Media24Media.com: #प्रसिद्ध शिव कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा

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प्रदीप मिश्रा की कथा रद्द: आयोजक नहीं दे सके तय दक्षिणा, 31 लाख में से मिले सिर्फ 15 लाख

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 रायपुर। प्रसिद्ध शिव कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा की राजनांदगांव में होने वाली शिव महापुराण कथा वित्तीय कारणों के चलते रद्द कर दी गई है। आयोजकों ने खुद इस बात की पुष्टि की है कि वे निर्धारित समय पर कथा की दक्षिणा का भुगतान नहीं कर सके, जिस कारण 17 से 23 अगस्त तक बजरंगपुर के मिनी स्टेडियम में होने वाली यह कथा अब नहीं होगी।


क्या है पूरा मामला?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कथा के लिए 31 लाख रुपए की दक्षिणा तय की गई थी, लेकिन आयोजक केवल 15 लाख रुपये ही एकत्र कर पाए। शेष 16 लाख रुपए समय पर ना दे पाने की वजह से प्रदीप मिश्रा की टीम ने कथा को कैंसिल कर दिया। इस आयोजन की तैयारी एक महिला समिति द्वारा की जा रही थी, जिन्होंने इस भुगतान की पुष्टि की है।

आयोजकों ने बताया कि कथा आयोजन की तिथि पहले से तय थी और पेमेंट के लिए भी अंतिम तारीख दी गई थी, लेकिन वे फंडिंग के इंतजाम में असफल रहे। अब वे भविष्य में दोबारा कथा आयोजन करने की योजना बना रहे हैं और इसकी तैयारियों की शुरुआत भी जल्द करेंगे।

प्रदीप मिश्रा ने दी सफाई, बताया ‘बदनाम करने की साजिश’

कथा रद्द होने और दक्षिणा को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही आलोचनाओं के बाद प्रदीप मिश्रा ने भिलाई के जयंती स्टेडियम में चल रही कथा के दौरान सफाई दी। उन्होंने कहा:

“मैं धर्मांतरण के खिलाफ खुलकर बोलता हूं, यही बात सनातन विरोधियों को खलती है। मुझे बदनाम करने की साजिश रची जा रही है।"

"जो भी कथा होती है, वह जनसहयोग से होती है, और मैं केवल धर्म की सेवा कर रहा हूं।”

धार्मिक आयोजनों में शुल्क पर फिर उठे सवाल

धार्मिक आयोजनों में कथावाचकों द्वारा ली जाने वाली मोटी रकम को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। इससे पहले भी बागेश्वर धाम प्रमुख पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर कथावाचन के लिए “अंडर टेबल” पेमेंट लेने के गंभीर आरोप लग चुके हैं।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा था:

“कई कथावाचक 50 लाख रुपये तक फीस लेते हैं। क्या किसी आम आदमी की इतनी हैसियत है? बाबा अंडर टेबल पैसे लेते हैं। आप खुद जांच कर लीजिए।”

हालांकि धीरेंद्र शास्त्री ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि अखिलेश यादव केवल राजनीतिक फायदा उठाने के लिए सनातन धर्म पर निशाना साध रहे हैं।

निष्कर्ष:

राजनांदगांव में कथा रद्द होना केवल एक वित्तीय मामला नहीं बल्कि धार्मिक आयोजनों में पारदर्शिता, फीस और आस्था के व्यापार को लेकर बढ़ते सवालों की झलक भी है। आने वाले दिनों में ऐसे आयोजनों को लेकर लोगों की सोच और व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग और तेज हो सकती है।

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