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नेपाल में जलप्रलय से तबाही, 163 की मौत; 750 से ज्यादा लापता, 133 भारतीय भी शामिल

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 काठमांडू। नेपाल में तिब्बत सीमा से लगे इलाकों में अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। बाढ़ और भूस्खलन से अब तक 163 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 750 से ज्यादा लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। लापता लोगों में 133 भारतीय नागरिक और 37 अप्रवासी भारतीय (NRI) भी शामिल बताए जा रहे हैं। इनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए कई तीर्थयात्री भी शामिल हैं।


बाढ़ के तेज बहाव में कई कस्बे और गांव प्रभावित हुए हैं। महत्वपूर्ण पुल बह गए हैं और करीब एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचने की जानकारी है। प्रभावित क्षेत्रों में सेना, पुलिस और राहत-बचाव दल लगातार अभियान चला रहे हैं।

भूकंप के कुछ मिनट बाद आई बाढ़

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद को बताया कि स्थानीय समयानुसार सुबह 8:37 बजे तिब्बत क्षेत्र में भूकंप आया था। इसके करीब तीन मिनट बाद अचानक बाढ़ आने की सूचना मिली। अधिकारियों को आशंका है कि भूकंप के झटकों के कारण ग्लेशियर या चट्टानों के खिसकने से अचानक बाढ़ की स्थिति बनी।

राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के अनुसार, नेपाल-तिब्बत सीमा पर लेंडे नदी में जलस्तर बढ़ने और चट्टानों के खिसकने के कारण रसुवा जिले के सीमावर्ती शहर तिमुरे में भोटे कोशी नदी उफान पर आ गई। इसके बाद त्रिशूली नदी में भीषण बाढ़ आई और इसका असर नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहूं और नवलपरासी पूर्व समेत कई जिलों तक पहुंच गया।

चितवन में सबसे ज्यादा तबाही

नेपाल में अब तक बरामद हुए 163 शवों में सबसे अधिक 64 शव चितवन जिले से मिले हैं। इसके अलावा धादिंग से 27, नवलपरासी पूर्व से 26, गोरखा से 20, नुवाकोट से 12, तनहूं से 9, रसुवा से 3 और नवलपरासी पश्चिम से 2 शव बरामद किए गए हैं।

बाढ़ प्रभावित इलाकों से सामने आए वीडियो में तबाही का भयावह मंजर दिखाई दे रहा है। तेज रफ्तार से बहता मलबा, चट्टानें और पानी अपने रास्ते में आने वाली इमारतों, वाहनों और पुलों को बहाते नजर आ रहे हैं।

130 से ज्यादा भारतीय लापता

नेपाल में अचानक आई बाढ़ के बाद 130 से ज्यादा भारतीय नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्री भी शामिल हैं। सम्राट टूर्स एंड ट्रैवल एजेंसी के अनुसार, कम से कम 59 भारतीय कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे।

अधिकारियों के मुताबिक लापता लोगों में 133 भारतीय और 37 NRI शामिल हैं। गैर-लाभकारी संस्था ईशा फाउंडेशन ने भी अपने 77 सदस्यों के लापता होने की जानकारी दी है। ये लोग एक आव्रजन केंद्र में मौजूद थे।

तमिलनाडु के 57 पर्यटकों में से 37 का अब तक पता नहीं चल पाया है, जबकि 20 लोगों के बारे में जानकारी मिल गई है। पश्चिम बंगाल के भी कई लोगों के लापता होने की आशंका है। इनमें कोलकाता से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गया 32 सदस्यों का एक समूह भी शामिल बताया जा रहा है।

भारत ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर

नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों की मदद के लिए काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। भारतीय नागरिक +977 985 131 6807 और +977 970 910 7500 पर संपर्क कर सकते हैं।

भारतीय दूतावास ने कहा है कि बाढ़ प्रभावित भारतीय नागरिकों के जल्द बचाव और राहत के लिए वह नेपाल सरकार के संबंधित अधिकारियों के संपर्क में है।

नेपाल पर्यटन बोर्ड ने भी मदद के लिए टोल-फ्री इमरजेंसी नंबर 1234, हॉटलाइन 1144 और पर्यटक पुलिस नंबर 9851289445 जारी किया है। वहीं, बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने 0086 185 1428 4905 हेल्पलाइन नंबर जारी किया है, जिस पर व्हाट्सऐप के जरिए भी संपर्क किया जा सकता है।

कर्नाटक सरकार ने भी नेपाल-तिब्बत सीमा और तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के आसपास फंसे कर्नाटक के लोगों की जानकारी जुटाने के लिए 1070 और 080-22253707 नंबर जारी किए हैं।

पीएम मोदी ने नेपाल को मदद का भरोसा दिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से फोन पर बातचीत कर आपदा पर दुख जताया और हरसंभव मानवीय सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया। भारत ने नेपाल के लिए राहत सामग्री की पहली खेप भी भेजी है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी नेपाल में आई बाढ़ पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में भारत सरकार नेपाल के साथ खड़ी है। उन्होंने बिहार और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों से भी बात की और संभावित प्रभावित सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन तथा राहत-बचाव टीमों के साथ NDRF को हाई अलर्ट पर रखने की जानकारी दी।

नेपाल में संचार व्यवस्था प्रभावित

भीषण बाढ़ के कारण कई इलाकों में संचार व्यवस्था बाधित हो गई है, जिससे लापता लोगों की सही जानकारी जुटाने में मुश्किलें आ रही हैं। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने कहा कि पूरा देश इस आपदा से “सदमे में है और बहुत दुखी है।” सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है।

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