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बस्तर क्षेत्र में खुशहाली और शांति बहाल करने में हो रहे हैं कामयाब: मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : हमारी सरकार जनजातीय समाज के भविष्य को संवारने के लिए दृढ़ संकल्प के साथ कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प से अब हम बस्तर क्षेत्र में खुशहाली और शांति बहाल करने में कामयाब हो रहे हैं। बस्तर पिछले लगभग 40 वर्षों से विकास से अछूता रहा और लंबे समय तक नक्सल प्रभाव से प्रभावित था, लेकिन अब परिस्थितियाँ तेजी से बदल रही हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश जल्द ही नक्सलवाद से मुक्त होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिससे जनजातीय समाज में अमन-चैन के साथ-साथ खुशहाली और समृद्धि का नया दौर आएगा।


मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने नवा रायपुर स्थित आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (TRTI) परिसर में आयोजित दो दिवसीय ‘आदि परब’ के समापन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।


मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि ‘आदि परब’ की थीम ‘परंपरा से पहचान तक’ रखी गई है। यह आयोजन छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, कला और परंपराओं को साझा मंच देने के उद्देश्य से आयोजित किया गया, जिसमें छत्तीसगढ़ सहित तेलंगाना, ओडिशा, महाराष्ट्र और झारखंड के आदिवासी लोक कलाकारों ने भाग लिया।


उन्होंने कहा कि प्रदेश की 43 विभिन्न जनजातियों के लोग एक मंच पर एकत्रित हुए, जो हमारी सांस्कृतिक विविधता और समृद्धि का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने इस सफल आयोजन के लिए विभाग की पूरी टीम को बधाई दी तथा ‘आदि परब’ चित्रकला और परिधान को मिले ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ पुरस्कार के लिए भी शुभकामनाएँ दीं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जनजातीय समाज के युवाओं को उच्च शिक्षा और शोध के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से टीआरटीआई परिसर में 5 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 100 सीटर छात्रावास का लोकार्पण किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय बाहुल्य प्रदेश छत्तीसगढ़ में इस प्रकार के आयोजन का विशेष महत्व है, क्योंकि यह हमारी समृद्ध जनजातीय संस्कृति और परंपराओं की व्यापकता को प्रदर्शित करता है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन में पारंपरिक चित्रकला, शिल्प, हाट-बाजार और पारंपरिक व्यंजनों का अद्भुत संगम देखने को मिला। हमारी लोक परंपराएँ ही हमारी असली पहचान हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां स्थित दो संग्रहालयों में से एक शहीद वीर नारायण सिंह जी की जीवनगाथा को समर्पित है। उन्होंने कहा कि 1 नवंबर 2025 को छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की रजत जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने देश के पहले डिजिटल ‘शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह-जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय’ का लोकार्पण किया था, जो हम सभी के लिए गर्व की बात है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दूसरे जनजातीय संग्रहालय में जन्म, विवाह और मृत्यु संस्कारों सहित जनजातीय जीवन के विभिन्न अवसरों पर पहने जाने वाले पारंपरिक परिधानों और रीति-रिवाजों का जीवंत चित्रण प्रस्तुत किया गया है। आधुनिकता की दौड़ में हमें अपनी विलुप्त होती सांस्कृतिक विरासत को सहेजना होगा।

उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि आज देश में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जैसे नेतृत्व के कारण आदिवासी समाज का कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि देश के सर्वोच्च पद राष्ट्रपति के लिए आदिवासी समाज की बेटी श्रीमती द्रौपदी मुर्मु को अवसर मिला, जो पूरे जनजातीय समाज के लिए गौरव का विषय है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के माध्यम से छत्तीसगढ़ में चिन्हित 6 हजार 691 बसाहटों का कायाकल्प किया जा रहा है। अति पिछड़ी जनजातियों को मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
उन्होंने कहा कि पीएम जनमन योजना के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजातियों को सड़क, आवास और अन्य मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस योजना के तहत प्रदेश की 2300 से अधिक पीवीटीजी बसाहटों के 56 हजार से अधिक परिवार लाभान्वित हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नियद नेल्लानार योजना (आपका अच्छा गांव) हमारी सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसके माध्यम से नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र के जनजातीय गांवों तक सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएँ पहुंचाई जा रही हैं। साथ ही इन क्षेत्रों के लोगों को अब सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिल रहा है।

इस अवसर पर आदिम जाति विकास मंत्री  रामविचार नेताम ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद जनजातीय समाज के गौरव के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए गए हैं। इनमें शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय और जनजातीय संस्कृति एवं परंपराओं पर आधारित संग्रहालय प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि यह देश का ऐसा डिजिटल संग्रहालय है जिसका अध्ययन करने देश और विदेश से लोग आ रहे हैं। संग्रहालय में अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष करने वाले जनजातीय नायकों और आंदोलनों की जीवंत प्रस्तुति की गई है, जो समाज के गौरव को बढ़ाती है। उन्होंने बताया कि सरकार 3357 आश्रम-छात्रावास, 17 प्रयास विद्यालय और 75 एकलव्य विद्यालयों के माध्यम से जनजातीय वर्ग के भविष्य को संवारने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की सरकार ने एफआरए के तहत 4 लाख 25 हजार 425 हितग्राहियों को 3.49 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में पट्टा प्रदान किया है।

इस अवसर पर वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने ‘परंपरा से पहचान तक’ की थीम पर आयोजित ‘आदि परब’ के लिए बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि हमने नक्सलवाद की पीड़ा को नजदीक से देखा है और अब डबल इंजन की सरकार के दृढ़ संकल्प से नक्सलवाद समाप्ति की ओर बढ़ रहा है।उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद से मुक्त कराने में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने ‘आदि परब’ के माध्यम से जनजातीय संस्कृति और परंपराओं को दुनिया तक पहुंचाने के इस प्रयास की सराहना की।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री 

साय ने यूपीएससी परीक्षा में सफलता प्राप्त करने वाले जनजातीय समाज के  अंकित साकिनी और  डायमंड ध्रुव को सम्मानित किया। साथ ही प्रयास आवासीय विद्यालय के उन विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया जिनका चयन NIT और IIT में हुआ है। मुख्यमंत्री ने ‘प्रयास’ आवासीय विद्यालयों के विद्यार्थियों को लैपटॉप के लिए चेक भी प्रदान किए।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने सरगुजा क्षेत्र के जनजातीय इतिहास पर आधारित पुस्तक का विमोचन भी किया तथा पारंपरिक वेशभूषा में सजे जनजातीय युवाओं द्वारा प्रस्तुत अटायर शो का आनंद लिया।

कार्यक्रम में विधायक प्रबोध मिंज एवं श्री इन्द्रकुमार साहू, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, छत्तीसगढ़ जनजातीय आयोग के अध्यक्ष  रूपसिंह मण्डावी, छत्तीसगढ़ राज्य औषधि एवं पादप बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम, आदिम विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा, आयुक्त डॉ. सारंश मित्तर, टीआरटीआई की संचालक श्रीतमी हिना नेताम सहित बड़ी संख्या में जनजातीय समाज के गणमान्यजन उपस्थित थे।

शांति और विकास की ओर बस्तर का ऐतिहासिक मोड़: दंतेवाड़ा में 63 माओवादियों का आत्मसमर्पण

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रायपुर। बस्तर अंचल में शांति, विश्वास और विकास की दिशा में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज हुई है। दंतेवाड़ा जिले में “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” पहल के अंतर्गत 36 इनामी सहित कुल 63 माओवादियों— जिनमें 18 महिलाएं और 45 पुरुष शामिल हैं — ने हिंसा का रास्ता छोड़कर लोकतांत्रिक और विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का संकल्प लिया है। यह केवल आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि बस्तर के भविष्य के लिए एक निर्णायक परिवर्तन है।

बंदूक नहीं, संवाद और विकास ही स्थायी समाधान: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर कहा कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी की स्पष्ट, बहुआयामी सुरक्षा एवं विकास रणनीति का प्रत्यक्ष परिणाम है। उन्होंने कहा कि यह घटना प्रमाण है कि “बंदूक नहीं, संवाद और विकास ही स्थायी समाधान हैं।”

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार की संवेदनशील पुनर्वास नीति, सटीक सुरक्षा रणनीति और सुशासन आधारित प्रशासनिक दृष्टिकोण के कारण नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। माओवादी नेटवर्क का प्रभावी विघटन हो रहा है और बस्तर के सुदूर अंचलों में अब तेज़ी से सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंच रही हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले युवाओं को सरकार द्वारा सम्मानजनक पुनर्वास, कौशल प्रशिक्षण, आजीविका और सामाजिक पुनर्स्थापन की समुचित व्यवस्था दी जाएगी ताकि वे आत्मनिर्भर नागरिक बनकर समाज की मुख्यधारा में स्थायी रूप से स्थापित हो सकें।

उन्होंने कहा कि बस्तर अब भय नहीं, भविष्य की भूमि बन रहा है — जहां शांति, सुशासन और विकास मिलकर एक स्वर्णिम कल की नींव रख रहे हैं।

हिंसा नहीं, विकास बनेगा सुकमा की नई पहचान : उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा

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रायपुर। बस्तर के अति संवेदनशील इलाकों में विकास की नई किरण पहुंचाने के संकल्प के साथ उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा आज सुकमा ले के जगरगुंडा पहुंचे। इस दौरान उन्होंने बैठक में आए पारंपरिक समाज प्रमुखों गायता, सिरहा, पुजारी, बैगा और जनप्रतिनिधियों के साथ आत्मीय मुलाकात की। जिसमें समाज प्रमुखों ने हिंसा के दौर में विकास के गांव तक नहीं पहुंचने के संबंध में विस्तारपूर्वक बताया। उन्होंने बताया कैसे पहले कोई भी विकास कार्य ग्राम में आता तो नक्सलियों द्वारा उनको कभी पूरा होने नहीं दिया जाता था। 

जिससे ग्राम में आधारभूत सुविधाओं का भी आभाव है। जिस पर उपमुख्यमंत्री ने कहा कि अब हिंसा नहीं बल्कि विकास सुकमा की नई पहचान बनेगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शासन द्वारा ऐसे क्षेत्रों में जहां विकास माओवादी गतिविधियों के कारण बाधित हो गया था, उनके लिए तीव्र विकास हेतु नियद नेल्ला नार योजना चलाई जा रही है। जहां सुरक्षा कैंप केवल नक्सलवाद को रोकने के लिए नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं को ग्रामीणों तक पहुँचाने के 'सुविधा केंद्र' के रूप में कार्य कर रहे हैं और कई गांव जहां सड़क, बिजली, पेयजल की समस्या थी वहां अब ये सुविधाएं पहुंच रहीं हैं।

उन्होंने आगे बताया कि शासन द्वारा ऐसे ग्राम जो अपने सभी भटके हुए युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाकर खुद को 'सशस्त्र नक्सल हिंसा मुक्त' घोषित करेंगे, उन्हें इलवद पंचायत योजना से 1 करोड़ रुपये की अतिरिक्त विकास राशि प्रदाय की जाएगी। इसके साथ ही संबंधित जनपद सदस्य को 10 लाख और जिला पंचायत सदस्य को 15 लाख रुपये की राशि क्षेत्र के विकास हेतु प्रदान की जाएगी। यह राशि गाँव के सर्वांगीण विकास और बुनियादी ढाँचे के लिए सीधे उपयोग की जा सकेगी।

उन्होंने बताया कि बस्तर अंचल के वनोपजों से ग्रामीण केवल वनोपज संग्राहक से अब व्यवसायी बनने का सफर तय कर रहे हैं, बस्तर के गांवों में विकास का मॉडल तैयार हो रहे हैं। अब ग्रामीण केवल वनोपज इकट्ठा नहीं करेंगे, बल्कि गांवों में ही प्रोसेसिंग यूनिट लगाकर उत्पादक और व्यवसायी बनेंगे। गांव के वनोत्पादों को भी उचित मूल्य प्राप्त होगा, प्रसंस्करण से अभी के मुकाबले 4 से 5 गुना अधिक लाभ ग्रामीणों को प्राप्त होगा।

उपमुख्यमंत्री शर्मा ने समाज प्रमुखों से आग्रह किया कि अब हिंसा को रोकना आवश्यक है, वे जंगलों में भटक रहे युवाओं को पुनर्वास नीति का लाभ उठाने और देश के विकास में भागीदार बनने के लिए प्रेरित करें, ताकि सभी का विकास शासन के साथ मिलकर सुनिश्चित किया जा सके। 

50 ग्रामीणों को मिले उन्नत किस्म के पौधे

 इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री ने ग्रामीणों को विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत समाग्री का भी वितरण किया। जिसमें उन्होंने किसानों को उन्नत किस्म के मूंग और उड़द के बीज प्रदान किए, उद्यानिकी विभाग की ओर से 50 कृषकों को टमाटर और बैंगन के उन्नत किस्म के पौधे वितरित किए गए। इसके अतिरिक्त 17 किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड प्रदान किया गया। 5 ग्राम समूहों को पावर वीडर, 5 संकुल संगठनों को 10 लाख रुपए, 76 समूहों को 11.40 लाख रुपए की रिवोल्विंग फंड, 63 समूहों को 37.80 लाख रुपए की सीआईएफ राशि, 6 समूहों को बैंक लिंकेज के तहत A8 लाख रुपए की राशि भी उनके द्वारा प्रदान की गई।

40 लोगों को मोतियाबिंद के इलाज के लिए विशेष बस द्वारा उपमुख्यमंत्री ने किया रवाना

नियद नेल्ला नार योजना के तहत संवेदनशील ग्रामों को मोतियाबिंद मुक्त बनाने के लिए मिशन दृष्टी के तहत विशेष बस को उपमुख्यमंत्री शर्मा ने हरी झंडी दिखा कर रवाना किया। स्वास्थ्य विभाग के द्वारा संचालित यह बस सिलगेर, कोंडासावली, तिमापुरम जैसे दुर्गम इलाकों के दोनों आँखों से मोतियाबिंद के मरीजों को विशेष बस द्वारा जिला अस्पताल पहुंचा कर उपचार कराया जाएगा। इसके तहत 40 लोगों के दल को आज रवाना किया गया। जहां उनका पूर्ण उपचार किया जाएगा। उपमुख्यमंत्री ने हितग्राहियों से बात कर सभी का हाल जाना और उन्हें पूर्ण उपचार करवाने की सलाह दी।

उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पीएचसी बुरड़ी, गगनपल्ली और किस्टाराम को एनक्यूएएस सर्टिफिकेट प्रदान किया

स्वास्थ्य सेवाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पीएचसी बुरड़ी, गगनपल्ली और किस्टाराम को उपमुख्यमंत्री ने नेशनल क्वालिटी एसस्यूरेंश स्टैण्डर्ड (एनक्यूएएस) सर्टिफिकेट प्रदान किया गया। इस दौरान उपमुख्यमंत्री शर्मा ने स्वास्थ्यकर्मियों के क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था की भी जानकारी ली एवं उन्हें उत्कृष्ट सेवाओं के लिए प्रोत्साहित किया।

कार्यक्रम में जनपद अध्यक्ष कोंटा कुसुमलता कोवासी, नगर पालिका परिषद सुकमा अध्यक्ष हुंगाराम मरकाम, नगर पंचायत दोरनापाल अध्यक्ष राधा नायक, जिला पंचायत सदस्य कोरसा सन्नू, हुंगा राम मरकाम, सरपंच जगरगुंडा नित्या कोसमा, सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास भीम सिंह, एडीजी विवेकानंद सिन्हा, कमिश्नर डोमन सिंह, आईजी पी सुंदरराज, संचालक अश्विनी देवांगन, कलेक्टर अमित कुमार, एसपी किरण चव्हाण, जनप्रतिनिधि धनीराम बारसे, नूपुर वैदिक, विश्वराज चौहान, बलिराम नायक, रंजीत बारठ तथा अन्य जनप्रतिनिधि और ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

किसान की आड़ में अवैध धान व्यापार करने वाले को प्रशासन ने रंगे हाथों पकड़ा

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रायपुर। बस्तर जिले में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के दिशा निर्देशों के अनुसार निरंतर किसानों से धान का उपार्जन किया जा रहा है साथ ही अवैध धान के विक्रय पर भी प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा रहा है। जिसका असर आज देखने को मिला जहां कलेक्टर हरिस एस के निर्देश पर अवैध धान परिवहन के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत बकावंड विकासखण्ड के अनुविभागीय दंडाधिकार मनीष वर्मा ने बड़ी कार्रवाई की। 

सोमवार को धान उपार्जन केंद्र करपावंड के औचक निरीक्षण के दौरान प्रशासन ने व्यापारी और किसान की मिलीभगत से चल रहे एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया, जिसमें किसान के टोकन पर व्यापारी का धान खपाने का प्रयास किया जा रहा था। मामले की जांच में यह खुलासा हुआ कि जिस टोकन पर धान बेचा जा रहा था, वह कृषक उपेन्द्र भारती पिता अर्जुन भारती के नाम पर था।

जमीनी हकीकत यह थी कि कृषक उपेन्द्र भारती आजीविका के सिलसिले में हैदराबाद में निवासरत हैं और उनकी जमीन पर खेती उनके भाई लखीधर भारती द्वारा की जा रही थी। लखीधर ने अपनी उपज के लिए 182 क्विंटल का टोकन कटवाया था, लेकिन खेत में वास्तविक उत्पादन केवल 100 क्विंटल ही हुआ। टोकन में बचे 80 क्विंटल के अंतर का गलत फायदा उठाने के लिए व्यापारी राजेश गुप्ता ने साजिश रची। व्यापारी ने मंडी करपावंड से ही धान अपने दो वाहन क्रमांक सीजी 17 केवाय 7204 और सीजी 17 केजे 9389 में लोड करवाया और ड्राइवरों के हाथ में उपेन्द्र भारती के टोकन की फोटोकॉपी थमाकर उन्हें उपार्जन केंद्र भेज दिया।

मौके पर पहुंची प्रशासन की टीम ने जब कड़ाई से पूछताछ की, तो ड्राइवर और किसान के भाई ने पूरा सच स्वीकार कर लिया। उनकी स्वीकारोक्ति के बाद एसडीएम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए अवैध धान से भरे दोनों वाहनों को जब्त कर लिया है और उन्हें आगामी कार्यवाही हेतु थाना करपावंड के सुपुर्द कर दिया गया है।

बंदूक की गूंज से फलों और फूलों की महक तक का सफर

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जगदलपुर। बस्तर, जो कभी नक्सल की काली छाया और पिछड़ेपन की गहरी खाई में डूबा माना जाता था, आज कृषि के क्षेत्र में एक चमत्कारिक परिवर्तन का साक्षी बन रहा है। छत्तीसगढ़ के इस आदिवासी बहुल इलाके में अब टमाटर और मिर्च की खेती न केवल आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रही है, बल्कि पड़ोसी राज्यों के बाजारों तक अपनी पहुंच बना चुकी है। लेकिन असली आश्चर्य यह है कि अब बस्तर की मिट्टी में ड्रैगन फ्रूट की लालिमा, अमरूद की मिठास, चकोतरा की ताजगी, पपीते का रस और मिर्च की तीखापन लहलहा रही है। वे फल एवं मसाले जो कभी यहां की कल्पना से परे थे।

यह बदलाव कोई संयोग नहीं, बल्कि मेहनत, नवाचार और दूरदर्शिता का परिणाम है। वर्ष 2001-02 में सब्जियों की खेती महज 1,839 हेक्टेयर में सिमटी थी और उत्पादन केवल 18,543 मीट्रिक टन था। आज वही हरियाली 12,340 हेक्टेयर तक फैल चुकी है और 1,90,180 मीट्रिक टन की सुनहरी फसल दे रही है। फलों की बगिया 643 हेक्टेयर से बढ़कर 14,420 हेक्टेयर तक पहुंच गई है, जिसका उत्पादन 4,457 मीट्रिक टन से उछलकर 64,712 मीट्रिक टन हो गया। जहां कभी फूलों की खेती शून्य थी, वहां आज 207 हेक्टेयर में 1,313 मीट्रिक टन सुगंध बिखर रही है। मसाले 335 हेक्टेयर से 1,189 हेक्टेयर तक फैले हैं और 9,327 मीट्रिक टन का स्वाद दे रहे हैं। औषधीय एवं सुगंधित पौधे भी शून्य से शुरू होकर 667 हेक्टेयर में 6,673 मीट्रिक टन तक पहुंचकर स्वास्थ्य और खुशबू का खजाना बन गए हैं।

इस हरित क्रांति की जड़ें आधुनिक तकनीक में गहरी पैठी हैं। जिले में 03 लाख 80 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में शेडनेट हाउस खड़े किए गए हैं, जिनके नीचे 160 से अधिक किसान मौसम की मार से सुरक्षित होकर फसल उगा रहे हैं। करीब 19 हजार वर्गमीटर में पॉली हाउस चमक रहे हैं, जहां उच्च गुणवत्ता वाली सब्जियां और फल पनप रहे हैं। शेडनेट के अंदर ही 56 किसान एक लाख 47 हजार वर्गमीटर में हाईब्रिड बीज तैयार कर रहे हैंकृएक ऐसी आत्मनिर्भरता जो बस्तर को बीज उत्पादन का केंद्र बना रही है। जगदलपुर के आसना में 2018-19 में स्थापित प्लग टाइप वेजिटेबल सीडलिंग यूनिट रोग-मुक्त पौधे न्यूनतम कीमत पर किसानों तक पहुंचा रही है।

सिंचाई के मोर्चे पर भी क्रांति आई है। लगभग 3,536 हेक्टेयर में ड्रिप इरिगेशन सिस्टम बिछाकर पानी की हर बूंद को सोना बनाया जा रहा है। ऑयल पाम योजना के तहत 735 हेक्टेयर में 499 किसानों के खेत हरे-भरे हो चुके हैं। बास्तानार विकासखंड में 58.64 हेक्टेयर में कॉफी की सुगंधित छांव फैल रही है, जबकि 20 हेक्टेयर में ड्रैगन फ्रूट की फसल बाजार में नई चमक ला रही है।

बस्तर की यह यात्रा आंकड़ों से कहीं आगे है। यह उन सैकड़ों किसानों की मुस्कान है, जो कभी बादलों के रहम पर जीते थे और आज तकनीक, प्रशिक्षण और सरकार की योजनाओं के सहारे अपने सपने बुन रहे हैं। माओवादियों की बंदूकें अब खामोश हैं, और खेतों में नई फसलें गुनगुना रही है। बस्तर के लोग अब आजीविका के समुचित साधनों के जरिए जीवन-यापन को बेहतर करने सहित खिलखिला रह रहे हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना का किया शुभारंभ

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रायपुर। बस्तर से नक्सलवाद का अंत शीघ्र होगा और क्षेत्र में शांति स्थापित कर हम विकास के नए आयाम गढ़ेंगे। बस्तर और सरगुजा क्षेत्र के सुदूर अंचलवासी अब विकास से विश्वास तक की यात्रा में सहभागी बनकर विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएंगे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जगदलपुर से मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना का शुभारंभ करते हुए यह बात कही। इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने यात्री बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया और क्षेत्रवासियों को इस विशेष पहल के लिए शुभकामनाएं दीं।

केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ के विकास के लिए डबल इंजन की सरकार प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। लाल आतंक की समाप्ति प्रदेश के सुदूर इलाकों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ेगी। आज प्रारंभ हुई यात्री बस सेवा हमारे नागरिकों के जीवन में नई ऊर्जा का संचार करेगी। उन्होंने कहा कि अब 250 गांवों के लोग अपने निकटवर्ती शासकीय कार्यालयों, स्कूलों और अस्पतालों तक आसानी से पहुंच पाएंगे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने क्षेत्रवासियों को बधाई देते हुए कहा कि हमारी सरकार जनसुविधाओं को बढ़ाने के लिए तेजी से कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना का उद्देश्य यात्री बस सुविधा से वंचित गांवों में बसों का परिचालन सुनिश्चित करना है। इससे लोग कम लागत में अपने गंतव्य तक समय पर पहुंच सकेंगे। रोज़मर्रा के कामकाज, शासकीय कार्यों और अन्य गतिविधियों में भी सहूलियत बढ़ेगी।

उल्लेखनीय है कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में परिवहन सुविधाओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना शुरू की गई है। इस महत्वाकांक्षी योजना का लक्ष्य उन गांवों तक बस सेवा पहुँचाना है, जहाँ अब तक सार्वजनिक परिवहन की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। इस पहल से ग्रामीणों को सुरक्षित, समयबद्ध और सुविधाजनक यात्रा का अवसर मिलेगा, जो उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

योजना के पहले चरण में बस्तर और सरगुजा पर फोकस

योजना के पहले चरण में बस्तर और सरगुजा संभाग को प्राथमिकता दी गई है। इन क्षेत्रों में कुल 34 मार्गों पर 34 बसों का संचालन प्रारंभ होगा। इस पहल से 11 जिलों के 250 नए गांव बस सेवा से जुड़ेंगे। यह प्रयास विशेष रूप से उन ग्रामीण क्षेत्रों के लिए वरदान साबित होगा, जहां सड़क संपर्क सीमित है और लोग जिला मुख्यालय या अन्य महत्वपूर्ण स्थानों तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी पैदल तय करते हैं।

ग्राम पंचायत से जिला मुख्यालय तक कनेक्टिविटी

मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्राम पंचायत से लेकर जिला मुख्यालय तक निर्बाध बस कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना है। इससे ग्रामीणों को स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और बाजार जैसी आवश्यक सेवाओं तक पहुंचने में आसानी होगी। योजना के तहत संचालित बसें समयबद्ध और सुरक्षित यात्रा का भरोसा देंगी, जिससे ग्रामीणों का समय और संसाधन दोनों की बचत होगी।

योजना की दीर्घकालिक सफलता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने बस संचालकों को वायबिलिटी गैप फंडिंग प्रदान करने का प्रावधान किया है। यह वित्तीय सहयोग संचालकों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाएगा, ताकि वे इन दूरस्थ क्षेत्रों में निरंतर सेवा दे सकें। यह कदम न केवल परिवहन सुविधाओं को मजबूत करेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन में भी योगदान देगा।

250 गांवों को पहली बार बस सेवा से जोड़ने की उपलब्धि

इस योजना के तहत लगभग 250 गांव पहली बार बस सेवा से जुड़ रहे हैं। यह ग्रामीण छत्तीसगढ़ के लिए एक ऐतिहासिक कदम है, जो सामाजिक और आर्थिक विकास को गति देगा। ग्रामीणों को अब अपनी आवश्यकताओं के लिए लंबी दूरी पैदल तय करने या निजी वाहनों पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं होगी।

समावेशी विकास की दिशा में कदम

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस योजना की शुरुआत पर कहा कि हमारा लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ का कोई भी गांव विकास की मुख्यधारा से न छूटे। मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना ग्रामीणों के जीवन को आसान बनाने और उन्हें शहरों से जोड़ने का प्रयास है। यह योजना न केवल परिवहन की सुविधा देगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेगी। यह योजना न केवल परिवहन की दृष्टि से, बल्कि सामाजिक और आर्थिक समानता की दिशा में भी एक मील का पत्थर साबित होगी।


बड़े सार्वजनिक निवेशों के साथ-साथ लगभग ₹1,000 करोड़ का निजी निवेश भी सेवा क्षेत्र और एमएसएमई: लगभग ₹52,000 करोड़ की प्रतिबद्धताओं के साथ बस्तर औद्योगिक और सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन का बन रहा नया केंद्र

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रायपुर। बस्तर आज विकास की स्वर्णिम सुबह का प्रतीक बनकर उभर रहा है। जो क्षेत्र कभी उपेक्षा और अभाव की पहचान से जूझता था, वह अब निवेश, अवसर और रोजगार का नया केंद्र बन रहा है। यहाँ हर क्षेत्र,उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और पर्यटन में समावेशी विकास की गूंज सुनाई दे रही है। यह बदलाव न केवल बस्तर की तस्वीर बदल रहा है, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के उज्ज्वल भविष्य की गाथा लिख रहा है।

रेल–सड़क परियोजनाओं से आएगा बड़ा बदलाव

बस्तर के विकास को गति देने के लिए सरकार ने ₹5,200 करोड़ की रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें रावघाट–जगदलपुर नई रेल लाइन (₹3,513.11 करोड़) और केके रेल लाइन (कोत्तवलसा–किरंदुल) के दोहरीकरण जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं। ये परियोजनाएँ न केवल बस्तर में यात्रा, पर्यटन और व्यापार को नई दिशा देंगी, बल्कि युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोज़गार और औद्योगिक अवसर भी सृजित करेंगी। बेहतर रेल कनेक्टिविटी से नक्सलवाद उन्मूलन के प्रयास और मजबूत होंगे तथा बस्तर विश्वसनीय निवेश और समावेशी विकास का केंद्र बनकर उभरेगा।

इसके साथ ही, बस्तर में ₹2300 करोड़ की सड़क विकास परियोजनाएँ भी स्वीकृत की गई हैं। कभी नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में जाना जाने वाला यह संभाग अब छत्तीसगढ़ के सबसे विकसित और समृद्ध क्षेत्रों में से एक बनने की राह पर है। राज्य और केंद्र सरकार मिलकर धमतरी–कांकेर–कोंडागांव–जगदलपुर मार्ग का एक वैकल्पिक रास्ता बना रही हैं, जो कांकेर, अंतागढ़, नारायणपुर के अबूझमाड़ होते हुए दंतेवाड़ा के बारसूर और आगे बीजापुर तक पहुँचेगा। इन परियोजनाओं से बस्तर के सभी जिलों तक पहुँचने के लिए कई रास्ते उपलब्ध होंगे, जिससे दूरियाँ कम होंगी और योजनाओं व विकास कार्यों की पहुँच और अधिक प्रभावी होगी। यह आधुनिक सड़क नेटवर्क न केवल आवागमन की सुविधा बढ़ा रहा है, बल्कि सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक प्रगति के नए द्वार भी खोल रहा है। इस प्रकार, बस्तर अब संघर्ष की भूमि से आगे बढ़कर संपर्क, समृद्धि और सुरक्षा का प्रतीक बन रहा है।

बड़े सार्वजनिक निवेश से बदलता बस्तर

बस्तर में एनएमडीसी द्वारा ₹43,000 करोड़ तथा सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल हेतु ₹200 करोड़ का निवेश किया जा रहा है। ये निवेश बस्तर की आधारभूत संरचना को मजबूती प्रदान कर रहे हैं।

निजी निवेश और समावेशी विकास

बड़े सार्वजनिक निवेशों के साथ-साथ लगभग ₹1,000 करोड़ का निजी निवेश भी सेवा क्षेत्र और एमएसएमई में किया जा रहा है। यह विविधीकृत विकास रोजगार के अवसरों को बढ़ाएगा और समावेशी व सतत विकास को सुनिश्चित करेगा। कुल मिलाकर लगभग ₹52,000 करोड़ की प्रतिबद्धताओं के साथ बस्तर औद्योगिक और सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन का नया केंद्र बन रहा है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांति: बस्तर को मिला पहला 350 बेड का निजी अस्पताल

जगदलपुर में पहली बार 350 बेड का मल्टी-स्पेशियलिटी निजी अस्पताल और मेडिकल कॉलेज स्थापित होने जा रहा है। इसके लिए रायपुर स्टोन क्लिनिक प्रा. लि. को “इनविटेशन टू इन्वेस्ट” पत्र जारी किया गया है। 550 करोड़ रुपये के निवेश और 200 रोजगार अवसरों के साथ यह परियोजना बस्तर की स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊँचाई देगी और इसे मेडिकल शिक्षा का केंद्र बनाएगी।

इसके अतिरिक्त, जगदलपुर में 33 करोड़ रुपये के निवेश से एक और मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल तथा नवभारत इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज द्वारा 85 करोड़ रुपये के निवेश से 200 बेड का मल्टी-सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल स्थापित किया जाएगा। ये पहल न केवल आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करेंगी, बल्कि सैकड़ों युवाओं को रोजगार भी प्रदान करेंगी।

खाद्य प्रसंस्करण में नई शुरुआत

बीजापुर, नारायणपुर, बस्तर और कोंडागांव में आधुनिक राइस मिल और फूड प्रोसेसिंग इकाइयाँ स्थापित की जा रही हैं, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलेगा और स्थानीय युवाओं के लिए अनेक रोजगार अवसर सृजित होंगे।

एग्रीटेक और वैल्यू एडिशन

नारायणपुर जिले में पार्श्वा एग्रीटेक प्रतिवर्ष 2,400 टन परबॉयल्ड चावल का उत्पादन करेगी। 8 करोड़ रुपये के निवेश और नए रोजगार के साथ यह परियोजना बस्तर की कृषि उपज को वैल्यू एडिशन का नया आधार देगी।

खाद्य प्रसंस्करण में नई शुरुआतबी

जापुर, नारायणपुर, बस्तर और कोंडागांव में आधुनिक राइस मिल और फूड प्रोसेसिंग इकाइयाँ स्थापित की जा रही हैं, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलेगा और स्थानीय युवाओं के लिए अनेक रोजगार अवसर सृजित होंगे।

वेलनेस और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में प्रगति

जगदलपुर में नमन् क्लब एंड वेलनेस सेंटर 7.65 करोड़ रुपये के निवेश और 30 रोजगार अवसरों के साथ स्थापित हो रहा है। वहीं पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में एएस बिल्डर्स एंड ट्रेडर्स तथा सेलिब्रेशन रिजॉर्ट्स एंड होटल्स बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करेंगे।

डेयरी और कृषि-आधारित उद्योग

बस्तर डेयरी फार्म प्रा. लि. 5.62 करोड़ रुपये का निवेश कर दुग्ध उत्पादन और प्रसंस्करण को गति देगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और किसानों की आय में वृद्धि होगी।

निर्माण सामग्री और औद्योगिक विकास

पीएस ब्रिक्स और महावीर माइन्स एंड मिनरल्स जैसी कंपनियाँ ईंट और स्टोन क्रशर क्षेत्र में प्रवेश कर रही हैं, जिससे निर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और बुनियादी ढांचा सशक्त होगा।

वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक्स और कोल्ड स्टोरेज

कांकेर, भानुप्रतापपुर और कोंडागांव में नए वेयरहाउसिंग केंद्र स्थापित हो रहे हैं। दंतेश्वरी कोल्ड स्टोरेज जैसी परियोजनाएँ किसानों की उपज को लंबे समय तक सुरक्षित रखने, बर्बादी घटाने और लाभ बढ़ाने में मदद करेंगी।

वुड, फर्नीचर और कृषि मशीनरी

माँ दंतेश्वरी वेनियर्स और अली फर्नीचर जैसी इकाइयाँ बस्तर की पारंपरिक कारीगरी को आधुनिक बाजारों से जोड़ेंगी।

आधुनिक उद्योगों की एंट्री

शंकरा लेटेक्स इंडस्ट्रीज 40 करोड़ रुपये के निवेश से सर्जिकल ग्लव्स निर्माण इकाई स्थापित करेगी, जिससे 150 रोजगार अवसर सृजित होंगे। यह भारत की स्वास्थ्य आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

पीएमएफएमई योजना के तहत सहयोग

पीएमएफएमई योजना अंतर्गत कांकेर, बस्तर और कोंडागांव जिलों के हितग्राहियों को वित्तीय सहायता प्रदान की गई। कांकेर जिले के श्री मुकेश खटवानी (मेसर्स रूद्रा फूड्स एंड बेवरेजेस) को ₹35 लाख, बस्तर जिले की श्रीमती योगिता वानखेडे (मेसर्स माँ गृह उद्योग) को ₹5 लाख तथा कोंडागांव जिले की श्रीमती रागिनी जायसवाल (मेसर्स फिटनेस फ्यूल) को ₹5 लाख एवं ₹9.50 लाख की स्वीकृति मिली। कुल मिलाकर योजना के अंतर्गत ₹49.50 लाख से अधिक की सहायता दी गई।

पीएमईजीपी योजना से सशक्तिकरण

पीएमईजीपी योजना अंतर्गत कांकेर जिले के श्री हरीश कोमरा (रेडीमेड गारमेंट्स – ₹9 लाख), सुरेश बघेल (हार्वेस्टर – ₹20 लाख), बस्तर जिले के श्री चंद्रशेखर दास (मेसर्स दीक्षा टेंट हाउस – ₹8.80 लाख) और श्री रेवेन्द्र राणा (मेसर्स राणा मोबाईल रिपेयरिंग – ₹7.50 लाख) को सहायता दी गई। वहीं कोंडागांव जिले के  सुरेश कुमार देवांगन (मेसर्स किसान मितान एग्रो) को ट्रैक्टर-ट्रॉली निर्माण हेतु ₹50 लाख का अनुदान स्वीकृत हुआ। इस प्रकार योजना के अंतर्गत ₹94.50 लाख की राशि वितरित की गई।

औद्योगिक नीति से नए अवसर

राज्य सरकार की औद्योगिक नीति के तहत स्थायी पूंजी निवेश हेतु भी अनुदान दिया गया। कांकेर जिले की श्रीमती साधना शर्मा (मेसर्स महावीर वेयरहाउस) को वेयरहाउस स्थापना के लिए ₹90 लाख की स्वीकृति मिली। इन पहलों से बस्तर संभाग में उद्यमिता और औद्योगिक विकास को गति मिल रही है और स्थानीय युवाओं व महिलाओं को रोजगार एवं आत्मनिर्भरता के अवसर मिल रहे हैं।

कुल मिलाकर बस्तर में अब तक ₹967 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव आए हैं, जिससे 2100 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। स्वास्थ्य, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, पर्यटन, निर्माण और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में यह निवेश लहर बस्तर को एक सच्चे “निवेश गंतव्य” के रूप में स्थापित कर रही है।

बस्तर में औद्योगिक विस्तार के अवसर

बस्तर में औद्योगिक विकास की अपार संभावनाएँ हैं। स्टील प्लांट के समीप समर्पित सीमेंट प्लांट, मोटर रिपेयर एवं वाइंडिंग, मशीन एवं फैब्रिकेशन शॉप्स, पंप रिपेयर जैसी सहायक इकाइयों को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही लोहा और इस्पात उद्योग से जुड़े पिग आयरन, टीएमटी बार, एंगल/चैनल, वायर रॉड्स और ब्राइट बार के उत्पादन की भी बड़ी संभावनाएँ हैं।

मुख्यमंत्री के 20 माह में 100+ दौरे: विश्वास और विकास का संकल्प

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने पिछले 20 महीनों में बस्तर के 100 से अधिक स्थानों का दौरा कर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की नई उम्मीद और विश्वास का संचार किया है। “नियद नेल्ला नार” योजना के तहत सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार सुविधाएँ दूरस्थ इलाकों तक पहुँची हैं।

सुरक्षा शिविरों के 10 किमी दायरे में अब तक 81,090 आधार कार्ड, 49,239 आयुष्मान कार्ड, 5,885 किसान सम्मान निधि लाभ, 2,355 उज्ज्वला कनेक्शन और 98,319 राशन कार्ड जारी किए गए। 21 सड़कों, 635 मोबाइल टॉवर, 18 उचित मूल्य दुकानों और 9 उप-स्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण हुआ। अब तक 54 सुरक्षा शिविर स्थापित हुए हैं। पहली बार 28 गाँवों (जैसे जगारगुंडा, पामेड) में बैंक खुले हैं और 50 से अधिक बंद स्कूल फिर से शुरू हुए हैं।

नई पुनर्वास नीति: आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए जीवन की नई राह

नई पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पित नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने का अवसर दिया जा रहा है। इसमें तीन वर्षों तक ₹10,000 मासिक सहायता, शहरी क्षेत्रों में 4 डिसमिल प्लॉट या ग्रामीण क्षेत्रों में एक हेक्टेयर जमीन दी जाएगी। साथ ही व्यावसायिक प्रशिक्षण, पूर्ण इनामी राशि और सामूहिक आत्मसमर्पण (80% से अधिक) पर दुगुना इनाम तथा नक्सल-मुक्त गाँवों के लिए ₹1 करोड़ तक की विकास योजनाएँ स्वीकृत होंगी। प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत 15,000 घर आत्मसमर्पित नक्सलियों और हिंसा प्रभावित परिवारों को मंजूर किए गए हैं।

स्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण हुआ। अब तक 54 सुरक्षा शिविर स्थापित हुए हैं। पहली बार 28 गाँवों (जैसे जगारगुंडा, पामेड) में बैंक खुले हैं और 50 से अधिक बंद स्कूल फिर से शुरू हुए हैं।

 मोदी की गारंटी: तेंदूपत्ता संग्राहकों को अधिक दर

राज्य सरकार ने तेंदूपत्ता खरीदी दर को ₹4,000 से बढ़ाकर ₹5,500 प्रति मानक बोरा कर दिया है। इससे बस्तर के 52 लाख संग्राहक (13 लाख परिवार) सीधे लाभान्वित हो रहे हैं।

कौशल विकास से युवाओं को अवसर

मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत 90,273 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया, जिनमें से 39,137 को रोजगार मिला। वर्ष 2024–25 में ही आईटी, ऑटोमोबाइल, कंस्ट्रक्शन और सौर ऊर्जा क्षेत्रों में 3,296 युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

नक्सल उन्मूलन में बड़ी सफलता

दिसंबर 2023 से अब तक सुरक्षा बलों की आक्रामक रणनीति के परिणामस्वरूप 453 नक्सली मारे गए, 1,611 गिरफ्तार हुए और 1,636 ने आत्मसमर्पण किया। बीते 20 महीनों में 65 से अधिक नए सुरक्षा शिविर स्थापित हुए हैं। सड़क, पुल और मोबाइल नेटवर्क जैसे ढाँचागत विकास ने भी इस प्रक्रिया को मजबूती दी है।

सरकार का लक्ष्य मार्च 2026 तक नक्सल उन्मूलन सुनिश्चित करना है, जिसके साथ-साथ सतत विकास और शांति का मार्ग प्रशस्त होगा।

औद्योगिक नीति 2024–30: बदलाव का सूत्रधार

छत्तीसगढ़ औद्योगिक नीति 2024–30 ने बस्तर ही नहीं बल्कि पूरे राज्य में निवेश, नवाचार और रोजगार के नए द्वार खोले हैं। “बस्तर इन्वेस्टर कनेक्ट” संतुलित क्षेत्रीय विकास के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

यह नीति रोजगार सृजन, उद्यमिता संवर्धन और सामुदायिक सशक्तिकरण सुनिश्चित करती है, साथ ही बस्तर की जनजातीय धरोहर और सांस्कृतिक पहचान को भी संरक्षित रखती है। 1,000 करोड़ रुपये से अधिक निवेश या 1,000 से अधिक रोजगार देने वाली परियोजनाओं को विशेष प्रोत्साहन दिए जाएंगे। फार्मा, एग्रो-प्रोसेसिंग, टेक्सटाइल्स, आईटी व डिजिटल टेक, एडवांस इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस-डिफेंस और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स को प्राथमिकता दी गई है।

पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया गया है, जिसमें होटलों, ईको-टूरिज्म, वेलनेस सेंटर, एडवेंचर स्पोर्ट्स और खेल सुविधाओं पर 45% तक सब्सिडी मिलेगी। बस्तर के 88% ब्लॉक ग्रुप-3 श्रेणी में आते हैं, जिससे निवेशकों को अधिकतम लाभ मिलेगा।समावेशिता को नीति का केंद्र बनाया गया है: एससी/एसटी उद्यमियों और नक्सल प्रभावित परिवारों को अतिरिक्त 10% सब्सिडी दी जाएगी। आत्मसमर्पित नक्सलियों को रोजगार देने वाली इकाइयों को 40% वेतन सब्सिडी (5 लाख रुपये प्रतिवर्ष तक, पाँच वर्षों के लिए) प्रदान की जाएगी।


मुख्यमंत्री साय को बस्तर दशहरा कार्यक्रम में शामिल होने का मिला न्यौता, देश-विदेश में है 75 दिनों तक मनाए जाने वाले "बस्तर दशहरा" की विशेष ख्याति

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में बस्तर सांसद महेश कश्यप के नेतृत्व में बस्तर दशहरा समिति, जगदलपुर के प्रतिनिधि मंडल ने सौजन्य भेंट की। प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री को विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा पर्व 2025 में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया।

प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री को बताया कि 75 दिनों तक चलने वाला यह पर्व हरेली अमावस्या से प्रारंभ होकर आश्विन शुक्ल पक्ष के 13वें दिन तक मनाया जाता है। इस वर्ष इसकी शुरुआत 24 जुलाई को पाटजात्रा पूजा विधान के साथ हुई है। आगामी प्रमुख आयोजनों में 21 सितंबर को काछनगादी पूजा, 29 सितंबर को बेल पूजा तथा 4 अक्टूबर को मुरिया दरबार का आयोजन शामिल है। मुख्यमंत्री साय ने बस्तर दशहरा के आमंत्रण के लिए प्रतिनिधि मंडल का आभार व्यक्त किया और आयोजन की सफलता के लिए शुभकामनाएँ दीं।


छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव 2025 : नियमित विमान सेवा से बड़े शहरों से सीधे जुड़ा बस्तर संभाग

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रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के 25 वर्षों की विकास यात्रा में आवागमन की सुविधाओं का विस्तार महत्वपूर्ण उपलब्धि रही है। जहां राजधानी रायपुर पहले से ही देश के प्रमुख शहरों से वायु मार्ग से जुड़ा था, वहीं अब बस्तर, बिलासपुर और अंबिकापुर जैसे शहर भी विमान सेवाओं से लाभान्वित हो रहे हैं। विशेषकर बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर में एयरपोर्ट और नियमित यात्री उड़ानों की सुविधा से क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं खुली हैं।

जगदलपुर स्थित माँ दंतेश्वरी हवाई अड्डा का ऐतिहासिक महत्व है। इसका निर्माण वर्ष 1939 में ब्रिटिश शासनकाल में किया गया था और इसे उस समय ‘‘जहाज भाटा’’ नाम से जाना जाता था। वर्ष 2017 में केंद्र सरकार की उड़ान योजना के अंतर्गत भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण द्वारा हवाई अड्डे के उन्नयन का कार्य प्रारंभ किया गया। वर्ष 2019 में इसे 3-सी श्रेणी में अपग्रेड किया गया, जिससे एटीआर-72 जैसे विमानों का संचालन संभव हुआ। वर्ष 2020 में छत्तीसगढ़ सरकार ने हवाई अड्डे का नामकरण बस्तर की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी के नाम पर किया।

सितंबर 2020 में जगदलपुर से रायपुर और हैदराबाद के लिए एलायंस एयर द्वारा नियमित व्यावसायिक उड़ानें शुरू की गईं। इसके बाद दिल्ली, जबलपुर और बिलासपुर के लिए भी उड़ान सेवाएँ प्रारंभ हुईं। मार्च 2024 से इंडिगो एयरलाइंस ने जगदलपुर को हैदराबाद और रायपुर से जोड़ते हुए दैनिक सेवा शुरू की। पैरामिलिट्री बलों के लिए विशेष दिल्ली सेवा का संचालन भी किया जा रहा है।

वर्तमान में जगदलपुर एयरपोर्ट से अब तक लगभग तीन लाख यात्री हवाई यात्रा कर चुके हैं। इससे न केवल स्थानीय नागरिकों को सुविधा मिली है, बल्कि व्यापार, पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। गंभीर मरीजों को बड़े शहरों तक शीघ्र उपचार हेतु पहुंचाना संभव हो पाया है। विद्यार्थी और युवा रोजगार एवं उच्च शिक्षा के लिए बड़े शहरों तक आसानी से पहुँच रहे हैं।

बस्तर के हस्तशिल्प, वनोपज और हर्बल उत्पाद अब देश के बड़े बाजारों तक सरलता से पहुँच रहे हैं। वहीं चित्रकूट और तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान और ऐतिहासिक बस्तर दशहरा जैसे पर्यटन स्थलों तक देश-विदेश से पर्यटकों की पहुँच भी सहज हुई है।

जगदलपुर एयरपोर्ट का संचालन बस्तर अंचल के लिए विकास का नया द्वार सिद्ध हो रहा है। इससे आंतरिक क्षेत्रों तक आधुनिक सुविधाएँ पहुँच रही हैं और बस्तर को राष्ट्रीय परिदृश्य पर नई पहचान मिल रही है। आने वाले समय में यह एयरपोर्ट क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक प्रगति का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।


छत्तीसगढ़ की जनजातियों पर शोध और अनुसंधान की राह खुली, गुरू घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय और टी.आर.के.सी. के बीच हुआ एमओयू

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रायपुर-  छत्तीसगढ़ के बस्तर और सरगुजा क्षेत्र में निवास करने वाली जनजातियों पर विशेष शोध और अनुसंधान की राह खुल गई है। राज्य की जनजातियों की गौरवशाली परंपरा, उनकी संस्कृति और उनके आर्थिक-समाजिक ताने-बाने को लेकर अब विद्यार्थी उच्च स्तरीय शोध कर पाएंगे। राज्य के गुरू घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय और ट्रायबल रिसर्च एण्ड नॉलेज सेंटर नई दिल्ली के बीच इसके लिए महत्वपूर्ण एमओयू हुआ है। टीआरकेसी विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में भारतीय जनजातियों के बारे में शोध कार्याें के लिए महत्वपूर्ण संस्था है। विश्वविद्यालय के ओर से इस एमओयू पर कुलसचिव प्रो. अभय एस रणदिवे और टीआरकेसी की ओर से छतीसगढ़ प्रभारी राजीव शर्मा ने हस्ताक्षर किए। इस एमओयू के तहत् संस्था द्वारा अगले तीन वर्षों तक छत्तीसगढ़ में निवासरत जनजातियों पर शोध कार्य किए जाएंगे। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कूलपति प्रो. आलोक कुमार चक्रवाल, सौराष्ट्र विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. नीलांबरी दवे, वनवासी कल्याण आश्रम के अखिल भारतीय युवा कार्यप्रमुख वैभव सुरंगे सहित अनेक प्राध्यापक, शोधार्थी, विद्यार्थी और गणमान्य नागरिक भी मौजूद थे।

एमओयू के बारे में टीआरकेसी के राज्य प्रभारी राजीव शर्मा ने बताया कि टीआरकेसी देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में जनजातीय विषयों पर शोध कार्यों को बढ़ावा देने की महत्वपूर्ण संस्था है। गुरू घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर से एमओयू के बाद छत्तीसगढ़ की विभिन्न जनजातीयों पर रिसर्च तेज होगी। उन्होंने बताया कि राज्य की पुरातन और गौरवशाली जनजातीय के कई अनछुए पहलुओं और उनकी सभ्यता और संस्कृति के बारे में इन शोधों से आम नागरिकों को भी महत्वपूर्ण जानकारियां मिलेंगी। इन शोध कार्यों से सरगुजा और बस्तर के क्षेत्रों की विभिन्न जनजातियों के आदिकालीन सामाजिक संगठन, उनके अर्थशास्त्र, सुशासन, ग्रामीण उद्यमिता, सतत् विकास और नवाचार के बारे में भी लोगों को जानकारियां मिलेंगी। शर्मा ने बताया कि इससे खुद जनजातीय युवा अपने गौरवशाली अतीत और उसकी व्यवस्थाओं के बारे में जान पाएंगे। 

विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने बताया कि संपादित एमओयू के बाद जनजातीयों पर संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएं शुरू होंगी। क्षेत्राधारित केस स्टडी और युवाओं, प्रशासकों, जनजातीय हितधारकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, नेतृत्व विकास कार्यशालाएं और प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम भी आयोजित होंगे। युवाओं के लिए सामाजिक प्रभाव आधारित र्स्टाटअप और नवाचारों पर मार्गदर्शन तथा परामर्श सत्र रखे जाएंगे। विशेषज्ञों और प्राघ्यापकों की भागीदारी से जनजातीय वर्ग में जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे। जनजातीय पर आधारित संगोष्ठीयों, व्याख्यानों, सम्मेलनों, गोलमेज चर्चाओं तथा सार्वजनिक संवादों का भी आयोजन होगा। उन्होंने बताया कि रिसर्च वर्क से मिले परिणामों को पुस्तकालयों, अनुसंधान प्रकाशनों तथा डेटाबेस के द्वारा विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों पर उपलब्ध कराया जाएगा। इससे राज्य के जनजातीय समुदाय के बारे में अधिक से अधिक जानकारी लोगों तक पहुंच सकेगी। स्वयं जनजातीय समुदायों को भी अपने गौरवशाली अतीत के बारे में पता चलेगा और भविष्य में यह रिसर्च वर्क जनजातीयों के विषयों को शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में शामिल करने का जरिया बनेंगे।


आज़ादी के बाद पहली बार बस्तर के 29 गांवों में शान से लहराया तिरंगा

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रायपुर- आज़ादी के 78 साल बाद बस्तर के उन गांवों में तिरंगा शान से लहराया, जहाँ अब तक नक्सलियों का लाल झंडा ही ताक़त और खौफ का प्रतीक माना जाता था। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा जिलों के 29 गांवों में पहली बार राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। दशकों से बंदूकों की नली और डर के साए में जी रहे इन गांवों में तिरंगे का फहराया जाना केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि बदलते बस्तर की ऐतिहासिक तस्वीर है। यह तस्वीर दर्शाती है कि सुरक्षा बलों के त्याग, सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति और ग्रामीणों की उम्मीद ने मिलकर नक्सलवाद के गढ़ माने जाने वाले इलाकों में शांति और विकास का मार्ग प्रशस्त किया है। इन गांवों में तिरंगा फहराना उस ऐतिहासिक बदलाव का प्रमाण है, जो सुरक्षा बलों के साहस, राज्य और केंद्र सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति तथा सबसे बढ़कर ग्रामीणों के धैर्य और विश्वास से संभव हुआ है। बीजापुर जिले के कोंडापल्ली, जीड़पल्ली, वाटेवागु, कर्रेगुट्टा, पिड़िया, पुजारीकांकेर और भीमारम जैसे गांव; नारायणपुर जिले के गारपा, कच्चापाल, बेड़माकोट्टी, कांदूलनार, रायनार सहित कई गांव; तथा सुकमा जिले के गोमगुड़ा, गोल्लाकुंडा, नुलकातोंग और उसकावाया जैसे नक्सल प्रभावित इलाकों में आज़ादी के बाद पहली बार तिरंगे का फहरना एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह उपलब्धि हमारी सुशासन की सरकार के उस संकल्प का परिणाम है, जिसमें नक्सल प्रभावित इलाकों में शांति और विकास की नई धारा प्रवाहित करने का लक्ष्य रखा गया है। “बस्तर अब भय और हिंसा से बाहर निकलकर प्रगति, समृद्धि और विश्वास की ओर बढ़ रहा है। सरकार का वचन है कि हर गांव तक विकास की रोशनी पहुँचेगी और कोई भी नागरिक विकास की रोशनी से अछूता नहीं रहेगा,” उन्होंने कहा।

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इसे सुरक्षा बलों की मेहनत और स्थानीय समुदायों के धैर्य का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि “आज जिन गांवों में तिरंगा फहराया गया, वहाँ दशकों तक लाल झंडे का खौफ छाया रहा। यह  बस्तर में नई सुबह का प्रतीक है। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर बस्तर के विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों की नई रणनीति, शिविरों की स्थापना और लगातार दबाव के चलते नक्सली कैडर कमजोर हुआ है। आत्मसमर्पण नीतियों ने बड़ी संख्या में उग्रवादियों को मुख्यधारा में लौटाया है। वहीं सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि केवल सुरक्षा उपाय ही नहीं, बल्कि विकास ही स्थायी समाधान है। इसी कारण नियद नेल्ला नार योजना सहित सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा की सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना, मनरेगा और अन्य योजनाओं से ग्रामीणों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने लगा है। ग्रामीणों का भरोसा जीतना इस ऐतिहासिक बदलाव का सबसे बड़ा आधार रहा है। स्वास्थ्य शिविर, शिक्षा और रोजगार के नए अवसर तथा प्रशासन का संवेदनशील रवैया ग्रामीणों को यह संदेश दे रहा है कि सरकार उनके साथ खड़ी है।

बस्तर की यह नई तस्वीर पूरे देश को यह संदेश देती है कि जब इच्छाशक्ति, रणनीति और जनभागीदारी एक साथ आते हैं, तो कोई भी चुनौती असंभव नहीं रहती। कर्रेगुट्टा सहित बस्तर के इन 29 गांवों में फहराता तिरंगा उस नई सुबह का प्रतीक है, जो हिंसा की अंधेरी रात को पीछे छोड़ते हुए शांति, विकास और आत्मविश्वास से भरे भविष्य की ओर अग्रसर है।


स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया बस्तर में नए सबेरे का स्वागत — अब आतंक नहीं, खेलों से पहचान

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रायपुर- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ के बस्तर का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एक समय था जब बस्तर का नाम सुनते ही नक्सलवाद और हिंसा की याद आती थी, लेकिन आज यह तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गर्व के साथ कहा कि आज बस्तर के नौजवान बंदूक़ पकड़ने की जगह खेलों के मैदान में उतर रहे हैं। बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा और उत्साह का जीवंत प्रतीक बन चुके हैं। उन्होंने इस ऐतिहासिक बदलाव को सुरक्षा, विकास और जनसहभागिता के संयुक्त प्रयासों का परिणाम बताया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि कभी देश के अनेक हिस्सों को नक्सलवाद की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ता था। हिंसा और भय के माहौल ने दशकों तक विकास की गति को जकड़ रखा था, जिससे प्रगति के रास्ते थम से गए थे। उन्होंने कहा कि अब यह स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है — नक्सलवाद आज देश में केवल कुछ ही जिलों तक सीमित रह गया है। प्रधानमंत्री ने कहा  कि पिछले 11 वर्षों में नक्सलवाद 125 से अधिक जिलों से घटकर मात्र 20 जिलों तक सीमित हो गया है। उन्होंने कहा कि आज बस्तर में खेलकूद, शिक्षा, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर लगातार बढ़ रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्वास व्यक्त किया कि बस्तर की यह नई पहचान आने वाली पीढ़ियों के लिए गर्व और प्रेरणा का स्रोत बनेगी, और यह क्षेत्र अब शांति, प्रगति और गौरव की राह पर निरंतर आगे बढ़ता रहेगा।


बस्तर के विकास में एक और क्रांतिकारी कदम, दल्लीराजहरा–रावघाट रेल परियोजना दिसंबर तक होगी पूरी

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रायपुर- छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल को रेलवे से सशक्त कनेक्टिविटी देने वाली दल्लीराजहरा–रावघाट रेल परियोजना का कार्य तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। 95 किलोमीटर लंबी इस परियोजना के तारोकी से रावघाट खंड की लंबाई 77.5 किलोमीटर है, जिसमें यूटिलिटी शिफ्टिंग का कार्य शत-प्रतिशत पूर्ण हो चुका है। बड़े और छोटे पुलों के साथ-साथ ट्रैक बिछाने का काम अब अंतिम चरण में है, जिससे इस महत्वाकांक्षी परियोजना के दिसंबर 2025 तक पूर्ण होने की दिशा में ठोस प्रगति हुई है।

इस रेल परियोजना के पूरा होने से बस्तर क्षेत्र पहली बार राज्य की राजधानी से सीधे रेलवे द्वारा जुड़ जाएगा। इससे बस्तर आने-जाने वाले यात्रियों के लिए सुविधाएं बढ़ेंगी और खनिज परिवहन की दिशा में नई गति मिलेगी। बस्तर के सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य में यह कनेक्टिविटी एक बड़ा बदलाव लाएगी और स्थानीय लोगों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने में सहायक होगी।

यह रेलवे लाइन रावघाट लौह अयस्क खदानों और सेल/भिलाई इस्पात संयंत्र के बीच सीधी कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। वर्तमान में दल्लीराजहरा की खदानों से लौह अयस्क की उपलब्धता घट रही है, ऐसे में यह परियोजना न केवल औद्योगिक जरूरतों को पूरा करेगी बल्कि क्षेत्र के आर्थिक विकास की रीढ़ साबित होगी। रेल विकास निगम लिमिटेड के अनुसार, 17.5 किलोमीटर भूमि अधिग्रहण कार्य संपन्न हो चुका है। 21.94 लाख घन मीटर मिट्टी कार्य में से अधिकांश पूरा हो चुका है। तीन में से दो बड़े पुल तैयार हो गए हैं, जबकि 61 में से 55 छोटे-मोटे पुलों का निर्माण पूर्ण हो चुका है। बैलेस्ट प्रोक्योरमेंट और भवन निर्माण कार्य भी अगस्त–सितंबर 2025 तक पूर्ण होने की संभावना है।

उल्लेखनीय है कि कुल 95 किलोमीटर लंबे इस रेलमार्ग में 16 प्रमुख पुल, 19 रोड ओवर ब्रिज, 45 रोड अंडर ब्रिज और 176 छोटे पुलों का निर्माण शामिल है। केवल 17.5 किलोमीटर लंबे तारोकी–रावघाट खंड में ही 3 प्रमुख पुल, 5 रोड ओवर ब्रिज, 7 रोड अंडर ब्रिज और 49 छोटे पुल बनाए जा रहे हैं। इन सभी कार्यों में तकनीकी सटीकता और सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है, ताकि यह परियोजना लंबे समय तक टिकाऊ और सुरक्षित रहे।

वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित इस क्षेत्र में निर्माण कार्य एक बड़ी चुनौती रहा है। परियोजना को बाधित करने के लिए नक्सलियों द्वारा किए गए 12 हमलों में अब तक 4 मजदूरों की मौत और 2 सुरक्षाकर्मियों की शहादत हो चुकी है। इसके अलावा निर्माण कार्य में प्रयुक्त उपकरणों और मशीनों में आगजनी की घटनाएं भी हुई हैं। इसके बावजूद, एसएसबी सुरक्षा कवच मिलने के बाद परियोजना में उल्लेखनीय प्रगति हुई। परियोजना के पूरा होने के बाद बस्तर क्षेत्र में खनिज परिवहन, रोजगार, स्थानीय व्यापार और यात्री सुविधाओं में अभूतपूर्व वृद्धि होगी। यह रेलवे लाइन खनिज परिवहन को नई दिशा देने के साथ-साथ पूरे क्षेत्र को मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य करेगी। इससे क्षेत्र में निवेश के अवसर बढ़ेंगे और बुनियादी ढांचे का विस्तार होगा।

नवंबर 2025 तक तारोकी–रावघाट खंड पर ट्रेन परिचालन शुरू होने की संभावना व्यक्त की गई है। इस परियोजना के पूरा होते ही बस्तर अंचल एक नई विकास यात्रा पर अग्रसर होगा, जहां रेल पटरी पर दौड़ती गाड़ियां न केवल खनिज और सामान पहुंचाएंगी, बल्कि रोजगार, अवसर और विकास का संदेश भी लेकर आएंगी।


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