Media24Media.com: #वन विभाग

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #वन विभाग. Show all posts
Showing posts with label #वन विभाग. Show all posts

वन विभाग ने जारी किए IFS प्रशिक्षु अधिकारियों के पदस्थापना आदेश, विभिन्न वनमंडलों में मिली जिम्मेदारी

No comments Document Thumbnail

 रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के वन विभाग ने 2024 बैच के भारतीय वन सेवा (IFS) के प्रशिक्षु अधिकारियों के पदस्थापना आदेश जारी कर दिए हैं। विभाग द्वारा जारी आदेश के तहत इन अधिकारियों को राज्य के विभिन्न वनमंडलों में उप वनमंडलाधिकारी (SDO) के पद पर जिम्मेदारी सौंपी गई है। इनमें सरगुजा, कटघोरा, सुकमा, नारायणपुर और राजनांदगांव वनमंडल शामिल हैं।


वन विभाग के अनुसार, प्रशिक्षण अवधि के दौरान सभी प्रशिक्षु अधिकारी संबंधित वनमंडलों में विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (OSD) के रूप में कार्य करेंगे। इस दौरान उन्हें वन प्रबंधन, वन एवं वन्यजीव संरक्षण तथा विभागीय कार्यप्रणाली का गहन व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।


आदेश में स्पष्ट किया गया है कि प्रशिक्षण अवधि पूर्ण होने के बाद भी ये अधिकारी फिलहाल इन्हीं उप वनमंडलों में अपनी सेवाएं देते रहेंगे। इस पहल का मुख्य उद्देश्य प्रशिक्षु अधिकारियों को मैदानी (फील्ड) स्तर पर प्रशासनिक व तकनीकी अनुभव प्रदान कर भविष्य की बड़ी जिम्मेदारियों के लिए तैयार करना है।

तेंदुए के हमले में अधेड़ की मौत, हाथ-पैर गायब मिलने से इलाके में दहशत

No comments Document Thumbnail

 धमतरी। जिले के वनांचल क्षेत्र बेलरगांव में तेंदुए के हमले से एक अधेड़ ग्रामीण की दर्दनाक मौत का मामला सामने आया है। दुधावा जलाशय के पास स्थित कोड़मुड़ गांव निवासी 55 वर्षीय चौथराम मंडावी मंगलवार शाम से लापता थे। गुरुवार सुबह उनका क्षत-विक्षत शव पहाड़ी क्षेत्र में बरामद किया गया। शव की स्थिति देखकर तेंदुए के हमले की आशंका जताई जा रही है।


जानकारी के अनुसार, चौथराम मंडावी मंगलवार शाम शौच के लिए घर से निकले थे, लेकिन देर रात तक वापस नहीं लौटे। परिजनों और ग्रामीणों ने उनकी तलाश शुरू की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। गुरुवार सुबह दुधावा जलाशय किनारे पहाड़ी इलाके में उनका शव मिला, जिसके बाद पूरे गांव में सनसनी फैल गई।

ग्रामीणों के मुताबिक शव के पास घसीटे जाने के निशान मिले हैं। मृतक का एक हाथ और पैर गायब था, जिससे तेंदुए के हमले की आशंका और मजबूत हो गई है। सूचना मिलते ही वन विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की गई।

इधर, धमतरी से लगे ग्राम कोटाभर्री में भी तेंदुए द्वारा एक गाय के बछड़े का शिकार किए जाने की जानकारी सामने आई है। लगातार हो रही घटनाओं से ग्रामीणों में भय का माहौल है। लोग शाम ढलते ही घरों में कैद होने लगे हैं।
धमतरी वन मंडल के डीएफओ श्रीकृष्ण जाधव ने बताया कि मामला बिड़गुड़ी वन परिक्षेत्र के कोड़मुड़ गांव का है। प्रारंभिक जांच में घटनास्थल पर घसीटने के निशान और अन्य साक्ष्य मिले हैं, जिससे तेंदुए की मौजूदगी की संभावना अधिक लग रही है। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी।

डीएफओ ने बताया कि धमतरी और गरियाबंद जिले के जंगलों में तेंदुओं की संख्या अधिक है। गर्मी के दिनों में भोजन और पानी की तलाश में वन्य प्राणी गांवों की ओर पहुंच जाते हैं। वन विभाग ने जंगल से लगे गांवों में अलर्ट जारी करते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।

गौरतलब है कि दो वर्ष पहले भी इसी क्षेत्र में तेंदुए ने आंगन में खेल रही तीन वर्षीय मासूम बच्ची को उठा लिया था। अब एक बार फिर हुई इस घटना ने पूरे वनांचल क्षेत्र में दहशत और चिंता का माहौल पैदा कर दिया है।

भीषण गर्मी का असर: हीटवेव से बाघ भी बेहाल, वन विभाग ने शुरू किया खास इंतजाम

No comments Document Thumbnail

 देहरादून। अप्रैल महीने में ही बढ़ती गर्मी ने आम जनजीवन के साथ वन्यजीवों पर भी असर डालना शुरू कर दिया है। उत्तराखंड में इस बार मैदानी इलाकों के साथ पहाड़ी क्षेत्रों में भी तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया जा रहा है। हीटवेव का असर अब बाघों पर भी देखने को मिला है, जिसके बाद वन विभाग ने विशेष इंतजाम शुरू किए हैं।


जानकारी के अनुसार, हाल ही में रेस्क्यू किए गए चार घायल बाघों में डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक जैसे लक्षण पाए गए। इनमें एक बाघ की मौत हो चुकी है, जबकि एक बाघिन सहित तीन अन्य बाघों को कॉर्बेट नेशनल पार्क के ढेला रेस्क्यू सेंटर भेजा गया है। बताया जा रहा है कि बाघिन की हालत सबसे ज्यादा गंभीर है।

वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, बाघों को राहत देने के लिए ग्लूकोज चढ़ाने के साथ विशेष प्रकार की आइसक्रीम दी जा रही है। इस आइसक्रीम में इलेक्ट्रोलाइट, मिनरल और जरूरी दवाएं मिलाई गई हैं, ताकि शरीर में पानी और ऊर्जा की कमी पूरी की जा सके।
कॉर्बेट पार्क के निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने बताया कि घायल होने के बाद संभव है कि बाघ लंबे समय तक धूप में पड़े रहे हों या पानी तक नहीं पहुंच पाए हों, जिससे उनकी हालत बिगड़ गई। उन्होंने कहा कि बाघ सामान्यतः मौसम सहन कर लेते हैं, लेकिन लंबे समय तक भीषण गर्मी और पानी की कमी उनके लिए भी खतरनाक हो सकती है।

मौसम विभाग ने मंगलवार से राज्य के कुछ जिलों में बारिश और ओलावृष्टि की संभावना जताई है, जिससे तापमान में राहत मिलने की उम्मीद है।

वन विभाग की बड़ी कार्रवाई- उदंती-सीतानदी अभ्यारण्य क्षेत्र में 6 शिकारी गिरफ्तार

No comments Document Thumbnail

रायपुर। राज्य वन क्षेत्र अंतर्गत आ रहे शिकार के मामलों पर अंकुश लगाने व ऐसी व्यवस्था लागू करने के लिए जिससे वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके, इसके लिए वन मंत्री केदार कश्यप ने वन विभाग के उच्च अधिकारियों के साथ लगातार बैठक कर वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा, संरक्षण व संवर्धन के निर्देश दिए हैं। साथ ही किसी भी लापरवाही पर सख्त कार्रवाई करने की बात कही है, जिसके फलस्वरूप वनमंत्री कश्यप के नेतृत्व व प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) के कुशल दिशा निर्देश का पालन करते हुए छत्तीसगढ़ के विभिन्न स्थानों में वन एवं वन्यजीव सुरक्षा के मद्देनजर वन विभाग द्वारा लगातार एंटी स्नेयर वाक अभियान चलाया जा रहा है, जिससे वन विभाग को लगातार सफलता मिल रही है।

वन क्षेत्र में शिकार पर अंकुश लगाने के लिए कठोर गश्तए वनकर्मियों की तैनाती, आधुनिक तकनीक,ड्रोन, ट्रैप कैमरे, का उपयोग, स्थानीय समुदायों को जोड़ना, कड़े कानून और जुर्माने, और जागरूकता अभियान जैसे कदम उठाने चाहिए, खासकर पिकनिक या अन्य गतिविधियों की आड़ में होने वाले अवैध शिकार को रोकने के लिए चौकसी बढ़ाया गयी है।

गरियाबंद जिले के परिक्षेत्र कुल्हाड़ीघाट के अंतर्गत ओड़ सर्कल में वन्यजीव अपराध के विरुद्ध एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 6 शिकारियों को गिरफ्तार किया गया। वन विभाग द्वारा अवैध शिकार को रोकने के लिए निरंतर निगरानी बरती जा रही है और नियमित एन्टी स्नेयर वाक अभियान चलाए जा रहे हैं। वन विभाग की मुस्तैदी के चलते ग्राम सुनाबेड़ा (ओडिशा) के 02 और ग्राम ओड़ के 04 अभियुक्तों को धर-दबोचा गया है। पकड़े गए अभियुक्तों के पास से खरगोश पकड़ने के फंदे, तीर-कमान और मछली पकड़ने के जाल जैसे शिकार की सामग्री बरामद किए गए हैं। इन अभियुक्तों के विरुद्ध दो अलग-अलग प्रकरणों में पी.ओ.आर. (प्रारंभिक अपराध रिपोर्ट) दर्ज कर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत वैधानिक कार्यवाही की गई है। गिरफ्तार किए गए सभी 06 अभियुक्तों को दिनांक 07 जनवरी को माननीय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट गरियाबंद के समक्ष पेश किया गया।

वन विभाग की यह कार्रवाई क्षेत्र में वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और शिकारियों के हौसले पस्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वन विभाग द्वारा वनों और वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए गश्त अभियान को और अधिक सशक्त किया गया है ताकि भविष्य में शिकार की ऐसी गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सके।

वन विभाग का विधिक साक्षरता प्रशिक्षण कार्यक्रम, अपराधियों पर सख्त कार्रवाई की तैयारी

No comments Document Thumbnail

रायपुर। राज्य के वन क्षेत्रों में अवैध शिकार की घटनाओं को रोकने के लिए वन विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा है। कई माप्रतिशत मलों में अपराधी पकड़े भी जाते हैं, लेकिन कभी-कभी वनकर्मियों को कानूनी प्रावधानों की पूरी जानकारी न होने के कारण अपराधियों के विरुद्ध मजबूत प्रकरण तैयार नहीं हो पाता, जिससे वे आसानी से छूट जाते हैं। 

विधिक साक्षरता कार्यशाला एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम

ऐसी स्थिति से बचने और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वन मंत्री केदार कश्यप के नेतृत्व में तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) अरुण कुमार पाण्डेय के निर्देशानुसार वन विभाग के कर्मचारियों के लिए विधिक साक्षरता प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

इसी क्रम में दिसंबर माह में वनमण्डल कार्यालय दुर्ग के सभागार में “प्रोटेक्ट टुडे एंड सिक्योर टुमारो” परियोजना के अंतर्गत एक दिवसीय विधिक साक्षरता कार्यशाला एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसमें जिला न्यायालय दुर्ग के काउंसलर चंद्राकर ने मुख्य वक्ता के रूप में वन एवं वन्यजीव संरक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण कानूनी जानकारी दी।

वन एवं वन्यजीव अपराधियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके

इस प्रशिक्षण का उद्देश्य वनकर्मियों को वन कानूनों, नियमों और धाराओं की स्पष्ट जानकारी देना है, ताकि प्रकरणों को मजबूत बनाया जा सके और अपराधियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके। इसके लिए समय-समय पर संशोधित नियमों और कानूनी प्रावधानों की जानकारी कार्यशालाओं के माध्यम से दी जा रही है।

आरक्षित और संरक्षित वनों से संबंधित, कानूनी प्रक्रियाओं की दी गई जानकारी

कार्यक्रम के दौरान भारतीय वन अधिनियम, 1927 तथा वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रमुख प्रावधानों पर विशेष रूप से चर्चा की गई। विशेषज्ञों द्वारा आरक्षित और संरक्षित वनों से संबंधित कानूनी धाराओं तथा विभागीय कार्रवाई की प्रक्रियाओं को सरल भाषा में समझाया गया। साथ ही राजस्व क्षेत्रों में होने वाले वन अपराधों की रोकथाम और नियंत्रण के उपायों पर भी जानकारी दी गई।

प्रशिक्षण के एक विशेष सत्र में नालसा के विशेषज्ञों ने अदालती मामलों के प्रबंधन से संबंधित “क्या करें और क्या न करें” पर व्यावहारिक सुझाव दिए, जिससे वनकर्मी विधिक प्रक्रियाओं का सही ढंग से पालन कर सकें। इस अवसर पर वन परिक्षेत्र अधिकारी दुर्ग एवं धमधा सहित वनमण्डल के समस्त कार्यपालिक और क्षेत्रीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे, जिन्हें वन्यजीव और वन संपदा की सुरक्षा हेतु विधिक रूप से सजग रहने के लिए प्रशिक्षित किया गया।

वन्यजीव अपराध रोकथाम पर अंतर-एजेंसी बैठक आयोजित, प्रशिक्षण और जागरूकता पर विशेष जोर

No comments Document Thumbnail

रायपुर। भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो, मध्य क्षेत्र मुख्यालय भोपाल, छत्तीसगढ़ वन विभाग तथा विभिन्न राज्यों के वन विभागों द्वारा आज नवा रायपुर के अरण्य भवन में वन्यजीव अपराध रोकथाम पर अन्तर एजेंसी की बैठक आयोजित की गई। बैठक में रेलवे, पुलिस, वन विभाग, केंद्रीय एजेंसियों तथा विभिन्न विशेषज्ञ संस्थाओं के अधिकारी शामिल हुए।

बैठक में वन बल प्रमुख व्ही श्रीनिवास राव, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, उड़ीसा तथा झारखंड के वरिष्ठ वन अधिकारी, पुलिस अधिकारी, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो के अधिकारी, फॉरेंसिक विशेषज्ञ सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे तथा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विभिन्न राज्यों के 35 अधिकारी भी जुड़े।

बैठक में वन्यजीव अपराधों की रोकथाम, अपराधियों पर प्रभावी कार्रवाई, तस्करी नेटवर्क की पहचान, अदालतों में केस प्रस्तुत करने की प्रक्रिया और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर विस्तृत चर्चा की गई। देशभर में बढ़ते वन्यजीव अपराधों को देखते हुए सभी विभागों ने अपने-अपने सुझाव और अनुभव को साझा किया।

छत्तीसगढ़ में प्रशिक्षण की आवश्यकता पर जोर

बैठक के दौरान बताया गया कि छत्तीसगढ़ वन विभाग में वन्यजीव अपराध नियंत्रण और क्राइम सीन डिटेक्शन विषय पर क्षेत्रीय स्तर पर प्रशिक्षण की आवश्यकता है। इस पर वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो, नई दिल्ली ने सहमति जताई और विभागीय कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण देने का आश्वासन दिया। साथ ही वन बल प्रमुख व्ही श्रीनिवास राव ने बताया कि स्थानीय मुखबिर तंत्र को मजबूत करने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया।

वन्य अपराधों की त्वरित जांच और कानूनी प्रक्रिया पर चर्चा

प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी ) अरुण कुमार पांडे ने वन्यजीव अपराध प्रकरणों की त्वरित जांच, साक्ष्य संकलन और केस को न्यायालय में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया और अधिकारियों को समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

विशेष टास्क फोर्स बनाने पर विचार

बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य में वन्यजीव अपराध नियंत्रण के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (STF) गठित करने पर भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई, ताकि राज्य में वन्यजीव तस्करी और अवैध व्यापार पर और अधिक प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।


प्रतापपुर वन परिक्षेत्र में अवैध साल लकड़ी जब्त, वन अपराध दर्ज

No comments Document Thumbnail

रायपुर। सूरजपुर जिले के प्रतापपुर वन परिक्षेत्र में वन विभाग और हाथी मित्र दल की संयुक्त कार्रवाई में अवैध रूप से साल की लकड़ी ले जा रहे एक वाहन को जब्त किया गया। इस दौरान कुल 42 नग अवैध साल लकड़ी के चिरान बरामद किए गए।

विभागीय अधिकारियों को सूचना मिली कि ग्राम झींगादोहर के पंडोपारा में एक वाहन में लकड़ी लोड की जा रही है। सूचना के आधार पर मुख्य वन संरक्षक और वनमंडलाधिकारी के निर्देशानुसार गठित टीम ने वाहन की तलाशी ली। 

तलाशी के दौरान वाहन में 19 नग अवैध साल लकड़ी के चिरान पाए गए। साथ ही आस-पास के गन्ना और मक्का के खेतों में की गई जांच में 23 नग लकड़ी के चिरान और बरामद किए गए। वन विभाग ने इस मामले में वन अधिनियम, 1927 के तहत अपराध दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।

वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, शिकार के पूर्व तीन शिकारी गिरफ्तार

No comments Document Thumbnail

रायपुर। वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार वन्य प्राणियों के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में सख्त कार्रवाई करते हुए बलौदाबाजार वनमण्डल ने शिकार की एक बड़ी साजिश को विफल किया है। वनमण्डलाधिकारी बलौदाबाजार धम्मशील गणवीर ने बताया कि देवपुर वन परिक्षेत्र की टीम ने 31 अगस्त 2025 की रात कसौंदी बीट में गश्त के दौरान शिकार की योजना बना रहे तीन आरोपियों को रंगेहाथ गिरफ्तार किया।

ये आरोपी विद्युत जीआई तार को 11 केवी लाइन से जोड़कर वन्य प्राणियों का शिकार करने की कोशिश कर रहे थे। इन आरोपियों से मौके पर जीआई तार, दवाइयों की खाली शीशियाँ, लकड़ी की खूंटी, प्लास्टिक कवर पाइप और बांस की डांगिनी जैसी सामग्री जब्त की गई।

वनमण्डलाधिकारी बलौदाबाजार धम्मशील गणवीर ने बताया कि यह सफलता विगत दिनों आयोजित बैठक और रात्रिकालीन गश्त की सुदृढ़ व्यवस्था का परिणाम है। उन्होंने कहा कि इस त्वरित कार्रवाई में संभावित शिकार को रोका, जिसका सारा श्रेय वन विभाग की सजगता और तत्परता को जाता है।

गिरफ्तार आरोपियों में बालाराम बरिहा (50 वर्ष), गणेशराम बरिहा (28 वर्ष) और गुनसागर बरिहा (51 वर्ष) सभी ग्राम कुम्हारी, थाना राजादेवरी, जिला बलौदाबाजार निवासी हैं। इन आरोपियों के विरुद्ध वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 एवं संशोधित अधिनियम 2022 की धाराओं के अंतर्गत अपराध दर्ज कर उन्हें जेल भेजा दिया गया है।

वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशों के परिपालन में उक्त कारवाई हुई है उन्होंने वन विभाग की टीम को बधाई देते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्रवाई से वन्य प्राणियों की सुरक्षा को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने आमजन और युवाओं से अपील की है कि वन्यजीवों की रक्षा में वन विभाग का सहयोग करें और किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना विभाग को दें।


Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.