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देश और समाज के लिए पूरी ताकत से जुटें जनजातीय युवा : अरुण साव

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रायपुर। उप मुख्यमंत्री अरुण साव आज बिलासपुर के स्वर्गीय लखीराम अग्रवाल ऑडिटोरियम में जनजाति युवा संगम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने कार्यक्रम में शहीद वीरनारायण सिंह एवं भगवान बिरसा मुंडा को श्रद्धापूर्वक नमन किया। जनजाति गौरव माह के समापन पर जनजाति गौरव दिवस आयोजन समिति एवं युवा कार्य वनवासी विकास समिति द्वारा इसका आयोजन किया गया था। गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आलोक कुमार चक्रवाल ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। बिलासपुर की महापौर पूजा विधानी, वैभव सुरंगे और डॉ. चंद्रशेखर उइके सहित जनजातीय समाज के अनेक गणमान्य नागरिक कार्यक्रम में शामिल हुए।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने जनजाति युवा संगम को संबोधित करते हुए कहा कि आज शहीद वीरनारायण सिंह के बलिदान दिवस पर उन्हें नमन करता हूं। अंग्रेजों ने उनके साथ जो व्यवहार किया, वह इस बात का प्रमाण है कि वे उनसे कितना भय खाते थे। जमींदार परिवार में जन्म लेकर भी उन्होंने आम जनता, समाज और गरीबों की चिंता की तथा अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष किया। भगवान बिरसा मुंडा की जीवनी जनजातीय समाज के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने समाज के अधिकारों के लिए संघर्ष किया और अंग्रेजों से डटकर मुकाबला किया। 

आज शहीद वीरनारायण सिंह और भगवान बिरसा मुंडा से प्रेरणा लेकर जनजातीय समाज के गौरव, स्वाभिमान और वैभव को आगे बढ़ाने का समय है। उप मुख्यमंत्री साव ने कहा कि जनजातीय समाज के युवा यदि अपने समाज की महिमा को आगे बढ़ाएं, तो इसका सकारात्मक प्रभाव पूरे समाज पर पड़ेगा। 

जब कोई समाज किसी व्यक्ति को भगवान का दर्जा देता है, तो यह दर्शाता है कि उस महापुरुष ने समाज के लिए असाधारण काम किए हैं। जनजातीय समाज के युवाओं को भगवान बिरसा मुंडा और शहीद वीरनारायण सिंह से प्रेरणा लेकर भारत माता, छत्तीसगढ़ महतारी और अपने समाज के वैभव व गौरव को बढ़ाने के लिए पूरी ताकत से जुटना चाहिए। उन्होंने युवाओं से सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण के मार्ग पर आगे बढ़ने का आह्वान किया।

जनजातीय गौरव दिवस पर समूचे प्रदेश में 1 से 15 नवम्बर तक मनाया जाएगा “जनजातीय गौरव पखवाड़ा”

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रायपुर। भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के निर्देशानुसार इस वर्ष 15 नवम्बर 2025 को धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में समूचे देश में “जनजातीय गौरव दिवस” भव्य रूप से मनाया जाएगा। इस अवसर पर 1 नवम्बर से 15 नवम्बर 2025 तक “जनजातीय गौरव पखवाड़ा” का आयोजन किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में प्रदेश के सभी जिलों में प्रभारी मंत्री, सांसद, विधायक, जनप्रतिनिधि एवं प्रभारी सचिवों की उपस्थिति में विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। जिला स्तरीय समारोह में जनजातीय संस्कृति, लोककला, व्यंजन, हस्तशिल्प और विकास प्रदर्शनी के साथ-साथ भारत सरकार एवं राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का भी प्रदर्शन किया जाएगा।

कार्यक्रमों में शहीद वीर नारायण सिंह लोक कला महोत्सव एवं उत्तर छत्तीसगढ़ जनजातीय लोक नृत्य महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इसके साथ ही आश्रम-छात्रावासों, शासकीय संस्थानों और जनजातीय ग्रामों में प्रभातफेरी, जन-जागरूकता यात्राएँ, वृक्षारोपण, निबंध, वाद-विवाद एवं चित्रकला प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाएँगी। जनजातीय नायक-नायिकाओं के जीवन और योगदान पर संगोष्ठियाँ भी होंगी।

इस पखवाड़े के दौरान विशेष लाभार्थी संतृप्ति शिविरों का आयोजन किया जाएगा, जिनमें आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, जनधन खाता, सिकल सेल जांच, स्वास्थ्य परीक्षण, जाति प्रमाणपत्र वितरण, पीएम किसान सम्मान निधि एवं किसान क्रेडिट कार्ड जैसी सेवाएँ प्रदान की जाएँगी।

जिले के “आदि सेवा केन्द्रों” में भी गौरव दिवस का आयोजन किया जाएगा। जिला स्तरीय मुख्य कार्यक्रम में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजनों, जनजातीय समुदाय के प्रमुखों, प्रतिभावान बच्चों एवं उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों का सम्मान किया जाएगा। साथ ही पी.एम. जनमन, आदि कर्मयोगी तथा धरतीआबा योजनाओं से संबंधित लघु फिल्में प्रदर्शित की जाएँगी। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का संदेश-पाठ (पाती वाचन) भी किया जाएगा।

जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर यह आयोजन प्रदेश के आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा, संघर्ष और गौरवगाथा को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का अवसर बनेगा।

"धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती हम सबके लिए गर्व और प्रेरणा का अवसर है। भगवान बिरसा मुंडा ने अपने अदम्य साहस, संघर्ष और त्याग से जनजातीय समाज को स्वाभिमान और स्वतंत्रता का संदेश दिया। जनजातीय गौरव पखवाड़ा न केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत के उत्सव का प्रतीक है, बल्कि यह आदिवासी समाज के उत्थान, सम्मान और सशक्तिकरण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का भी प्रमाण है। मैं सभी प्रदेशवासियों से आग्रह करता हूँ कि वे इस पखवाड़े में उत्साहपूर्वक भाग लें और हमारी जनजातीय संस्कृति, परंपरा एवं मूल्यों को आगे बढ़ाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएँ।"- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय*

विशेष लेख : आदिवासी वीर नायकों को समर्पित है देश का पहला डिजिटल संग्रहालय

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रायपुर। आदिवासी नायक भगवान बिरसा मुंडा जहां देशभर के आदिवासियों के प्रेरणापूंज है। ठीक उसी प्रकार छत्तीसगढ़ में भी फिरंगियों के विरूद्ध बिगुल फूंकने का काम सोनाखान केे जमींदार वीर नारायण सिंह ने किया। उन्होंने फिरंगियों की दमन और शोषणकारी नीतियों के विरूद्ध विद्रोह का बिगुल फूंका का और उनसे लड़ते हुए शहीद हुए। उन्हें छत्तीसगढ़ का प्रथम शहीद माना जाता है।  

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शहीद वीर नारायण सिंह और फिरंगियों के विरूद्ध संघर्ष करने वाले आदिवासी नायकों की स्मृतियों को संजोने और भावी पीढ़ी तक उनके प्रेरणास्पद कार्यों को पहुंचाने के लिए नवा रायपुर में संग्रहालय बनाने का निर्णय लिया। मुख्यमंत्री के इस निर्णय से पूरा आदिवासी समाज गौरवान्वित है। 

प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने बताया कि नवा रायपुर के सेक्टर 24 में तैयार किया जा रहा है भव्य संग्रहालय अपने आप में अनूठा है। यह देश का पहला डिजिटल संग्रहालय है। लगभग 50 करोड़ रूपए की लागत से इस संग्रहालय को तैयार किया गया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ पर इस संग्र्रहालय का लोकार्पण करने जा रहे हैं। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने की शुरूआत की। उन्होंने जनजाति समाज को मुख्यधारा में शामिल करने के लिए देश का सबसे बड़ा अभियान पीएम जनमन और प्रधानमंत्री धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना शुरू की। इस अभियान के तहत जनजाति इलाकों में सभी प्रकार की मूलभूत सुविधाओं के साथ ही कंेद्र और राज्य सरकार की योजनाओं से उन्हें लाभान्वित किया जा रहा है। 

संग्रहालय में शहीद वीर नारायण सिंह का भव्य स्मारक भी बनाया गया है। साथ ही यहां छत्तीसगढ़ में आदिवासी विद्रोहों हल्बा विद्रोह, सरगुजा विद्रोह, भोपालपट्टनम, परलकोट, तारापुर, लिंगागिरी, कोई, मेरिया, मुरिया, रानी चौरिस, भूमकाल, सोनाखान विद्रोहों के साथ ही झंडा सत्याग्रह और जंगल सत्याग्रह की जीवंत झलक दिखाई गई है। इन विद्रोहों को अलग-अलग 14 सेक्टरों में बांटा गया है। अत्याधुनिक इस डिजिटल संग्रहालय में आगतुंकों के लिए वीएफएक्स टेक्नोलॉजी, प्रोजेक्शन, डिजिटल स्क्रीन, मोबाइल पर क्यूआर कोड स्कैन की सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। 

संग्रहालय के प्रवेश द्वार पर सरगुजा कलाकारों की नक्काशीदार पैनल, 1400 वर्ष पुराने साल-महुआ और साजा वृक्ष की प्रतिकृति जिसकी पत्तियों पर 14 विद्रोहों की डिजिटल कहानी उकेरी गई है। यह वृक्ष मोशन फिल्मों की तरह पूरे विद्रोहो की कहानी बतलाती प्रतीत होगी। इस संग्रहालय में सेल्फी पॉइंट, दिव्यांग सुविधाएं, सीनियर सिटीजन के लिए विशेष इंतजाम, ट्राइबल आर्ट से सजा फर्श, भगवान बिरसा मुंडा, शहीद गैंदसिंह और रानी गाइडल्यू की मूर्तियां भी लगाई गई है, जो लोगों के लिए प्रेरणाप्रद होंगे।  

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय कहते हैं कि यह संग्रहालय छत्तीसगढ़ जनजातीय संस्कृति का वैश्विक केंद्र बनेगा। यहां आने वाले लोगों को आदिवासी वीर नायकों की शौर्य गाथा से गर्व की अनुभूति होगी। यह आदिवासी समाज की पूर्वजों की स्मृति है और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है। 

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