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विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य हेतु अंतर-विभागीय कार्ययोजना पर उच्च स्तरीय बैठक संपन्न

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रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य के संरक्षण, संवर्धन एवं समग्र कल्याण को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से गठित राज्य स्तरीय समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक रायपुर में आयोजित की गई। यह बैठक लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) के संचालक ऋतुराज रघुवंशी की अध्यक्षता में संपन्न हुई, जिसमें विभिन्न शासकीय विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।

मानसिक स्वास्थ्य को शिक्षा का अभिन्न अंग बनाने पर जोर

बैठक का मुख्य उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को एक अनिवार्य एवं अभिन्न घटक के रूप में स्थापित करना रहा। इस अवसर पर संचालक रघुवंशी ने कहा कि बच्चों का सर्वांगीण विकास तभी संभव है, जब वे मानसिक रूप से स्वस्थ, सशक्त एवं तनावमुक्त हों।

अंतर-विभागीय समन्वय से एकीकृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश

बैठक में अंतर-विभागीय समन्वय पर विशेष बल देते हुए रघुवंशी ने निर्देशित किया कि सभी संबंधित विभाग विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को अपनी कार्यसूची में प्राथमिकता दें। प्रत्येक विभाग को अपनी-अपनी विस्तृत एवं विशिष्ट कार्ययोजना तैयार कर उसे तत्काल प्रभाव से धरातल पर क्रियान्वित करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने छत्तीसगढ़ शासन की मंशा के अनुरूप विभिन्न विभागों की संसाधनों एवं विशेषज्ञता को समन्वित करते हुए एक एकीकृत कार्ययोजना तैयार करने पर बल दिया।

राज्य स्तरीय समिति निभाएगी सेतु की भूमिका

उल्लेखनीय है कि यह राज्य स्तरीय समिति प्रदेश के छात्र-छात्राओं के मानसिक स्वास्थ्य के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से गठित की गई है। समिति विभिन्न विभागों के बीच समन्वयक सेतु के रूप में कार्य करेगी, ताकि विद्यार्थियों को समय पर परामर्श, सहयोगात्मक सहायता एवं एक सकारात्मक, सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।

पुस्तकों की छपाई से लेकर परिवहन तक एक ही टेंडर के माध्यम हो: शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव

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रायपुर। स्कूल शिक्षा, ग्रामोद्योग, विधि एवं विधायी कार्य मंत्री गजेन्द्र यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय (महानदी भवन) नवा रायपुर अटल नगर में शिक्षा विभाग की बैठक आयोजित हुई। बैठक में विभागीय कार्यों की समीक्षा करते हुए मंत्री यादव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए। बैठक में मंत्री यादव ने कहा कि पाठ्य पुस्तक निगम द्वारा पुस्तको की छपाई से लेकर परिवहन तक एक ही टेंडर के माध्यम से करने के निर्देश दिए ताकि समय कर राशि की बचत हो। बैठक में सचिव सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, संचालक लोक शिक्षण ऋतुराज रघुवंशी, एमडी समग्र शिक्षा संजीव कुमार झा सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

बैठक में सर्वप्रथम शिक्षकों की कमी को दूर करने के मुद्दे पर चर्चा हुई। मंत्री यादव ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आगामी शैक्षणिक सत्र से पहले 5000 शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षकों एवं जिला स्तरीय अधिकारियों की उपस्थिति को ऑनलाइन एवं परिसर स्तर पर अनिवार्य रूप से दर्ज किया जाए, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।

बैठक में मंत्री ने कहा कि राजपत्रित अधिकारियों की भर्ती लोक सेवा आयोग (पीएससी) के माध्यम से की जाएगी। पाठ्यपुस्तक वितरण की प्रगति की समीक्षा करते हुए मंत्री यादव ने कहा कि यह स्पष्ट किया जाए कि अभी कितने स्थानों पर पुस्तक वितरण शेष है और कितनी अतिरिक्त मांग बची हुई है। उन्होंने कहा कि विभागीय कार्यों में स्पष्टता होनी चाहिए और हर कार्य उसकी जिम्मेदार संस्था के माध्यम से ही किया जाए। समस्त प्रशिक्षण कार्यक्रम अब एससीईआरटी के माध्यम से अनिवार्य रूप से संचालित होंगे।

बैठक में भवनविहीन स्कूलों की स्थिति की जानकारी, उन्हें फुल फर्निश्ड स्कूलों के रूप में विकसित करने के लिए आवश्यक व्यय तथा तदर्थ स्कूलों की राशि पर भी विस्तृत चर्चा हुई। मंत्री श्री यादव ने कहा कि बजट का पूरा उपयोग सुनिश्चित किया जाए और राशि लैप्स न हो, इसके लिए अभी से कार्ययोजना तैयार की जाए।

बड़े शहरों में जहां शासकीय भवन उपलब्ध हैं, वहाँ नीट और जेईई जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थाओं के सहयोग से कक्षाएं शुरू करने पर भी विचार किया गया। शाला त्यागी बच्चों को पुनः विद्यालयों से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने पर जोर दिया गया।

मंत्री यादव ने कहा कि शाला प्रवेश उत्सव के समय ही छात्र-छात्राओं को वितरण की जाने वाली सामग्रियों की अग्रिम कार्ययोजना बनाकर समय पर कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। स्कूलों की परीक्षा समाप्त होने के पश्चात शिक्षकों का जिला एवं ब्लॉक स्तरीय प्रशिक्षण प्रारंभ कराया जाएगा। प्रशिक्षण उपरांत परीक्षा लेकर शिक्षकों की दक्षता का मूल्यांकन होगा। इसके लिए एक स्पष्ट शैक्षणिक कैलेंडर तैयार किया जाएगा और डीआईईटी/बीआईईटी को सशक्त बनाया जाएगा। मंत्री गजेन्द्र यादव ने बैठक के अंत में कहा कि शिक्षा विभाग की सभी योजनाएँ और कार्यक्रम समयबद्ध एवं पारदर्शी तरीके से लागू किए जाएं। मंत्री यादव ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है और इसके लिए सभी अधिकारी जिम्मेदारी से कार्य करें।


महासमुंद जिले की शिक्षक विहीन और एकल शिक्षकीय शालाएं युक्तियुक्तकरण से हुई समाप्त, 629 शिक्षकों ने नवीन पदस्थ शालाओं में संभाला कार्यभार

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 रायपुर : राज्य में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए चलाए गए युक्तियुक्तकरण अभियान ने ठोस परिणाम आने शुरू हो गए हैं। इस प्रक्रिया के तहत विशेष रूप से उन शालाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया, जहां या तो शिक्षक बिल्कुल नहीं थे या केवल एक शिक्षक के भरोसे पूरी व्यवस्था संचालित हो रही थी। अब इन सभी विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित कर दी गई है, जिससे नियमित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था प्रारंभ हो जाएगी।


महासमुंद जिले में युक्तियुक्तकरण से पहले कुल 287 प्राथमिक शालाएं ऐसी थीं जो या तो शिक्षक विहीन थीं या केवल एक शिक्षक के सहारे चल रही थीं। इनके अलावा एक पूर्व माध्यमिक शाला और तीन हाई स्कूलों में भी शिक्षकों की भारी कमी थी। शिक्षा विभाग की सक्रियता और समुचित योजना के क्रियान्वयन के तहत अब जिले में ऐसी कोई शाला नहीं बची है, जहां शिक्षक उपलब्ध न हों।

महासमुंद जिले के जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि, शिक्षा विभाग ने प्राथमिकता के आधार पर युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया को पूर्ण किया है। अब जिले की कोई भी शाला शिक्षक विहीन नहीं है, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई में अब करेई अवरोध न हो और शैक्षणिक गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा।


मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में शुरू की गई इस पहल ने प्रदेश में सुशासन के तहत शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊर्जा का संचार किया है। वर्षों से शिक्षक संकट से जूझ रहे विद्यालयों में अब नवपदस्थ शिक्षकों की उपस्थिति से विद्यार्थियों, अभिभावकों, ग्रामीणजनों और विद्यालय प्रबंधन समितियों में उत्साह और संतोष का वातावरण बना है।

ज्ञात हो कि कलेक्टर विनय कुमार लंगेह की मौजूदगी में 01 और 02 जून को युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया पूर्णतः पारदर्शी और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न की गई थी। सभी शिक्षकों को पदस्थापना आदेश प्रदान किए गए थे। शिक्षा विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, अब तक कुल 629 शिक्षकों ने विभिन्न शालाओं में पदभार ग्रहण किया है, जिनमें सहायक शिक्षक के 399, प्रधान पाठक प्राथमिक शाला के 12, सहायक शिक्षक विज्ञान के 08, शिक्षक के 127, प्रधान पाठक मिडिल स्कूल 01, व्याख्याता के 82 पद शामिल हैं।

छत्तीसगढ़ में शिक्षा विभाग में 5,000 शिक्षकों की भर्ती, साय सरकार का बड़ा कदम

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग में 5,000 शिक्षकों की भर्ती का ऐलान किया है। यह भर्ती प्रथम चरण में होगी, जिसके लिए विभागीय स्तर पर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। इस निर्णय से प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षक-छात्र अनुपात को संतुलित करने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।


राज्य में युक्तियुक्तकरण (Rationalization) की प्रक्रिया के तहत स्कूलों और शिक्षकों का पुनर्वितरण किया जा रहा है, ताकि शिक्षकों की कमी वाले स्कूलों में पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध हो। शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 212 प्राथमिक स्कूल शिक्षक-विहीन हैं, और 6,872 प्राथमिक स्कूलों में केवल एक शिक्षक है। वहीं, 48 पूर्व माध्यमिक स्कूलों में कोई शिक्षक नहीं है, और 255 स्कूल एकल शिक्षक पर निर्भर हैं। इस भर्ती से इन समस्याओं को दूर करने में मदद मिलेगी।

युक्तियुक्तकरण के तहत 10,463 स्कूलों में से 166 स्कूलों (133 ग्रामीण और 33 शहरी) का समायोजन किया जाएगा, जहां छात्रों की संख्या बहुत कम है। यह सुनिश्चित करेगा कि संसाधनों का बेहतर उपयोग हो और बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिले। भर्ती प्रक्रिया की आधिकारिक अधिसूचना जल्द जारी होने की उम्मीद है, और आवेदन छत्तीसगढ़ सरकार के भर्ती पोर्टल के माध्यम से किए जाएंगे।

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