Media24Media.com: #महासमुंद जिले

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #महासमुंद जिले. Show all posts
Showing posts with label #महासमुंद जिले. Show all posts

नैनो उर्वरक के उपयोग से धान उत्पादन में हुई वृद्धि, लागत में आई कमी - किसान निरंजन

No comments Document Thumbnail

 रायपुर : कृषि में आधुनिक तकनीकों और नवाचारों को अपनाकर किसान उत्पादन में वृद्धि के साथ खेती की लागत को भी कम करने में सफल हो रहे हैं। महासमुंद जिले के विकासखंड बसना अंतर्गत ग्राम दूधीपाली के प्रगतिशील किसान निरंजन सिदार ने भी विगत वर्ष अपनी धान की फसल में नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग कर बेहतर परिणाम प्राप्त किए हैं।


सिदार ने बताया कि वे धान की खेती में नैनो डीएपी से बीज उपचार कर खेती की शुरुआत की। इसके बाद फसल की वृद्धि अवस्था में नैनो डीएपी तथा नैनो यूरिया का छिड़काव किया। आधुनिक उर्वरक तकनीक के उपयोग से उनकी फसल में रोग एवं कीटों का प्रकोप अपेक्षाकृत कम देखने को मिला, जिससे फसल स्वस्थ एवं मजबूत बनी रही। इसके साथ ही धान की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ। उन्होंने बताया कि नैनो उर्वरकों के उपयोग से खेती की लागत में कमी आई है। नैनो उर्वरकों को कीटनाशकों के साथ मिलाकर छिड़काव किए जाने की सुविधा के कारण अलग-अलग बार मजदूरी लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती, जिससे समय और श्रम दोनों की बचत होती है।

कृषि विभाग द्वारा किसानों को नैनो उर्वरकों के वैज्ञानिक उपयोग के संबंध में लगातार जागरूक किया जा रहा है। विभाग के अनुसार नैनो डीएपी का उपयोग बीजोपचार, पौध उपचार तथा प्रारंभिक वृद्धि अवस्था में छिड़काव के रूप में किया जा सकता है, जबकि नैनो यूरिया का उपयोग फसल की पोषण आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए विभिन्न अवस्थाओं में किया जाता है।

विशेषज्ञों द्वारा अनुशंसित मात्रा एवं विधि से उपयोग करने पर उत्पादन वृद्धि, गुणवत्ता सुधार तथा लागत में कमी आती है। विशेषज्ञों के अनुसार नैनो डीएपी से बीज उपचार के लिए 1 किलोग्राम बीज में 5 एमएल नैनो डीएपी के घोल को बीज में अच्छे तरीके से मिलाएं, उसके पश्चात 20 मिनट तक छांव में सूखने दें और फिर बुवाई करें। नैनो डीएपी से थरहा (पौध) उपचार के लिए 1 लीटर पानी में 5 एमएल नैनो डीएपी की दर से घोल बनाएं एवं रोपाई से पहले 20 मिनट तक थरहा को इस घोल में डूबे रहने दें, उसके पश्चात रोपाई करें।

पहला छिड़काव फसल 30-35 दिन का होने पर जब फसल में पत्तियां अच्छी आ जाएं, तब 1 लीटर पानी में 4-5 एमएल की दर से नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया प्लस का पत्तियों में स्प्रेयर के माध्यम से छिड़काव करें। दूसरा छिड़काव, प्रथम छिड़काव के 25-30 दिन बाद फूल आने से पहले 1 लीटर पानी में 4-5 एमएल की दर से नैनो यूरिया प्लस का पत्तियों में स्प्रेयर के माध्यम से छिड़काव करें। साथ ही नैनो उर्वरकों को कीटनाशकों के साथ मिलाकर भी स्प्रे किया जा सकता है। लेकिन कॉपर युक्त कीटनाशक एवं फफूंद नाशक के साथ इसे नहीं मिलाया जाता है।

महासमुंद में दिल दहला देने वाली घटना, प्रेमी जोड़े ने उठाया खौफनाक कदम

No comments Document Thumbnail

 महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के पिथौरा थाना क्षेत्र में एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां प्रेम में असफल एक प्रेमी जोड़े ने पेड़ पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।


जानकारी के अनुसार, नेशनल हाईवे-53 स्थित मुरई धुआं नाला के पास एक खेत में पेड़ पर दोनों के शव लटके हुए मिले। सुबह खेत में काम करने पहुंचे ग्रामीणों ने यह दृश्य देखा और तत्काल पुलिस को सूचना दी।

सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को पेड़ से नीचे उतारकर कब्जे में लिया। फिलहाल मृतकों की पहचान आधिकारिक रूप से नहीं हो पाई है।

प्रारंभिक जांच में प्रेम संबंधों में पारिवारिक नाराजगी या दबाव के चलते इस कदम की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच कर रही है।

शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और परिजनों से पूछताछ जारी है। पुलिस का कहना है कि जांच के बाद ही आत्महत्या के सही कारणों का खुलासा हो पाएगा।

महासमुंद : फिर मिला कैश ही कैश, चेकिंग में 47.50 लाख जब्त, 4 आरोपी गिरफ्तार

No comments Document Thumbnail

 महासमुंद। महासमुंद जिले में पुलिस की सख्त चेकिंग के दौरान बड़ी मात्रा में अवैध नकदी बरामद हुई है। अलग-अलग थाना क्षेत्रों में कार्रवाई करते हुए कुल 47 लाख 50 हजार रुपए जब्त किए गए हैं और चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।


पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, बसना थाना क्षेत्र के पालसपाली के पास मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई की गई। यहां एक टोयोटा कार से 32 लाख 50 हजार रुपए की अवैध नकदी जब्त की गई। इस मामले में आशु बंसल और महेंद्र चौहान को गिरफ्तार किया गया है।

वहीं बलौदा थाना क्षेत्र के सिरपुर इलाके में चेकिंग के दौरान पुलिस ने 15 लाख रुपए नकद बरामद किए। यहां से केशव अग्रवाल और नरेश अग्रवाल को गिरफ्तार किया गया।

चारों आरोपियों के खिलाफ धारा 106 के तहत कार्रवाई करते हुए मामला आयकर विभाग को सौंपा जा रहा है, ताकि राशि के स्रोत की जांच की जा सके।

एक सप्ताह में 1.47 करोड़ की जब्ती

गौरतलब है कि महासमुंद पुलिस ने पिछले एक सप्ताह में लगातार कार्रवाई करते हुए कुल 1 करोड़ 47 लाख रुपए की अवैध राशि जब्त कर बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस द्वारा आगे भी सघन चेकिंग अभियान जारी रखने की बात कही गई है।

छात्रों से मारपीट पड़ा महंगा: महासमुंद में लेक्चरर निलंबित

No comments Document Thumbnail

 महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले से शिक्षा व्यवस्था को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। शासकीय आशीबाई गोलछा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पदस्थ व्याख्याता आशीष देवांगन को छात्रों के साथ दुर्व्यवहार एवं मारपीट के गंभीर आरोपों में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई लोक शिक्षण संचालनालय, छत्तीसगढ़ द्वारा की गई है।


प्राप्त जानकारी के अनुसार, विद्यालय की शाला प्रबंधन विकास समिति के सदस्य नीलम कुमार दीवान ने व्याख्याता के विरुद्ध लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि शिक्षक द्वारा छात्र-छात्राओं के साथ लगातार डांट-डपट, मारपीट, कान मरोड़ने तथा सिर पर मारने जैसी अनुचित हरकतें की जाती थीं।


शिकायत के पश्चात मामले की जांच हेतु समिति गठित की गई। जांच समिति की रिपोर्ट में लगाए गए आरोप सही पाए गए। इसके आधार पर लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा संबंधित शिक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, किंतु निर्धारित समय-सीमा में उनका कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ।

जांच में दोषी पाए जाने पर उक्त कृत्य को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-3 का उल्लंघन माना गया। इसके पश्चात छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के तहत कार्रवाई करते हुए व्याख्याता आशीष देवांगन को निलंबित कर दिया गया।

निलंबन अवधि के दौरान शिक्षक का मुख्यालय जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, महासमुंद निर्धारित किया गया है। साथ ही नियमानुसार उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा। लोक शिक्षण संचालनालय ने जिला शिक्षा अधिकारी महासमुंद को निर्देशित किया है कि निलंबन आदेश की तामिली सुनिश्चित करते हुए आरोप पत्र सहित समस्त दस्तावेज सात दिवस के भीतर संचालनालय को प्रेषित किए जाएं।

बाल अधिकार संरक्षण हेतु महासमुंद जिले में डॉ. सुरेश शुक्ला की नियुक्ति

No comments Document Thumbnail

 महासमुंद : बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 एवं नियम 2020 के अंतर्गत, साथ ही लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (POCSO) 2012 की धारा 39 के तहत, महासमुंद जिले में डॉ. सुरेश शुक्ला को "सहयोगी व्यक्ति" के रूप में नामित किया गया है। यह नियुक्ति बाल अधिकारों की रक्षा, यौन शोषण से प्रभावित बच्चों को न्याय दिलाने और पुनर्वास की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है।

डॉ सुरेश शुक्ला
डॉ सुरेश शुक्ला

डॉ. सुरेश शुक्ला एक अनुभवी एवं समर्पित सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जिन्होंने पिछले दो दशकों से महासमुंद जिले में बाल कल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है। वे बाल संरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य, एवं बच्चों के अधिकारों को सुनिश्चित करने की दिशा में निरंतर सक्रिय रहे हैं। डॉ. शुक्ला का सामाजिक क्षेत्र में गहन अनुभव, समर्पण और सेवा भावना उन्हें इस दायित्व हेतु उपयुक्त बनाते हैं।

उन्होंने चाइल्ड हेल्पलाइन के जिला संचालक के रूप में कार्य करते हुए हजारों बच्चों को संकट की स्थिति में सहायता पहुंचाई है। उनके प्रयासों से न सिर्फ बच्चों को तत्काल राहत मिली है, बल्कि उनके पुनर्वास, शिक्षा और पारिवारिक पुनर्स्थापन की दिशा में भी सार्थक परिणाम प्राप्त हुए हैं। बाल शोषण, बाल विवाह, बाल श्रम और बाल उत्पीड़न जैसे गंभीर मुद्दों पर उनकी सक्रिय भूमिका एवं सजगता ने कई जिंदगियों को सुरक्षित भविष्य प्रदान किया है।

डॉ. शुक्ला ने शासन द्वारा संचालित अनेक बाल-संरक्षण समितियों एवं बाल न्यायालयों में सलाहकार के रूप में भी अपनी सेवाएं दी हैं। उनके मार्गदर्शन में कई संवेदनशील मामलों का समुचित समाधान हुआ है। बाल अधिकारों की रक्षा हेतु उनकी प्रभावशाली भागीदारी समाज के लिए एक प्रेरणास्रोत है।

लैंगिक अपराधों से बालकों की सुरक्षा हेतु बने पाक्सो अधिनियम के तहत 'सहयोगी व्यक्ति' के रूप में उनकी यह नियुक्ति न केवल प्रशासनिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है, बल्कि यह समाज में बच्चों की सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन की दिशा में उठाया गया सकारात्मक कदम भी है।

महासमुंद जिले में कार्यरत बाल संरक्षण इकाइयों, पुलिस प्रशासन, बाल कल्याण समिति, न्यायिक अधिकारियों एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ मिलकर डॉ. शुक्ला बच्चों के हित में समन्वय स्थापित करेंगे। पीड़ित बच्चों के लिए परामर्श, चिकित्सा, पुनर्वास, न्यायिक प्रक्रिया में सहायता और परिवार के साथ पुनर्स्थापन जैसे विभिन्न पहलुओं पर कार्य करते हुए वे यह सुनिश्चित करेंगे कि प्रत्येक प्रभावित बालक को न्याय और सुरक्षा मिल सके।

हर बच्चा सुरक्षित, सशक्त और सम्मानजनक जीवन जी सके

डॉ. शुक्ला की यह नियुक्ति न केवल उनके कार्यों की सार्वजनिक मान्यता है, बल्कि यह संकेत भी है कि शासन अब बाल अधिकारों के प्रति अधिक संवेदनशील और सक्रिय है। समाज के सभी वर्गों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे इस दिशा में प्रशासन एवं सहयोगी व्यक्तियों के साथ मिलकर कार्य करें ताकि हर बच्चा सुरक्षित, सशक्त और सम्मानजनक जीवन जी सके।

Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.