Media24Media.com: #डिजिटल अरेस्ट

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मोबाइल बना जेल, ठग बने अफसर - सनसनीखेज साइबर केस

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 ग्वालियर। नए साल में मध्यप्रदेश का अब तक का सबसे बड़ा “डिजिटल अरेस्ट” ठगी मामला सामने आया है। ठगों ने आईपीएस और सीबीआई अधिकारी बनकर एक 75 वर्षीय रिटायर्ड उप पंजीयक को 31 दिनों तक मानसिक रूप से बंधक बनाए रखा और उनसे 1 करोड़ 12 लाख रुपए ठग लिए।


पीड़ित बिहारी लाल गुप्ता, निवासी खेड़ापति कॉलोनी, मकान नंबर बी-57, 16 नवंबर 2025 से 3 जनवरी 2026 तक लगातार ठगों के संपर्क में रहे। इस दौरान उन्हें डर, धमकी और गिरफ्तारी का भय दिखाकर घर से बाहर निकलने तक से रोका गया।

अनजान कॉल से शुरू हुआ ठगी का जाल

16 नवंबर 2025 को बिहारी लाल गुप्ता के मोबाइल पर एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को TRAI अधिकारी रोहित शर्मा बताया और कहा कि उनका मोबाइल नंबर और आधार कार्ड बंद होने वाला है। जब बुजुर्ग ने कारण पूछा तो ठग ने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग केस में शामिल बताते हुए गिरफ्तारी की बात कही।

कुछ ही मिनटों बाद बताए गए नंबर से व्हाट्सएप वीडियो कॉल आया। कॉल पर पुलिस की वर्दी में बैठे युवक ने खुद को IPS नीरज ठाकुर बताया।

CBI जांच का डर दिखाकर बैंक बैलेंस की जानकारी ली

फर्जी आईपीएस अधिकारी ने बताया कि संदीप कुमार नामक व्यक्ति मनी लॉन्ड्रिंग केस में पकड़ा गया है, जिसने 2 लाख रुपए में बुजुर्ग का ICICI बैंक खाता खरीदा और उससे करोड़ों का लेन-देन किया गया।

इसके बाद ठगों ने बुजुर्ग से

  • परिवार के सदस्यों की जानकारी
  • संपत्ति का विवरण
  • बैंक खातों और बैलेंस की पूरी जानकारी
    ले ली।

CBI अधिकारी बनकर लिखवाया आवेदन

फर्जी आईपीएस ने कहा कि बुजुर्ग होने के कारण उन्हें अभी गिरफ्तार नहीं किया जा रहा, लेकिन “प्री-इन्वेस्टिगेशन” के लिए उन्हें CBI अधिकारी को आवेदन देना होगा। ठगों ने आवेदन लिखवाकर व्हाट्सएप पर खुद को ही भेजने को कहा, जिससे भरोसा और डर दोनों बढ़ता गया।

वीडियो देखकर खुली आंखें

लगभग 31 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रहने के बाद, दो दिन पहले मोबाइल पर डिजिटल अरेस्ट से सावधान रहने वाला एक वीडियो देखने पर बुजुर्ग को ठगी का एहसास हुआ। रविवार शाम उन्होंने पुलिस से संपर्क किया, जिसके बाद क्राइम ब्रांच में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

परिवार बाहर, अकेलेपन का उठाया फायदा

बिहारी लाल गुप्ता के चार बेटे हैं, जो सभी मल्टीनेशनल कंपनियों में उच्च पदों पर कार्यरत हैं और शहर से बाहर रहते हैं। ठगों ने इसी अकेलेपन और भरोसे का फायदा उठाकर इस बड़ी ठगी को अंजाम दिया।

CyberFraud: 5 दिन 'डिजिटल अरेस्ट', बुजुर्ग से 81 लाख की ठगी

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 Digital Arrest : राष्ट्रीय राजधानी के पास फरीदाबाद के बल्लभगढ़ में साइबर ठगों ने 68 वर्षीय विष्णुपद चटर्जी को पांच दिन तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखकर 81 लाख रुपये की ठगी की। पुलिस ने बताया कि शिकायतकर्ता ने बल्लभगढ़ थाना में तहरीर दी है, जिसके आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी गई है।


चटर्जी ने बताया कि 14 अक्टूबर को अपराह्न 2:29 बजे उन्हें फोन आया। कॉल करने वालों ने खुद को पुलिस और CBI अधिकारी बताया और कहा कि उनके खिलाफ धनशोधन और मानव तस्करी जैसी अवैध गतिविधियों में मामला दर्ज किया गया है। ठगों ने उन्हें वीडियो कॉल पर पांच दिन तक रखा, धमकाया और रकम का भुगतान करने के लिए मजबूर किया।

भुगतान का विवरण:

  • 16 अक्टूबर: 51 लाख रुपये का भुगतान।
  • 17 अक्टूबर: 30 लाख रुपये का भुगतान आरटीजीएस के माध्यम से।

फरीदाबाद पुलिस के प्रवक्ता ने कहा कि शिकायत मिलने के बाद मामला दर्ज कर आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।

डिजिटल अरेस्ट क्या है?

‘डिजिटल अरेस्ट’ एक तरह की साइबर ठगी तकनीक है जिसमें अपराधी फोन या वीडियो कॉल के माध्यम से शिकार को वर्चुअल रूप से गिरफ्तार करने का डर दिखाते हैं। इस प्रक्रिया में व्यक्ति को मानसिक रूप से डराया और वित्तीय दबाव में लाकर रकम वसूल की जाती है।

CBI अफसर बनकर डराया: डिजिटल अरेस्ट के नाम पर महिला से 12.5 लाख की ठगी, आरोपी गिरफ्तार

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 रायपुर :  भिलाई से साइबर ठगी का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। ठगों ने खुद को CBI और क्राइम ब्रांच का अफसर बताकर एक महिला को मानसिक दबाव में रखा और डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 12.5 लाख रुपये ठग लिए। पुलिस ने मेरठ से एक आरोपी को गिरफ्तार किया है।


5 दिन तक घर में रखा डिजिटल अरेस्ट में, गहने गिरवी और जमा पूंजी निकलवाई

भिलाई सेक्टर-7 की रहने वाली शोभा झा को 1 जुलाई 2025 को एक अनजान कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को CBI और क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताते हुए महिला पर मनी लॉन्ड्रिंग और ठगी जैसे गंभीर आरोप लगाए।

ठगों ने IPC की धाराएं गिनाकर जेल भेजने की धमकी दी और उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ में डाल दिया। 5 दिन तक घर में बंद रखकर महिला से गहने गिरवी रखवाए, बैंक खातों से जमा पूंजी निकलवाई और पेंशन खाते से भी रकम RTGS के जरिए ठगों के खाते में ट्रांसफर करवा ली गई। कुल मिलाकर 12.5 लाख रुपये हड़प लिए गए।

तकनीकी जांच से बड़ा खुलासा

दुर्ग पुलिस प्रवक्ता पद्मश्री तवर ने बताया कि भिलाई नगर थाना और ACCU की टीम ने तकनीकी जांच के आधार पर मेरठ से मोह. फैजल अहमद को गिरफ्तार किया। पूछताछ में सामने आया कि मेरठ निवासी सुहैल कॉल कन्वर्टर मशीन में लोकल सिम लगाकर कॉल बेचता था और गिरोह को तकनीकी मदद देता था।

क्रिप्टो के जरिए रकम की हेराफेरी

जांच में यह भी सामने आया कि ठगी की रकम को USDT क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर हवाला के जरिए भारतीय मुद्रा में कन्वर्ट किया जाता था। घटना से इलाके में सनसनी फैल गई है।

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