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नई भूमि गाइडलाइन से रियल एस्टेट को मिलेगी गति, जनता को मिलेगी राहत

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में भूमि की गाइडलाइन दरों के युक्तिकरण एवं सरलीकरण के तहत रायपुर एवं कोरबा जिलों के लिए जारी संशोधित भूमि गाइडलाइन को लेकर रियल एस्टेट क्षेत्र, स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों एवं व्यवसायिक संगठनों में उत्साहजनक माहौल है। नई गाइडलाइन को जनहितकारी बताते हुए छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन (क्रेडाई) सहित विभिन्न प्रतिनिधिमंडलों ने रायपुर स्थित वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी के शासकीय निवास पहुंचकर उनसे सौजन्य मुलाकात की और आभार व्यक्त किया।

वित्त मंत्री ओपी चौधरी का विभिन्न संगठनों ने किया सम्मान, जताया आभार

क्रेडाई द्वारा 30 जनवरी 2026 से प्रदेश में लागू संशोधित भूमि गाइडलाइन के लिए वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी का सम्मान किया गया। एसोसिएशन ने कहा कि रियल एस्टेट सेक्टर एवं आम नागरिकों की व्यावहारिक समस्याओं को ध्यान में रखते हुए शासन द्वारा गाइडलाइन दरों में यथार्थपरक एवं संतुलित संशोधन किया गया है। इससे प्रदेश में मकान, प्लॉट एवं अन्य अचल संपत्तियों के क्रय-विक्रय में पारदर्शिता बढ़ेगी और आम जनता को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मयंक आहुजा,सचिव विक्रांत डोसी, कोषाध्यक्ष दीपक जैन सहित राज्य सलाहकार समिति के सदस्य हेमंत सेठिया, गुरुदास सत्रे, योगेश बोथरा, विनोद छिपा, मनोज महंती एवं संजय निलांजने उपस्थित रहे।

जनप्रतिनिधियों ने कहा कि नई भूमि गाइडलाइन से जमीन की दरों में संतुलन स्थापित हुआ है, जिससे आम नागरिकों, मध्यम वर्ग, किसानों एवं व्यापारियों को लाभ मिलेगा। विशेष रूप से आवास, व्यवसाय तथा औद्योगिक निवेश से जुड़े कार्यों में अब अधिक सुगमता और स्पष्टता आएगी।

इस अवसर पर वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता आमजन के हितों की रक्षा करते हुए विकास को गति देना है। भूमि गाइडलाइन का निर्धारण व्यापक विचार-विमर्श, स्थानीय परिस्थितियों एवं जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए किया गया है, ताकि निवेश को प्रोत्साहन मिले और जनता पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी सभी नीतिगत निर्णयों में जनहित सर्वोपरि रहेगा।

प्रतिनिधिमंडलों एवं एसोसिएशन ने विश्वास व्यक्त किया कि शासन के इस निर्णय से रियल एस्टेट क्षेत्र को नई ऊर्जा मिलेगी, निवेशकों का विश्वास मजबूत होगा, रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और छत्तीसगढ़ के समग्र आर्थिक विकास को नई गति प्राप्त होगी।

छत्तीसगढ़ में नई गाइडलाइन दरें लागू : संपत्तियों के वास्तविक मूल्यांकन के लिए सरल, पारदर्शी और जनहितैषी सुधार

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रायपुर। राज्य सरकार ने अचल संपत्तियों के बाजार मूल्य निर्धारण को अधिक वैज्ञानिक और स्पष्ट बनाने के लिए छत्तीसगढ़ गाइडलाइन दरों का निर्धारण नियम, 2000 के तहत वर्ष 2025-26 की नई गाइडलाइन दरें 20 नवंबर 2025 से पूरे प्रदेश में लागू कर दी हैं। कार्यालय महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक द्वारा जारी आदेश के अनुसार यह संशोधन पिछले 7-8 वर्षों से लंबित था, जिसके कारण वास्तविक बाजार मूल्य और गाइडलाइन मूल्य के बीच असंतुलन बढ़ता जा रहा था।   


इन विसंगतियों को दूर करने और किसानों तथा आम जनता को उनकी संपत्ति का वास्तविक मूल्य सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से व्यापक सुधार किए गए हैं। नई गाइडलाइन दरें शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में एकसमान, सुव्यवस्थित और वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित हैं।

शहरी क्षेत्रों में लंबे समय से एक ही मार्ग पर स्थित भूखंडों के लिए अलग-अलग दरें निर्धारित थीं, जिससे नागरिकों में असंतोष और पंजीयन प्रक्रिया में भ्रम उत्पन्न होता था। नई गाइडलाइन में मुख्य मार्ग और अन्य मार्ग के आमने-सामने स्थित क्षेत्रों की दरों को एक समान कर दिया गया है। नगरीय निकाय क्षेत्रों में अनावश्यक कंडिकाओं को समाप्त करते हुए वार्डवार संरचना को सरल बनाया गया है, जिससे आमजन अब आसानी से अपनी संपत्ति का वास्तविक बाजार मूल्य समझ सकेंगे।

जांजगीर-नैला में मुख्य मार्ग चांपा रोड पर वार्ड 8 में दर 26,000 रुपये प्रति वर्गमीटर और इसी मार्ग पर वार्ड 17 में 22,800 रुपये प्रति वर्गमीटर दर निर्धारित थी, जबकि दोनों स्थान भौगोलिक और व्यावसायिक दृष्टि से समान थे। नई गाइडलाइन में इस विसंगति को समाप्त करते हुए दोनों क्षेत्रों में एक समान दर लागू कर दी गई है।

इसी तरह, नगर पालिका परिषद चांपा के महादेव वार्ड में 20 मीटर भीतर स्थित संपत्ति के लिए दो अलग-अलग दरें 12,480 तथा 7,880 रुपये निर्धारित थीं, जिससे पंजीयन के समय Rate Overlapping की समस्या आती थी। अब इन कंडिकाओं को एकीकृत कर एक समान दर निर्धारित कर दी गई है।

ग्रामीण क्षेत्रों में भी मार्गों के आमने-सामने स्थित भूमि के दरों में असमानता एक बड़ी समस्या थी। नई गाइडलाइन में ग्रामों का समूहीकरण कर समान महत्व वाले ग्रामों के लिए समान दरें लागू की गई हैं। मुख्य मार्ग से लगते दोनों ओर के गांवों को एक जैसा दर प्रदान करने से किसानों को अधिग्रहण या विक्रय के समय वास्तविक मूल्य का लाभ मिलेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में वर्गमीटर दर समाप्त कर अभिविन्यास आधारित दर लागू की गई है, जिससे मूल्यांकन अधिक सरल और पारदर्शी होगा।

नई गाइडलाइन दरों को लागू करने का प्रमुख उद्देश्य किसानों और आम जनता को उनका वास्तविक अधिकार देना है। पुरानी दरों के कारण कई मामलों में किसानों को भूमि अधिग्रहण में कम मुआवजा मिलता था और खरीदारों को भी हाउसिंग लोन कम राशि में स्वीकृत होता था। नई दरें इन समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करती हैं।

राज्य सरकार का मानना है कि दरों का यह संतुलित और तर्कसंगत पुनरीक्षण रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाएगा, काले धन पर रोक लगाएगा और पंजीयन प्रक्रिया को विवाद रहित बनाएगा। नई गाइडलाइन दरें न केवल संपत्ति बाजार को व्यवस्थित करेंगी, बल्कि पूरे प्रदेश में विकास की गति को भी बढ़ावा देंगी।


कृषि भूमि बाजार मूल्य निर्धारण नियमों में संशोधन

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रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन ने भूमि के बाजार मूल्य निर्धारण से संबंधित नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। अब तक लागू “छत्तीसगढ़ बाजार मूल्य मार्गदर्शक सिद्धांत नियम, 2000” का नाम बदलकर “छत्तीसगढ़ गाइडलाइन दरों का निर्धारण नियम, 2000” कर दिया गया है। 

नए संशोधनों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों की कृषि भूमि का बाजार मूल्य अब हेक्टेयर दर से निर्धारित किया जाएगा। इसके साथ ही वर्ग मीटर के आधार पर गणना की पूर्व प्रक्रिया को समाप्त कर दिया गया है। 

इसी तरह ग्रामीण क्षेत्रों में परिवर्तित भूमि के मूल्य निर्धारण में भी बदलाव किया गया है। पहले इसके लिए सिंचित भूमि की दर से ढाई गुना मूल्य लिया जाता था, लेकिन अब यह प्रावधान हटाकर केवल हेक्टेयर दर से ही मूल्य तय किया जाएगा। 

राज्य शासन ने स्पष्ट किया है कि इन संशोधनों को दस्तावेजों के पंजीयन एवं प्रभार्य शुल्क निर्धारण में लागू किया जाएगा। साथ ही संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे नए प्रावधानों की जानकारी अधीनस्थ कर्मचारियों को दें ताकि भूमि पंजीयन की प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।

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