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मुख्यमंत्री के निर्देश पर अमल : नगरीय निकायों को पशुओं के मृत शरीर के वैज्ञानिक एवं सुरक्षित निपटान के लिए उपयुक्त स्थल निर्धारित करने के निर्देश

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रायपुर। राजधानी रायपुर में पिछले महीने हुए कलेक्टर-एसपी कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा दिए गए निर्देश पर अमल करते हुए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने शहरों में गौवंशीय एवं अन्य पशुओं के मृत शरीर के वैज्ञानिक एवं सुरक्षित निपटान के लिए उपयुक्त स्थल निर्धारित करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने सभी नगरीय निकायों को परिपत्र जारी कर पर्यावरणीय मानकों और जैव-सुरक्षा नियमों के अनुरूप 48 घंटे के भीतर पशुओं के मृत शरीर के निपटान के लिए निर्देशित किया है।

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा मंत्रालय से सभी नगर निगमों के आयुक्तों तथा नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को जारी परिपत्र में कहा गया है कि सभी निकायों में गौवंशीय तथा अन्य पशुओं के मृत शरीर के वैज्ञानिक एवं सुरक्षित निपटान के लिए उपयुक्त स्थल का चयन करते हुए तत्काल इसका निर्धारण करें। विभाग ने निपटान का स्थल आबादी से उचित दूरी पर तथा पर्यावरणीय मानकों एवं जैव-सुरक्षा नियमों के अनुरूप सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। 

नगरीय प्रशासन विभाग ने निकायों को मृत पशु के निपटान के लिए विशेष स्थान निर्धारित कर विधिवत निपटान के मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है। विभाग ने परिपत्र में बताया है कि मृत पशुओं के निपटान की प्रक्रिया छत्तीसगढ़ नगरपालिक निगम अधिनियम, 1956 की धारा 258, "मृत पशुओं का निराकरण एवं नगर पालिक निगम हेतु कूड़ा-करकट, गंदा, मल, मृत पशुओं तथा घृणोत्पादक पदार्थों का निपटान आदर्श उपविधियों, 2002 तथा छत्तीसगढ़ नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 289, जीव जन्तुओं के मृत शरीर के व्ययन के संबंध में विशेष उपबंध" अधिनियम में उल्लेखित हैं। लोक सेवा गारंटी अधिनियम, 2011 के तहत मृत पशुओं के निपटान की सेवा 48 घंटे की समय-सीमा में प्रदान किया जाना अनिवार्य है।


नगरीय निकायों में सभी सुविधाएं होंगी ऑनलाइन, यूपीआई से कर सकेंगे भुगतान

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन एवं उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव के दूरदर्शी नेतृत्व में राज्य में ई-गवर्नेस परियोजना के तहत शहरी प्रशासन को अधिक दक्ष, पारदर्शी और नागरिक केंद्रित बनाने का बड़ा फैसला लिया गया है। राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) प्रदेश के सभी 192 नगरीय निकायों में नागरिक सेवाओं को पूरी तरह ऑनलाइन उपलब्ध कराएगा। यह पहल "एक राज्य - एक प्लेटफार्म" और "डिजिटल छत्तीसगढ़" के लक्ष्य को साकार करेगा।

उप मुख्यमंत्री साव ने नगरीय प्रशासन विभाग की इस नई पहल के बारे में कहा कि ई-गवर्नेस परियोजना सुशासन के नए युग की शुरुआत होगी। इससे नागरिकों को सभी शहरी सेवाएँ घर बैठे, समय पर और पारदर्शी रूप से मिलेंगी। उन्होंने कहा कि यह सुविधा शासन को लोगों के और पास लाएगी और अब "शासन जनता के द्वार पर" की सोच धरातल पर दिखेगी।

एक पोर्टल पर नगरीय निकायों की कई सुविधाएं

परियोजना के तहत एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफार्म तैयार किया जाएगा, जिसमें नागरिक सेवा पोर्टल, मोबाइल एप्लीकेशन, भवन अनुमति प्रणाली, वित्तीय प्रबंधन प्रणाली, शिकायत निवारण मॉड्यूल, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली, मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली तथा निर्णय सहायता डैशबोर्ड जैसी प्रमुख सेवाएँ सम्मिलित होंगी। ये सभी मॉड्यूल क्लाउड आधारित डेटा सेंटर से संचालित होंगे, जिससे सभी नगरों का डेटा सुरक्षित, एकीकृत और रियल-टाइम में उपलब्ध रहेगा।

सभी कर ऑनलाइन जमा होंगे

ई-गवर्नेस प्रणाली से लोग अपने मोबाइल या कम्प्यूटर से प्रत्येक सेवा का लाभ ले सकेंगे। संपत्ति कर, जल कर, व्यापार कर और ठोस अपशिष्ट शुल्क जैसी सभी देनदारियाँ ऑनलाइन जमा की जा सकेंगी। नागरिकों को बैंक, यूपीआई, वॉलेट या नेट-बैंकिंग जैसे माध्यमों से त्वरित भुगतान की सुविधा मिलेगी, जिससे राज्य के राजस्व संग्रह में वृद्धि होगी।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि यह परियोजना आम लोगों को केंद्र में रखकर बनाई गई है और बेहतर प्रशासन की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने बताया कि ई-गवर्नेंस प्रणाली शुरू होने से पूरे राज्य के नगरीय निकायों का कामकाज एक जैसा और पारदर्शी होगा। फैसले अब तथ्यों और तकनीक के आधार पर लिए जाएंगे, जिससे लोगों को तेज़ और भरोसेमंद सेवाएं मिलेंगी।

साव ने कहा कि यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के “डिजिटल इंडिया” के विज़न पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन सरकार की मुहर है। इससे छत्तीसगढ़ में ऐसा सिस्टम बनेगा, जहां जनहित की सुविधाएं कागजों पर नहीं बल्कि डिजिटल माध्यम से घर बैठे भी मिलेंगी। नागरिकों को लगेगा कि सरकार सच में उनके द्वार पर है। उन्होंने कहा कि सेवाएं पारदर्शी होंगी, तकनीक जनकल्याण का साधन बनेगी और छत्तीसगढ़ डिजिटल सुशासन का एक आदर्श उदाहरण बनकर देश में नई पहचान बनाएगा।

एआई और डेटा एनालिटिक्स का भी उपयोग

ई-गवर्नेंस परियोजना में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डेटा एनालिटिक्स का भी उपयोग किया जाएगा। यह प्रणाली नागरिकों के शिकायतों के पैटर्न का विश्लेषण कर संभावित समस्याओं का पूर्वानुमान लगाएगी और अधिकारियों के प्रदर्शन का आंकलन करेगी। इससे नीतिगत निर्णयों में सटीकता आएगी और शहरी निकायों का संचालन "स्मार्ट गवर्नेस" के स्तर पर पहुंचेगा।

स्वच्छ, सुंदर, सुनियोजित, सुव्यवस्थित, संस्कारित और सुविधापूर्ण शहर बनाने के लिए करें काम – अरुण साव

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रायपुर। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव की मौजूदगी में शहरों को स्वच्छ और सुंदर बनाने आज 14 नगरीय निकायों के बीच करार (MoU) हुआ। इन समझौतों में संबंधित नगरीय निकायों के महापौरों, अध्यक्षों, आयुक्तों और सीएमओ ने हस्ताक्षर किए। केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय की नई पहल ‘स्वच्छ जोड़ी शहर’ के तहत स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 में राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत छत्तीसगढ़ के सभी सात शहर एक-एक और शहर की रैंकिंग सुधारने में मदद करेंगे। इसके लिए आज समझौता ज्ञापन में हस्ताक्षर के साथ ही नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा ‘स्वच्छ शहर जोड़ी संवाद’ का आयोजन किया गया। प्रदेश के सभी 192 नगरीय निकाय इससे वर्चुअली जुड़े।

उप मुख्यमंत्री साव ने नवा रायपुर स्थित विश्राम भवन में आयोजित कार्यक्रम में आरडीएफ ट्रैकिंग पोर्टल, व्हाट्स-अप चैटबॉट तथा स्वच्छता लीग के हिन्दी टूलकिट को भी लॉन्च किया। भारत सरकार के नवीन अभियान "स्वच्छ शहर जोड़ी" के तहत स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के अंतर्गत स्वच्छ सर्वेक्षण में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले शहर अपने राज्य के उन शहरों को जो स्वच्छ सर्वेक्षण में अपेक्षा के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाये हैं, उन्हें अपने अनुभवों का लाभ प्रदान कर स्वच्छता में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित और सहयोग करेंगे। इसके लिए आज मेन्टोर (Mentor) शहर एवं मेन्टी शहरों द्वारा एमओयू पर हस्ताक्षर करने के साथ ही आगे के रोडमैप पर विस्तृत चर्चा की गई।

नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा आज लॉन्च किए गए डिजिटल नवाचार ‘आरडीएफ (Refused Derived Fuel) ट्रैकिंग पोर्टल’ के द्वारा निकाय स्तर पर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुदृढ़ की जाएगी। यह पोर्टल राज्य के सभी नगरीय निकायों में स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के अंतर्गत संचालित मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF) केंद्रों से उत्पन्न होने वाले रिफ्युज्ड डिराइव्ड फ्युइल (Refused Derived Fuel) की आवाजाही के डिजिटल निरीक्षण, निगरानी और विश्लेषण के लिए तैयार किया गया है। 

आज लॉन्च किए गए व्हाट्स-अप चैटबॉट के माध्यम से नागरिक 851-900-9090 नम्बर पर अब सीधे स्वच्छता संबंधी शिकायतें एवं समस्याएं दर्ज करा सकेंगे। स्वच्छता में नागरिकों की सहभागिता बढ़ाने की दृष्टि से विभाग द्वारा यह चैटबॉट प्रारंभ किया गया है। स्वच्छता अभियान को बढ़ावा देने, लोगों को जागरूक करने तथा साफ-सफाई के महत्व के बारे में शिक्षित करने के लिए विभाग द्वारा स्वच्छता लीग टूलकिट का हिंदी संस्करण तैयार किया गया है।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कार्यक्रम में मौजूद महापौरों, अध्यक्षों, निगम आयुक्तों, मुख्य नगर पालिका अधिकारियों तथा ऑनलाइन जुड़े नगरीय निकायों के पदाधिकारियों एवं अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि शहरों को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए छत्तीसगढ़ में अच्छा काम हो रहा है। स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 में 115 नगरीय निकायों ने अपनी रैंकिंग सुधारी है। 20 हजार से कम आबादी वाले देश के 100 सबसे साफ-सुथरे शहरों में अकेले छत्तीसगढ़ के 58 शहर शामिल हैं। उन्होंने कहा कि शहरों में केवल निर्माण ही नहीं करना है, बल्कि उन्हें स्वच्छ, सुंदर, सुनियोजित, सुव्यवस्थित, संस्कारित और सुविधापूर्ण भी बनाना है। इसके लिए जनसहभागिता जरूरी है।

साव ने नगरीय निकायों के पदाधिकारियों और अधिकारियों से कहा कि आप लोग शहर के नागरिकों, महिलाओं, बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए कार्य करें। शहरों से राज्य की प्रतिष्ठा बनती है। इसलिए आप लोग पुराने तौर-तरीके छोड़कर नई सोच, नए विजन और नवाचार के साथ अनुकरणीय व परिणाममूलक काम करें। उन्होंने कहा कि इस साल हम छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना का रजत जयंती वर्ष मना रहे हैं। हमें नए संकल्प के साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए अपने शहर को तैयार करना है। हमारा शहर देश और प्रदेश में अग्रणी बने, इसके लिए काम करना है। साव ने सभी नगरीय निकायों से कहा कि विभाग द्वारा आज जो सुविधाएं लॉन्च की गई हैं, उनका अपने शहर में सक्रियता से उपयोग करें। इनसे ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ें और सहभागिता बढ़ाएं।

रायपुर की महापौर मीनल चौबे, बिलासपुर की महापौर पूजा विधानी और अंबिकापुर की महापौर मंजूषा भगत ने भी मेंटरशिप के जरिए क्रमशः बिरगांव, रतनपुर एवं बैकुंठपुर में बेहतर स्वच्छता के लिए हर तरीके के सहयोग के लिए आश्वस्त करने के साथ ही इसके लिए रोडमैप साझा किया। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक आर. एक्का, संयुक्त सचिव डॉ. रेणुका श्रीवास्तव, राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) के सीईओ शशांक पाण्डेय और अतिरिक्त सीईओ दुष्यंत कुमार रायस्त के साथ ही नगरीय प्रशासन विभाग तथा सुडा के वरिष्ठ अधिकारी भी कार्यक्रम में मौजूद थे।


सात नगरीय निकाय सात और निकायों को बनाएंगे स्वच्छ और सुंदर

मेंटर और मेंटी शहरों के बीच आज हुए एमओयू के अनुसार स्वच्छ सर्वेक्षण में राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित रायपुर मेंटर के रूप में अपने मेंटी शहर बिरगांव नगर निगम को स्वच्छ और सुंदर बनाने में सहयोग और मार्गदर्शन प्रदान करेगा। इसी तरह से बिलासपुर नगर निगम रतनपुर को, अंबिकापुर नगर निगम बैकुंठपुर को, कुम्हारी नगर पालिका अहिवारा को, बिल्हा नगर पंचायत कोटा को, पाटन नगर पंचायत गुरुर को और विश्रामपुर नगर पंचायत जरही को स्वच्छता के कार्यों में सहयोग प्रदान करेगा।


नगरीय निकायों को 102.97 करोड़ से अधिक की राशि जारी, नगरीय प्रशासन विभाग ने पार्षद निधि की 72.34 करोड़ और महापौर/अध्यक्ष निधि की 30.64 करोड़ किए जारी

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रायपुर। राज्य शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने प्रदेशभर के नगरीय निकायों को कुल 102 करोड़ 97 लाख 50 हजार रुपए जारी किए हैं। विभाग द्वारा निकायों को पार्षद निधि के कुल 72 करोड़ 33 लाख 75 हजार रुपए तथा महापौर/अध्यक्ष निधि के कुल 30 करोड़ 63 लाख 75 हजार रुपए आबंटित कर दिए गए हैं। विभाग ने चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए दोनों मदों में 50-50 प्रतिशत राशि निकायों को जारी की है।

नगरीय प्रशासन विभाग ने पार्षद निधि के रूप में राज्य के 14 नगर निगमों को कुल 21 करोड़ 96 लाख रुपए जारी किए हैं। वहीं 54 नगर पालिकाओं को 23 करोड़ 37 लाख 75 हजार रुपए तथा 120 नगर पंचायतों को 27 करोड़ रुपए की पार्षद निधि जारी की गई है। विभाग द्वारा 14 नगर निगमों को दस करोड़ 12 लाख 50 हजार रुपए की महापौर निधि आबंटित की गई है। राज्य के 54 नगर पालिकाओं को दस करोड़ 50 लाख रुपए और 120 नगर पंचायतों को दस करोड़ एक लाख 25 हजार रुपए की अध्यक्ष निधि विभाग द्वारा जारी की गई है।


समय-सीमा तय कर योजनाओं के काम पूर्ण करने के दिए निर्देश, कार्यों की गुणवत्ता औऱ जन सुविधाओं का ध्यान रखने कहा- अरुण साव

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रायपुर। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों की बैठक लेकर कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने नवा रायपुर स्थित विश्राम भवन में आयोजित बैठक में अधिकारियों को हर कार्य की पूर्णता के लिए समय-सीमा तय कर योजनाओं के क्रियान्वयन के निर्देश दिए। उन्होंने गौधाम योजना के क्रियान्वयन के लिए शीघ्र कार्ययोजना तैयार करने को कहा। साव ने नगरीय निकायों में निर्माणाधीन अटल परिसरों और नालंदा परिसरों के निर्माण में भी तेजी लाने को कहा। नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव डॉ. बसवराजु एस. और संचालक आर. एक्का भी समीक्षा बैठक में शामिल हुए। 

उप मुख्यमंत्री साव ने बैठक में कहा कि विभाग द्वारा लगातार नवाचार के कार्य किए जा रहे हैं। नवाचारों के साथ ही विभागीय संरचना और योजनाओं का सुदृढ़ीकरण व विस्तारीकरण भी किया जाए। उन्होंने कहा कि विभागीय योजनाओं का असर धरातल पर दिखना चाहिए। प्रत्येक कार्य की समय-सीमा तय की जाए। सभी कार्यों में गुणवत्ता के साथ ही जन सुविधाओं का ध्यान रखा जाए।

साव ने बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों को नगरीय निकायों के सेट-अप पुनरीक्षण और वर्गीकरण के साथ ही रिक्त पदों पर भर्ती के लिए वित्त विभाग तथा सामान्य प्रशासन विभाग से समन्वय कर स्वीकृति के लिए आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी निकाय में अधिकारियों-कर्मचारियों को वेतन देने में विलंब की स्थिति नहीं निर्मित होना चाहिए। समय पर वेतन का भुगतान सुनिश्चित करें। साव ने नगरीय निकायों के सभी वार्डों में आबादी के हिसाब से समुचित स्ट्रीट लाइटिंग के निर्देश दिए। उन्होंने पार्षद निधि के तहत इसके प्रावधान का प्रस्ताव आगामी बैठक में प्रस्तुत करने को कहा। उन्होंने दीपावली के पहले सभी निकायों के प्रत्येक वार्ड में प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

उप मुख्यमंत्री साव ने भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘वीमेन फॉर ट्री’ के अंतर्गत नगरीय निकायों में किए जा रहे पौधरोपण के बारे में कहा कि छत्तीसगढ़ के लिए यह गौरव की बात है कि पूरे देश में मध्यप्रदेश के बाद छत्तीसगढ़ को सर्वाधिक संख्या में वृक्षारोपण की मंजूरी मिली है। ‘वीमेन फॉर ट्री’ के अंतर्गत 27 करोड़ 48 लाख रुपए की लागत की 444 परियोजनाओं की स्वीकृति मिली है। अभियान के तहत विभिन्न नगरीय निकायों में कुल एक लाख 66 हजार पौधे लगाए जाएंगे। पौधरोपण के बाद एक वर्ष तक इनकी देखभाल और सुरक्षा का काम 1701 महिला समूहों को सौंपा गया है। बैठक में बताया गया कि ‘वीमेन फॉर ट्री’ के तहत अब तक एक लाख 33 हजार पौधे लगाए जा चुके हैं, जो अभियान के अंतर्गत स्वीकृत कुल पौधरोपण का 80 प्रतिशत है। साव ने शेष 20 प्रतिशत पौधरोपण को भी चालू सितम्बर माह के अंत तक पूर्ण करने के निर्देश दिए।

उप मुख्यमंत्री साव ने विभिन्न नगरीय निकायों में राज्य के बजट से स्वीकृत 21 जल प्रदाय परियोजनाओं और एसटीपी निर्माण के कार्यों की भी समीक्षा की। उन्होंने यथाशीघ्र इन कार्यों के प्राक्कलन व निविदा आदि की कार्यवाही पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं स्वच्छ भारत मिशन, अमृत मिशन और प्रधानमंत्री आवास योजना की समीक्षा करते हुए समय-सीमा में कार्यों का क्रियान्वयन करने को कहा। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की उप सचिव डॉ. रेणुका श्रीवास्तव, राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा) के सीईओ शशांक पाण्डेय, अपर संचालक पुलक भट्टाचार्य और मुख्य अभियंता राजेश शर्मा सहित नगरीय प्रशासन विभाग और सूडा के कई अधिकारी समीक्षा बैठक में मौजूद थे।

निर्माण विभागों के कार्यपालन अभियंताओं को चेतावनी, लंबित निरीक्षण प्रतिवेदनों का जवाब देने 7 दिन की मोहलत

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रायपुर। मुख्य तकनीकी परीक्षक (सतर्कता) आर. पुराम ने आज वीडियों कॉन्फ्रेसिंग के जरिए राज्य के निर्माण विभागों के सभी संभागों के कार्यपालन अभियंताओं की बैठक लेकर लंबित निरीक्षण प्रतिवेदनों के निराकरण की अद्यतन स्थिति की गहन समीक्षा की गई। बड़ी संख्या में लंबित निरीक्षण प्रतिवेदन के मद्देनजर उन्होंने सभी कार्यपालन अभियंताओं को इसके निराकरण के लिए एक सप्ताह की मोहलत देते हुए कहा कि इसमें चूक करने वाले अधिकारियों के विरूद्ध कार्रवाई के लिए नामजद प्रस्ताव राज्य शासन को भेजा जाएगा।

बैठक में पुराम ने 30 जून 2025 की स्थिति में लोक निर्माण विभाग से संबंधित 493, जल संसाधन के 308, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी के 203, नगरीय प्रशासन एवं विकास के 11, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क एवं मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के 73, छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड और छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज के 86 लंबित निरीक्षण प्रतिवेदनों की संभागवार समीक्षा की और संबंधित कार्यपालन अभियंताओं को तत्परता से इसका परीक्षण कर उत्तर भिजवाने के निर्देश दिए।

गौरतलब है कि राज्य शासन द्वारा मुख्य तकनीकी परीक्षक के कार्यों के त्रैमासिक प्रगति की समीक्षा की जाती है। संगठन द्वारा स्थल निरीक्षण किये जाने के पश्चात् निरीक्षण प्रतिवेदन जारी किया जाता है, जिसका जवाब संबंधित कार्य विभागों से प्राप्त कर निरीक्षण प्रतिवेदनों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।


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