Media24Media.com: #राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन

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बैंक एवं मुद्रा लिंकेज मेले में महिलाओं को बड़ी सौगात, स्व-सहायता समूहों को 2.43 करोड़ रुपए से अधिक का ऋण स्वीकृत

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 रायपुर : राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) अंतर्गत जशपुर जिले के जनपद पंचायत मनोरा में बैंक लिंकेज एवं मुद्रा लिंकेज मेले का आयोजन किया गया। मेले में विकासखंड के विभिन्न बैंकों द्वारा स्व-सहायता समूहों एवं महिला उद्यमियों को ऋण स्वीकृति एवं वितरण किया गया।


कार्यक्रम के दौरान 64 मुद्रा ऋण प्रकरणों में कुल 56 लाख 40 हजार रुपए तथा 75 स्व-सहायता समूहों को बैंक लिंकेज के माध्यम से 1 करोड़ 87 लाख 50 हजार रुपए के ऋण की स्वीकृति एवं वितरण किया गया। इस प्रकार कुल 2 करोड़ 43 लाख 90 हजार रुपए की ऋण सहायता उपलब्ध कराई गई।

मेले में विकासखंड मनोरा की लगभग 200 स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने भाग लिया। इस अवसर पर महिलाओं को स्वरोजगार, उद्यमिता विकास तथा वित्तीय समावेशन से संबंधित जानकारी भी प्रदान की गई। बैंकिंग सेवाओं तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने और महिला समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में यह आयोजन महत्वपूर्ण साबित हुआ।

कार्यक्रम में जनपद सदस्य रंजीत भगत, अमीन खान, राकेश तिवारी, रघुनाथ राम, जनपद पंचायत मनोरा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी रवि बघेल, बिन्सेंट तिर्की, विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में स्व-सहायता समूहों की महिलाएं उपस्थित थीं। सभी के सहयोग से कार्यक्रम का सफल आयोजन संपन्न हुआ।

बिहान से बदली महिलाओं की जिंदगी, आर्थिक सशक्तिकरण की राह पर बढ़ रहीं ‘लखपति दीदी

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 रायपुर : राज्य में केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से संचालित योजनाओं का प्रभाव अब गांव-गांव में दिखाई देने लगा है।


राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) और महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाएं स्वरोजगार और समूह आधारित गतिविधियों से जुड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं और ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी नई पहचान बना रही हैं।

जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा विकासखंड के ग्राम पोड़ीदल्हा की निवासी श्रीमती पुष्पलता साहू इसका प्रेरक उदाहरण हैं। पहले उनका परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था और सीमित आय में परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो जाता था।

साहू बताती हैं कि महतारी वंदन योजना के तहत उन्हें हर माह मिलने वाली सहायता राशि से परिवार की आर्थिक स्थिति में पहले की तुलना में काफी सुधार हुआ है। इस राशि से उन्हें घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मदद मिली और आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा भी मिली। इसके साथ ही वे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़कर स्वयं सहायता समूह के माध्यम से विभिन्न आर्थिक गतिविधियों में शामिल हुईं। समूह की ताकत और अपनी मेहनत के बल पर उन्होंने अपनी आय में लगातार वृद्धि की और आज वे ‘लखपति दीदी’ की श्रेणी में शामिल हो चुकी हैं।

पुष्पलता साहू न केवल स्वयं आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि अपने गांव की अन्य महिलाओं को भी योजनाओं से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं। वे महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आजीविका गतिविधियां शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करती हैं और उन्हें मार्गदर्शन भी देती हैं, ताकि अधिक से अधिक महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं ने महिलाओं को गरीबी से बाहर निकलकर सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर दिया है। इन योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने और ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी पहचान बनाने का अवसर मिला है।

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