Media24Media.com: #भारत की जनगणना-2027

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जनगणना-2027 राष्ट्र निर्माण की आधारशिला : मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : भारत की जनगणना-2027 के सफल संचालन के लिए आयोजित राज्य एवं संभाग स्तरीय अधिकारियों के प्रशिक्षण सम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि जनगणना केवल जनसंख्या की गणना नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। उन्होंने प्रदेश के सभी संभागायुक्तों, कलेक्टरों एवं प्रशासनिक अधिकारियों से इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय दायित्व को पूरी गंभीरता, सटीकता और संवेदनशीलता के साथ निभाने का आह्वान किया।


मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2027 की जनगणना स्वतंत्रता के बाद आठवीं जनगणना होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना प्रशासन की विश्वसनीयता और शासन की पारदर्शिता की परीक्षा है। यदि आंकड़े अधूरे या त्रुटिपूर्ण होंगे तो विकास योजनाओं का लक्ष्य प्रभावित होगा। एक भी व्यक्ति या परिवार छूटना नहीं चाहिए, क्योंकि इससे विकास की प्रक्रिया अधूरी रह सकती है।


उन्होंने बताया कि जनगणना-2027 भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना होगी। मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल के माध्यम से डेटा संकलन किया जाएगा, जिससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, त्वरित और प्रभावी होगी। छत्तीसगढ़ में प्रथम चरण अंतर्गत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य 1 मई से 30 मई 2026 तक संचालित किया जाएगा। यह कार्य प्रदेश के 33 जिलों, 252 तहसीलों और 19,978 गाँवों में संपन्न किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्व-गणना की सुविधा से जनभागीदारी बढ़ेगी और जनता का विश्वास ही जनगणना की सफलता का आधार है। यह कार्य विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत-2047 की नींव रखने वाला सिद्ध होगा।

प्रशिक्षण सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य सचिव श्री विकासशील ने कहा कि जनगणना एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसमें तथ्यों का व्यवस्थित एवं प्रमाणिक संकलन किया जाता है। उन्होंने अधिकारियों से सभी निर्धारित कार्यों को तय समय-सीमा के भीतर पूर्ण करने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने प्रगणकों के प्रशिक्षण में सपोर्टिव सुपरविजन की तकनीक अपनाने पर विशेष बल देते हुए कहा कि मैदानी स्तर पर कार्य करने वाले कर्मियों को निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग मिलना चाहिए, जिससे त्रुटियों की संभावना न्यूनतम हो।

उन्होंने नई भवन अनुज्ञाओं को पूर्व से ही ट्रेस करने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि मकान सूचीकरण के दौरान कोई संरचना छूट न जाए। साथ ही सीमावर्ती जिलों के संदर्भ में उन्होंने वर्ष 2001 के अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में चले गए व्यक्तियों की गणना में दोहराव से बचने के लिए विशेष सावधानी बरती जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि जनगणना की सफलता सूक्ष्म योजना, समन्वय और सटीक क्रियान्वयन पर निर्भर करती है, इसलिए सभी अधिकारी गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ इस राष्ट्रीय दायित्व का निर्वहन करे।

इस अवसर पर भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त श्री मृत्युंजय कुमार नारायण ने कहा कि जनगणना विश्व के सबसे बड़े प्रशासनिक एवं सांख्यिकीय कार्यों में से एक है। यह हमारे लोकतंत्र की आधारशिला है और नीति-निर्माण व विकास योजनाओं की दिशा तय करती है। उन्होंने बताया कि भारत में पहली संगठित जनगणना वर्ष 1872 में प्रारंभ हुई थी और आगामी जनगणना देश की 16वीं तथा स्वतंत्रता के बाद की 8वीं जनगणना होगी।

उन्होंने कहा कि 150 वर्षों की परंपरा वाली भारतीय जनगणना गाँव, कस्बा और वार्ड स्तर तक प्राथमिक आँकड़ों का सबसे बड़ा स्रोत है। इसमें मकानों की स्थिति, सुविधाएँ, परिसंपत्तियाँ, जनसांख्यिकीय विवरण, धर्म, अनुसूचित जाति-जनजाति, भाषा, शिक्षा, आर्थिक गतिविधि, प्रव्रजन एवं प्रजनन से संबंधित सूक्ष्म एवं विश्वसनीय आँकड़े संकलित किए जाते हैं।

गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज पिंगुआ ने कलेक्टरों को जनगणना-2027 से संबंधित कार्यों के बारे में विस्तार से दिशा-निर्देश दिए। राज्य स्तरीय संभागायुक्त-कलेक्टर सम्मेलन में राज्य शासन के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, सभी संभागायुक्त, कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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