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राज्य सरकार जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने के लिए प्रतिबद्ध - मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल की संयुक्त अध्यक्षता में आज नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित बैठक में प्रदेश में “जल संचय-जन भागीदारी 2.0” अभियान के क्रियान्वयन की गहन समीक्षा की गई। केंद्रीय मंत्री पाटिल इस बैठक में वर्चुअली शामिल हुए और बैठक को संबोधित किया। इस दौरान बिलासपुर, दुर्ग और सूरजपुर जिले के कलेक्टरों ने अपने-अपने जिलों में अभियान के अंतर्गत संचालित कार्यों और गतिविधियों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जल संकट 21वीं सदी की केवल गंभीर पर्यावरणीय ही नहीं, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और विकासात्मक चुनौती भी बन चुका है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण को स्थायी और प्रभावी बनाने के लिए जनभागीदारी अनिवार्य है।उन्होंने देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के उस संदेश का उल्लेख किया, जिसमें पानी के उपयोग को प्रसाद के समान मानते हुए जल के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन से प्रेरित होकर राज्य सरकार जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अभियान के पहले चरण में छत्तीसगढ़ ने देशभर में द्वितीय स्थान प्राप्त किया तथा विभिन्न जिलों को भी अलग-अलग श्रेणियों में पुरस्कार मिले। पहले चरण में सामुदायिक भागीदारी के मॉडल पर कार्य करते हुए बड़े पैमाने पर बोरवेल रिचार्ज, रूफटॉप रेनवॉटर हार्वेस्टिंग, रिचार्ज शाफ्ट, सोक पिट और ओपनवेल रिचार्ज जैसी संरचनाओं का निर्माण किया गया। साय ने कहा कि प्रदेश में वर्तमान में 5 क्रिटिकल और 21 सेमी-क्रिटिकल भू-जल ब्लॉक चिन्हित हैं। वर्ष 2024 की तुलना में 2025 में इनमें से 5 ब्लॉकों में भू-जल निकासी में कमी और भू-जल स्तर में सुधार दर्ज किया गया है, जो जल संरक्षण प्रयासों के सकारात्मक परिणामों का संकेत है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अभियान के दूसरे चरण “जल संचय-जन भागीदारी 2.0” के अंतर्गत तकनीक आधारित और अधिक परिणाममूलक रणनीति अपनाई जा रही है। राज्य सरकार ने 31 मई 2026 तक 10 लाख जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया है। मुख्यमंत्री ने इसे जल सुरक्षा की दिशा में प्रदेश का ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि राज्य के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर एक विशेष पहल के तहत 10 एकड़ से अधिक भूमि वाले चार लाख से अधिक किसानों को अपने खेतों में डबरी निर्माण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस कार्य में जिला प्रशासन के साथ-साथ औद्योगिक समूहों का सहयोग भी लिया जा रहा है। इन डबरियों से भू-जल स्तर में वृद्धि के साथ किसानों को सिंचाई एवं मछली पालन जैसी अतिरिक्त सुविधाएँ मिलेंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दूसरे चरण में सभी जल संरचनाओं की जियोटैगिंग, ग्राम पंचायतों के वॉटर बजट तथा जल सुरक्षा योजनाओं के निर्माण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही गांवों के युवाओं को “जल मित्र” के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि अभियान को गति मिल सके। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि क्रिटिकल और सेमी-क्रिटिकल ब्लॉकों पर विशेष फोकस रखते हुए सेमी-क्रिटिकल ब्लॉकों में 40 प्रतिशत तथा क्रिटिकल ब्लॉकों में 65 प्रतिशत जल संरक्षण कार्यों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने प्रदेशवासियों से जल संरक्षण को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने, जल संरचनाओं की रक्षा करने और जल के प्रति जिम्मेदार सोच अपनाने का आह्वान भी किया।

केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण के क्षेत्र में हो रहे कार्यों और नवाचारों की सराहना की। उन्होंने कहा कि गत वर्ष जल संरक्षण के प्रयासों में छत्तीसगढ़ देशभर में दूसरे स्थान पर रहा, जो राज्य के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सितंबर 2024 को सूरत से ‘जल संचय जन भागीदारी अभियान’ की शुरुआत की थी और ‘कर्मभूमि से मातृभूमि के लिए जल संचयन में सहयोग’ का आह्वान किया था। इस अभियान का उद्देश्य जल संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देना है।

केंद्रीय मंत्री पाटिल ने प्रदेश के समस्त कलेक्टरों से मनरेगा के तहत जल संचय कार्यों के लिए प्राप्त राशि का पूर्ण और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने राजनांदगांव प्रवास के दौरान एक महिला सरपंच द्वारा स्वयं के प्रयासों से जल संचयन के लिए किए गए उल्लेखनीय कार्यों की प्रशंसा की। इसके साथ ही उन्होंने जल संचय में व्यापक जनभागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया।

बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो तथा जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार के सचिव श्री कांताराव और छत्तीसगढ़ के समस्त कलेक्टर वर्चुअली उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ में भी इस तकनीक के व्यापक उपयोग को सुनिश्चित किया जाएगा - मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को मध्यप्रदेश शासन के जल संसाधन विभाग के अपर मुख्य सचिव राजेश राजौरा ने भोपाल में सिंचाई की नवीनतम तकनीक PIN (Pressure Irrigation Network) के संबंध में विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया। उन्होंने बताया कि पारंपरिक सिंचाई पद्धतियों की तुलना में यह प्रणाली कहीं अधिक कुशल, आधुनिक और जल संरक्षण के अनुरूप है।


अपर मुख्य सचिव राजौरा ने प्रस्तुति के दौरान बताया कि जहाँ पारंपरिक नहर आधारित सिंचाई में लगभग 35 प्रतिशत एफिशिएंसी प्राप्त होती है, वहीं प्रेशर इरिगेशन प्रणाली में दक्षता बढ़कर 65 प्रतिशत तक पहुँच जाती है। इस तकनीक में प्रेशर आधारित पाइपलाइनों से सिंचाई की जाती है, जिससे पानी का रिसाव और अपव्यय कम होता है तथा बिजली की उल्लेखनीय बचत होती है। उन्होंने यह भी बताया कि इस प्रणाली में भू-अधिग्रहण की आवश्यकता न्यूनतम होती है, जिससे परियोजनाएं समय पर और लागत प्रभावी तरीके से पूरी की जा सकती है।


प्रस्तुति में उल्लेख किया गया कि मध्यप्रदेश में 13 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में इस तकनीक से सिंचाई की जा रही है और आगामी वर्षों में इसे 40 लाख हेक्टेयर तक विस्तारित करने का लक्ष्य है। इस मॉडल से न केवल जल उपयोग दक्षता बढ़ी है, बल्कि किसानों की उत्पादकता और सिंचाई सुविधा में भी महत्वपूर्ण सुधार देखने को मिला है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रेजेंटेशन की सराहना करते हुए कहा कि सिंचाई की यह उन्नत तकनीक जल प्रबंधन की वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप है। उन्होंने कहा, “हम इस तकनीक का छत्तीसगढ़ में भी अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करेंगे, ताकि राज्य के किसानों को कम पानी में अधिक सिंचाई सुविधा और बेहतर उत्पादन मिल सके। जल संरक्षण, ऊर्जा बचत और त्वरित क्रियान्वयन के दृष्टिकोण से यह तकनीक अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। इस तकनीक के माध्यम से भूमि अधिग्रहण किए बिना भी सिंचाई का लाभ मिल सकेगा।” मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने विभागीय अधिकारियों को इस तकनीक के अध्ययन, परीक्षण और चरणबद्ध क्रियान्वयन के लिए दिशा-निर्देश दिए।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, मध्यप्रदेश जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता विनोद देवड़ा, अधीक्षण यंत्री विकास राजोरिया और अधीक्षण यंत्री शुभंकर विश्वास भी उपस्थित थे।

उल्लेखनीय है कि पारंपरिक नहर आधारित सिंचाई में पानी का एक बड़ा हिस्सा रिसाव, वाष्पीकरण और अनियंत्रित बहाव के कारण व्यर्थ हो जाता है, जिससे खेतों तक वास्तविक जल आपूर्ति सीमित रहती है और पूरी कमांड एरिया में समान सिंचाई नहीं हो पाती। सामान्यतः पारंपरिक प्रणाली की कुल सिंचाई दक्षता केवल 35 प्रतिशत मानी जाती है। वहीं दूसरी ओर PIN (Pressure Irrigation Network) प्रणाली में पानी पाइपलाइनों के माध्यम से नियंत्रित दबाव के साथ सीधे खेतों तक पहुँचाया जाता है, जिससे पानी का अपव्यय लगभग शून्य हो जाता है। इस तकनीक से सिंचाई दक्षता बढ़कर 65 प्रतिशत से अधिक हो जाती है, जो जल संरक्षण और उत्पादन बढ़ाने दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

PIN प्रणाली में सिंचाई पूरी तरह पाइपलाइन आधारित होने के कारण नहर निर्माण की आवश्यकता कम हो जाती है और भू-अधिग्रहण भी न्यूनतम होता है। इससे परियोजनाओं की लागत घटती है और कार्य समय पर पूरे होते हैं। पारंपरिक सिंचाई की तुलना में इस तकनीक में पंपिंग दक्षता अधिक होती है, जिससे बिजली की उल्लेखनीय बचत होती है। समान दबाव से पानी वितरण होने के कारण खेतों के टेल एंड के क्षेत्रों को भी पर्याप्त पानी मिलता है। इस प्रणाली से फसलों की उत्पादकता में वृद्धि, जल प्रबंधन में सुधार और किसानों की आय में वृद्धि जैसे व्यापक लाभ प्राप्त होते हैं।

छत्तीसगढ़ को जल संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर मिला सम्मान, केराष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नई दिल्ली में राज्य के 12 जिलों को किया सम्मानित

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रायपुर। जल संरक्षण एवं सामुदायिक भागीदारी के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां अर्जित कर छत्तीसगढ़ के 12 जिलों रायपुर, गरियाबंद, महासमुंद, राजनांदगांव, बलौदाबाजार-भाटापारा, धमतरी, बालोद, बलरामपुर, बिलासपुर, रायगढ़, दुर्ग और सूरजपुर ने राष्ट्रीय स्तर पर नया इतिहास रच दिया है। विज्ञान भवन, नई दिल्ली में कल आयोजित 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कार एवं जल संचय जनभागीदारी 1.0 अवार्ड समारोह में राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु ने इन जिलों को सम्मानित किया है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और संवेदनशील प्रशासनिक प्रयासों के परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ ने जल संरक्षण की दिशा में देशभर में विशेष पहचान बनाई है। पिछले दो वर्षों में राज्य सरकार के अभिनव प्रयासों और जनभागीदारी ने जल संचयन की दिशा में नए आयाम हासिल किए हैं। मुख्यमंत्री ने इन जिलों के नागरिकों और जिला प्रशासन को अपनी शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि जल संचयन के प्रति लोगों में आई यह चेतना जल के समुचित उपयोग को बढ़ावा देगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश का जल भविष्य सुरक्षित करने में यह पुरस्कार प्रेरणादायी होगा। 

रायपुर जिले को जल संचय जनभागीदारी अभियान में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया है। देशभर के नगर निगमों में रायपुर नगर निगम प्रथम स्थान पर रहा, जबकि पूर्वी जोन कैटेगरी 01 में रायपुर जिला तीसरे स्थान पर रहा। रायपुर जिले और नगर निगम ने मिलकर सामुदायिक सहभागिता को जल संचय का व्यापक अभियान बनाया। रायपुर नगर निगम द्वारा 33,082 कार्य और जिला प्रशासन द्वारा 36,282 कार्य किए गए हैं।

राजनांदगांव जिले को ईस्ट जोन के अंतर्गत राष्ट्रीय जल अवार्ड में प्रथम स्थान तथा जनभागीदारी केटेगरी 01 में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है तथा प्रोत्साहन स्वरूप 2 करोड़ रूपए की राशि प्रदान की गई है। यहां 58,967 जल संचय के कार्य जनभागीदारी से पूर्ण किए गए हैं। बालोद जिले को केटेगरी 01 में बेस्ट परफॉर्मिंग के लिए पहला स्थान प्राप्त हुआ है, साथ ही 2 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की गई। यहां 92,742 नई जल संरचनाएँ निर्मित की गई। 

महासमुंद जिले को कैटेगरी 2 अंतर्गत प्रथम स्थान के लिए सम्मानित किया है। यहां 35,182 जल संरचनाओं का निर्माण किया गया है। बलौदाबाजार-भाटापारा जिले को कैटेगरी 2 के तहत दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है तथा प्रोत्साहन स्वरूप 01 करोड़ रूपए की पुरस्कार राशि दी गई है। यहां 30,927 संरचनाओं का निर्माण किया गया है। गरियाबंद जिला को केटेगरी-2 में देश में तीसरा स्थान प्राप्त हुआ है तथा प्रोत्साहन स्वरूप एक करोड़ रूपए की राशि मिली है। यहां 26,025 सतही जल के बेहतर रख-रखाव के कार्य किए गए हैं। 

बिलासपुर को केटेगेरी 03 में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है तथा प्रोत्साहन स्वरूप 25 लाख रूपए की पुरस्कार राशि मिली है। यहां 21,058 जल संरचनाओं का निर्माण कार्य किया गया है। दुर्ग जिले को केटेगरी-03 में 16वां स्थान प्राप्त हुआ है तथा 25 लाख रूपए की प्रोत्साहन राशि दी गई है। यहां 5010 जल संरक्षण परियोजनाओं का निर्माण किया गया है। बलरामपुर जिले को केटेगरी-03 में 6वें स्थान के लिए सम्मानित किया गया है तथा 25 लाख रूपए की प्रोत्साहन राशि दी गई है। यहां 8644 जल संरक्षण परियोजनाओं का निर्माण किया गया है। 

धमतरी जिले को केटेगरी 3 में 8वां स्थान के लिए सम्मानित कर 25 लाख रूपए की प्रोत्साहन राशि दी गई है। यहां 7674 जन संरक्षण परियोजनाओं का निर्माण किया गया है। रायगढ़ जिले को केटेगरी 3 में द्वितीय स्थान के लिए सम्मानित कर 25 लाख रूपए की प्रोत्साहन राशि दी गई है। यहां 19088 जल संरक्षण परियोजनाओं का निर्माण किया गया है। सूरजपुर जिले को केटेगरी 3 में 12वां स्थान के लिए सम्मानित कर 25 लाख रूपए की प्रोत्साहन राशि दी गई है तथा यहां 5797 जल संरक्षण परियोजनाओं का निर्माण किया गया है।

जल संचय जनभागीदारी 1.0 में छत्तीसगढ़ का परचम – राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा स्थान, रायपुर नगर निगम को प्रथम पुरस्कार

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रायपुर। जल संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने एक बार फिर इतिहास रचा है। जल संचय जनभागीदारी 1.0 (JSJB)के परिणामों में प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा स्थान हासिल किया है। यह उपलब्धि केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि जल प्रबंधन और जनभागीदारी के संगम का जीवंत उदाहरण है। प्रदेश में अब तक 4,05,563 कार्य पूर्ण कर जल संरक्षण को एक जन-आंदोलन में बदल दिया गया है।

छत्तीसगढ़ ने जल संरक्षण में रचा नया इतिहास – मुख्यमंत्री ने दी जनता को बधाई

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस सफलता पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित जल-संपदा की नींव है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के क्षेत्र में यह उस सामूहिक चेतना का प्रमाण है, जिसने छत्तीसगढ़ को देश के लिए एक प्रेरणा बना दिया है।

प्रदेश के शहरी निकायों में भी छत्तीसगढ़ ने अपनी श्रेष्ठता स्थापित की है। रायपुर नगर निगम ने पूरे देश में शीर्ष स्थान प्राप्त करते हुए राष्ट्रीय पुरस्कार जीता है। यहाँ 33,082 कार्यों के माध्यम से न केवल जल संरक्षण को बढ़ावा दिया गया, बल्कि इसे जन-सहभागिता आधारित शहरी विकास का मॉडल बना दिया गया। मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि को रायपुर के नागरिकों और निगम प्रशासन के सामूहिक प्रयासों का परिणाम बताया।

जिला स्तर पर भी छत्तीसगढ़ का प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा। कैटेगरी-1 में बालोद को प्रथम स्थान, राजनांदगांव को द्वितीय स्थान और रायपुर को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ है। इन तीन जिलों को पुरस्कार स्वरूप ₹2-2 करोड़ की राशि प्राप्त होगी। वहीं केटेगरी 2 में महासमुंद, बलौदा बाजार और गरियाबंद को ₹1-1 करोड़ से सम्मानित किया जाएगा। कैटेगरी 3 में बिलासपुर, रायगढ़, बलरामपुर, धमतरी, सुरजपुर और दुर्ग को उनकी उत्कृष्ट भागीदारी के लिए ₹25-25 लाख के पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। यह दर्शाता है कि पूरे प्रदेश में जल संरक्षण को प्राथमिकता के साथ अपनाया गया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह सम्मान केवल प्रशासन का नहीं, बल्कि हर किसान, हर महिला, हर नौजवान और हर जनप्रतिनिधि का है, जिन्होंने पानी की हर बूंद को बचाने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी से ही जनकल्याण संभव है और छत्तीसगढ़ ने इसे सिद्ध कर दिखाया है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह उपलब्धि राज्य की ‘जन-संवाद एवं जनभागीदारी आधारित सुशासन नीति’ का प्रत्यक्ष परिणाम है। मुख्यमंत्री ने जल संरक्षण को प्रदेश की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था और दीर्घकालिक विकास का सबसे महत्वपूर्ण आधार बताया।

रायपुर नगर निगम को मिले राष्ट्रीय सम्मान पर मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से निगम प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और नागरिकों की सराहना की। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्र में सामुदायिक सहयोग से जल संचय की यह मिसाल पूरे देश के लिए अनुकरणीय है और अन्य नगर निगम भी इससे सीख सकते हैं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों का आह्वान किया कि जल संरक्षण के इस अभियान को केवल सरकारी कार्यक्रम न मानें, बल्कि इसे जीवनशैली का हिस्सा बनाएं। उन्होंने कहा कि बूंद-बूंद का संरक्षण ही भविष्य की जल-सुरक्षा की गारंटी है।

छत्तीसगढ़ की यह उपलब्धि एक बार फिर साबित करती है कि जब सरकार और जनता मिलकर कार्य करें तो असंभव भी संभव हो जाता है। JSJB 1.0 की सफलता ने न केवल प्रदेश को सम्मान दिलाया है, बल्कि इसे जल प्रबंधन का राष्ट्रीय मॉडल भी बना दिया है।


मोर गांव मोर पानी महाभियान के तहत जल संरक्षण की अनूठी पहल

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 रायपुर : सरगुजा जिले में मोर गांव मोर पानी महाभियान के तहत जल संरक्षण और भू.जल स्तर को बढ़ाने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किया जा रहा है। कलेक्टर विलास भोसकर और जिला मुख्य कार्यपालन अधिकारी विनय कुमार अग्रवाल के मार्गदर्शन में मनरेगा योजना के तहत जल संवर्धन के लिए विभिन्न संरचनाओं का निर्माण तेज गति से जारी है।


जनपद पंचायत उदयपुर के पांच पंचायतों में पलकाए फुलचूहीए रिखीए ललाती और केसमा इस महाभियान का केंद्र बनी हैं। यहां पहाड़ी ढलानों पर कुल 125 संरचनाएं बनाई जा रही हैंए जिनमें स्ट्रेगर ट्रेंचए कंटूर ट्रेंचए वाटर एब्जॉरप्शन ट्रेंचए लूज बोल्डर चेक डैमए गली प्लग और डबरी शामिल हैं। इन संरचनाओं का मुख्य उद्देश्य बरसात के मौसम में नालों के माध्यम से बहकर व्यर्थ जाने वाले पानी को रोकना और उसे धरती में समाहित कर भू.जल स्तर को बढ़ाना है।

GIS तकनीक से वैज्ञानिक प्लानिंग

इन कार्यों की योजना बनाने और कार्यान्वयन में आधुनिक GIS तकनीक ;जियोग्राफिक इन्फॉर्मेशन सिस्टमद्ध का उपयोग किया जा रहा है। GIS तकनीक की मदद से रिज टू वैली ;पहाड़ी की चोटी से घाटी तकद्ध सिद्धांत पर आधारित स्ट्रक्चर्स की प्लानिंग की गई है ताकि बारिश का पानी व्यवस्थित तरीके से संरचनाओं में एकत्र हो और अधिकतम जल संचयन हो सके।

मिट्टी कटाव पर भी लगेगा अंकुश

पूर्व में इन क्षेत्रों में वर्षाजल के बहाव से बड़े पैमाने पर मिट्टी कटाव की समस्या उत्पन्न होती थी। अब इन संरचनाओं के निर्माण से न केवल जल संरक्षण होगा बल्कि मिट्टी कटाव की समस्या पर भी स्थायी समाधान मिलेगा। इन संरचनाओं से नालों का बहाव धीमा होगा और पानी धीरे.धीरे भूमि में रिसकर भू.जल भंडार को समृद्ध करेगा।

ग्रामीणों में उत्साहए प्रशासन को धन्यवाद

इस महाभियान से ग्रामीणों में भी खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने प्रशासन की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह कार्य उनके गांवों की जल समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि इन कार्यों से आने वाले वर्षों में सिंचाईए पीने के पानी और पर्यावरण संरक्षण में बड़े बदलाव दिखेंगे।

प्रशासन की प्राथमिकताः जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा

कलेक्टर विलास भोसकर ने मार्गदर्शन में मोर गांव मोर पानी महाभियान के तहत जिले में जल संरक्षण की दिशा में हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। सभी संबंधित विभागों को समन्वय के साथ कार्य करने और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि यह अभियान जिले में जल संकट दूर करने में मील का पत्थर साबित हो। जिला मुख्य कार्यपालन अधिकारी विनय कुमार अग्रवाल के नेतृत्व में जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण जनसहभागिता से किया जा रहा है ताकि लोगों में भी जल के प्रति जागरूकता बढ़े और वे अपनी जिम्मेदारी निभाएं।

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