Media24Media.com: #राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

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राष्ट्रपति के समक्ष बास्तानार के युवाओं ने ‘गौर नृत्य’ से बिखेरे अद्भुत लोक-रंग

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 रायपुर : शनिवार का दिन बस्तर के इतिहास में एक अविस्मरणीय अध्याय के रूप में दर्ज हो गया, जब संभाग स्तरीय ‘बस्तर पण्डुम’ के शुभारंभ अवसर पर देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बस्तर की आदिम संस्कृति का सजीव और जीवंत स्वरूप प्रत्यक्ष रूप से देखा। इस गरिमामयी अवसर पर बास्तानार क्षेत्र के आदिवासी युवाओं द्वारा प्रस्तुत विश्व-प्रसिद्ध ‘गौर नृत्य’ ने पूरे परिसर को ढोल की थाप और घुंघरुओं की झनकार से गुंजायमान कर दिया। राष्ट्रपति ने इस मनोहारी प्रस्तुति का तन्मयता से अवलोकन करते हुए बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को निकट से महसूस किया।


बास्तानार के युवाओं द्वारा प्रस्तुत यह नृत्य केवल एक सांस्कृतिक प्रदर्शन भर नहीं था, बल्कि ‘दंडामी माड़िया’ (बाइसन हॉर्न माड़िया) जनजाति की परंपराओं, जीवन-दर्शन और सांस्कृतिक चेतना का एक जीवंत दस्तावेज था। जैसे ही नर्तक दल मंच पर उतरा, उनकी विशिष्ट वेशभूषा ने उपस्थित जनसमूह का ध्यान सहज ही अपनी ओर आकर्षित कर लिया। पुरुष नर्तकों के सिर पर सजे गौर के सींगों वाले मुकुट, जिन्हें कौड़ियों और मोरपंखों से अलंकृत किया गया था, बस्तर की वन्य संस्कृति तथा गौर पशु के प्रति आदिवासी समाज के गहरे सम्मान और श्रद्धा को प्रतीकात्मक रूप से अभिव्यक्त कर रहे थे। वहीं पारंपरिक साड़ियों और आभूषणों से सुसज्जित महिला नर्तकियों ने जब अपने हाथों में थमी ‘तिरूडुडी’ (लोहे की छड़ी) को भूमि पर पटकते हुए ताल दी, तो एक अद्भुत, गूंजती और लयबद्ध ध्वनि ने वातावरण को मंत्रमुग्ध कर दिया।


नृत्य के दौरान पुरुष नर्तकों ने गले में टंगे भारी ‘मांदरी’ (ढोल) को बजाते हुए जंगली भैंसे की आक्रामक, चंचल और ऊर्जावान मुद्राओं की प्रभावशाली नकल प्रस्तुत की। यह दृश्य दर्शकों को ऐसा अनुभव करा रहा था, मानो वे जंगल के सजीव और प्राकृतिक परिवेश के प्रत्यक्ष साक्षी बन गए हों। उल्लास और आनंद से परिपूर्ण इस नृत्य में माड़िया जनजाति की शिकार-परंपरा, साहस और अदम्य ऊर्जा स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती रही। गोलाकार घेरे में थिरकते युवक और उनके कदम से कदम मिलाती युवतियों ने यह सिद्ध कर दिया कि आधुनिकता के इस दौर में भी बस्तर ने अपनी सांस्कृतिक जड़ों को पूरी निष्ठा और गर्व के साथ संजोकर रखा है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की गरिमामयी उपस्थिति में बास्तानार के कलाकारों द्वारा दी गई यह सशक्त और भावपूर्ण प्रस्तुति न केवल बस्तर पण्डुम की भव्य सफलता का प्रतीक बनी, बल्कि इसने बस्तर की लोक-कला, जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक वैभव को राष्ट्रीय पटल पर पुनः प्रभावशाली ढंग से रेखांकित किया।

राष्ट्रपति के जगदलपुर दौरे की तैयारी शुरू, मुख्य सचिव ने ली उच्चस्तरीय बैठक

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 रायपुर : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 07 फरवरी को बस्तर पंडुम संभाग स्तरीय शुभारंभ कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जगदलपुर आएंगी। राष्ट्रपति के दौरे को लेकर प्रशासनिक तैयारियां शुरू कर दी गई है। मुख्य सचिव  विकास शील ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के बस्तर प्रवास के मद्देनजर आज यहां मंत्रालय में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक लेकर बस्तर पंडुम के संभागीय कार्यक्रम के आयोजन और इससे संबंधित अन्य तैयारियों की समीक्षा की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।


 
मुख्य सचिव  विकासशील ने राष्ट्रपति महोदया के प्रवास अवसर पर सुरक्षा, चिकित्सा, आवागमन सहित तमाम जरूरी व्यवस्थाओं के संबंध में अधिकारियों को निर्देश दिए है। मुख्य सचिव ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बस्तर कलेक्टर से वहां की सभी व्यवस्थाओं की जानकारी ली। मुख्य सचिव ने रायपुर कलेक्टर को भी आवश्यक दिशा निर्देश दिए। 
 
बैठक में जनसम्पर्क एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव  अविनाश चंपावत, गृह विभाग की सचिव नेहा चंपावत, स्वास्थ्य विभाग के सचिव  अमित कटारिया, लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह सहित अन्य विभागों के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शामिल हुए।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से की सौजन्य मुलाकात, ‘बस्तर पंडुम 2026’ में किया आमंत्रित

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को छत्तीसगढ़ में आयोजित होने वाले राज्यस्तरीय जनजातीय सांस्कृतिक महोत्सव ‘बस्तर पंडुम 2026’ में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने का आमंत्रण दिया।

मुख्यमंत्री साय ने राष्ट्रपति को बस्तर अंचल की समृद्ध जनजातीय कला, संस्कृति, परंपराओं एवं लोक जीवन से अवगत कराते हुए कहा कि बस्तर पंडुम राज्य की जनजातीय विरासत के संरक्षण, संवर्धन और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। यह आयोजन तीन चरणों में आयोजित किया जाएगा, जिसका अंतिम चरण फरवरी 2026 में बस्तर में संपन्न होगा।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने राष्ट्रपति को छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, बुनियादी ढांचे के विस्तार एवं जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति से भी अवगत कराया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जनजातीय समाज को विकास की मुख्यधारा से जोड़ते हुए उनकी सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जनजातीय संस्कृति से जुड़े इस आयोजन की सराहना करते हुए बस्तर पंडुम 2026 के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं।

उल्लेखनीय है कि बस्तर पंडुम 2026 के माध्यम से लोकनृत्य, लोकगीत, पारंपरिक वाद्ययंत्र, हस्तशिल्प, जनजातीय व्यंजन, वेशभूषा सहित विभिन्न सांस्कृतिक विधाओं का प्रदर्शन किया जाएगा।

राष्ट्रपति ने शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए

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 नई दिल्ली-  राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (5 सितंबर, 2025) शिक्षक दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में देश भर के शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए।

सभा को संबोधित करते हुए, राष्ट्रपति ने कहा कि भोजन, वस्त्र और आवास की तरह ही, शिक्षा भी व्यक्ति की गरिमा और सुरक्षा के लिए आवश्यक है। संवेदनशील शिक्षक बच्चों में गरिमा और सुरक्षा की भावना जगाने का काम करते हैं। उन्होंने एक शिक्षिका के रूप में अपने समय को याद करते हुए उस समय को अपने जीवन का एक अत्यंत सार्थक काल-खंड बताया।

राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा व्यक्ति को सक्षम बनाती है। कमजोर से कमजोर पृष्ठभूमि के बच्चे भी शिक्षा के बल पर प्रगति के आसमान को छू सकते हैं। बच्चों की उड़ान को शक्ति देने में स्नेही एवं निष्ठावान शिक्षक सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिक्षकों के लिए सबसे बड़ा पुरस्कार यही है कि उनके विद्यार्थी उन्हें आजीवन याद रखें और परिवार, समाज तथा  देश के लिए सराहनीय योगदान दें।

राष्ट्रपति ने कहा कि विद्यार्थियों का चरित्र निर्माण एक शिक्षक का प्राथमिक कर्तव्य है। नैतिक आचरण करने वाले संवेदनशील, जिम्मेदार और समर्पित विद्यार्थी, उन विद्यार्थियों से बेहतर होते हैं जो केवल प्रतिस्पर्धा, किताबी-ज्ञान और स्वार्थ में रुचि रखते हैं। एक अच्छे शिक्षक में भावना और बुद्धि, दोनों ही पक्ष प्रबल होते हैं। भावनाओं और बुद्धि के समन्वय का प्रभाव विद्यार्थियों पर भी पड़ता है।

राष्ट्रपति ने कहा कि स्मार्ट ब्लैकबोर्ड, स्मार्ट क्लासरूम और अन्य आधुनिक सुविधाओं का अपना महत्व है। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण होते हैं स्मार्ट शिक्षक। स्मार्ट शिक्षक वैसे शिक्षक होते हैं जो अपने विद्यार्थियों के विकास से जुड़ी जरूरतों को समझते हैं। स्मार्ट शिक्षक स्नेह और संवेदनशीलता के साथ अध्ययन की प्रक्रिया को रोचक और प्रभावी बनाते हैं। ऐसे शिक्षक विद्यार्थियों को समाज और राष्ट्र की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम बनाते हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि बालिकाओं की शिक्षा को सर्वाधिक महत्व दिया जाना चाहिए। बालिकाओं की शिक्षा में निवेश करके, हम अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के निर्माण में एक अमूल्य निवेश करते हैं। उन्होंने कहा कि बालिकाओं को सर्वोत्तम संभव शिक्षा प्रदान करना महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास को प्रोत्साहित करने का सबसे प्रभावी तरीका है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के विस्तार और वंचित वर्गों की बालिकाओं को विशेष शिक्षा-सुविधाएं प्रदान करने पर बल देती है। लेकिन शिक्षा से जुड़ी किसी भी पहल की सफलता मुख्य रूप से शिक्षकों पर ही निर्भर करती है। उन्होंने शिक्षकों से कहा कि वे बालिकाओं को शिक्षित करने में जितना अधिक योगदान देंगे, शिक्षक के रूप में उनका जीवन उतना ही सार्थक होगा। उन्होंने शिक्षकों से बालिकाओं सहित उन सभी विद्यार्थियों पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया, जो अपेक्षाकृत संकोची होते हैं या कम सुविधा संपन्न पृष्ठभूमि से आते हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उद्देश्य भारत को ज्ञान की वैश्विक महाशक्ति बनाना है। इसके लिए यह अनिवार्य है कि हमारे शिक्षकों की पहचान विश्व के सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों के रूप में हो। हमारे संस्थानों और शिक्षकों को शिक्षा के तीनों क्षेत्रों - स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा और कौशल संबंधी शिक्षा - में सक्रिय योगदान देना होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि हमारे शिक्षक अपने निर्णायक योगदान से भारत को ज्ञान की वैश्विक महाशक्ति के रूप में प्रतिष्ठित करेंगे।

छत्तीसगढ़ को स्वच्छता में सात सितारे, राष्ट्रपति 17 जुलाई को करेंगी सम्मानित

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 रायपुर : स्वच्छ सर्वेक्षण-2024 में छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है। नई दिल्ली में आगामी 17 जुलाई को आयोजित होने वाले स्वच्छ सर्वेक्षण पुरस्कार समारोह में राज्य के सात नगरीय निकायों को स्वच्छता के मानकों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जाएगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु इन पुरस्कारों को प्रदान करेंगी। इस अवसर पर केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल तथा केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू भी उपस्थित रहेंगे।


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, स्वच्छ सर्वेक्षण पुरस्कार समारोह में छत्तीसगढ़ के तीन नगरीय निकायों को प्रेसिडेंट्स अवार्ड प्रदान करेंगी। स्वच्छता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए बिलासपुर नगर निगम को तीन लाख से दस लाख आबादी वाले (Big Cities) शहरों की श्रेणी में, कुम्हारी नगर पालिका को 20 हजार से 50 हजार आबादी वाले (Small Cities) शहरों की श्रेणी में तथा बिल्हा नगर पंचायत को 20 हजार से कम आबादी वाले (Very Small Cities) शहरों की श्रेणी में यह सम्मान दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, रायपुर नगर निगम को स्वच्छता के क्षेत्र में राज्य स्तर पर श्रेष्ठ कार्यों के लिए केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा मिनिस्ट्रियल अवार्ड (Ministerial Award) प्रदान किया जाएगा।

स्वच्छता के क्षेत्र में असाधारण प्रदर्शन करने वाले शहरों को पहचान देने हेतु इस वर्ष सुपर स्वच्छता लीग (एसएसएल) नामक एक विशेष श्रेणी की शुरुआत की गई है। इस लीग में वे शहर शामिल किए गए हैं, जो पिछले तीन वर्षों में कम से कम एक बार शीर्ष तीन में स्थान प्राप्त कर चुके हैं तथा वर्तमान वर्ष में अपनी संबंधित जनसंख्या श्रेणी में शीर्ष 200 में बने हुए हैं। इस नवीन श्रेणी में छत्तीसगढ़ के तीन नगरीय निकायों का चयन हुआ है – अंबिकापुर नगर निगम (50 हजार से तीन लाख आबादी वाले शहरों की श्रेणी), पाटन नगर पंचायत तथा बिश्रामपुर नगर पंचायत (20 हजार से कम आबादी वाले शहरों की श्रेणी) को एसएसएल के लिए चयनित किया गया है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने स्वच्छ सर्वेक्षण में राष्ट्रीय पुरस्कारों के लिए चयनित सातों नगरीय निकायों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के शहरों को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग तथा स्थानीय निकायों द्वारा सतत किए जा रहे प्रयासों का यह उत्कृष्ट परिणाम है। उन्होंने आशा जताई कि आने वाले समय में राज्य के और भी अधिक नगरीय निकाय स्वच्छता के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित होंगे। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि शहरी सरकारों से लेकर राज्य और केंद्र सरकार तक, सभी मिलकर शहरों को स्वच्छ, सुंदर और सुविधासंपन्न बनाने हेतु अनेक नवाचारों के साथ निरंतर कार्य कर रहे हैं।

"छत्तीसगढ़ के सात नगरीय निकायों का स्वच्छ सर्वेक्षण-2024 में राष्ट्रीय स्तर पर चयन होना पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है। यह हमारे नगरीय प्रशासन, स्थानीय निकायों और नागरिकों के सामूहिक प्रयासों का प्रमाण है। बिलासपुर, कुम्हारी, बिल्हा, रायपुर, अंबिकापुर, पाटन और बिश्रामपुर जैसे शहरों ने स्वच्छता के क्षेत्र में जो उदाहरण प्रस्तुत किया है, वह अन्य निकायों के लिए भी प्रेरणा बनेगा। मैं सभी विजेता नगरीय निकायों को बधाई देता हूँ और विश्वास जताता हूं कि छत्तीसगढ़ स्वच्छता के इस अभियान में देश का अग्रणी राज्य बना रहेगा।"
– मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय

गढ़बेंगाल के पंडीराम मंडावी को पद्मश्री सम्मान, मुख्यमंत्री साय ने दी शुभकामनाएं

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 रायपुर: देश की महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा बस्तर अंचल के गढ़बेंगाल निवासी पंडीराम मंडावी को वर्ष 2025 के पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किया गया है। यह सम्मान उन्हें जनजातीय वाद्य यंत्र निर्माण और काष्ठ शिल्प कला के क्षेत्र में उनके अद्भुत एवं उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया है।


मंडावी द्वारा पारंपरिक गोंड और मुरिया समाज की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने और आगे बढ़ाने के लिए किए गए प्रयासों ने न केवल बस्तर की कला को राष्ट्रीय मंच दिया, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत भी प्रस्तुत किया है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंडावी को बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान छत्तीसगढ़ की जनजातीय प्रतिभा और सांस्कृतिक समृद्धि का गौरवपूर्ण प्रतीक है। उन्होंने कहा कि मंडावी जैसे कलाकारों ने अपनी साधना से यह सिद्ध किया है कि हमारी मिट्टी की कला विश्वपटल पर छा सकती है। यह पद्मश्री सम्मान बस्तर की लोकपरंपरा, शिल्प और सांस्कृतिक चेतना को राष्ट्रीय गौरव दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

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