Media24Media.com: #रावण दहन

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डब्लू आर एस कॉलोनी में रावण दहन: राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में उमड़ा उत्साह

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रायपुर। राजधानी के डब्लू आर एस कॉलोनी मैदान में विजयादशमी उत्सव का भव्य आयोजन हुआ। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की गरिमामय उपस्थिति रही। 

कार्यक्रम में विशाल जनसमूह ने रावण दहन और आतिशबाजी का रोमांचक दृश्य देखा और देर तक उत्सव का आनंद लिया।राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि विजयादशमी का यह पर्व आत्ममंथन का भी अवसर है। 

उन्होंने कहा कि आज हम सभी को संकल्प लेना चाहिए कि अपने भीतर के अहंकार और बुराई का त्याग कर समाज और राष्ट्र की प्रगति में सकारात्मक भूमिका निभाएँ।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि दशहरा का पर्व अधर्म पर धर्म की, असत्य पर सत्य की और बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश देता है। यह पर्व हमें अपने भीतर के नकारात्मक विचारों और प्रवृत्तियों को त्यागकर सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

इस अवसर पर कृषि मंत्री रामविचार नेताम, विधायक पुरंदर मिश्रा सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, आयोजन समिति के पदाधिकारी और श्रद्धालुगण उपस्थित थे।

आज दशहरा पर होगा रावण दहन, जानें भाई के तिलक का शुभ मुहूर्त और विधि

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 Dussehra 2025 Ravan Dahan Muhurat: सनातन धर्म में दशहरा का विशेष महत्व है। इस दिन देशभर में रावण दहन किया जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने आश्विन मास की शुक्ल पक्ष दशमी तिथि पर रावण का वध कर माता सीता को मुक्त कराया था। तभी से यह दिन बुराई पर अच्छाई की जीत के पर्व के रूप में मनाया जाता है। इसी तिथि पर मां दुर्गा ने महिषासुर का वध भी किया था। इसलिए इस दिन नवरात्रि का समापन और दुर्गा विसर्जन भी होता है।


इस बार 2 अक्टूबर 2025, गुरुवार को दशहरा और दुर्गा विसर्जन दोनों एक साथ मनाए जा रहे हैं। कई जगह इसे विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है।

रावण दहन और पूजन का महत्व

भगवान श्रीराम की पूजा की जाती है।
रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतलों का दहन कर बुराई पर अच्छाई की विजय का उत्सव मनाया जाता है।

घरों में शस्त्र पूजा की जाती है।

बहनें भाई के माथे पर तिलक और कान पर जौ लगाती हैं, जिसके बदले में भाई उनकी रक्षा का वचन देता है।

भाई के तिलक की परंपरा

तिलक और जौ लगाने से भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम और विश्वास बढ़ता है।
मान्यता है कि यह परंपरा भाई की आयु, शक्ति और समृद्धि बढ़ाती है।

दशहरा पूजा विधि

प्रातः स्नान कर लाल, नीले या नारंगी वस्त्र धारण करें।
घर के मंदिर की सफाई कर गंगाजल से शुद्ध करें।
चौकी पर भगवान राम की मूर्ति स्थापित कर गंगाजल से अभिषेक करें।
चंदन, फूल, फल, अक्षत और मिठाई अर्पित करें।
धूप-दीप और अगरबत्ती जलाएं।

राम जी के मंत्रों का जाप करें:

ॐ श्री रामाय नमः
श्री राम जय राम जय जय राम
ॐ ह्रां ह्रीं रां रामाय नमः
श्रीराम रक्षा स्तोत्र का पाठ करें और आरती करें।

नीलकंठ दर्शन का महत्व

नीलकंठ पक्षी महादेव का स्वरूप माना जाता है।
दशहरे के दिन इसका दर्शन शुभ और सौभाग्यशाली माना जाता है।
मान्यता है कि भगवान राम ने भी रावण वध से पहले नीलकंठ का दर्शन किया था।

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