Media24Media.com: #देवउठनी एकादशी

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देवउठनी एकादशी पर मुख्यमंत्री निवास में श्रद्धा एवं पारंपरिक विधिविधान से हुआ तुलसी विवाह

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रायपुर। देवउठनी एकादशी के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री निवास में श्रद्धा, भक्ति और पारंपरिक विधि-विधान के साथ तुलसी विवाह का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं उनकी धर्मपत्नी कौशल्या साय ने माता तुलसी एवं भगवान शालिग्राम का विवाह संपन्न कराया और सपरिवार पूजा-अर्चना की।

मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर कहा कि देवउठनी एकादशी धर्म, अध्यात्म और प्रकृति के संतुलन का प्रतीक है। भगवान विष्णु के योगनिद्रा से जागरण के साथ ही शुभ कार्यों की पुनः शुरुआत होती है। तुलसी विवाह समाज में पवित्रता, सौहार्द और एकत्व की भावना को जागृत करता है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं में तुलसी विवाह का विशेष महत्व है। यह पर्व हमें परिवार, समाज और प्रकृति के बीच सामंजस्य और संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा देता है। हमारी लोक संस्कृति में तुलसी विवाह को पवित्रता और समर्पण का प्रतीक माना गया है, जो जीवन में सात्त्विकता और सद्भावना का संचार करता है।

मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि और आरोग्यता की मंगलकामना करते हुए कहा कि सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु और माता तुलसी की कृपा से सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास हो, तथा समूची सृष्टि में आरोग्य, सौहार्द और मंगलमय ऊर्जा का संचार हो।https://x.com/vishnudsai/status/1984997709648912412?s=19

उन्होंने कहा कि यह पर्व न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि जीवन में संतुलन, सकारात्मकता और नव आरंभ का प्रतीक भी है। 

मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशवासियों को देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह के पावन अवसर की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं और कहा कि यह पर्व हमारी समृद्ध परंपराओं, लोकआस्था और जीवनमूल्यों को निरंतर जीवंत रखने का प्रतीक है।


देवउठनी एकादशी आज - इस दिन जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, श्रीहरि होंगे प्रसन्न!

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 कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवउठनी एकादशी कहा जाता है। इसे देवप्रबोधिनी एकादशी भी कहते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं, जिससे मांगलिक और शुभ कार्यों की शुरुआत होती है।


जो भी भक्त इस दिन व्रत रखकर कथा का पाठ या श्रवण करते हैं, उनके सभी पाप नष्ट होते हैं और भगवान विष्णु की कृपा से जीवन में सुख-समृद्धि और मंगल कार्यों का आरंभ होता है।

देवउठनी एकादशी व्रत कथा

देवउठनी एकादशी से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं हैं। इनमें दो कथाएं प्रमुख मानी जाती हैं -
एक राजा और धर्मनिष्ठ रानी की कथा, और दूसरी भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी के संवाद की।

राजा और धर्म की परीक्षा

बहुत समय पहले एक राज्य में एकादशी के दिन अन्न नहीं बेचा जाता था, और सभी लोग फलाहार करते थे। एक बार भगवान विष्णु ने सुंदर स्त्री का रूप धारण किया और उसी राज्य में पहुंचे। राजा उस स्त्री के सौंदर्य पर मोहित हो गए और विवाह का प्रस्ताव दिया।

स्त्री ने शर्त रखी कि वह राज्य का अधिकार चाहेगी और राजा को उसका बनाया हुआ भोजन खाना होगा। राजा ने स्वीकार किया, लेकिन जब एकादशी आई, तो स्त्री ने उन्हें भोजन करने को कहा। राजा ने व्रत का हवाला देते हुए इनकार कर दिया।

तब स्त्री ने कहा — “यदि तुमने भोजन नहीं किया तो मैं राजकुमार का सिर काट दूंगी।”
राजा धर्म संकट में पड़ गए और रानी से सलाह ली। रानी ने कहा — “धर्म को नहीं छोड़ना चाहिए। पुत्र फिर मिल सकता है, पर धर्म नहीं।”

राजकुमार ने यह सुनकर स्वयं को बलिदान के लिए प्रस्तुत किया। उसी क्षण वह स्त्री अपना वास्तविक रूप प्रकट करते हुए भगवान विष्णु बन गईं।
विष्णु जी राजा के धर्म और भक्ति से प्रसन्न हुए और उन्हें मुक्ति का वरदान देकर वैकुंठ धाम भेज दिया।

विष्णु और लक्ष्मी जी का संवाद

एक बार माता लक्ष्मी ने भगवान विष्णु से कहा -
“आप दिन-रात जगते रहते हैं, और जब सोते हैं, तो युगों तक नहीं जागते। इससे सृष्टि का संतुलन बिगड़ सकता है।”

भगवान विष्णु मुस्कुराए और बोले - 

“देवि, मैं वर्षा ऋतु के दौरान चार महीनों तक योगनिद्रा में रहूंगा। इसे अल्पनिद्रा कहा जाएगा। इस दौरान जो भी भक्त मेरी सेवा करेंगे, उनके घर में मैं और तुम सदैव निवास करेंगे। इसी योगनिद्रा से जागने का दिन ही देवउठनी एकादशी कहलाया।

व्रत का महत्व

देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा, तुलसी विवाह और दीपदान का विशेष महत्व है। इस दिन व्रत रखकर कथा सुनने, तुलसी की पूजा करने और भगवान विष्णु के नाम का जाप करने से जीवन में सुख, समृद्धि और वैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है।

निष्कर्ष

देवउठनी एकादशी केवल एक व्रत नहीं, बल्कि धर्म, संयम और विश्वास की परंपरा है। जो भक्त इस दिन सच्चे मन से भगवान विष्णु की आराधना करते हैं, उनके जीवन से अंधकार मिटता है और हर क्षेत्र में शुभ फल की प्राप्ति होती है।

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