Media24Media.com: #बूंद-बूंद की पवित्रता

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #बूंद-बूंद की पवित्रता. Show all posts
Showing posts with label #बूंद-बूंद की पवित्रता. Show all posts

​ तालाबो की नगरी आरंग का महामाया तालाब झेल रहा उपेक्षा का दंश, कभी पेयजल के लिए होता था इस्तेमाल, आज आ रही दुर्गंध

No comments Document Thumbnail

 40 वर्ष पहले जो पानी लोगों की प्यास बुझाता था, आज वह खुद अपनी बूंद-बूंद की पवित्रता के लिए तरस रहा; धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर के अस्तित्व पर गहराया संकट।


​ आरंग। आस्था, संस्कृति और जन-जीवन का प्रमुख केंद्र माना जाने वाला आरंग का ऐतिहासिक व प्रसिद्ध ‘महामाया तालाब’ आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। 'तालाबों की नगरी' के नाम से विख्यात आरंग नगर का यह मुख्य जलाशय आज घोर प्रशासनिक उपेक्षा और गंदगी का शिकार है। हालात इस कदर बदतर हो चुके हैं कि तालाब के चारों ओर बने घरों और शौचालयों का दूषित पानी सीधे इसमें आकर मिल रहा है, जिससे कभी निर्मल रहने वाला यह जलस्रोत अब तेज दुर्गंध मार रहा है।

​ कभी था पेयजल का मुख्य स्रोत

​स्थानीय बुजुर्गों और प्रबुद्ध नागरिकों ने भारी मन से बताया कि करीब 40 वर्ष पहले इस तालाब का पानी इतना स्वच्छ और पारदर्शी था कि पूरे नगर के लोग इसका उपयोग पेयजल और रसोई के कार्यों के लिए करते थे। लेकिन वक्त के साथ संरक्षण के अभाव और बढ़ते शहरीकरण ने इसे एक गंदे नाले के रूप में तब्दील करना शुरू कर दिया है। नियमित सफाई न होने के कारण तालाब के किनारों पर प्लास्टिक, पॉलीथिन और अपशिष्ट कचरे का अंबार लगा हुआ है।

​ चारों दिशाओं में मंदिर, फिर भी अनदेखी

​यह तालाब केवल पानी का स्रोत नहीं, बल्कि आरंग की धार्मिक और सांस्कृतिक आत्मा है। इसके चारों किनारों पर प्राचीन और जागृत देवस्थान स्थापित हैं:
​ पूर्व से पश्चिम तक देवस्थान: तालाब के तट पर आदिशक्ति मां महामाया मंदिर, भव्य दुर्गा मंदिर, प्राचीन नारायण बन हनुमान मंदिर और कुमारेश्वर महादेव सहित कई अन्य शिव मंदिर स्थित हैं।


​ सालभर अनुष्ठान: इन मंदिरों में वर्ष भर धार्मिक अनुष्ठान होते हैं और प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु यहाँ पूजा-अर्चना के लिए पहुँचते हैं।


​ विसर्जन का मुख्य स्थल: चैत्र व क्वांर नवरात्र में मां दुर्गा की प्रतिमाओं, ज्योति जवारा और लोक पर्व भोजली का विसर्जन इसी पवित्र तालाब में पूरे विधि-विधान से किया जाता है। इसके बावजूद इसकी पवित्रता को अक्षुण्ण रखने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है।

​ चर्म रोग की आशंका, निस्तारी के लिए लोग मजबूर

​नगर का मुख्य केंद्र होने के कारण आज भी बड़ी आबादी दैनिक निस्तारी (नहाने-धोने) के लिए इसी तालाब पर निर्भर है। पानी इस कदर दूषित हो चुका है कि इसके संपर्क में आने से स्थानीय लोगों और विशेषकर बच्चों में चर्म रोग (स्किन इन्फेक्शन) तथा अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा तेजी से मंडराने लगा है।

जन-प्रतिनिधियों और प्रशासन से सौंदर्यीकरण की गुहार

​स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्ध वर्ग का कहना है कि महामाया तालाब आरंग की बहुमूल्य सांस्कृतिक धरोहर है। इसे इस तरह नष्ट होने नहीं दिया जा सकता। नगरवासियों ने प्रशासन, नगर पालिका और जन-प्रतिनिधियों से पुरजोर मांग की है कि तालाब में गिरने वाले गंदे पानी और नालियों को तुरंत रोका जाए। साथ ही, इसके गहरीकरण, पचरी निर्माण, सौंदर्यीकरण और दीर्घकालिक संरक्षण के लिए तत्काल युद्ध स्तर पर कार्य शुरू किया जाए, ताकि इस ऐतिहासिक धरोहर को समय रहते बचाया जा सके।
Box..

126 से घटकर 30 पर सिमटी 'तालाबों की नगरी'

आरंग को इतिहास में 'छः आगर छः कोरी' अर्थात् 126 तालाबों की गौरवशाली नगरी कहा जाता था। अवैध कब्जों, देखरेख की कमी और प्रशासनिक उदासीनता के कारण आज यहाँ मुश्किल से 30 से 35 तालाब ही अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। महामाया तालाब की जो स्थिति है, कमोबेश वही हाल आरंग के अन्य बचे हुए तालाबों का भी है।

Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.