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CG NEWS : किसानों के हक पर डाका डालने वालों पर सख्ती, हजारों बोरी खाद जब्त

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 धमतरी। खरीफ सीजन शुरू होने से पहले किसानों को उचित मूल्य पर खाद उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने सख्ती बढ़ा दी है। उर्वरकों की कालाबाजारी, अधिक कीमत वसूली और स्टॉक में गड़बड़ी की शिकायतों के बाद जिलेभर में व्यापक जांच अभियान चलाया गया। कार्रवाई के दौरान कई खाद विक्रेताओं की अनियमितताएं सामने आने पर प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई करते हुए लाइसेंस निलंबित कर बड़ी मात्रा में उर्वरक जब्त किए हैं।


कृषि विभाग की टीम ने मगरलोड विकासखंड के करेली छोटी स्थित एक उर्वरक विक्रय केंद्र का निरीक्षण किया। जांच में पाया गया कि किसानों को निर्धारित दर से अधिक कीमत पर रासायनिक खाद बेची जा रही थी। साथ ही ग्राहकों को कम्प्यूटरीकृत बिल भी नहीं दिया जा रहा था। शिकायत सही पाए जाने पर प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से दुकान का लाइसेंस निलंबित कर दिया और वहां रखी 859 बोरी रासायनिक खाद जब्त कर ली।

इसी तरह नगरी विकासखंड के बेलरगांव में दो खाद विक्रेताओं के यहां जांच के दौरान बड़ी मात्रा में जैविक खाद का भंडारण मिला। नियमों के उल्लंघन की आशंका के चलते एक प्रतिष्ठान से 600 बोरी और दूसरे से 100 बोरी जैविक खाद जब्त की गई। दोनों संचालकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।

वहीं कुरूद विकासखंड में जांच के दौरान कुछ खाद विक्रय केंद्रों पर गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। यहां पॉइंट ऑफ सेल (POS) मशीन में दर्ज स्टॉक और वास्तविक स्टॉक में अंतर पाया गया। इसके अलावा किसानों के लिए मूल्य सूची और उपलब्ध उर्वरकों की जानकारी भी प्रदर्शित नहीं की जा रही थी, जो नियमों का उल्लंघन है। मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने संबंधित प्रतिष्ठानों के उर्वरक लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए।

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसानों के हितों से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यापारी को बख्शा नहीं जाएगा और आगे भी ऐसी कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।

किसानों के लिए मुख्यमंत्री साय की बड़ी पहल : इस माह मिलेगा 60 हजार टन अतिरिक्त यूरिया

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर किसानों के हित में एक बड़ी राहत मिल रही है। भारत सरकार ने छत्तीसगढ़ के लिए 60 हजार टन अतिरिक्त यूरिया का आबंटन स्वीकृत किया है। इसमें सितम्बर माह के प्रथम सप्ताह में 20 हजार टन, द्वितीय सप्ताह में 35 हजार टन और शेष 5 हजार टन की आपूर्ति माह के अंत तक सुनिश्चित की जाएगी। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि किसानों की हर आवश्यकता पर राज्य सरकार संवेदनशील है और यह अतिरिक्त आबंटन उनकी खरीफ फसलों को सुरक्षित रखने में सहायक होगा।


मार्कफेड अधिकारियों ने बताया कि चालू खरीफ सीजन के लिए 28 अगस्त की स्थिति में सहकारी क्षेत्र में 3 लाख 91 हजार 79 मीट्रिक टन और निजी क्षेत्र में 3 लाख 11 हजार 563 मीट्रिक टन, इस तरह कुल 7 लाख 2 हजार 642 मीट्रिक टन यूरिया का भंडारण किया गया है। इसके विरुद्ध 6 लाख 38 हजार 599 मीट्रिक टन यूरिया किसानों को वितरित किया जा चुका है। इसमें 3 लाख 42 हजार 444 मीट्रिक टन सहकारी क्षेत्र और 2 लाख 96 हजार 155 मीट्रिक टन निजी क्षेत्र से वितरण शामिल है। यह आँकड़ा पिछले वर्ष की इसी अवधि में हुए 6 लाख 17 हजार 798 मीट्रिक टन वितरण से अधिक है, जो इस बार की बेहतर आपूर्ति व्यवस्था का प्रमाण है।

प्रदेश में किसानों के लिए नैनो खाद की भी पर्याप्त व्यवस्था की गई है। सहकारी क्षेत्र में 1 लाख 78 हजार 919 और निजी क्षेत्र में 1 लाख 12 हजार 140, इस तरह कुल 2 लाख 91 हजार 59 बॉटल नैनो यूरिया का भंडारण हुआ है। इसी प्रकार सहकारी क्षेत्र में 1 लाख 58 हजार 809 और निजी क्षेत्र में 79 हजार 810, कुल 2 लाख 38 हजार 619 बॉटल नैनो डीएपी संग्रहित किया गया है। अब तक किसानों को 2 लाख 32 हजार 652 बॉटल नैनो यूरिया और 1 लाख 85 हजार 136 बॉटल नैनो डीएपी वितरित किया जा चुका है।

प्रदेश में चालू खरीफ सीजन के लिए भारत सरकार ने 14.62 लाख टन रासायनिक खाद का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके विरुद्ध सहकारी एवं निजी क्षेत्रों में 15.64 लाख टन का भंडारण कर लिया गया है। भंडारण के आधार पर किसानों को अब तक 13.19 लाख टन खाद वितरित किया गया है। यह व्यवस्था बताती है कि समितियों और निजी क्षेत्रों में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध हैं और किसानों को किसी तरह की कठिनाई नहीं होगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि खरीफ सीजन में किसानों को खाद की आपूर्ति उनकी समयबद्ध जरूरतों के अनुरूप प्राथमिकता से की जा रही है। अब तक निर्धारित लक्ष्य का 98 प्रतिशत यूरिया किसानों तक पहुँच चुका है। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि किसानों को मौसम और फसल की आवश्यकताओं के अनुरूप पर्याप्त खाद की आपूर्ति लगातार जारी रहेगी और उनकी उपज सुरक्षित रहेगी।

इस संबंध में गत दिनों कृषि मंत्री रामविचार नेताम और राज्य के सांसदों ने भी केंद्रीय उर्वरक मंत्री जे.पी. नड्डा से भेंट कर छत्तीसगढ़ के किसानों की मांग रखी थी। मुख्यमंत्री साय के मार्गदर्शन में केंद्र सरकार से लगातार संपर्क किया गया और किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त 60 हजार टन यूरिया का आबंटन स्वीकृत किया गया।

अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में सहकारी सोसायटियों और निजी विक्रेताओं के माध्यम से खाद का वितरण सुव्यवस्थित तरीके से किया जा रहा है। किसान समितियों में आसानी से खाद उपलब्ध करा पा रहे हैं और समय पर आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। इससे खेती-किसानी प्रभावित होने के बजाय और मजबूती पा रही है। प्रदेश के विभिन्न जिलों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, किसानों ने सरकार और प्रशासन की इस पहल पर संतोष व्यक्त किया है। उनका कहना है कि समय पर यूरिया और अन्य खाद उपलब्ध होने से बुवाई और फसल प्रबंधन का काम सुचारू रूप से हो रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। उन्होंने कहा कि खाद, बीज और सिंचाई जैसी मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र और राज्य के समन्वित प्रयासों से खरीफ सीजन में किसानों को समुचित राहत मिलेगी और छत्तीसगढ़ कृषि उत्पादन में नए कीर्तिमान स्थापित करेगा।

भारत सरकार द्वारा अधिप्राप्ति सुधारों पर राज्य स्तरीय कार्यशाला सम्पन्न

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रायपुर- खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग, भारत सरकार द्वारा खाद्यान्न उपार्जन प्रणाली में दक्षता, पारदर्शिता तथा तकनीकी समावेश को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से अधिप्राप्ति सुधारों पर राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन नवा रायपुर में किया गया, जिसमें प्रदेश के खाद्य, सहकारिता एवं कृषि विभाग के अधिकारी शामिल हुए। कार्यशाला के मुख्य अतिथि भारतीय खाद्य निगम के सीएमडी श्री आशुतोष अग्निहोत्री, भारत सरकार की संयुक्त सचिव सुश्री शिखा तथा छत्तीसगढ़ की खाद्य सचिव श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले की उपस्थिति में दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यशाला का शुभारंभ किया गया।

इस अवसर पर भारत सरकार के अधिकारियों द्वारा कस्टम मिलिंग में नवाचार, 10 प्रतिशत ब्रोकन चावल के संबंध में नवीन निर्देश, राइस मिलों के संयुक्त भौतिक सत्यापन की नई मानक संचालन प्रक्रिया, सेंट्रल फूड प्रोक्योरमेंट पोर्टल तथा सेंट्रल फूड स्टोरेज पोर्टल में खाद्यान्न के उपार्जन व वितरण जैसे विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई, जिसमें विभिन्न जिलों के जिला कलेक्टर, खाद्य अधिकारी एवं जिला विपणन अधिकारी भी शामिल हुए।

भारत सरकार की संयुक्त सचिव  सुश्री शिखा ने राइस मिलों में ब्रोकन चावल के संबंध में शासन स्तर पर जारी पॉलिसी की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में 25 प्रतिशत तक के ब्रोकन चावल को यांत्रिक उन्नयन के माध्यम से 10 प्रतिशत तक लाने और शेष ब्रोकन चावल को खुले बाजार में विक्रय करने की योजना लागू की जाएगी। भारत सरकार के मार्गदर्शन में भारतीय खाद्य निगम और छत्तीसगढ़ खाद्य विभाग के समन्वय से सेंट्रल पूल अंतर्गत चावल उपार्जन की गति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसके तहत जून माह में प्रदेश को चावल के निराकरण हेतु 188 रैक उपलब्ध कराए गए, जिससे लगभग 6 लाख मीट्रिक टन चावल का भंडारण संभव हुआ है, और एफसीआई के माध्यम से प्रदेश में उपार्जित चावल कर्नाटक, तेलंगाना, महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों में कल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत वितरित किया जा रहा है। 

कार्यशाला में बताया गया कि कस्टम मिलिंग में पारदर्शिता तथा वर्तमान व्यवस्था एवं नीतिगत सुधार हेतु समय-समय पर संयुक्त भौतिक सत्यापन की मानक संचालन प्रक्रिया को अद्यतन किया गया है तथा अनिवार्य संयुक्त भौतिक सत्यापन हेतु राइस मिलों के चयन के लिए स्वचालन एवं सॉफ्टवेयर आधारित पद्धति अपनाने का निर्णय लिया गया है। प्रदेश के लगभग 25 लाख किसान 2,739 उपार्जन केंद्रों में समर्थन मूल्य पर धान बेचते हैं, और इन केंद्रों के अधोसंरचनात्मक सुधार पर भारत एवं राज्य सरकार सतत निगरानी रख रही है, जिसके लिए पीसीएसएपी सॉफ्टवेयर के माध्यम से उपार्जन केंद्रों में किए गए सुधार की प्रविष्टि करने संबंधी प्रशिक्षण दिया गया। धान उपार्जन में किए गए अतिरिक्त व्यय का दावा भारत सरकार को ऑनलाइन स्कैन मॉड्यूल के जरिए भेजने की प्रक्रिया की जानकारी भी दी गई, जिससे दावों का शीघ्र निपटारा संभव होगा, साथ ही धान उपार्जन एवं चावल भंडारण हेतु रूट ऑप्टिमाइजेशन पर भी चर्चा की गई। भारत सरकार के अधिकारियों ने अतिरिक्त मिनिमम थ्रेशहोल्ड पैरामीटर का शत-प्रतिशत अनुपालन करने पर प्रदेश की सराहना की। 

प्रदेश में धान उपार्जन एवं सार्वजनिक वितरण प्रणाली में किए गए नवाचारों, चावल उत्सव, टोकन तुहर हाथ तथा बस्तर क्षेत्र में संचालित नियद नेल्लानार योजना की जानकारी खाद्य सचिव श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले ने भारत सरकार के अधिकारियों को जानकारी दी। आगामी खरीफ वर्ष में धान उपार्जन हेतु किसानों के लिए एग्रीस्टेक पोर्टल पर पंजीयन अनिवार्य किया गया है, जिससे फर्जी खरीदी पर नियंत्रण होगा, और इस संबंध में जिला कलेक्टरों को आगामी माह में शत-प्रतिशत पंजीयन कराने हेतु प्रशिक्षित किया गया। कार्यशाला के समापन अवसर पर भारत सरकार के अधिकारियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर आभार व्यक्त किया गया। 

कार्यशाला में श्री दलजीत सिंह, कार्यकारी निदेशक, अधिप्राप्ति, भा.खा.नि., डॉ. अश्विनी कुमार गुप्ता, कार्यकारी निदेशक, पश्चिमी अंचल, श्री मातेश्वरी प्रसाद मिश्रा, भारत सरकार द्वारा भी आवश्यक प्रस्तुतिकरण एवं मार्गदर्शन दिया गया। इस अवसर पर विपणन संघ एवं नागरिक आपूर्ति निगम की प्रबंध संचालक श्रीमती किरण कौशल, संचालक खाद्य श्री कार्तिकेय गोयल, पंजीयक सहकारिता श्री कुलदीप शर्मा, महाप्रबंधक भा.खा.नि. श्री देवेश यादव सहित अन्य अधिकारी  उपस्थित थे।


किसान हित में राज्य शासन की मजबूत पहल, खरीफ सीजन में किसानों को समय पर मिल रहा खाद

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कोरबा- खरीफ का मौसम शुरू होते ही किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई देती हैं-  खाद, बीज, पानी... सब कुछ समय पर मिले, तभी मेहनत रंग लाती है। लेकिन इस बार तस्वीर थोड़ी अलग है। प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की दूरदर्शिता और मंशा के अनुरूप, अन्नदाताओं की परेशानियों को दूर करने खरीफ सीजन की शुरुआत से पहले ही सहकारी समितियों में पर्याप्त मात्रा में उन्नत किस्म की खाद और बीज का पर्याप्त भंडारण कर दिया गया।

कोरबा विकासखंड की कोरकोमा आदिम जाति सेवा सहकारी समिति में सरकार की किसान हितैषी पहल का स्पष्ट रूप देखने को मिलती है। ग्राम कोरकोमा के किसान श्री दुबराज सिंह राठिया जब समिति में अपने खरीफ सीजन में फसल की बेहतर पैदावार के लिए खाद बीज लेने पहुँचे, तो उन्हें बिना किसी परेशानी के डीएपी, यूरिया, एनपीके, सुपर फास्फेट जैसे उर्वरक उपलब्ध हुआ। उन्हें अनावश्यक समितियों के बार -बार चक्कर लगाने नही पड़े। हितग्राही दुबराज सिंह ने बताया कि पहले हमें खाद के लिए समितियों में भटकना पड़ता था, पर इस बार खाद बीज  समय पर मिल गया। वक्त पर खाद मिलने से खेती की तैयारी आसान हो गई। खेतों में बुआई का काम पूर्ण हो गया है और अब हम निश्चिंत होकर बेहतर पैदावार की उम्मीद कर सकते हैं। किसान श्री राठिया ने बताया कि उनकी लगभग 10 एकड़ जमीन है। आज वे समिति से 10 बोरी डीएपी व 5 बोरी यूरिया खाद ले जा रहे है। खाद खरीदने में उन्हें किसी प्रकार की समस्या नही हुई, समिति में आवश्यक दस्तावेज देने के साथ ही तत्काल उन्हें खाद प्रदान किया गया। उन्होंने बताया कि कुछ दिनों पहले ही वे समिति से 15 बोरी यूरिया, 5 बोरी सुपर फॉस्फेट, 5 बोरी पोटाश ले जा चुके है। आगे भी अपनी आवश्यकतानुसार खाद समिति से ले जाते रहेंगे। किसान दुबराज सिंह राठिया ने समय पर खाद मिलने पर राज्य शासन की किसान हितैषी नीति की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का धन्यवाद किया और कहा कि इससे खेती में बहुत सहूलियत हुई है।

कोरकोमा से लगभग 8 से 10 किलोमीटर दूर ग्राम केराकछार  के  किसान श्री बृजपाल राठिया ने समिति की व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि खाद की उपलब्धता समय पर होने से फसल की शुरुआत अच्छी हुई है। खेतों में बुआई का काम तेजी से हो रहा है।  उन्होंने बताया कि वे अपनी 12 एकड़ जमीन पर सपरिवार खेती करते है, पिछले सीजन में उन्होंने लगभग  200 क्विंटल  धान विक्रय किया था, और आज समिति से वे 10-10 बोरी यूरिया , डीएपी और आवश्यक खाद ले जा रहे है। बीते माह भी वे समिति से जरूरत की खाद ले गए थे। किसान बृजलाल ने कहा कि समय पर खाद प्राप्त होने से उनकी फसल की नींव मजबूत हुई है। इस वर्ष भी अच्छी फसल के पैदावार के लिए उनका पूरा परिवार मेहनत कर रहा है। 

कोरकोमा समिति के प्रबंधक श्री प्यारे लाल साहू ने कहा कि शासन की दूरदर्शी नीतियों के कारण समितियों में समय पर गुणवत्तापूर्ण खाद बीज की व्यवस्था हो सकी, जिससे किसानों को बड़ा लाभ मिला है। उन्होंने बताया कि कोरकोमा समिति में आस पास के 22 गांव के कुल 1503 किसान पंजीकृत है। खरीफ सीजन के दौरान  यूरिया, सुपर फॉस्फेट, पोटाश, डीएपी, एनपीके (लिक्विड) नैनो डीएपी, नैनो यूरिया जैसे रासायनिक उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण कर किसानों को प्राथमिकता से वितरण किया गया है, अभी भी समिति में सभी खाद पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि समिति में  सबेरे से ही खाद क्रय करने के लिए किसानों का आना जाना लगा रहता है। किसान केसीसी के माध्यम से खाद बीज क्रय कर रहे। समिति में किसानों की सहूलियत के पूरा ध्यान रखा जा रहा है। किसान आवश्यकतानुसार अपनी जरूरत का खाद समिति से ले जा रहे है। अब तक 75 प्रतिशत से अधिक किसानों ने खाद का उठाव कर लिया है।  समिति में आने वाले समय मे खाद की मांग की स्थिति होने पर विभागीय अधिकारियों को सूचित कर खाद का भंडारण सुनिश्चित किया जाएगा।



इस खरीफ सीजन में 48.85 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का है लक्ष्य, किसानों को 10.20 लाख मीट्रिक टन खाद और 7.22 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरित

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रायपुर- प्रदेश में खेती-किसानी का काम तेजी के साथ जारी है। राज्य में अब तक 36.42 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान, मक्का, कोदो, कुटकी, अरहर, मूंग, मूंगफली, रामतिल सहित विभिन्न फसलों की बोनी हो चुकी है, जो लक्ष्य का 75 प्रतिशत है। इस खरीफ सीजन में राज्य सरकार ने 48.85 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य रखा है।

         मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का निर्देश: किसानों को उनकी मांग के अनुरूप सुगमता से मिले खाद बीज

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने किसानों को खेती-किसानी में सहुलियतें प्रदान करने के लिए सभी आवश्यक सहयोग करने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किए हैं। उन्होंने किसानों को उनकी मांग के अनुसार सुगमता के साथ प्रमाणित खाद-बीज का वितरण करने को भी कहा हैं। कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री श्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा इन पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है। प्रदेश के किसानों को अब तक 10.20 लाख मीट्रिक टन खाद और 7.22 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का वितरण किया जा चुका है। 21 जुलाई 2025 की स्थिति में प्रदेश में अब तक 446.1 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई है, जबकि प्रदेश की औसत वार्षिक वर्षा 1238.7 मिमी है।  

कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष खरीफ 2025 के लिए प्रदेश में 4.95 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरण का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें समस्त स्त्रोतों से 7.88 लाख क्विंटल बीज का भंडारण कर अब तक 7.22 लाख क्विंटल बीज का वितरण किसानों को किया गया है, जो मांग का 146 प्रतिशत है। जबकि खरीफ वर्ष 2024 में राज्य में बीज निगम से 4.64 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का वितरण किया गया था।


इसी प्रकार प्रदेश में इस खरीफ सीजन में 14.62 लाख मीट्रिक टन उर्वरक वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उक्त लक्ष्य के विरूद्ध 13.78 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का सहकारी एवं निजी क्षेत्रों में भंडारण किया गया है। उक्त भंडारण के विरूद्ध 10.20 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किसानों को किया जा चुका है, जो लक्ष्य का 70 प्रतिशत है।     

कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि खाद-बीज वितरण व्यवस्था में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पर कड़ी कार्यवाही करने के भी निर्देश दिए गए हैं। साथ ही सोसायटियों में पर्याप्त खाद-बीज का भण्डारण कर सतत निगरानी करने को कहा गया है।


छत्तीसगढ़ में वैकल्पिक उर्वरकों की कोई कमी नहीं, सहकारी समितियों में एक लाख बोतल नैनो डीएपी का भंडारण

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रायपुर : राज्य में खरीफ सीजन 2025 के दौरान विभिन्न प्रकार के रासायनिक उर्वरकों की मांग को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने समय रहते न सिर्फ इसकी ठोस व्यवस्था सुनिश्चित की बल्कि रासायनिक उर्वरकों की आपूर्ति भंडारण एवं वितरण व्यवस्था पर भी लगातार निगरानी रख रही है, जिसके चलते राज्य में रासायनिक उर्वरकों के भण्डरण एवं उठाव की स्थिति बेहतर बनी हुई है।


डी.ए.पी. की कमी को पूरा करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने एन.पी.के., सुपर फास्फेट और नेनो डी.ए.पी. जैसे वैकल्पिक उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित कर किसानों के हितों का ध्यान रखा है। छत्तीसगढ़ में अब तक विभिन्न प्रकार के 12.27 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का भंडारण कर लिया गया है, जिससे खरीफ सीजन में किसानों को समय पर पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध हो सकें।

छत्तीसगढ़ राज्य में खरीफ 2025 में पूर्व में कुल 14.62 लाख मीट्रिक टन उर्वरक वितरण का लक्ष्य निर्धारित था। इसमें यूरिया 7.12 लाख, डी.ए.पी. 3.10 लाख, एन.पी.के. 1.80 लाख, पोटाश 60 हजार तथा सुपर फास्फेट 2 लाख मीट्रिक टन शामिल हैं। वर्तमान में कुल 12.27 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का भंडारण किया जा चुका है। डीएपी की आपूर्ति में कमी के चलते उर्वरक वितरण के लक्ष्य को संशोधित कर अन्य वैकल्पिक उर्वरकों जैसे- एनपीके, एसएसपी के लक्ष्य में 4.62 लाख मीट्रिक टन की उल्लेखनीय वृद्धि की है, जिसके चलते खरीफ सीजन 2025 में विभिन्न प्रकार के रासायनिक उर्वरकों की वितरण का लक्ष्य 17.18 लाख मीट्रिक टन हो गया है।

राज्य में अब तक 5.63 लाख मीट्रिक टन यूरिया का भंडारण एवं 3.76 लाख मीट्रिक टन का वितरण किया गया है। किसानों को अभी 1.86 लाख मीट्रिक टन यूरिया वितरण हेतु उपलब्ध है। यहां यह उल्लेखनीय है कि यूरिया का उपयोग धान फसल में तीन बार किया जाता है। पहली बार बुवाई अथवा रोपाई के समय कुल अनुशंसित मात्रा का 30 प्रतिशत, दूसरी बार 3 से 4 सप्ताह बाद कन्से निकलने के समय एवं तीसरी बार 7 से 8 सप्ताह बाद गभौट अवस्था में किया जाता है। इस प्रकार यूरिया का उपयोग बुवाई से लेकर सितंबर तक विभिन्न अवस्थाओं में किया जाना है, जिसके अनुरूप राज्य में यूरिया की चरणबद्ध आपूर्ति सुनिश्चित की गई है।

डी.ए.पी. के आयात में राष्ट्रीय स्तर पर कमी को देखते हुए राज्य शासन ने समय रहते वैकल्पिक उर्वरकों की दिशा में ठोस पहल की है, जिसके चलते एन.पी.के. को लक्ष्य बढ़ाकर 4.90 लाख तथा सुपर फास्फेट का 3.53 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया। वर्तमान में एन.पी.के. 11 हजार एवं सुपर फास्फेट 54 हजार मीट्रिक टन, लक्ष्य से अधिक भंडारित है, जिससे 23 हजार 600 मीट्रिक टन डी.ए.पी. में उपलब्ध फॉस्फेट तत्व की पूर्ति होगी।

छत्तीसगढ़ राज्य को चालू माह जुलाई में आपूर्ति प्लान के अनुसार कुल 2.33 लाख मी. टन उर्वरक मिलेगी। जिसमें यूरिया 1.25 लाख, डी.ए.पी. 48,850, एन.पी.के. 34,380, पोटाश 10 हजार एवं सुपर फास्फेट 76 हजार मी. टन शामिल हैं। जुलाई के अंत तक डी.ए.पी. का कुल भंडारण 1.95 लाख मी. टन तक होने की उम्मीद है। राज्य में डी.ए.पी. की कमी से बचाव हेतु 25 हजार मी. टन सुपर फास्फेट एवं 40 हजार मी. टन एन.पी.के. के अतिरिक्त भंडारण का लक्ष्य तय किया गया है। साथ ही, नैनो डी.ए.पी. उर्वरक को बढ़ावा देने हेतु सहकारी क्षेत्र में एक लाख बाटल का भंडारण किया जा रहा है, जिससे 25 हजार मीट्रिक टन पारंपरिक डी.ए.पी. की आवश्यकता की पूर्ति होगी।

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा अप्रैल माह से ही वैकल्पिक उर्वरकों के प्रचार-प्रसार हेतु पोस्टर पैम्फलेट तैयार कर समस्त सहकारी समितियों एवं उपार्जन केन्द्रों में प्रदर्शित किए गए डीएपी, उर्वरक के स्थान पर अन्य वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग के बारे में किसानों को जानकारी दी गई। इसी कड़ी में कृषि वैज्ञानिकों एवं कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा किसानों को विकसित कृषि संकल्प अभियान के दौरान एन.पी.के, सुपर फास्फेट एवं नेनो डी.ए.पी. के वैज्ञानिक उपयोग का प्रशिक्षण भी दिया। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा कुशल प्रबंधन कर खरीफ 2025 में उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति की जा रही है।

खरीफ सीजन 2025: छत्तीसगढ़ में 9.6 लाख किसानों को 4092 करोड़ रुपये का अल्पकालीन कृषि ऋण वितरित

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर सहकारिता मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में राज्य के अधिक से अधिक किसानों को अल्पकालीन कृषि ऋण वितरण किया जा रहा है। प्रदेश में किसानों को अब तक राज्य सहकारी बैंकों के द्वारा 2058 सहकारी समितियों के माध्यम से 4092.93 करोड़ रूपए का अल्पकालीन कृषि ऋण प्रदान किया गया है।


इस वर्ष राज्य सरकार द्वारा किसानों को 7800 करोड़ रूपए ऋण वितरण का लक्ष्य रखा गया है। अब तक वितरित कुल राशि लक्ष्य का लगभग 52.47 प्रतिशत है। किसानों को उनके मांग और रकबे के अनुरूप अल्पकालीन कृषि ऋण प्रदान किया जा रहा है। जबकि पिछले वर्ष आज की स्थिति में 4042.23 करोड़ रूपए के अल्पकालीन कृषि ऋण वितरित किए गए थे।

गौरतलब है कि राज्य सरकार द्वारा किसानों को खेती-किसानी की प्रारंभिक जरूरतों को पूरा करने तथा खेती-किसानी में सहूलियत प्रदान करने के उद्देश्य से किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना प्रारंभ किए गए थे। इसके अलावा किसानों को साहूकारों के चंगुलों से बचाना इसका एक प्रमुख उद्देश्य था। वर्तमान समय में इस योजना के माध्यम से प्रदेश के लाखों किसान इससे लाभान्वित हो रहे हैं। किसानों को प्रारंभिक जरूरतों के लिए न सिर्फ राहत मिली है, बल्कि फसलों के उत्पाद में लगातार वृद्धि हो रही है।

किसानों के लिए दलहन-तिलहन बीज नगद में उठाव हेतु उपलब्ध

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 महासमुंद : जिले के किसानों को आगामी खरीफ सीजन में बोनी हेतु सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से कृषि विभाग महासमुंद द्वारा दलहन एवं तिलहन फसलों के बीज नगद भुगतान पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। बीज की उपलब्धता पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर की जा रही है।


उप संचालक कृषि एफ.आर. कश्यप ने बताया कि कृषकगण वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी कार्यालय महासमुंद, बागबाहरा, पिथौरा, बसना एवं सरायपाली में संपर्क कर नगद भुगतान पर बीज प्राप्त कर सकते हैं। बीज की उपलब्धता इस प्रकार है। जिसमें दलहन फसल अंतर्गत उड़द (किस्म - इंदिरा-1) की मात्रा 79 क्विंटल, अरहर (किस्म - सी.जी.-1) 72.60 क्विंटल, तिलहन फसल अंतर्गत मूंगफली (किस्म - के 1812) 32.20 क्विंटल, तिल (किस्म - टी.के.जी.-308) 4.36 क्विंटल बरतुंगा फार्म में एवं हरित खाद हेतु डेंचा बीज की मात्रा 7.50 क्विंटल बोनी हेतु उपलब्ध है।

कृषि विभाग द्वारा किसानों से आग्रह किया गया है कि वे अपनी आवश्यकता अनुसार बीज क्रय कर खेती के रकबे में विस्तार करें, जिससे जिले में दलहन एवं तिलहन फसलों का उत्पादन बढ़ाया जा सके। यह बीज छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम लिमिटेड के माध्यम से उपलब्ध कराए जा रहे हैं। अधिक जानकारी के लिए कृषकगण अपने नजदीकी कृषि विभाग के कार्यालय में जाकर बीज की दर एवं मात्रा की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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