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भारत की अंतरिक्ष यात्रा में नया अध्याय : 2035 तक ‘भारतीय स्पेस स्टेशन’, 2040 तक चाँद पर भारतीय अंतरिक्ष यात्री – डॉ. जितेंद्र सिंह

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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार); पृथ्वी विज्ञान मंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत अपनी अंतरिक्ष यात्रा के एक परिवर्तनकारी दौर में प्रवेश कर रहा है। महत्वाकांक्षी लक्ष्यों में 2035 तक भारतीय स्पेस स्टेशन की स्थापना और 2040 तक चाँद पर भारतीय अंतरिक्ष यात्री का उतरना शामिल है।

वे आज “इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन स्पेस 2025” के उद्घाटन सत्र को वर्चुअल माध्यम से संबोधित कर रहे थे। इस सम्मेलन का विषय था – “Harnessing Space for Global Progress: Innovation, Policy, and Growth”।
🌙 हाल की उपलब्धियाँ
  • मंत्री ने चंद्रयान-3 की सफलता को रेखांकित किया, जिसने भारत को उन अग्रणी देशों में शामिल कर दिया जो चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट उतरे हैं।

  • उन्होंने ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की उपलब्धि का भी उल्लेख किया, जो अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर जाने वाले पहले भारतीय वायुसेना अधिकारी बने।

  • आने वाले वर्षों में भारत की योजना मंगल, शुक्र और क्षुद्रग्रह मिशनों के साथ-साथ मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम ‘गगनयान’ को आगे बढ़ाने की है।

🔧 सुधार और स्टार्टअप्स की भूमिका

डॉ. सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू किए गए सुधारों से अंतरिक्ष क्षेत्र निजी कंपनियों, स्टार्टअप्स और शैक्षणिक संस्थानों के लिए खुला है।

  • वर्तमान में 300 से अधिक स्टार्टअप्स सक्रिय हैं, जो लॉन्च व्हीकल्स, सैटेलाइट्स और ग्राउंड सिस्टम्स पर काम कर रहे हैं।

  • इससे नवाचार, निवेश, रोजगार और युवाओं के लिए अवसर लगातार बढ़ रहे हैं।

🌍 अंतरिक्ष का असली मूल्य

मंत्री ने कहा कि अंतरिक्ष का असली मूल्य उसकी जन-जीवन में उपयोगिता है —

  • कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, शहरी विकास और सुशासन में अंतरिक्ष तकनीक बड़ा बदलाव ला रही है।

  • “स्पेस हर सेक्टर को सशक्त बनाए और आम नागरिक की सेवा करे”, उन्होंने कहा।

🤝 अंतरराष्ट्रीय सहयोग

भारत अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए भी प्रतिबद्ध है।

  • अमेरिका के साथ NASA–ISRO NISAR मिशन

  • जापान के साथ आगामी चंद्रयान-5 मिशन
    इन साझेदारियों को मंत्री ने वैश्विक सहभागिता का प्रतीक बताया।

🎓 कौशल विकास

भारत की अंतरिक्ष रणनीति में स्किल डेवलपमेंट अहम स्तंभ है।

  • इसरो आउटरीच प्रोग्राम,

  • अकादमिक Centres of Excellence,

  • और इंडस्ट्री–अकादमी सहयोग
    के माध्यम से युवा प्रतिभाओं को सैटेलाइट डिजाइन, प्रोपल्शन, एआई आधारित एप्लिकेशन और स्पेस लॉ जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित किया जा रहा है।

🌐 सम्मेलन और उद्योग सहभागिता

यह सम्मेलन CII (Confederation of Indian Industry) द्वारा आयोजित किया गया है, जिसमें भारत और विदेश से 500 से अधिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जिनमें सरकारी अधिकारी, शिक्षाविद, उद्योगपति और स्टार्टअप्स शामिल थे।

  • मंत्री ने CII के नेशनल कमिटी ऑन स्पेस के गठन का स्वागत किया और कहा कि यह प्लेटफ़ॉर्म पारंपरिक उद्योगों और नई उम्र के स्टार्टअप्स को जोड़कर एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र बनाएगा।

✨ प्रधानमंत्री की दृष्टि और निष्कर्ष

डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी की उस दृष्टि को दोहराया कि 21वीं सदी भारत की है और अंतरिक्ष क्षेत्र भारत के वैश्विक नेतृत्व का नया मंच बनेगा।
उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष तकनीक का उपयोग न केवल कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा में बदलाव लाएगा बल्कि शासन और सार्वजनिक सेवाओं को भी और मज़बूत करेगा।
अपने संबोधन के अंत में मंत्री ने कहा:
“भारत की अंतरिक्ष यात्रा दृढ़ता और नवाचार की कहानी है। आइए, हम सब मिलकर सपने देखें, नवाचार करें और निर्माण करें — ताकि अंतरिक्ष एक दूरस्थ सीमा न रहकर एक साझा क्षितिज बने, जो एकता और प्रगति का प्रतीक हो।”


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