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“सौभाग्य से कुछ बुरा नहीं, दुर्भाग्य से कुछ सकारात्मक भी नहीं... देखते हैं क्या होता है” - उमर अब्दुल्ला का बड़ा बयान, जानिए वजह

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 श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने की छठी वर्षगांठ (5 अगस्त 2019) की पूर्व संध्या पर राज्य की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। केंद्र सरकार द्वारा राज्य का दर्जा बहाल किए जाने को लेकर चल रही अटकलों के बीच पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का बयान सुर्खियों में है।




उन्होंने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा:

“मैंने कल जम्मू-कश्मीर में क्या होने वाला है, इसकी हर संभावित अटकल और संयोजन सुन लिया है। इसलिए मैं पूरी ईमानदारी से कहूंगा कि कल कुछ नहीं होगा।”

“कुछ बुरा नहीं होगा, लेकिन कुछ अच्छा भी नहीं”
उमर अब्दुल्ला ने आगे कहा:

“सौभाग्य से कुछ बुरा नहीं होगा, लेकिन दुर्भाग्य से कुछ सकारात्मक भी नहीं होगा। मैं अभी भी संसद के इस मानसून सत्र में जम्मू-कश्मीर के लिए कुछ सकारात्मक होने की उम्मीद कर रहा हूं, लेकिन कल नहीं।"

“यह सिर्फ एक भावना है”
अपने बयान में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी यह राय किसी इनसाइड सूचना पर नहीं, बल्कि उनकी “आंतरिक भावना” पर आधारित है। उन्होंने लिखा:

“और नहीं, मैंने दिल्ली में किसी से कोई मुलाकात या बातचीत नहीं की है। यह बस एक आंतरिक भावना है। देखते हैं कल क्या होता है।”

राज्य का दर्जा बहाली की अटकलें क्यों तेज हुईं?
जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन की छठी वर्षगांठ से पहले बीते रविवार और सोमवार को दिल्ली में कई उच्चस्तरीय बैठकें हुईं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बीच लगातार हुई मुलाकातों से यह कयास लगाए जाने लगे कि केंद्र सरकार कोई बड़ा फैसला ले सकती है।

इसके अलावा मंगलवार सुबह एनडीए सांसदों की एक विशेष बैठक भी बुलाई गई है, जिसने इन अटकलों को और बल दिया है कि क्या केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस देने की प्रक्रिया शुरू करने वाली है।

पृष्ठभूमि: क्या है अनुच्छेद 370 और 5 अगस्त का महत्व?
5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त कर जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा समाप्त कर दिया था। इसके साथ ही राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों—जम्मू-कश्मीर और लद्दाख—में विभाजित कर दिया गया था।

इस ऐतिहासिक फैसले के बाद से लगातार राज्य के राजनीतिक दल और जनता राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग कर रहे हैं।

राजनीति में चुटकी भर साहित्य मिला दिया जाए तो सोने में सुहागा हो जाए: पंकज झा

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 रायपुर। राजनीति में अगर चुटकी भर साहित्य मिला दिया जाए तो सोने में सुहागा हो जाए। यह बात मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा ने प्रेस क्लब में कही। वे वरिष्ठ पत्रकार निकष परमार के काव्य संग्रह "हम कोई रास्ता न बन पाए" के विमोचन व काव्यगोष्ठी के अवसर बोल रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन रायपुर प्रेस क्लब के सभागार में आयोजित किया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने रायपुर प्रेस क्लब की इस रचनात्मक पहल की मुक्तकंठ से प्रशंसा की।


मुख्य अतिथि, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा ने पत्रकारिता में संवेदना की आवश्यकता का जिक्र करते हुए कहा कि पहले साहित्यकार ही पत्रकार भी हुआ करते थे, क्योंकि पत्रकारिता के लिए जो संवेदना चाहिए वह साहित्यकारों के पास होती है। किताब के प्रकाशक वैभव प्रकाशन के सलाहकार, कल्याण कॉलेज भिलाई में हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ सुधीर शर्मा ने कहा कि हर माह कई किताबें प्रकाशित होती हैं। उनमें से कुछ किताबें ऐसी होती हैं जिनके लिए प्रकाशक स्वयं अतिरिक्त श्रम करता है। यह किताब इसी श्रेणी की है। उन्होंने निकष परमार की एक कविता का जिक्र किया और याद किया कि उनके पिता नारायणलाल परमार ने भी इसी विषय पर एक कविता लिखी थी। दोनों की अपनी अपनी संवेदनाएं हैं। वरिष्ठ पत्रकार समीर दीवान ने किताब की भूमिका में लिखी पंकज झा की लिखी इस बात से सहमति जताई कि अगर आप सुविधाभोगी हैं तो ये कविताएं आपको अपराधवोध का अहसास कराती हैं।

कार्यक्रम के अध्यक्ष साहित्यकार व भाषाविद डा. चितरंजन कर ने कहा कि सरल रेखा खींचना सबसे कठिन होता है। इसी तरह सरल लिखना भी कठिन होता है। इस संग्रह की कविताएं ऐसी ही सरल कविताएं हैं।

आभार प्रदर्शित करते हुए प्रेस क्लब के अध्यक्ष प्रफुल्ल ठाकुर ने कहा कि प्रेस क्लब मनोरंजन प्रधान अन्य क्लबों से अलग, बुद्धिजीवियों की संस्था होती है। हम ऐसे साहित्यिक आयोजनों का सिलसिला जारी रखेंगे। कार्यक्रम का संचालन निश्चय बाजपेयी ने किया।

कार्यक्रम में प्रेस क्लब के महासचिव डॉ. वैभव पाण्डेय, विनय शर्मा, उचित शर्मा, प्रकाश शर्मा, विजय मिश्रा, अजित परमार, शाश्वत शुक्ल, रेणु नंदी, अमृता शर्मा, अनिरुद्ध दुबे, डा. विजय कापसे, डा. चंद्रकांत वाघ, हरिप्रकाश वत्स, राजेश गानोदवाले, सौरभ शर्मा, श्याम कश्यप, जान राजेश पॉॅल, ठाकुरराम यादव, असगर खान, विजय कुमार, शिवम विश्वकर्मा, प्रणेश सिंह, रमन हलवाई, मनोज देवांगन, नागेंद्र वर्मा सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी और पत्रकार उपस्थित थे।

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