना कठिन हो गया। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे अब कोई कार्य नहीं कर पा रहे हैं और उन्हें बैटरी संचालित ट्राईसिकल की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री साय ने अत्यंत संवेदनशीलता के साथ उनकी पूरी बात सुनी और तत्काल सहायता राशि प्रदान करते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि उन्हें शीघ्र मोटराइज्ड ट्राईसिकल उपलब्ध कराया जाए।

मुख्यमंत्री के निर्देशों का त्वरित पालन सुनिश्चित किया गया। नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतीक बैस ने तत्काल प्रक्रिया पूर्ण कर चंदूलाल वर्मा को मोटराइज्ड ट्राईसिकल उपलब्ध कराया।

अपनी खुशी व्यक्त करते हुए चंदूलाल भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि “मैंने सोचा भी नहीं था कि मुख्यमंत्री मुझसे मिलेंगे और मेरी समस्या का इतना जल्दी समाधान हो जाएगा। मैं उनका दिल से आभारी हूँ। धन्यवाद विष्णु भईया।”

यह घटना केवल एक व्यक्ति की सहायता भर नहीं, बल्कि यह दर्शाती है कि राज्य सरकार का उद्देश्य हर नागरिक तक संवेदनशीलता, पहुंच और त्वरित समाधान सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री का यह व्यवहार सुशासन के उस मॉडल को मजबूत करता है, जिसमें हर जरूरतमंद की आवाज सीधे शासन तक पहुंचती है और समाधान भी उतनी ही तेजी से मिलता है।

सुशासन के दो साल – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की बड़ी सौगात

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किसानों के हित में निरंतर लिए जा रहे फैसलों का सकारात्मक असर अब गांव–गांव तक दिखाई देने लगा है। सौर सुजला योजना मुख्यमंत्री की ऐसी ही एक दूरदर्शी सौगात है, जिसने जशपुर जिले के किसानों की खेती और किस्मत—दोनों बदलने का काम किया है।

दो वर्षो में जिले के 755 किसानों को मिली बड़ी राहत

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर जशपुर जिले में सौर सुजला योजना के तहत 755 किसानों को सोलर सिंचाई पंप की स्वीकृति मिली है। यह सौगात उन किसानों के लिए संजीवनी साबित हो रही है, जो अब तक बारिश और पारंपरिक साधनों पर निर्भर थे। सौर ऊर्जा से चलने वाले पंपों ने सिंचाई को आसान, सुलभ और किफायती बना दिया है।

बगीचा के बंधु यादव की सौर सुजला योजना से बदली तकदीर, मुख्यमंत्री का जताया आभार

जशपुर जिले के बगीचा तहसील क्षेत्र निवासी बंधु यादव ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की इस सौगात से लाभान्वित किसानों में शामिल हैं। सोलर पंप मिलने के बाद अब वे समय पर सिंचाई कर पा रहे हैं। इससे फसल की गुणवत्ता बेहतर हुई है और उत्पादन भी बढ़ा है।बंधु यादव कहते हैं कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की यह योजना उनके लिए उम्मीद की नई किरण बनकर आई है।

इसी तरह फरसाबहार तहसील के खुटशेरा निवासी दुलार साय भी इस योजना का लाभ उठा रहे हैं। सोलर पंप लगने से उन्होंने खेती का दायरा बढ़ाया है और अतिरिक्त फसलों की खेती शुरू की है। इससे उनकी आमदनी में बढ़ोतरी हुई है और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।

कम लागत, अधिक उत्पादन — किसानों को मिला आत्मविश्वास

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सोच के अनुरूप सौर सुजला योजना ने किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन का रास्ता दिखाया है। डीज़ल और बिजली पर होने वाला खर्च कम हुआ है, वहीं पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिला है। यह योजना खेती को आत्मनिर्भर और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है।

दो साल में दिखा सुशासन का असर

बीते दो वर्षों में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन में किसानों को केंद्र में रखकर कई योजनाएं धरातल पर उतरी हैं। सौर सुजला योजना उनमें से एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जिसने जशपुर जिले के सैकड़ों किसानों को स्थायी सिंचाई सुविधा देकर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया है।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की यह सौगात आज जशपुर के किसानों के चेहरे पर मुस्कान और खेतों में हरियाली का प्रतीक बन चुकी है।


ऑनलाइन टोकन से आसान हुई धान खरीदी, CM साय के सुशासन में किसानों को सीधा लाभ

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन में छत्तीसगढ़ राज्य में धान खरीदी व्यवस्था को लगातार अधिक सरल, पारदर्शी और किसान-हितैषी बनाया जा रहा है। किसानों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए शासन द्वारा ‘टोकन तुहर हाथ’ ऐप के माध्यम से 24×7 ऑनलाइन टोकन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जिससे किसान घर बैठे अपनी सुविधा अनुसार टोकन प्राप्त कर पा रहे हैं।


इस डिजिटल पहल से धान खरीदी की प्रक्रिया समयबद्ध होने के साथ-साथ खरीदी केंद्रों पर भीड़ नियंत्रण में भी प्रभावी सिद्ध हो रही है। ऑनलाइन टोकन व्यवस्था के कारण किसानों को निर्धारित तिथि एवं समय पर धान विक्रय का अवसर मिल रहा है।

इसी सुव्यवस्थित और डिजिटल व्यवस्था का लाभ कबीरधाम जिले के ग्राम खैरबाना कला के किसान निरंजन साहू को मिला। उन्होंने ‘टोकन तुहर हाथ’ ऐप के माध्यम से ऑनलाइन टोकन प्राप्त कर निर्धारित तिथि एवं समय पर उपार्जन केंद्र पहुँचकर 36 क्विंटल धान का सफलतापूर्वक विक्रय किया। टोकन प्राप्त करने से लेकर धान तौल और विक्रय तक की प्रक्रिया पूरी तरह व्यवस्थित रही, जिससे उन्हें किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा।

निरंजन साहू ने बताया कि पूर्व में धान बेचने के लिए लंबे समय तक प्रतीक्षा करनी पड़ती थी, जबकि अब ऑनलाइन टोकन व्यवस्था से समय की बचत हो रही है। खरीदी केंद्र में पहुँचते ही निर्धारित समय पर धान की तौल एवं खरीदी की प्रक्रिया पूर्ण हो जाती है। धान विक्रय के पश्चात भुगतान भी शीघ्रता से सीधे बैंक खाते में प्राप्त हो जाता है, जिससे किसानों को आर्थिक रूप से बड़ी राहत मिल रही है।

निरंजन साहू ने शासन की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऑनलाइन टोकन प्रणाली से न केवल खरीदी केंद्रों पर भीड़ नियंत्रित हुई है, बल्कि किसानों को सम्मानजनक एवं सुव्यवस्थित वातावरण में अपनी उपज विक्रय करने का अवसर भी मिला है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा अपनाई गई डिजिटल एवं पारदर्शी नीतियाँ किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रभावी सिद्ध हो रही हैं।

महासमुंद जिला : सुशासन, संकल्प और समग्र विकास की ओर बढ़ते कदम

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पोषण कुमार साहू*

महासमुंद। छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक धरती महासमुंद, जो कभी दक्षिण कोशल की राजधानी रही और सोमवंशी शासकों की गौरवशाली विरासत को संजोए है, आज मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सुशासन, जनप्रतिनिधियों की दूरदृष्टि और जिला प्रशासन के सार्थक परिश्रम के साथ एक नए टिकाऊ और संतुलित विकास की दिशा में आगे बढ़ रही है। यह वह भूमि है जहां सिरपुर जैसे प्राचीन सांस्कृतिक और धार्मिक स्थल महानदी के तट पर स्थापत्य, कला, धर्म, ज्ञान और विज्ञान के अद्भुत संगम का साक्षी बने खड़े हैं। जिला निर्माण के पश्चात चुनौतियों से भरे नई संभावनाओं ने जिले को एक नई पहचान देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अधोसंरचना विकास को लेकर सामाजिक सुरक्षा तक के विकास के हर पैमाने को बखूबी पूरा करता हुआ जिला अपना 27 वां वर्षगांठ मना रही है। विकास के विभिन्न पहलुओं की ओर नजर डाले तो खनिज संसाधन से लेकर, ऐतिहासिक और प्राचीन स्मारकों के लिए एक खास पहचान बना चुकी जिले में विकास की नई इबारत लिखी जा रही है।

अधोसंरचना विकास में मील का पत्थर साबित होगा भालुकोना-जामनीडीह

हाल ही में बसना के भालुकोना-जामनीडीह क्षेत्र में निकल, क्रोमियम और प्लेटिनम समूह के तत्वों की मौजूदगी की पुष्टि ने महासमुंद को राष्ट्रीय खनिज मानचित्र पर स्थापित कर दिया है। लगभग 3000 हेक्टेयर में फैली यह धरोहर जिले के आर्थिक भविष्य को नई गति देने का सामर्थ्य रखती है। इससे जिले में आर्थिक समृद्धि के द्वार खुलेंगे। लोगों को सुगम आवागमन के लिहाज से महासमुंद-तुमगांव-अछोला मार्ग, बरोंडा चौक से बम्हनी मार्ग, 23 सड़कों का पुनर्निर्माण और बेलसोंडा में रेलवे ओवर ब्रिज जैसे प्रोजेक्ट, जिन पर कई करोड रुपए का निवेश हो रहा है, जिले के कनेक्टिविटी तंत्र को नई ऊँचाई देंगे।

स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन, पेयजल के लिए सार्थक पहल

वहीं स्वास्थ्य की दिशा में दिसंबर 2025 तक 321.80 करोड़ की लागत से आधुनिक सुविधाओं से युक्त मेडिकल कॉलेज अस्पताल का निर्माण पूर्ण होगा, जो स्वास्थ्य सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण है। इसके निर्माण से न केवल जिले को बल्कि अंचल वासियों को भी लाभ पहुंचेगा। जिले के जागरूक और अध्ययनशील जनता के लिए 3328.20 वर्ग मीटर में बन रहा सर्वसुविधायुक्त जिला ग्रंथालय अध्ययन, ई-लाइब्रेरी, ओपन कैफेटेरिया, व्यवसायिक कॉम्प्लेक्स और दिव्यांगजन के लिए अनुकूल सुविधाओं के साथ 500 से अधिक पाठकों को एक साथ पढ़ने का अवसर देगा। पेय जल की समस्या के निदान के लिए 66.57 करोड़ की लागत से समोदा-अछोला जल योजना के माध्यम से 48 ग्रामों में शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लिए कार्य प्रगति पर हैं। वहीं सिंचाई सुविधा के लिए गरियाबंद के सिकासेर जलाशय से महासमुंद में पानी लाने हेतु ड्रोन सर्वे प्रारंभ हो चुका है, जिससे बागबाहरा, महासमुंद और पिथौरा ब्लॉक के खेतों को सिंचाई सुविधा मिलेगी और जल संकट का समाधान होगा। स्वास्थ्य, पोषण, आजीविका और कौशल विकास की सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पीएम जनमन योजना अंतर्गत जिले में ग्राम धनसुली और जोरातराई में दो बहुउद्देशीय मॉडल केंद्रों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। पर्यटन और प्रकृति प्रेमियों के लिए कोडार जलाशय को इको-टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित कर बोटिंग, टेंटिंग और खेल सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इसकी राष्ट्रीय राजमार्ग-53 से निकटता इसे एक प्रमुख पर्यटन गंतव्य बना रही है।

 जनभागीदारी से विकास को मिली नई गति

मोर गांव मोर पानी अभियान के तहत जनभागीदारी से जल संरक्षण कार्य तेजी से हो रहे हैं। अब तक 5 हजार सोखता गड्ढों, 1839 सोखपीट, 125 इंजेक्शन वेल एवं 25 बोरवेल रिचार्ज पूरे किए गए हैं। इस प्रयास से भूमिगत जल पुनर्भरण और जल स्तर बनाए रखने में सहायक होंगे। ऊर्जा आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण दोनों की दिशा में प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत 319 घरों में सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित हो चुके हैं और 230 हितग्राहियों को सब्सिडी दी जा चुकी है। इसके अलावा आदिवासी बाहुल्य 77 विशेष पिछड़ी जनजाति गांवों में पहली बार पीएम जनमन योजना से बिजली पहुंच पाई है। 

उपलब्धियों से बनी नई पहचान 

आकांक्षी जिला एवं विकासखंड पिथौरा को छत्तीसगढ़ राज्य में ताम्र पदक से सम्मानित किया गया है वही पिथौरा विकासखंड को रजत पदक प्राप्त हुआ। यह पुरस्कार 6 संकेतांको में से तीन संकेताक को शतप्रतिशत पूर्ण करने पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा सम्मानित किया गया। नवकिरण कोचिंग संस्थान के तहत 1 नवंबर 2019 से निःशुल्क कोचिंग और पुस्तकालय सुविधा मिल रही है, जिसके परिणामस्वरूप 428 अभ्यर्थी विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में चयनित हुए हैं। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन अभियान में 292 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित कर महासमुंद ने राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। डे-एनयूएलएम अवार्ड्स 2023-24 में स्वरोजगार घटक और उत्कृष्ट समग्र प्रदर्शन के लिए महासमुंद को राज्य में प्रथम स्थान मिला। स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ हर व्यक्ति को मिले इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए जिले के 9 लाख 86 हजार पात्र हितग्राहियों के आयुष्मान कार्ड बनना स्वास्थ्य सुरक्षा की बड़ी उपलब्धि है। महतारी वंदन योजना से 3 लाख 26 हजार माताओं को सम्मान, आर्थिक संबल और सहयोग मिला है।

खेल और शिक्षा का अद्भुत संगम

महासमुंद जिला खेल और तीरंदाजी के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है, जहां 23 खिलाड़ी देश की शीर्ष खेल अकादमियों में प्रशिक्षण ले रहे हैं। पद्मा साहू सहित कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता पाकर जिले का नाम रोशन किया है। एकलव्य आवासीय विद्यालय, विभिन्न स्कूलों व जिला स्तरीय केंद्रों ने प्रतिभाओं को तराशा है। बागबाहरा विकासखंड में शिक्षा विभाग व सुपर 40 संस्था द्वारा नवोदय एवं प्रयास प्रवेश परीक्षा की तैयारी हेतु विशेष प्रवेश परीक्षा आयोजित की गई, जिसमें क्रमशः 400 और 450 विद्यार्थियों ने भाग लिया। विगत वर्ष चयनित 40 में से 2 नवोदय एवं 38 प्रयास आवासीय विद्यालय में सफल हुए थे।

महासमुंद जिले की यह उपलब्धि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के दूरदर्शी नेतृत्व, जनप्रतिनिधियों के सतत प्रयास और जिला प्रशासन के क्रियान्वयन की प्रतिबद्धता का परिणाम हैं। महासमुंद आज विकास, संस्कृति, परंपरा और नवाचार का संगम बनकर प्रदेश के मानचित्र पर दृढ़ता से स्थापित है।

(लेखक जनसंपर्क विभाग महासमुंद में सहायक संचालक हैं।)


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