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दर्द से राहत की नई सुबह: दंतेवाड़ा में पहली बार बदला गया घुटना, अब बड़े शहरों की मजबूरी खत्म

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रायपुर। बरसों से घुटने के दर्द के साथ जी रही एक आदिवासी महिला के लिए यह सिर्फ सर्जरी नहीं, बल्कि नई जिंदगी की शुरुआत है। दंतेवाड़ा जिला अस्पताल में पहली बार एडवांस्ड टोटल नी रिप्लेसमेंट सर्जरी सफलतापूर्वक की गई—और इसी के साथ यह भरोसा भी मजबूत हुआ कि अब इलाज के लिए दूर-दराज़ के बड़े शहरों की मजबूरी नहीं रही।

कुआकोंडा विकासखंड के महारापारा की 45 वर्षीय शांति रोज़मर्रा की ज़िंदगी में संघर्ष कर रही थीं। साप्ताहिक हाट में चूड़ियों का छोटा-सा व्यवसाय चलाने वाली शांति के लिए चलना-फिरना ही सबसे बड़ी चुनौती बन गया था। दाएं घुटने के असहनीय दर्द ने काम, आमदनी और आत्मविश्वास—सब कुछ छीन लिया था।

जिला अस्पताल में जांच के बाद उन्हें गंभीर ऑस्टियोआर्थराइटिस बताया गया। 6 जनवरी को भर्ती और 13 जनवरी को उनका टोटल नी रिप्लेसमेंट किया गया। ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा। आज शांति के चेहरे पर सुकून है—“पहले हर कदम दर्द देता था, अब आराम है,” उन्होंने मुस्कराते हुए कहा।

ऑपरेशन करने वाले ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों के मुताबिक यह अत्याधुनिक प्रक्रिया घुटने के क्षतिग्रस्त जोड़ को कृत्रिम इम्प्लांट से बदलती है, जिससे लंबे समय का दर्द खत्म होता है और चलने-फिरने की क्षमता लौटती है।

इस इलाज की खास बात यह भी रही कि पूरा खर्च आयुष्मान भारत योजना के तहत हुआ—यानी शांति को जेब से एक रुपया भी नहीं देना पड़ा। उन्होंने सरकार और अस्पताल प्रशासन का आभार जताया।

वरिष्ठ चिकित्सकों का कहना है कि भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण और आदिवासी बहुल दंतेवाड़ा जैसे जिले में इस स्तर की सर्जरी का होना सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए मील का पत्थर है। प्रशिक्षित सर्जन, एनेस्थीसिया सपोर्ट, नर्सिंग स्टाफ और मज़बूत पोस्ट-ऑपरेटिव केयर—सबकी साझा मेहनत ने यह संभव किया।

अस्पताल प्रशासन के अनुसार यह सुविधा शासन की योजनाओं के तहत निःशुल्क उपलब्ध है, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को भी अत्याधुनिक इलाज अपने जिले में ही मिल सके। दंतेवाड़ा के लिए यह सिर्फ एक मेडिकल उपलब्धि नहीं—यह भरोसे की जीत है।

निर्धारित मानकों का पालन न करने पर 33 कॉमन सर्विस सेंटर बंद, सीएससी मुख्यालय दिल्ली की सख्त कार्रवाई

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रायपुर। दंतेवाड़ा जिले में कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के संचालन में निर्धारित नियमों का पालन न करने पर सीएससी मुख्यालय, दिल्ली ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच में अनियमितताएँ मिलने के बाद जिले के 33 सीएससी की पहचान संख्या (आईडी) को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया है।

जांच के दौरान पाया गया कि कई कॉमन सर्विस सेंटर बिना स्थायी केंद्र के संचालित हो रहे थे। कुछ केंद्रों में निर्धारित कॉमन ब्रांडिंग नहीं थी या बैनर बिना फ्रेम के लगाए गए थे। कई स्थानों पर दर सूची (रेट चार्ट) भी प्रदर्शित नहीं की गई थी। इसके अलावा, कुछ ग्राम स्तरीय उद्यमी (व्हीएलई) अपनी अधिकृत सीएससी पहचान संख्या की बजाय अन्य माध्यमों से लेन-देन कर रहे थे, जो नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।

सीएससी मुख्यालय ने कहा कि नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए यह सख्ती आगे भी जारी रहेगी। आने वाले दिनों में जिला प्रशासन और सीएससी टीम द्वारा पुनः निरीक्षण किया जाएगा। यदि अन्य केंद्रों में भी अनियमितताएँ मिलीं, तो उनकी पहचान संख्या भी रद्द की जा सकती है। जिन व्हीएलई की आईडी बंद की गई है, उन्हें निर्देश दिया गया है कि निर्धारित ब्रांडिंग लगाएँ, दर सूची प्रदर्शित करें और स्थायी केंद्र से संचालन सुनिश्चित करें। सभी लेन-देन केवल अपनी अधिकृत सीएससी आईडी से करें। इन मानकों का पालन करने के बाद ही उनके मामलों की पुनः समीक्षा की जाएगी और पहचान संख्या पुनः सक्रिय करने पर विचार किया जाएगा।

सीएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर कॉमन ब्रांडिंग सामग्री डाउनलोड करने की सुविधा उपलब्ध है, ताकि सभी VLE अपने केंद्रों को निर्धारित मानकों के अनुसार व्यवस्थित कर सकें। यह कार्रवाई जिले में पारदर्शिता बढ़ाने, नियमों का पालन सुनिश्चित करने और ग्रामीणों को बेहतर सेवाएँ उपलब्ध कराने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है।


रेशम की डोर से बुनी आत्मनिर्भरता –दंतेवाड़ा की महिलाओं को मिली नई पहचान

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 रायपुर : विष्णु देव साय के कुशल नेतृत्व एवं उनके मार्गदर्शन में कृषि, उद्यानिकी और मत्स्य पालन की तरह ही रेशम विभाग भी हितग्राहियों की आजीविका सशक्त करने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। विभाग की योजनाओं से लाभान्वित होकर जिले के स्व-सहायता समूह आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रहे हैं।

रेशम विभाग द्वारा हितग्राही समूहों को स्वस्थ रेशम कीट अंडे उपलब्ध कराए जाते हैं। इन अंडों से हैचिंग से लेकर कोसा निर्माण तक की संपूर्ण प्रक्रिया हितग्राही स्वयं करते हैं। तत्पश्चात तैयार कोसों के विक्रय से उन्हें आर्थिक आमदनी प्राप्त होती है।

इसी क्रम में शासकीय रेशम केन्द्र, चितालंका की महिला स्व-सहायता समूह ने मलबरी रेशम कीट पालन का सफल संचालन कर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है।

इस वर्ष इन  टसर रेशम कीट पालकों ने तेरह  सौ स्वस्थ अंडों से 45 दिनों की अवधि में 45 हजार नग डाबा कोसा का उत्पादन किया गया। इन के विक्रय से समूह को 72 हजार 300 सौ रुपए की आय प्राप्त हुई। यह प्रथम फसल से हुई आमदनी समूह की महिलाओं के उत्साह और आत्मविश्वास को दोगुना कर रही है।

अब समूह की महिलाएँ इस वित्तीय वर्ष में दूसरी एवं तीसरी फसल लेने के लिए पूरी तरह तैयार और प्रेरित हैं। यह पहल दंतेवाड़ा जिले में आजीविका संवर्धन और महिला सशक्तिकरण का मजबूत उदाहरण बनकर उभर रही है।


बाढ़ में बही पुस्तकें, टेबलेट भी हुआ खराब, पर नहीं रुकेगी पूनम की प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर बाढ़ से प्रभावित दंतेवाड़ा की पूनम पटेल की प्रशासनिक अधिकारी बनने की तैयारी आगे भी निर्बाध जारी रहेगी। पूनम पटेल, दंतेवाड़ा जैसे नक्सल प्रभावित इलाके में रहकर पिछले तीन वर्षों से यूपीएससी की तैयारी कर रही हैं। हाल ही में दंतेवाड़ा में आई बाढ़ से प्रभावित होने के कारण पूनम का पूरा परिवार राहत शिविर में है। आज मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पूनम से मुलाकात कर उनका हाल-चाल जाना। मुख्यमंत्री की पहल पर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी हेतु पूनम को आवश्यक पुस्तकें और एक नया टेबलेट उपलब्ध कराया गया है। अब पूनम की यूपीएससी तैयारी में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आएगी।

दंतेवाड़ा जिले के चूड़ीटिकरा पारा वार्ड की रहने वाली पूनम पटेल पिछले तीन वर्षों से यूपीएससी परीक्षा की तैयारी कर रही हैं। हाल ही में आई बाढ़ में उनका घर क्षतिग्रस्त हो गया और घर का सारा सामान बह गया। पूनम ने बताया कि बाढ़ के पानी में उनकी सभी पुस्तकें बह गईं और टेबलेट भी खराब हो गया। पूनम ने कहा कि उनके पिता संतोष पटेल किराना दुकान चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं और उन्हीं की आमदनी से बड़ी मुश्किल से एक-एक पैसा जोड़कर यूपीएससी की पढ़ाई के लिए टेबलेट खरीदा था। बाढ़ के पानी में पुस्तकें और टेबलेट खराब हो जाने से पूनम आगे की तैयारी को लेकर बेहद चिंतित थीं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर जिला प्रशासन द्वारा पूनम को नया टेबलेट और प्रतियोगी परीक्षाओं की आवश्यक पुस्तकें उपलब्ध कराई गईं। इस सहायता से पूनम को बड़ी राहत मिली है। अब पूनम के प्रशासनिक अधिकारी बनने की राह में बाढ़ भी बाधा नहीं डाल पाएगी।


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