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’इकोनॉमी के विकास के लिए वैल्यू एडिशन आधारित उत्पादन करना होगा -राज्यपाल डेका’

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रायपुर। छत्तीसगढ़ की लगभग 80 प्रतिशत अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है। आज भूमि लगातार संकुचित होती जा रही है। अतएव हमें कम जमीन में ज्यादा से ज्यादा उत्पादन के लिए कार्य करना होगा। अर्थव्यवस्था के तेजी से विकास के लिए वैल्यू एडिशन उत्पादन आज की महती आवश्यकता है।

राज्यपाल रमेन डेका एवं कुलाधिपति इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर ने विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में यह बात कही। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और विशिष्ट अतिथि के रूप में कृषि मंत्री राम विचार नेताम और भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली के पूर्व निदेशक और प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार सिंह उपस्थित थे।

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के सभागार में आयोजित भव्य एवं गरिमामय दीक्षांत समारोह में शैक्षणिक वर्ष 2024-25 में उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं को पदक एवं उपाधियां वितरित की गई। विभिन्न संकायों में प्रावीण्य सूची में स्थान प्राप्त करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को 13 स्वर्ण, 7 रजत एवं 2 कांस्य पदक सहित 128 शोधार्थियों को पी.एच.डी, 518 विधार्थियों को स्नातकोत्तर और 1234 विधार्थियों को स्नातक उपाधि प्रदान की गई।

कार्यक्रम के अध्यक्षीय उद्बोधन में राज्यपाल रमेन डेका ने इन उपाधि और पदक प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह छात्र जीवन का एक बहुत बड़ा अवसर होता है। यह केवल डिग्री प्राप्त करने का दिन नही बल्कि भविष्य की शुरूआत का प्रतीक है। जब यह विश्वविद्यालय स्थापित हुआ था तब यहां केवल दो या तीन स्ट्रीम ही उपलब्ध थी। लेकिन समय के साथ शिक्षा और अवसरों का विस्तार हुआ है।

डेका ने कहा कि आज कृषि परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। अब यह विज्ञान तकनीकी, नवाचार और उद्यमिता से संचालित हो रही है। विश्वभर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन, उपग्रह मानचित्र, सटीक कृषि जलवायु अनुकूल तकनीक, जैव प्रौद्योगिकी और डेटा विश्लेषण का उपयोग बढ़ रहा है। 

भारत भी तेजी से इस दिशा में आगे बढ़ रहा है। ड्रोन द्वारा उर्वरक एवं कीटनाशक छिड़काव, डिजिटल उपकरणों से मृदा स्वास्थ्य निगरानी, मोबाइल ऐप द्वारा किसान परामर्श और ई-नाम बाजार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदल रहे हैं। किसानों और युवाओं को भी आधुनिक और उन्नत खेती की ओर बढ़ना चाहिए। छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है। लेकिन अब हमें बासमती जैसे उच्च गुणवत्ता वाले धान के उत्पादन पर भी ध्यान देना चाहिए। इससे कार्पाेरेट कंपनियों द्वारा खरीद आसान होगी और किसानों को बेहतर लाभ मिल सकेगा। हाइड्रोपोनिक्स और प्राकृतिक खेती के लिए भी भविष्य में बड़ी संभावनाएं है। विद्यार्थियों को भी कृषि के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहिए।  

डेका ने कहा कि छत्तीसगढ़ की भूमि और जल संरचना कृषि के लिए अनुकूल है। यहां पानी आसानी से नीचे नहीं जाता जिससे उत्पादन बढ़ाने में सहायता मिलती है। सही तकनीक और सोच के साथ कृषि को और अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।

दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय ने कृषि शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है तथा वैज्ञानिकों द्वारा विकसित नई फसल किस्मों और आधुनिक तकनीकों से किसानों को बड़ा लाभ मिल रहा है। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए खेती को आधुनिक, लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। धान के साथ-साथ दलहन, तिलहन,फल-सब्जी और मोटे अनाजों के उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि किसानों से 3100 रूपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी, सिंचाई परियोजनाओं के विस्तार, कृषि उपकरणों की उपलब्धता तथा मुफ्त बिजली जैसी योजनाओं से किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। उन्होंने विद्यार्थियों से ड्रोन, एआई और डिजिटल तकनीकों को खेती से जोड़कर किसानों और वैज्ञानिकों के बीच सेतु बनने का आव्हान किया।

कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि प्रदेश में कृषि को बढ़ावा देने के लिए अनेक नवाचार किए जा रहे है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में धान की सबसे ज्यादा प्रजातियां है। सुगन्धित धान के लिए हमारा राज्य जाना जाता है। फल, फूल और मसाले की भी अपार संभावनाएं यहां है। उन्होंने विद्यार्थियों से शोध और नवाचार के क्षेत्र में आगे आने का आग्रह करते हुए कहा कि विद्यार्थियों के ज्ञान का लाभ छत्तीसगढ़ को मिलेगा।

समारोह में दीक्षांत भाषण डॉ. अशोक कुमार सिंह ने दिया। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने दीक्षांत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया उन्होंने विश्वविद्यालय की गतिविधियों एवं उपलब्धियों पर विस्तृत प्रकाश डाला। साथ ही उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को दीक्षा उपदेश दिया। आभार प्रदर्शन कुलसचिव द्वारा किया गया। दीक्षांत समारोह में क्षेत्र के विधायक पद्मश्री अनुज शर्मा, विभिन्न विश्वविद्यालय के कुलपति, विश्वविद्यालय के प्रबंध मण्डल, विद्या परिषद तथा प्रशासनिक परिषद के सदस्यगण, प्राध्यापक, वैज्ञानिक, विश्वविद्यालय के अधिकारी, उपाधि तथा पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी तथा उनके पालकगण उपस्थित थे।


इंटरनेट की इस दुनिया में प्रिंट और साहित्य का महत्व हमेशा रहेगा - राज्यपाल डेका

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रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने कहा है कि इंटरनेट से भरी इस दुनिया और न्यू जनरेशन वाले इस दौर में भी प्रिंट और साहित्य का महत्व हमेशा बना रहेगा। राज्यपाल डेका ने आज नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन परिसर में तीन दिवसीय रायपुर साहित्य उत्सव ‘आदि से अनादि‘ के समापन समारोह के अवसर पर उक्त विचार व्यक्त किए। राज्यपाल ने कहा कि साहित्य और कविता में हमेशा एक संदेश होना चाहिए। जिस तरह संगीत के सात स्वर हमें जोड़े रखते है उसी तरह साहित्य का आदान-प्रदान नई बातों का सीखने का अवसर प्रदान करता है। 

समापन समारोह में मुख्य अतिथि की आसंदी से राज्यपाल ने कहा कि पिछले तीन दिनों में इस मंच पर बहुत अच्छी और सार्थक चर्चाएं हुईं। विचारों का खुलकर आदान-प्रदान हुआ। सबने मिलकर साहित्य, समाज और जीवन से जुड़े कई विषयों पर बात की। यह उत्सव सभी साहित्य प्रेमियों के लिए एक यादगार और सीखने वाला अनुभव रहा है। इस दौरान कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन भी हुआ। देश भर से आए नामी प्रकाशकों ने यहां किताबों का बहुत सुंदर संग्रह प्रस्तुत किया। पाठकों को नई-नई किताबें देखने और पढ़ने का अच्छा मौका मिला। यह देखकर अच्छा लगता है कि आज भी लोगों में किताबों के प्रति गहरी रुचि है।

डेका ने कहा साहित्य और संगीत का आदान प्रदान जरूरी है और ऐसे साहित्य का उत्सव हमेशा होना चाहिए। उन्होंने तीन दिवसीय सफल आयोजन के लिए सभी को बधाई देते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन राज्य के अन्य शहरों एवं गांवों के स्तर तक भी किया जाना चाहिए और यह आयोजन सरकारी न होकर समुदाय की भागीदारी वाले होने चाहिए। 

डेका ने कहा कि आज की पीढ़ी छत्तीसगढ़ के रामायण कालीन संस्कृति एवं साहित्य को भूल गयी है। हमारा राज्य बहुत सुंदर है और यहां की संस्कृति भी बहुत समृद्ध है। इसका प्रचार प्रसार होना चाहिए ताकि राज्य के बाहर के लोग यहां के बारे में जान सकें। श्री डेका ने कहा कि शब्दों में बहुत शक्ति होती है। शब्द का रूप ब्रह्म है। उन्हांेने बंकिमचंद्र चटर्जी के वंदे मातरम गीत का उल्लेख किया और कहा कि सारे देश को इन दो शब्दों ने जागृत कर दिया था। उन्होंने कहा कि साहित्य हमें जोड़ता है, हमें सोचने की नई दिशा देता है और हमें बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देता है। हम सभी साहित्य को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं, संवाद की परंपरा को आगे बढ़ाएं और विचारों की यह रोशनी लगातार जलाए रखें। उन्होंने उपस्थित लोगों से आग्रह किया कि वे अपने जीवन में कम से कम एक ऐसा कार्य अवश्य करें, जो बिना किसी लेन-देन या व्यक्तिगत स्वार्थ के हो। ऐसे कार्य देश और समाज के समग्र विकास को मजबूती प्रदान करते हैं। 

समापन समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में साहित्य की अविरल धारा बहती रही है। कालीदास, रविन्द्रनाथ टैगोर जैसे कवि एवं साहित्यकारों का इतिहास भी छत्तीसगढ़ से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी इस तरह के आयोजन अनवरत किए जाते रहेंगे।  

समापन समारोह की अध्यक्षता प्रख्यात रंगकर्मी, नाट्य लेखक डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने की। इस अवसर पर फिल्म अभिनेता एवं निर्देशक डॉ. चंद्र प्रकाश द्विवेदी, फिल्म निर्माता-निर्देशक अनुराग बसु विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा और आर कृष्णा दास, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, राज्यपाल के विधिक सलाहकार भीष्म प्रसाद पाण्डेय, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा सहित गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

राज्यपाल डेका ने राजधानी की यातायात व्यवस्था और बढ़ती दुर्घटनाओं पर जताई चिंता

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रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने राजधानी रायपुर में बिगड़ती यातायात व्यवस्था और लगातार बढ़ रही सड़क दुर्घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने आज राजभवन में कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक की बैठक लेकर इस संबंध में विस्तृत चर्चा की तथा आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए।

राज्यपाल ने कहा कि राजधानी की जनसंख्या और वाहनों की संख्या के अनुपात में यातायात व्यवस्था को अधिक सुव्यवस्थित और अनुशासित बनाये जाने की आवश्यकता है। उन्होंने यातायात प्रबंधन और ट्रैफिक मॉनिटरिंग को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिये।

बैठक में राज्यपाल डेका ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में मानव जीवन की क्षति अत्यंत दुखद है। इसे रोकने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग कड़ाई से कार्रवाई करें। अवैध पार्किंग, नशे में वाहन चलाने, तेज गति से वाहन चलाने, बिना हेलमेट या सीट बेल्ट के वाहन चलाने वालों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक सतर्कता और जन सहयोग से ही सुरक्षित यातायात की दिशा में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।

राज्यपाल डेका से वन मंत्री केदार कश्यप ने की सौजन्य भेंट, राजधानी रायपुर की ट्रैफिक व्यवस्था और पर्यावरण सुधार पर हुई चर्चा

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रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका से आज राजभवन में वन एवं जलवायु परिवर्तन, जल संसाधन और कौशल विकास मंत्री केदार कश्यप ने सौजन्य भेंट की। इस दौरान राज्यपाल ने राजधानी रायपुर की ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार, बाहर से इलाज के लिए आने वाले लोगों के लिए बेहतर परिवहन सुविधा और संस्थागत वनों को बढ़ावा देने से संबंधित निर्देश दिए।

राज्यपाल ने कहा कि स्कूलों, आश्रमों और अन्य शासकीय भवनों के आसपास वृक्षारोपण को प्राथमिकता दी जाए, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ हरित आवरण में भी वृद्धि हो सके।

उन्होंने यह भी कहा कि एम्स और नया रायपुर के चिकित्सा संस्थानों में इलाज के लिए दूरदराज़ से आने वाले मरीजों और परिजनों को बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई जाए, जिससे उन्हें किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

छत्तीसगढ़ राज्योत्सव रजत महोत्सव का भव्य समापन : उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन मुख्य अतिथि, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया स्वागत

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रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित राज्योत्सव रजत महोत्सव का आज नवा रायपुर में भव्य और गरिमामय समापन हुआ। समारोह में भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, मंत्रीगण, सांसद, विधायक, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिकगण शामिल हुए।

नवा रायपुर का यह ऐतिहासिक समारोह छत्तीसगढ़ की 25 वर्षों की गौरवशाली विकास यात्रा, संस्कृति और परंपरा का प्रतीक बना। उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने अपने उद्बोधन की शुरुआत “जय जोहार, जय छत्तीसगढ़” के उद्घोष से की और “छत्तीसगढ़िया सबसे बढ़िया” का नारा लगाकर सभागार में उत्साह भर दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस रजत जयंती महोत्सव का शुभारंभ किया और समापन मेरे कर-कमलों से हो रहा है, जो इस राज्य की निरंतर प्रगति और गौरव का प्रतीक है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि 1 नवंबर 2000 को भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी की दूरदर्शी सोच से छत्तीसगढ़ का गठन हुआ, जिसने आज प्रशासनिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक रूप से उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने स्वयं लोकसभा में छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के पक्ष में मतदान किया था, इसलिए उनका इस राज्य से आत्मीय जुड़ाव है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने पारंपरिकता के साथ आधुनिकता को अपनाते हुए कृषि, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य और तकनीकी क्षेत्रों में तेजी से प्रगति की है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की राजधानी को “देश की पहली ग्रीन सिटी” बताते हुए कहा कि नवा रायपुर में आईटी हब, फार्मा हब, एआई डाटा सेंटर पार्क और मेडिसिटी का विकास राज्य की दूरदृष्टि का परिचायक है। साथ ही, सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में राज्य ने महत्वपूर्ण पहल की है।

राधाकृष्णन ने कहा कि आईएनएस विक्रांत में लगा इस्पात भिलाई स्टील प्लांट का है, जो छत्तीसगढ़ की औद्योगिक क्षमता को दर्शाता है। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा तैयार “अंजोर डॉक्यूमेंट 2047” की सराहना करते हुए कहा कि यह दस्तावेज विकसित भारत के साथ विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में एक ठोस कदम है।

राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि रजत जयंती केवल उत्सव नहीं, बल्कि 25 वर्षों की यात्रा का मूल्यांकन और नए संकल्पों का अवसर है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग और संस्कृति सहित सभी क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने राज्य निर्माण के सूत्रधार स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी और योगदान देने वाले सभी पुरोधाओं को नमन किया।

राज्यपाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की असली ताकत उसके किसान, मजदूर, युवा और महिलाएं हैं। उन्होंने महतारी वंदन योजना और एक पेड़ मां के नाम अभियान जैसी पहलों की सराहना करते हुए कहा कि ये कार्यक्रम आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण के उदाहरण हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि रामलला के ननिहाल छत्तीसगढ़ में उपराष्ट्रपति जी का स्वागत केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की आत्मा की ओर से अभिनंदन है। उन्होंने कहा कि राज्योत्सव की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रेरक संदेश से और समापन उपराष्ट्रपति जी के आशीर्वचन से होना, छत्तीसगढ़ के गौरव की पराकाष्ठा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रजत महोत्सव ने छत्तीसगढ़ की संस्कृति, विकास और जनभागीदारी की अद्भुत झलक प्रस्तुत की है। भारतीय वायुसेना के सूर्यकिरण दल द्वारा प्रस्तुत एरियल शो ने समापन समारोह में देशभक्ति और ऊर्जा का संचार किया।

उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार की गति से राज्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 18 लाख आवास स्वीकृत किए गए हैं, और महतारी वंदन योजना से माताओं-बहनों को अब तक 13 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्रदान की जा चुकी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत के साथ विकसित छत्तीसगढ़ का लक्ष्य लेकर विज़न डॉक्यूमेंट के अनुसार योजनाबद्ध ढंग से कार्य किया जा रहा है।

समारोह में राज्य अलंकरण पुरस्कार वितरण भी हुआ, जिसमें उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन और मुख्यमंत्री साय ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले नागरिकों और संस्थाओं को सम्मानित किया।

पुरस्कार विजेता विभाग एवं संस्थाएं:

शासकीय प्रदर्शनी श्रेणी: जल संसाधन विभाग (प्रथम), कृषि विभाग (द्वितीय), वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग (तृतीय), स्कूल शिक्षा विभाग (सांत्वना)।

सार्वजनिक क्षेत्र श्रेणी: एनएमडीसी (प्रथम), साउथ ईस्ट सेंट्रल रेलवे (द्वितीय), सीआईडीसी (तृतीय), नाबार्ड (सांत्वना)।

विशेष पुरस्कार: शिल्पग्राम (ग्रामोद्योग विभाग)।

नारी ही सृष्टि का आधार, समाज की धुरी और प्रेरणा है : डेका

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रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका आज सरोना में आयोजित विराट क्षत्रिय दशहरा मिलन समारोह एवं वीरांगना राष्ट्रीय अधिवेशन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने समाज में नारी शक्ति की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि मातृशक्ति परिवार को एक सूत्र में बांधने और समाज की नैतिक दिशा तय करने का कार्य करती है।

राज्यपाल ने कहा कि नारी जीवन का वह आधार है, जिसके बिना मानव अस्तित्व की कल्पना असंभव है। उन्होंने नारी की तुलना जल से करते हुए कहा कि जिस प्रकार पानी के बिना जीवन असंभव है, उसी प्रकार नारी के बिना भी यह सृष्टि अधूरी है।

अपने उद्बोधन में राज्यपाल ने जीवन को आनंदपूर्वक जीने के सूत्र साझा किए। उन्होंने कहा कि जीवन अनुपम है, इसे हर क्षण आनंद से जीना चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि पैसा केवल जीवन की आवश्यक जरूरतों भोजन, शिक्षा और मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति का माध्यम है, लेकिन वास्तविक सुख शांति और संतोष में ही निहित है। उन्होंने कहा कि सफलता के लिए ईमानदार प्रयास आवश्यक है, परंतु यदि प्राप्त न हो तो उसका अफसोस नहीं करना चाहिए।

राज्यपाल ने कहा कि आज देश और समाज के सामने अनेक चुनौतियां हैं, जिन पर जागरूक होकर विचार और समाधान करना आवश्यक है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आरंभ किए गए “मां के नाम एक पेड़” अभियान में सभी को सक्रिय भागीदारी करनी चाहिए और प्रत्येक व्यक्ति को कम से कम एक पेड़ अवश्य लगाना चाहिए।

राज्यपाल ने कहा कि माइक्रोप्लास्टिक आज पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। इसका उपयोग कम से कम करने और आने वाली पीढ़ियों को इसके दुष्प्रभावों से बचाने की दिशा में काम करने की जरूरत है।

राज्यपाल ने कहा कि जो व्यक्ति समय के पाबंद और अनुशासित होते हैं, वे जीवन में अवश्य सफल होते हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति और सेवा भावना की सराहना करते हुए कहा कि यहां के लोगों में समाज सेवा की अद्भुत प्रवृत्ति है।

राज्यपाल ने छत्तीसगढ़ के महिला स्व-सहायता समूहों के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि क्षत्रीय समाज की महिलाओं को भी इस दिशा में आगे आना चाहिए।

उन्होंने कहा कि क्षत्रिय समाज सदैव राष्ट्र रक्षा और जनसेवा के लिए पहचाना गया है। आज समाज की जिम्मेदारी और भी बढ़ गई है। आप सब मिलकर समाज को संगठित करें, व्याप्त कुरीतियों को दूर करें और देश के विकास में भागीदार बनें।

राज्यपाल ने विश्वास व्यक्त किया कि इस अधिवेशन से जो संदेश जाएगा, वह समाज में एकता, संगठन और प्रेरणा का स्रोत बनेगा।

कार्यक्रम में वीरांगना की मुख्य संरक्षिका वीणा रमन सिंह ने अपना प्रेरणादायी संबोधन दिया।

वीरांगना की राष्ट्रीय अध्यक्ष नीलू सिंह ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। इस अवसर पर समाज के राष्ट्रीय महामंत्री राघवेंद्र सिंह राजू, राष्ट्रीय संगठन मंत्री अमित कुमार सिंह , तथा राजपूत निस्वार्थ सेवा संघ की अध्यक्ष श्रीमती इला कलचुरी ने भी अपने विचार रखे।

राज्यपाल रमेन डेका ने समाज के लिए उल्लेखनीय कार्य करने वाली वीरांगनाओं को सम्मानित किया।

समारोह में क्षत्रिय समाज के पदाधिकारी, सदस्यगण और बड़ी संख्या में महिलाएं एवं नागरिक उपस्थित थे।


छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव में ‘भाओना सीता पाताल गमन’ की मनमोहक प्रस्तुति

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि इस नृत्य नाटिका भाओना के माध्यम से असम राज्य की संस्कृति और भावना का सशक्त प्रदर्शन हो रहा है, जिसे श्रीमंत शंकर देव ने लगभग 500 वर्ष पूर्व लिखा था। छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव अंतर्गत महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय में अंतर्राज्यीय सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम का आयोजन हुआ। 

इस अवसर पर असम से आए कलाकारों ने पौराणिक ग्रंथ रामायण में वर्णित सीता पाताल गमन प्रसंग पर आधारित नृत्य-नाटिका भाओना सीता पाताल गमन की प्रभावशाली प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राज्यपाल ने कहा कि असम और छत्तीसगढ़ दोनों में रामायण कालीन संस्कृति की छाप स्पष्ट दिखाई देती है और दोनों राज्यों की सांस्कृतिक परंपराएं आपस में काफी मिलती-जुलती हैं। डेका ने असम के रहने वाले देश के विख्यात गायक  जुबीन गर्ग जिनका हाल ही में आकस्मिक निधन हो गया था, उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

राज्यपाल डेका ने सभी कलाकारों को सम्मानित किया। इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा, सुनील सोनी, रिकेश सेन अन्य जनप्रतिनिधि, राज्यपाल के सचिव डॉ. आर. प्रसन्ना, संस्कृति विभाग के संचालक एवं अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में दर्शकगण उपस्थित थे। कलाकारों की प्रस्तुति ने दर्शकों को भारतीय संस्कृति की विविधता और उसकी गहराई से अवगत कराया।


अतीत की स्वर्णिम स्मृतियों से जोड़ने और हमारे अमूल्य विरासत को संजोने का महान संकल्प है चक्रधर समारोह : राज्यपाल डेका

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रायपुर। चक्रधर समारोह हमें अतीत की स्वर्णिम स्मृतियों से जोड़ता है और हमारे अमूल्य विरासत को संजोने का महान संकल्प है। राजा चक्रधर सिंह ने कला और संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का जो सपना रायगढ़ की धरती से देखा था, यह उत्सव उस स्वप्न का प्रतीक है। राज्यपाल रमेन डेका आज रायगढ़ जिले में आयोजित 40वें चक्रधर समारोह का भव्य शुभारंभ कर कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने भगवान गणपति की पूजा अर्चना की और संगीत सम्राट राजा चक्रधर सिंह का पुण्य स्मरण कर उन्हें नमन किया। 

राज्यपाल डेका ने कहा कि छत्तीसगढ़ के 25 वर्षों की स्वर्णिम यात्रा को हम रजत जयंती के रूप में मना रहे हैं और इस दौरान छत्तीसगढ़ की संस्कृति को समृद्ध बनाने में चक्रधर समारोह का योगदान अग्रणी है। डेका ने कहा कि असम और छत्तीसगढ़ में बहुत गहरा संबंध है और ब्रिटिश काल में इस प्रदेश से लोग असम गए थे। उन्होंने कहा कि श्रीमंत शंकरदेव ने साहित्य और कला के संरक्षण के जो प्रयास असम में किए थे, वही प्रयास महाराज चक्रधर ने रायगढ़ की धरती से किया। डेका ने बताया कि असम में राजा चक्रधर सिंह की स्मृति में पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। 

राज्यपाल ने कहा कि रायगढ़ की धरती भारतीय शास्त्रीय कला और संस्कृति की अनमोल धरोहर है। रायगढ़ घराने की छाप न केवल देश में बल्कि विश्वभर में है। राजा चक्रधर सिंह ने कथक नृत्य को नई ऊंचाइयां दीं और अपनी रचनाओं नर्तन सर्वस्व, तालतोय निधि और राग रत्न मंजूषा के माध्यम से संगीत और नृत्य को नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि कला हमारे भीतर संवेदनाओं को जगाती है और जीवन को सुंदर बनाती है। आधुनिकता की दौड़ में जब लोग संस्कृति से दूर हो रहे हैं, तब ऐसे आयोजन हमें अपनी जड़ों से जोड़े रखते हैं। राज्यपाल ने कहा कि रायगढ़ का नाम लेते ही हमारे मन में संगीत की मिठास, नृत्य की लय और कला के रंग दिखाई देते हैं। यही वो धरती है, जहां बिस्मिल्ला खाँ की शहनाई, हरिप्रसाद चौरसिया की बाँसुरी और पं. जसराज सहित साहित्य जगत के महान विभूतियों के सुर गूंजते रहे हैं। उन्होंने इस खास मौके पर रायगढ़ की जनता को इस महान परंपरा को सहेजने और आगे बढ़ाने के लिए अपनी शुभकामनाएं दी।  

40वें चक्रधर समारोह के शुभारंभ अवसर पर केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी ताकत उसकी विविधता में एकता है। उन्होंने कहा कि आदिकाल से ही संगीत, नृत्य और साहित्य जैसी विधाएँ राजाओं के आश्रय में पल्लवित होती आई हैं और इन्हीं परंपराओं ने भारत को नई ऊँचाइयाँ दी हैं।

राजा चक्रधर सिंह को नमन करते हुए उन्होंने कहा कि जब कथक में केवल जयपुर और बनारस घराने ही प्रसिद्ध थे, उस समय रायगढ़ घराने की स्थापना कर उन्होंने भारतीय संस्कृति को समृद्ध किया। शेखावत ने कहा कि आज यह समारोह उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को स्मरण करने का गौरवशाली अवसर है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह के सक्षम और सशक्त नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को नक्सल छवि से मुक्ति मिल रही है और प्रदेश अब संस्कृति तथा पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है। 

उन्होंने कहा कि नक्सलवाद से जूझते हुए जिस प्रदेश को कभी पिछड़ेपन की दृष्टि से देखा जाता था, वही आज अपनी लोककलाओं और पर्यटन स्थलों के कारण विश्व स्तर पर पहचान बना रहा है। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री शेखावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सांस्कृतिक पुनर्जागरण के दौर से गुजर रहा है। हमारी लोककलाएँ, लोकनृत्य और लोकपरंपराएँ पुनः संरक्षित और सशक्त हो रही हैं। शेखावत ने विश्वास व्यक्त किया कि आगामी दस दिनों तक रायगढ़ सांस्कृतिक रंगों से सराबोर रहेगा और देश-विदेश से आए कलाकार अपनी कला के माध्यम से इस ऐतिहासिक आयोजन को और भव्य बनाएँगे।

वित्त मंत्री ओ पी चौधरी ने कहा कि चक्रधर समारोह को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही रायगढ़ में लगातार विकास कार्यों को गति मिल रही है, जिससे यहां की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान और अधिक मजबूत हो रही है। चौधरी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आस्था के प्रमुख केंद्रों, पर्यटन स्थलों को लगातार विकसित करने का काम केंद्र सरकार के सहयोग से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री के सहयोग से भोरमदेव मंदिर सहित अनेक विकास कार्यों के लिए विशेष रूप से राशि आवंटित की गई है।

राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह ने गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि आज दिल्ली से आए अतिथियों ने चक्रधर समारोह को गरिमामयी बनाया है। सिंह ने कहा कि संगीत सम्राट राजा चक्रधर सिंह ने कथक नृत्य को नई पहचान दी। उन्होंने विधिवत प्रशिक्षण से रायगढ़ घराने को प्रतिष्ठा दिलाई और इसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थापित किया। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि एक गोंड आदिवासी राजा द्वारा कथक नृत्य को इस ऊँचाई तक पहुँचाना इतिहास के स्वर्णिम अध्याय के रूप में सदैव याद किया जाएगा। रायगढ़ सांसद श्री राधेश्याम राठिया ने कहा कि इस भव्य आयोजन से रायगढ़ की प्रतिष्ठा और अधिक बढ़ रही है तथा यहाँ की सांस्कृतिक धरोहर को नई पहचान मिल रही है।

चक्रधर समारोह के अवसर पर केन्द्रीय राज्य मंत्री आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय तोखन साहू, कृषि मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री  रामविचार नेताम, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री  राजेश अग्रवाल, लोकसभा क्षेत्र जांजगीर-चांपा की सांसद कमलेश जांगड़े, महासमुंद सांसद रूपकुमारी चौधरी, राज्यसभा सांसद चुन्नीलाल गरासिया, नगर निगम के महापौर  जीववर्धन चौहान सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी कर्मचारी, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में दर्शकगण उपस्थित रहे।


सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: विधानसभा से दोबारा पारित विधेयक रोक नहीं सकते राज्यपाल

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 नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को राज्यपाल की शक्तियों पर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया कि यदि विधानसभा द्वारा कोई विधेयक दोबारा पारित कर राज्यपाल के पास भेजा जाता है, तो राज्यपाल उसे राष्ट्रपति के पास विचारार्थ नहीं भेज सकते और उसे मंजूरी देना अनिवार्य होगा।


मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली पांच-सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा कि अनुच्छेद 200 के तहत राज्यपाल के पास प्रारंभिक तौर पर चार विकल्प होते हैं- 

  • विधेयक को मंजूरी देना,
  • रोकना,
  • राष्ट्रपति के पास भेजना,
  • पुनर्विचार के लिए विधानसभा को लौटाना।

लेकिन, यदि विधानसभा विधेयक को दोबारा पारित कर देती है, तो राज्यपाल के पास केवल मंजूरी देने का ही विकल्प बचता है।

‘अनिर्वाचित व्यक्ति पर निर्भर नहीं हो सकती निर्वाचित सरकार’

पीठ ने टिप्पणी की, “यदि राज्यपाल अनिश्चितकाल तक स्वीकृति रोक सकते हैं, तो निर्वाचित सरकारें एक अनिर्वाचित नियुक्त व्यक्ति की दया पर निर्भर हो जाएंगी।” अदालत ने यह भी कहा कि संविधान की व्याख्या स्थिर नहीं रह सकती, बल्कि इसे जीवंत दस्तावेज़ की तरह देखा जाना चाहिए।

पक्ष और विपक्ष की दलीलें

सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि राज्यपाल केवल “डाकिया” की भूमिका तक सीमित नहीं हो सकते और उन्हें असाधारण परिस्थितियों में मंजूरी रोकने की शक्ति होनी चाहिए।
वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने इसका कड़ा विरोध करते हुए कहा कि अगर यह तर्क मान लिया जाए तो राष्ट्रपति भी केंद्र सरकार के विधेयकों पर अनुच्छेद 111 के तहत मंजूरी रोक सकते हैं।

 

गौरतलब है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मई में अनुच्छेद 143(1) के तहत सुप्रीम कोर्ट से यह राय मांगी थी कि राज्यपाल और राष्ट्रपति के पास भेजे गए विधेयकों पर निर्णय के लिए समय-सीमा तय की जा सकती है या नहीं।

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