Media24Media.com: #शिव महापुराण कथा

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शिव महापुराण कथा में उठाईगिरी, भीड़ का फायदा उठा रहीं 9 महिलाएं गिरफ्तार

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 दुर्ग। दुर्ग जिले के नगपुरा गांव में आयोजित शिव महापुराण कथा के दौरान उठाईगिरी की वारदात को अंजाम देने वाली 9 महिलाओं को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। यह कथा प्रसिद्ध कथावाचक पं. प्रदीप मिश्रा द्वारा सुनाई जा रही है, जिसमें प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं।


यह धार्मिक आयोजन पुलगांव थाना क्षेत्र के नगपुरा गांव में 17 दिसंबर से जारी है। भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस पहले से ही सतर्क थी और सादी वर्दी में जवानों की तैनाती की गई थी।

 संदिग्ध गतिविधियों पर पुलिस की नजर

कथा स्थल के अलग-अलग पंडालों में 6 से अधिक महिलाएं संदिग्ध गतिविधियों के साथ घूमती नजर आईं, जिस पर पुलिस टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सभी को हिरासत में ले लिया।

 महाराष्ट्र की रहने वाली हैं आरोपी महिलाएं

पूछताछ में खुलासा हुआ कि सभी आरोपी महिलाएं महाराष्ट्र के नागपुर की निवासी हैं। गिरफ्तार महिलाओं में—

  • प्रकाशी जाटव (60)
  • अंजली जाटव (26)
  • कोमल जाटव (25)
  • सुजाता शिंदे (31)
  • रतना शिंदे (60)

ऊषा जाटव (40)
सहित अन्य महिलाएं शामिल हैं।

भीड़ का फायदा उठाकर कर रही थीं उठाईगिरी

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी महिलाएं श्रद्धालुओं की भारी भीड़ का फायदा उठाकर उठाईगिरी की घटनाओं को अंजाम दे रही थीं। फिलहाल पुलिस सभी आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

पुलिस का बयान

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि धार्मिक आयोजनों में श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। समय रहते की गई कार्रवाई से किसी बड़ी वारदात को टाल दिया गया।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय दिव्य शिव महापुराण कथा के समापन समारोह में वर्चुअली हुए शामिल

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पवित्र श्रावण मास के चौथे सोमवार के शुभ अवसर पर रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय से जशपुर जिले के कुनकुरी विकासखंड अंतर्गत मयाली में विश्व के सबसे बड़े प्राकृतिक शिवलिंग मधेश्वर पहाड़ के समीप आयोजित दिव्य शिव महापुराण कथा के समापन समारोह को ऑनलाइन माध्यम से संबोधित किया।

श्रावण मास की इस सात दिवसीय दिव्य कथा श्रृंखला का आयोजन 28 जुलाई से 4 अगस्त 2025 तक महामधेश्वर धाम समिति द्वारा किया गया, जिसमें अयोध्या के प्रसिद्ध कथावाचक पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने शिव महापुराण की अमृतमयी वाणी से हजारों श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध किया। मुख्यमंत्री ने व्यासपीठ से जुड़े सभी संतजनों को प्रणाम करते हुए समिति को भव्य आयोजन के लिए बधाई एवं आभार प्रकट किया।

मुख्यमंत्री साय ने अपने उद्बोधन में कहा कि शिव और शक्ति छत्तीसगढ़ के कण-कण में समाए हैं और प्रदेश को आध्यात्मिक ऊर्जा इन्हीं  देवस्थलों से प्राप्त होती है। उन्होंने बताया कि मधेश्वर महादेव धाम के विकास के लिए केंद्र सरकार से ₹10 करोड़ की राशि प्राप्त हुई है, तथा राज्य सरकार तीव्र गति से अधोसंरचना विकास और श्रद्धालु सुविधाओं के लिए कार्य कर रही  है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश में विराजित भगवान शिव के प्रमुख स्थलों का उल्लेख करते हुए कहा कि मयाली में मधेश्वर पहाड़, कवर्धा में बाबा भोरमदेव, राजिम में कुलेश्वर महादेव, गरियाबंद में भूतेश्वर महादेव और जांजगीर-चांपा के खरौद में लक्ष्मणेश्वर महादेव के रूप में भगवान शिव विभिन्न रूपों में श्रद्धालुओं को दर्शन दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह सम्पूर्ण प्रदेश शिवमय है।

साय ने बताया कि छत्तीसगढ़ में पाँच प्रमुख शक्तिपीठों के विकास के लिए शक्ति कॉरिडोर योजना प्रारंभ की गई है। इसमें डोंगरगढ़ की बमलेश्वरी देवी, रतनपुर की महामाया देवी, चंद्रपुर की चंद्रहासिनी माता, दंतेवाड़ा की दंतेश्वरी देवी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में तीर्थ पर्यटन को नई दिशा दी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने रामलला दर्शन योजना का उल्लेख करते हुए बताया कि अब तक 22 हजार से अधिक श्रद्धालु अयोध्या धाम में प्रभु श्रीराम के दर्शन का लाभ प्राप्त कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह योजना श्रद्धालुओं को प्रभु श्रीराम के प्रति श्रद्धा से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनी है। इसी क्रम में पुनः प्रारंभ की गई मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस योजना के अंतर्गत राज्य के वृद्ध श्रद्धालुओं को देश के 19 प्रमुख तीर्थ स्थलों के दर्शन कराए जा रहे हैं, जिससे उन्हें जीवन में आध्यात्मिक संतोष और आस्था का अनुभव हो रहा है।

समापन अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश की सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हुए प्रार्थना की कि बाबा भोलेनाथ की कृपा सदैव सभी श्रद्धालुओं पर बनी रहे। उन्होंने महामधेश्वर धाम समिति को आयोजन की सफलता के लिए शुभकामनाएं दी और कहा कि प्रदेश सरकार श्रद्धा, संस्कृति और विकास के समन्वय से छत्तीसगढ़ को नया धार्मिक एवं पर्यटन गंतव्य बनाएगी।


प्रदीप मिश्रा की कथा रद्द: आयोजक नहीं दे सके तय दक्षिणा, 31 लाख में से मिले सिर्फ 15 लाख

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 रायपुर। प्रसिद्ध शिव कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा की राजनांदगांव में होने वाली शिव महापुराण कथा वित्तीय कारणों के चलते रद्द कर दी गई है। आयोजकों ने खुद इस बात की पुष्टि की है कि वे निर्धारित समय पर कथा की दक्षिणा का भुगतान नहीं कर सके, जिस कारण 17 से 23 अगस्त तक बजरंगपुर के मिनी स्टेडियम में होने वाली यह कथा अब नहीं होगी।


क्या है पूरा मामला?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कथा के लिए 31 लाख रुपए की दक्षिणा तय की गई थी, लेकिन आयोजक केवल 15 लाख रुपये ही एकत्र कर पाए। शेष 16 लाख रुपए समय पर ना दे पाने की वजह से प्रदीप मिश्रा की टीम ने कथा को कैंसिल कर दिया। इस आयोजन की तैयारी एक महिला समिति द्वारा की जा रही थी, जिन्होंने इस भुगतान की पुष्टि की है।

आयोजकों ने बताया कि कथा आयोजन की तिथि पहले से तय थी और पेमेंट के लिए भी अंतिम तारीख दी गई थी, लेकिन वे फंडिंग के इंतजाम में असफल रहे। अब वे भविष्य में दोबारा कथा आयोजन करने की योजना बना रहे हैं और इसकी तैयारियों की शुरुआत भी जल्द करेंगे।

प्रदीप मिश्रा ने दी सफाई, बताया ‘बदनाम करने की साजिश’

कथा रद्द होने और दक्षिणा को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही आलोचनाओं के बाद प्रदीप मिश्रा ने भिलाई के जयंती स्टेडियम में चल रही कथा के दौरान सफाई दी। उन्होंने कहा:

“मैं धर्मांतरण के खिलाफ खुलकर बोलता हूं, यही बात सनातन विरोधियों को खलती है। मुझे बदनाम करने की साजिश रची जा रही है।"

"जो भी कथा होती है, वह जनसहयोग से होती है, और मैं केवल धर्म की सेवा कर रहा हूं।”

धार्मिक आयोजनों में शुल्क पर फिर उठे सवाल

धार्मिक आयोजनों में कथावाचकों द्वारा ली जाने वाली मोटी रकम को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। इससे पहले भी बागेश्वर धाम प्रमुख पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर कथावाचन के लिए “अंडर टेबल” पेमेंट लेने के गंभीर आरोप लग चुके हैं।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा था:

“कई कथावाचक 50 लाख रुपये तक फीस लेते हैं। क्या किसी आम आदमी की इतनी हैसियत है? बाबा अंडर टेबल पैसे लेते हैं। आप खुद जांच कर लीजिए।”

हालांकि धीरेंद्र शास्त्री ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि अखिलेश यादव केवल राजनीतिक फायदा उठाने के लिए सनातन धर्म पर निशाना साध रहे हैं।

निष्कर्ष:

राजनांदगांव में कथा रद्द होना केवल एक वित्तीय मामला नहीं बल्कि धार्मिक आयोजनों में पारदर्शिता, फीस और आस्था के व्यापार को लेकर बढ़ते सवालों की झलक भी है। आने वाले दिनों में ऐसे आयोजनों को लेकर लोगों की सोच और व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग और तेज हो सकती है।

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