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प्रयोगशाला परिचारक भर्ती- 2023 : दस्तावेजों का सत्यापन 8 से 12 दिसंबर तक, आठ समितियाँ 1603 अभ्यर्थी का करेगी दस्तावेजों का सत्यापन

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रायपुर। छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल द्वारा आयोजित प्रयोगशाला परिचारक  भर्ती परीक्षा–2023 के अंतर्गत चयनित अभ्यर्थियों के दस्तावेज़ों के सत्यापन की प्रक्रिया 08 से 12 दिसंबर 2025 तक चलेगी। सत्यापन का कार्य विज्ञान महाविद्यालय परिसर, रायपुर स्थित क्षेत्रीय अपर संचालक (रूसा) कार्यालय में प्रतिदिन सुबह 10:30 से शाम 5:30 बजे तक दो पालियों में संपन्न होगा।


1603 अभ्यर्थियों को सत्यापन हेतु आमंत्रित

आयुक्त उच्च शिक्षा विभाग डॉ. संतोष देवांगन ने बताया कि 430 पदों के विरुद्ध तीन गुना अभ्यर्थियों को दस्तावेजों के सत्यापन के लिए बुलाया गया है। इसमें सामान्य वर्ग के कुल 538 जिसमें महिला 164 तथा 374 पुरुष, अन्य पिछड़ा वर्ग के 190 में से महिला 56 और 134 पुरुष, अनुसूचित जाति वर्ग के 159 में से महिला 46 और 113 पुरुष तथा अनुसूचित जनजाति वर्ग के 419 में से महिला 123 और 296 पुरुष शामिल होंगे। इसी तरह दिव्यांग वर्ग के 91, भूतपूर्व सैनिक के 206 अभ्यर्थी दस्तावेजों के सत्यापन में शामिल होंगे।

दस्तावेज़ सत्यापन के लिए आठ समितियाँ गठित

उच्च शिक्षा विभाग ने दस्तावेजों के सत्यापन कार्य को सुचारू और पारदर्शी बनाने के लिए  कुल आठ समितियाँ बनाई हैं। प्रत्येक समिति में प्राचार्य, सहायक प्राध्यापक तथा वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। सभी समितियाँ 08 से 12 दिसंबर 2025 तक प्रतिदिन निर्धारित समय में अभ्यर्थियों के मूल दस्तावेज़ों का परीक्षण करेंगी। इस संबंध में विस्तृत निर्देश उच्च शिक्षा विभाग की वेबसाइट www. highereducation.cg.gov.in पर उपलब्ध हैं। यह प्रक्रिया भर्ती में पारदर्शिता बढ़ाने और चयन कार्य को समय सीमा के भीतर पूर्ण करने के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है।

डिजिटल छत्तीसगढ़ : जिसने दूर रह रही बेटी को दिया सबसे बड़ा सहारा

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रायपुर। डिजिटल भारत अभियान और छत्तीसगढ़ शासन की ई-सेवाओं ने आम नागरिकों के जीवन को न सिर्फ आसान बनाया है, बल्कि समय, मेहनत और संसाधनों की बड़ी बचत भी सुनिश्चित की है। भुवनेश्वर में रहने वाली सोनम त्रिपाठी का अनुभव इसका जीवंत उदाहरण है। उन्होंने डिजिटल सेवाओं के सहारे अपने दिवंगत पिता का डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त किया और अपनी बीमार माताजी के बैंक खाते को बिना किसी परेशानी के भुवनेश्वर में स्थानांतरित करवा लिया।

विवाह के बाद भुवनेश्वर में बस चुकी सोनम त्रिपाठी के माता-पिता बिलासपुर में ही रहते थे। पिता का निधन होने के बाद नगरपालिका बिलासपुर ने मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया। लेकिन जब उनकी माताजी की तबीयत बिगड़ी और उन्हें अपने साथ भुवनेश्वर ले जाना पड़ा, तब एक नई चुनौती सामने आई कि माताजी के बैंक खाते का ट्रांसफर। बैंक ने पिता का डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने का आग्रह किया, जिसकी जानकारी त्रिपाठी को पहले नहीं थी, और इसी कारण काम कुछ समय के लिए अटक गया। इस दस्तावेज़ की आवश्यकता ने परिवार को असमंजस में डाल दिया।

इंटरनेट और डिजिटल छत्तीसगढ़ का मिला सहारा

त्रिपाठी ने समाधान की तलाश शुरू की और इंटरनेट की मदद से छत्तीसगढ़ के जन्म-मृत्यु पंजीकरण कार्यालय का संपर्क नंबर प्राप्त किया। भुवनेश्वर से ही उन्होंने संबंधित कर्मचारी से संपर्क किया। कार्यालय कर्मचारी ने आवश्यक दस्तावेज़ों, ऑनलाइन प्रक्रिया और प्रमाण पत्र प्राप्ति के चरणों की स्पष्ट एवं सहज जानकारी प्रदान की। डिजिटल व्यवस्था की बदौलत कुछ ही दिनों में उन्हें अपने पिता का डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र ऑनलाइन उपलब्ध हो गया, और बैंक की समस्त औपचारिकताएँ तुरंत पूर्ण हो गईं।

डिजिटल सेवाएँ समय बचाती हैं, परेशानी दूर करती हैं — सोनम त्रिपाठी

सोनम त्रिपाठी बताती हैं कि यदि उन्हें डिजिटल प्रक्रिया की जानकारी पहले मिल जाती, तो उनका काम और पहले ही पूरा हो जाता। उनका कहना है कि बैंकिंग, सरकारी सहायता, संपत्ति, पेंशन और अन्य कार्यों में बाधा से बचने के लिए ऐसे दस्तावेज़ समय रहते बनवा लेना चाहिए। मैंने भी भुवनेश्वर से ही ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी की और प्रमाण पत्र कुछ ही दिनों में प्राप्त हो गया।

उनका अनुभव बताता है कि सूचना की उपलब्धता, तकनीक का उपयोग और सरकारी सेवाओं का डिजिटलीकरण किस प्रकार जटिल लगने वाले कामों को भी सरल और तेज बनाते हैं।

डिजिटल छत्तीसगढ़: अब हर नागरिक के ‘एक क्लिक’ पर सरकारी सेवाएँ

छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ वर्षों में जन्म-मृत्यु पंजीकरण, शिकायत निवारण, प्रमाण पत्र उपलब्धता और विभिन्न सेवाओं के डिजिटलीकरण ने आमजन की परेशानी को काफी हद तक कम किया है। बिलासपुर से लेकर बस्तर तक हर कोई घर बैठे प्रमाण पत्र, आवेदन स्थिति और अन्य सेवाओं का लाभ उठा पा रहा है। इससे न केवल समय और ऊर्जा की बचत होती है, बल्कि प्रक्रियाएँ पारदर्शी और विश्वसनीय भी बनी हैं।

सोनम त्रिपाठी की यह कहानी उन नागरिकों के लिए प्रेरणा है जो परंपरागत प्रक्रियाओं की कठिनाइयों से परेशान रहते हैं। यह उदाहरण दर्शाता है कि समय पर सूचना, सहयोगी प्रशासन और आधुनिक डिजिटल सेवाओं की सहायता से कोई भी महत्वपूर्ण कार्य शीघ्रता और सरलता से पूरा किया जा सकता है।

डिजिटल छत्तीसगढ़ की यह मिसाल न केवल राज्य के डिजिटल परिवर्तन की सफलता को रेखांकित करती है, बल्कि यह भी बताती है कि डिजिटल भारत अभियान कैसे आम नागरिकों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला रहा है।

छत्तीसगढ़ की डिजिटल सेवाएँ अब आम नागरिकों की जिंदगी में बदलाव ला रही हैं। भुवनेश्वर में रहते हुए भी सोनम त्रिपाठी ने बिलासपुर से अपने दिवंगत पिता का डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त किया और माताजी के बैंक खाते का ट्रांसफर बिना किसी कठिनाई के पूरा कर लिया—यह हमारे ई-गवर्नेंस सिस्टम की पारदर्शिता, विश्वसनीयता और दक्षता का प्रमाण है। “डिजिटल छत्तीसगढ़” का लक्ष्य ही यही है कि हर नागरिक को घर बैठे, एक क्लिक में, तेज़ और सरल तरीके से सरकारी सेवाएँ उपलब्ध हों। त्रिपाठी का यह अनुभव डिजिटल भारत अभियान और राज्य सरकार की नागरिक-केंद्रित कार्यशैली की सफलता को रेखांकित करता है। - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय


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