Media24Media.com: #भारत निर्वाचन आयोग

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आम चुनाव और उपचुनाव 2026: अवैध सोशल मीडिया सामग्री पर ईसीआई की कार्रवाई

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 रायपुर : भारत निर्वाचन आयोग ने दोहराया है कि सभी हितधारक सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000, आईटी नियम, 2021 और आदर्श आचार संहिता सहित मौजूदा कानूनी प्रावधानों के अनुपालन में सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म का जिम्मेदार और नैतिक उपयोग सुनिश्चित करेंगे।आयोग ने निर्देश दिया है कि किसी भी भ्रामक या अवैध एआई-जनित या हेरफेर की गई सामग्री पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के संज्ञान में लाए जाने के 3 घंटे के भीतर कार्रवाई की जाएगी।


राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों और अभियान प्रतिनिधियों के लिए यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि प्रचार के लिए उपयोग की जाने वाली किसी भी सिंथेटिक रूप से निर्मित या एआई-परिवर्तित सामग्री को स्पष्ट रूप से "एआई-जनित", "डिजिटल रूप से संवर्धित" या "सिंथेटिक सामग्री" के रूप में लेबल किया जाए, साथ ही पारदर्शिता और मतदाता विश्वास बनाए रखने के लिए मूल इकाई का खुलासा भी किया जाए।

असम, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल की विधानसभाओं के चल रहे चुनावों में, ऐसी सोशल मीडिया सामग्री जैसे कि पोस्ट जो आदर्श आचार संहिता (MCC) का उल्लंघन हैं, कानून और व्यवस्था को बाधित करते हैं या जिनमें बाधित करने की क्षमता है, और मतदान प्रक्रिया या मशीनरी के खिलाफ झूठी कहानियों की निगरानी की जा रही है और आईटी अधिनियम के तहत अधिसूचित संबंधित राज्य आईटी नोडल अधिकारियों द्वारा उन पर कार्रवाई की जा रही है। तदनुसार 15 मार्च 2026 को चुनावों की घोषणा के बाद से चल रहे चुनावों में सामग्री को हटाने, एफआईआर , स्पष्टीकरण और खंडन सहित 11 हजार से अधिक ऐसे सोशल मीडिया पोस्ट/यूआरएल की पहचान की गई है और उन पर कार्रवाई की गई है।

आयोग ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 के तहत प्रावधानों को भी दोहराया, जो मतदान की समाप्ति से पहले 48 घंटे की मौन अवधि के दौरान मतदान क्षेत्रों में किसी भी चुनावी मामले के प्रदर्शन को प्रतिबंधित करते हैं। टेलीविजन, रेडियो, प्रिंट और सोशल मीडिया सहित मीडिया प्लेटफॉर्मों को इन प्रावधानों का सख्ती से पालन करना आवश्यक है।इसके अतिरिक्त, नागरिक/राजनीतिक दल/उम्मीदवार ईसीआई-नेट पर 'सी-विजिल' मॉड्यूल का उपयोग करके आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की रिपोर्ट कर सकते हैं। 15 मार्च से 19 अप्रैल तक, इन चुनावों में सी-विजिल ऐप का उपयोग करके 3,23,099 शिकायतें दर्ज की गई हैं। इनमें से 3,10,393 शिकायतें यानी 96.01% शिकायतों का समाधान 100 मिनट की निर्धारित समय अवधि के भीतर किया गया।

ECI ने ECINet डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म को और अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाने के लिए सुझाव आमंत्रित किए

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रायपुर। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) सभी नागरिकों को ECINet ऐप डाउनलोड करने और ऐप पर 'Submit a Suggestion' (एक सुझाव सबमिट करें) टैब का उपयोग करके ऐप को बेहतर बनाने के लिए अपने सुझाव देने के लिए आमंत्रित करता है। यह 27 नवंबर 2025 से 27 दिसंबर 2025 के बीच किया जा सकता है।

ECINet ऐप का ट्रायल वर्ज़न बिहार विधानसभा चुनाव 2025 और हाल के उपचुनावों के दौरान उपयोग में लाया गया था। इस नए प्लेटफ़ॉर्म ने बेहतर मतदाता सेवाएँ, मतदान प्रतिशत रुझानों की तेज़ी से उपलब्धता, और मतदान की समाप्ति के 72 घंटों के भीतर इंडेक्स कार्डों का प्रकाशन संभव बनाया, एक ऐसा कार्य जिसमें पहले कई सप्ताह या महीने लगते थे।

बिहार चुनावों से मिली सीख और मुख्य निर्वाचन पदाधिकारियों (CEOs), जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEOs), निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों (EROs), पर्यवेक्षकों और फील्ड अधिकारियों से मिले फीडबैक को प्लेटफ़ॉर्म की कार्यक्षमता को और बढ़ाने के लिए शामिल किया जा रहा है। उपयोगकर्ताओं के सुझावों की जाँच की जाएगी और प्लेटफ़ॉर्म को और अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाने के लिए अपडेट किया जाएगा। ECINet प्लेटफ़ॉर्म का आधिकारिक लॉन्च जनवरी 2026 में नियोजित है।

ECINet आयोग की प्रमुख पहलों में से एक है, जिसका उद्देश्य प्रौद्योगिकी के उपयोग के माध्यम से मतदाता सुविधा में सुधार करना और चुनावी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाना है। यह पहल मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में निर्वाचन आयुक्तों डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी के साथ की गई है। ECINet ऐप के विकास पर काम 04 मई, 2025 को इसकी घोषणा के बाद शुरू हुआ था (https://tinyurl.com/3s6bnezr)।

ECINet ऐप नागरिकों के लिए एक एकल, एकीकृत ऐप है, जो पहले के 40 अलग-अलग चुनाव-संबंधी एप्लिकेशन/वेबसाइटों जैसे वोटर हेल्पलाइन ऐप (VHA), CVIGIL, सक्षम, पोलिंग ट्रेंड्स (वोटर टर्नआउट ऐप), नो योर कैंडिडेट (KYC) ऐप, को एक ही इंटरफ़ेस में एकीकृत करता है। ऐप को Google Play Store और Apple App Store दोनों से डाउनलोड किया जा सकता है।


हलफनामा दें या देश से माफी मांगे राहुल गांधी : बृजमोहन अग्रवाल

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 रायपुर। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा कांग्रेस नेता राहुल गांधी को 7 दिन के भीतर हलफनामा देने अथवा देश से माफी मांगने का निर्देश दिया गया है। इस पर रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।


"जबरदस्ती मुद्दा उछाल रहे राहुल गांधी"

सांसद अग्रवाल ने कहा कि राहुल गांधी बेवजह इस मुद्दे को हवा दे रहे हैं। उन्होंने कहा – “यदि राहुल गांधी को वास्तव में लगता है कि चुनाव आयोग किसी प्रकार की गड़बड़ी कर रहा है तो उन्हें बिना देर किए हलफनामा प्रस्तुत करना चाहिए। लेकिन यदि उनके पास ऐसा कोई प्रमाण या आधार नहीं है तो उन्हें अपने झूठे आरोपों के लिए देश से माफी मांगनी चाहिए।”

"चुनाव आयोग पर अनर्गल आरोप लोकतंत्र को कमजोर"

सांसद अग्रवाल ने आगे कहा कि चुनाव आयोग देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी और निष्पक्ष संस्था है।
इस पर अनर्गल और बेबुनियाद आरोप लगाना लोकतंत्र को कमजोर करने का प्रयास है।

छत्तीसगढ़ की 11 राजनीतिक पार्टियों का पंजीयन रद्द, 30 दिन में जवाब का मौका

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रायपुर। भारत निर्वाचन आयोग ने छत्तीसगढ़ की 11 गैर-मान्यता प्राप्त पंजीकृत राजनीतिक पार्टियों (RUPP) का पंजीयन रद्द कर दिया है। ये दल पिछले छह वर्षों में किसी भी चुनाव में शामिल नहीं हुए थे। आयोग ने इन्हें अपने फैसले के खिलाफ पक्ष रखने या चुनौती देने के लिए 30 दिन की मोहलत दी है।


लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29ए के तहत, जो दल लगातार छह साल तक चुनाव में भाग नहीं लेते, उनका पंजीकरण रद्द किया जा सकता है। साथ ही, नाम, पता, पदाधिकारियों की जानकारी और उसमें बदलाव की सूचना समय पर आयोग को देना अनिवार्य है।


जून 2025 में आयोग ने देशभर के 345 RUPP की जांच कराई थी। इसमें से 334 दल नियमों का पालन नहीं करते पाए गए, जिन्हें मुख्य निर्वाचन अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर सूची से हटा दिया गया। अब देश में 2,854 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त दलों में से 2,520 शेष रह गए हैं।

आयोग का कहना है कि यह कार्रवाई चुनावी प्रणाली को पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाने की सतत रणनीति का हिस्सा है।

भारत निर्वाचन आयोग की बड़ी पहल: IIIDEM में शुरू हुआ अब तक का सबसे बड़ा प्रशिक्षण बैच, छत्तीसगढ़ के 96 अधिकारी शामिल

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 रायपुर : भारत निर्वाचन आयोग द्वारा आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की आठवीं श्रृंखला का शुभारंभ आज नई दिल्ली स्थित भारत अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र और निर्वाचन प्रबंधन संस्थान (IIIDEM) में हुआ। इस प्रशिक्षण में छत्तीसगढ़ के 96 निर्वाचन अधिकारी सक्रिय रूप से शामिल हुए हैं।


मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए छत्तीसगढ़, हरियाणा, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश से आए बूथ लेवल अधिकारी, बीएलओ सुपरवाइज़र्स, ईआरओ तथा डीईओ को संबोधित किया। उन्होंने निर्वाचन व्यवस्था को पारदर्शी, सुसंगत और विधिसम्मत बनाए रखने में इन अधिकारियों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

उल्लेखनीय है कि यह अब तक का सबसे बड़ा प्रशिक्षण बैच है, जिसमें कुल 373 प्रतिभागी शामिल हैं – जिनमें से उत्तर प्रदेश से 118, मध्यप्रदेश से 130, छत्तीसगढ़ से 96 और हरियाणा से 29 अधिकारी हैं। इस श्रृंखला के माध्यम से आयोग दो माह में अब तक 3,720 से अधिक मैदानी चुनाव अधिकारियों को प्रशिक्षण दे चुका है।

अपने संबोधन में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 एवं 1951, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1960, निर्वाचन संचालन नियम 1961 तथा आयोग द्वारा समय-समय पर जारी निर्देशों की जानकारी को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण यह सुनिश्चित करेगा कि चुनाव की समस्त प्रक्रियाएँ विधिक प्रावधानों के अनुरूप संपन्न हों।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने प्रतिभागियों को अवगत कराया कि प्रशिक्षण के दौरान वे लोकप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 24(a) (जिला मजिस्ट्रेट/कलेक्टर के समक्ष प्रथम अपील) और धारा 24(b) (राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के समक्ष द्वितीय अपील) की प्रक्रिया से भी परिचित रहें। उन्होंने बीएलओ व पर्यवेक्षकों को सलाह दी कि वे क्षेत्रीय सत्यापन के समय इन प्रावधानों की जानकारी मतदाताओं को भी दें।

उल्लेखनीय है कि 6 से 10 जनवरी 2025 के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) के बाद छत्तीसगढ़, हरियाणा, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से किसी प्रकार की अपील प्राप्त नहीं हुई – जो क्षेत्रीय अधिकारियों के सतर्क, व्यवस्थित और तकनीकी रूप से दक्ष होने का प्रमाण है।

प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य मतदाता पंजीकरण, फॉर्म प्रबंधन और चुनाव प्रक्रियाओं के व्यावहारिक पक्ष को मजबूत करना है। इसके अंतर्गत प्रतिभागियों को ईवीएम (EVM), वीवीपैट (VVPAT) और मॉक पोल से संबंधित तकनीकी पहलुओं पर विशेष सत्रों के माध्यम से प्रशिक्षित किया जाएगा।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईटी टूल्स के उपयोग पर भी विशेष बल दिया गया है। इससे अधिकारी डिजिटल प्रक्रिया, डेटा प्रबंधन और निर्वाचन प्रक्रिया में तकनीकी दक्षता प्राप्त कर सकेंगे, जिससे भविष्य के चुनाव अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाए जा सकेंगे।

भारत निर्वाचन आयोग द्वारा आयोजित यह प्रशिक्षण श्रृंखला लोकतंत्र की मजबूती में एक और ठोस कदम है, जिसमें छत्तीसगढ़ के अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह सुनिश्चित करता है कि आने वाले चुनावों में भी निर्वाचन कार्य में नियोजित अधिकारी एवं कर्मचारी पारदर्शिता और प्रभावशीलता के उच्चतम मानकों का पालन करेंगे।

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