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अवैध उर्वरक परिवहन पर बड़ी कार्रवाई, 240 बोरी जैविक खाद जब्त

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रायपुर। किसानों के हितों की सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण कृषि आदानों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए छत्तीसगढ़ में अवैध उर्वरक परिवहन एवं विक्रय के विरुद्ध सख्त कार्रवाई लगातार जारी है। इसी क्रम में बलरामपुर जिले में कृषि एवं पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बिना वैध दस्तावेजों के परिवहन किए जा रहे 240 बोरी जैविक खाद से भरे एक ट्रक को जब्त किया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार 08 जुलाई को थाना बसंतपुर पुलिस को अवैध उर्वरक परिवहन की सूचना मिली। सूचना के आधार पर वाहन क्रमांक सीजी-04 पीयू-5217 की जांच की गई। जांच के दौरान चालक जैविक खाद के परिवहन संबंधी कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके बाद पुलिस ने वाहन को अभिरक्षा में लेकर कृषि विभाग को सूचित किया।

कृषि विभाग की टीम द्वारा वाहन का निरीक्षण करने पर उसमें 240 बोरी जैविक खाद परिवहन करते हुए पाया गया। नियमानुसार खाद का नमूना लेकर परीक्षण के लिए भेजा गया है। प्रारंभिक जांच में उक्त जैविक खाद हरियाली एग्रो, गोरखपुर (उत्तर प्रदेश) द्वारा निर्मित होना पाया गया, जिस पर निर्माण माह मई 2026 अंकित है।कृषि एवं पुलिस विभाग की संयुक्त उपस्थिति में वाहन को जब्त कर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की गई है।

उप संचालक कृषि ने बताया कि प्रकरण में उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 एवं प्रचलित नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जा रही है।

उन्होंने कहा कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण एवं प्रमाणित कृषि आदान उपलब्ध कराने तथा अवैध उर्वरक के परिवहन एवं विक्रय पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से जिले में जांच अभियान लगातार जारी रहेगा। 

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसानों के हितों से खिलवाड़ करने वाले तत्वों के विरुद्ध भविष्य में भी कठोर कार्रवाई की जाएगी।

धान खरीदी में नया रिकॉर्ड: 13 जनवरी तक 17.77 लाख किसानों के खातों में पहुंचा ₹23,448 करोड़

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में चल रहे धान खरीदी महाअभियान ने इस वर्ष ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। 

दिनांक 13 जनवरी 2026 तक खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में अब तक 17,77,419 किसानों से 105.14 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की जा चुकी है, जिसके एवज में किसानों को ₹23,448 करोड़ की रिकॉर्ड राशि का भुगतान किया गया है। यह अब तक के सभी वर्षों की तुलना में 13 जनवरी तक की सबसे अधिक खरीदी और सबसे अधिक भुगतान है।

यदि पिछले वर्षों के 13 जनवरी तक के आंकहोगा भीड़ों से तुलना की जाए तो सरकार की यह उपलब्धि और भी स्पष्ट रूप से सामने आती है। खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में 13 जनवरी तक 17,49,003 किसानों से 72.15 LMT धान की खरीदी की गई थी और ₹13,550 करोड़ का भुगतान हुआ था। वर्ष 2021-22 में इसी अवधि तक 17,09,834 किसानों से 68.77 LMT धान खरीदा गया था, जिसके बदले ₹13,410 करोड़ किसानों को दिए गए थे।

खरीफ विपणन वर्ष 2022-23 में 13 जनवरी तक 22,14,302 किसानों से 97.67 LMT धान की खरीदी की गई थी और ₹20,022 करोड़ का भुगतान हुआ था। इन सभी वर्षों की तुलना में वर्ष 2025-26 में धान खरीदी की मात्रा और किसानों को वितरित की गई राशि – दोनों ही उच्चतम स्तर पर पहुँच चुकी हैं।

आंकड़ों से स्पष्ट है कि जहां 2020-21 में 72.15 LMT, 2021-22 में 68.77 LMT और 2022-23 में 97.67 LMT धान खरीदा गया था, वहीं 2025-26 में मात्र 13 जनवरी तक ही 105.14 LMT धान खरीदा जा चुका है, जो अपने-आप में एक नया रिकॉर्ड है। इसी तरह किसानों को मिलने वाली राशि भी सीधे बढ़कर ₹23,448 करोड़ तक पहुँच गई है।

यह ऐतिहासिक बढ़ोतरी इस बात का प्रमाण है कि राज्य सरकार की पारदर्शी खरीदी व्यवस्था, समयबद्ध भुगतान प्रणाली और किसान-हितैषी नीतियों ने प्रदेश के किसानों का भरोसा मजबूत किया है। किसानों को उपज का उचित मूल्य समय पर मिल रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति सशक्त हो रही है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिल रही है।

राज्य सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि हर पात्र किसान से हर दाना खरीदा जाएगा और हर रुपये का भुगतान समय पर किया जाएगा, ताकि छत्तीसगढ़ का किसान और अधिक समृद्ध, आत्मनिर्भर और सुरक्षित बन सके।

उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार द्वारा खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में समर्थन मूल्य पर उपार्जित धान के भंडारण में सूखत एवं अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की गई है। जिन संग्रहण केन्द्रों में 0.5 प्रतिशत से अधिक एवं 1 प्रतिशत से कम कमी पाई गई, वहाँ केन्द्र प्रभारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। 01 से 02 प्रतिशत तक कमी पाए जाने पर विभागीय जांच शुरू की गई, जबकि 02 प्रतिशत से अधिक कमी वाले केन्द्र प्रभारियों को निलंबित कर विभागीय जांच संस्थित की गई तथा आपराधिक पाए जाने पर एफ.आई.आर. दर्ज की गई है।

विगत 02 वर्षों में धान खरीदी एवं भण्डारण में अनियमितता तथा लापरवाही पाए जाने पर कुल 33 खाद्य निरीक्षकों एवं खाद्य अधिकारियों को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किए गए, 02 मामलों में संग्रहण केन्द्र प्रभारियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई तथा 01 संग्रहण केन्द्र प्रभारी को निलंबित किया गया है। यह स्पष्ट करता है कि सरकार भ्रष्टाचार और लापरवाही के प्रति शून्य सहनशीलता नीति पर कार्य कर रही है।

खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 में आई सूखत के संबंध में शासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार 06 जिला विपणन अधिकारियों एवं 06 संग्रहण केन्द्र प्रभारियों के विरुद्ध कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। यह कदम प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत करने और भविष्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही को रोकने की दिशा में निर्णायक पहल है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018-19 में कुल 25.61 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में 80.38 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई थी, जबकि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में खरीदी का दायरा, मात्रा और किसानों को मिलने वाला प्रत्यक्ष लाभ ऐतिहासिक स्तर तक बढ़ा है।

उल्लेखनीय है कि भारत सरकार द्वारा केन्द्रीय पूल के अंतर्गत 78 लाख मीट्रिक टन चावल का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसके विरुद्ध लगभग 116 लाख मीट्रिक टन धान का निराकरण संभव हो पाया। शेष धान का निराकरण नीलामी के माध्यम से किया गया।केन्द्रीय लक्ष्य के अनुरूप प्राप्त चावल की मिलिंग में FCI के पास गोदाम क्षमता कम होने के कारण धान के अंतिम निराकरण में लगभग 12 से 15 माह का समय लग गया, जिससे संग्रहण केन्द्रों में ड्रायज (सूखत) होना संभावित रहा। वर्तमान में खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के अंतर्गत संग्रहण केन्द्रों में रखे धान का उठाव प्रगतिरत है तथा ऑक्शन एवं नीलामी से विक्रय किए गए धान का उठाव प्रक्रियाधीन है। संपूर्ण धान निराकरण के पश्चात ही कुल सूखत का वास्तविक आंकलन किया जा सकेगा।

राज्य सरकार का यह स्पष्ट संदेश है कि किसानों के धन, अनाज और विश्वास से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। धान खरीदी, भुगतान, भंडारण और निराकरण की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी, उत्तरदायी और तकनीकी निगरानी में रखा गया है ताकि हर किसान को समय पर भुगतान और सुरक्षित व्यवस्था का लाभ मिले।


ऑनलाइन 24×7 टोकन सुविधा से धान खरीदी हुई सरल : 3100 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य और पारदर्शी व्यवस्था से बढ़ा किसानों का भरोसा

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में संचालित समर्थन मूल्य एवं कृषक उन्नति योजना किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का सशक्त माध्यम बन रही है। योजना के अंतर्गत 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जा रही धान खरीदी तथा धान उपार्जन केंद्रों पर लागू सरल, सुव्यवस्थित और पारदर्शी व्यवस्थाओं ने किसानों का भरोसा और आत्मविश्वास बढ़ाया है।

प्रदेशभर में ऑनलाइन 24×7 टोकन प्रणाली लागू होने से धान विक्रय की प्रक्रिया अधिक सहज और परेशानी-मुक्त हो गई है। किसान अब घर बैठे टोकन प्राप्त कर निर्धारित समय पर उपार्जन केंद्र पहुंच रहे हैं, जिससे भीड़, लंबी कतारों और अनावश्यक प्रतीक्षा की समस्या समाप्त हो गई है।

इसी क्रम में जांजगीर जिले के ग्राम सुकली के किसान भीम गोंड़ ने धान उपार्जन केंद्र पेंड्री में 116 क्विंटल धान का सफलतापूर्वक विक्रय किया। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन टोकन व्यवस्था के कारण पूरी प्रक्रिया आसान हो गई। निर्धारित समय पर केंद्र पहुंचते ही नमी परीक्षण, तौल और विक्रय की सभी प्रक्रियाएं सहजता और पारदर्शिता के साथ पूर्ण हुईं।

किसान भीम गोंड़ ने बताया कि समय पर भुगतान मिलने से किसानों का शासन की व्यवस्था पर विश्वास और मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि अब किसान अपनी उपज पूरे आत्मसम्मान और निश्चिंतता के साथ बेच पा रहे हैं, जो किसान-हितैषी सुशासन का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि शासन की पारदर्शी व्यवस्था और आधुनिक तकनीक के उपयोग से खेती अब केवल आजीविका का साधन नहीं रह गई है, बल्कि यह सम्मानजनक आय और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन रही है।

प्रदेश में धान खरीदी कार्य प्रशासनिक निगरानी और डिजिटल व्यवस्थाओं के साथ निरंतर संचालित किया जा रहा है, जिससे प्रत्येक पात्र किसान को समर्थन मूल्य का पूरा लाभ मिल रहा है और राज्य में कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है।


महासमुंद : सुचारू रूप से धान खरीदी व्यवस्था जारी

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महासमुंद। राज्य सरकार द्वारा किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने हेतु समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की जा रही है। इसी कड़ी में ग्राम झालखम्हरिया सेवा सहकारी समिति में सुव्यवस्थित धान खरीदी व्यवस्था के कारण किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा है। समिति में आफ लाइन और ऑनलाइन टोकन व्यवस्था नियमित रूप से लागू की गई है, जिससे धान विक्रय के दौरान न तो भीड़ है और न ही भगदड़ की स्थिति। किसान पूरी सुविधा और संतोष के साथ अपना धान विक्रय कर रहे हैं।

समिति प्रबंधक भोज राम साहू ने बताया कि आज कुल 24 किसानों के टोकन काटे गए, जिनके माध्यम से 1090 क्विंटल धान की खरीदी की गई। अब तक समिति में 27,482 क्विंटल धान की सफलतापूर्वक खरीदी हो चुकी है। वर्तमान में लगभग 50 प्रतिशत किसान धान विक्रय कर चुके हैं, जिसमें 535 किसान शामिल हैं। समिति में कुल 1077 किसान पंजीकृत हैं। धान उठाव की व्यवस्था भी सुचारू रूप से संचालित हो रही है। अब तक लगभग 50 प्रतिशत धान का उठाव हो चुका है और परिवहन या भंडारण में किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं है।

धान विक्रय के लिए पहुँचे युवा किसान देव कुमार साहू ने बताया कि उन्होंने ऑनलाइन टोकन के माध्यम से बिना किसी परेशानी के 105 कट्टा (लगभग 42 क्विंटल) धान विक्रय हेतु लाया है। उनकी लगभग 2 एकड़ कृषि भूमि है। उन्होंने कहा कि समिति में पर्याप्त मात्रा में हमाल उपलब्ध हैं, जिससे धान तौल एवं उठाव में समय की कोई बर्बादी नहीं होती। पूरी प्रक्रिया शासन के निर्देशानुसार सुव्यवस्थित ढंग से संचालित हो रही है।

समिति प्रबंधक ने यह भी बताया कि धान विक्रय के पश्चात किसानों के बैंक खातों में राशि का तत्काल अंतरण किया जा रहा है, जिससे किसानों में खुशी और संतोष दिखाई दे रहा है।

सुशासन के दो साल – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की बड़ी सौगात

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किसानों के हित में निरंतर लिए जा रहे फैसलों का सकारात्मक असर अब गांव–गांव तक दिखाई देने लगा है। सौर सुजला योजना मुख्यमंत्री की ऐसी ही एक दूरदर्शी सौगात है, जिसने जशपुर जिले के किसानों की खेती और किस्मत—दोनों बदलने का काम किया है।

दो वर्षो में जिले के 755 किसानों को मिली बड़ी राहत

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर जशपुर जिले में सौर सुजला योजना के तहत 755 किसानों को सोलर सिंचाई पंप की स्वीकृति मिली है। यह सौगात उन किसानों के लिए संजीवनी साबित हो रही है, जो अब तक बारिश और पारंपरिक साधनों पर निर्भर थे। सौर ऊर्जा से चलने वाले पंपों ने सिंचाई को आसान, सुलभ और किफायती बना दिया है।

बगीचा के बंधु यादव की सौर सुजला योजना से बदली तकदीर, मुख्यमंत्री का जताया आभार

जशपुर जिले के बगीचा तहसील क्षेत्र निवासी बंधु यादव ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की इस सौगात से लाभान्वित किसानों में शामिल हैं। सोलर पंप मिलने के बाद अब वे समय पर सिंचाई कर पा रहे हैं। इससे फसल की गुणवत्ता बेहतर हुई है और उत्पादन भी बढ़ा है।बंधु यादव कहते हैं कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की यह योजना उनके लिए उम्मीद की नई किरण बनकर आई है।

इसी तरह फरसाबहार तहसील के खुटशेरा निवासी दुलार साय भी इस योजना का लाभ उठा रहे हैं। सोलर पंप लगने से उन्होंने खेती का दायरा बढ़ाया है और अतिरिक्त फसलों की खेती शुरू की है। इससे उनकी आमदनी में बढ़ोतरी हुई है और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।

कम लागत, अधिक उत्पादन — किसानों को मिला आत्मविश्वास

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सोच के अनुरूप सौर सुजला योजना ने किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन का रास्ता दिखाया है। डीज़ल और बिजली पर होने वाला खर्च कम हुआ है, वहीं पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिला है। यह योजना खेती को आत्मनिर्भर और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है।

दो साल में दिखा सुशासन का असर

बीते दो वर्षों में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन में किसानों को केंद्र में रखकर कई योजनाएं धरातल पर उतरी हैं। सौर सुजला योजना उनमें से एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जिसने जशपुर जिले के सैकड़ों किसानों को स्थायी सिंचाई सुविधा देकर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया है।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की यह सौगात आज जशपुर के किसानों के चेहरे पर मुस्कान और खेतों में हरियाली का प्रतीक बन चुकी है।


छत्तीसगढ़ में नई गाइडलाइन दरें लागू : संपत्तियों के वास्तविक मूल्यांकन के लिए सरल, पारदर्शी और जनहितैषी सुधार

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रायपुर। राज्य सरकार ने अचल संपत्तियों के बाजार मूल्य निर्धारण को अधिक वैज्ञानिक और स्पष्ट बनाने के लिए छत्तीसगढ़ गाइडलाइन दरों का निर्धारण नियम, 2000 के तहत वर्ष 2025-26 की नई गाइडलाइन दरें 20 नवंबर 2025 से पूरे प्रदेश में लागू कर दी हैं। कार्यालय महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक द्वारा जारी आदेश के अनुसार यह संशोधन पिछले 7-8 वर्षों से लंबित था, जिसके कारण वास्तविक बाजार मूल्य और गाइडलाइन मूल्य के बीच असंतुलन बढ़ता जा रहा था।   


इन विसंगतियों को दूर करने और किसानों तथा आम जनता को उनकी संपत्ति का वास्तविक मूल्य सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से व्यापक सुधार किए गए हैं। नई गाइडलाइन दरें शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में एकसमान, सुव्यवस्थित और वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित हैं।

शहरी क्षेत्रों में लंबे समय से एक ही मार्ग पर स्थित भूखंडों के लिए अलग-अलग दरें निर्धारित थीं, जिससे नागरिकों में असंतोष और पंजीयन प्रक्रिया में भ्रम उत्पन्न होता था। नई गाइडलाइन में मुख्य मार्ग और अन्य मार्ग के आमने-सामने स्थित क्षेत्रों की दरों को एक समान कर दिया गया है। नगरीय निकाय क्षेत्रों में अनावश्यक कंडिकाओं को समाप्त करते हुए वार्डवार संरचना को सरल बनाया गया है, जिससे आमजन अब आसानी से अपनी संपत्ति का वास्तविक बाजार मूल्य समझ सकेंगे।

जांजगीर-नैला में मुख्य मार्ग चांपा रोड पर वार्ड 8 में दर 26,000 रुपये प्रति वर्गमीटर और इसी मार्ग पर वार्ड 17 में 22,800 रुपये प्रति वर्गमीटर दर निर्धारित थी, जबकि दोनों स्थान भौगोलिक और व्यावसायिक दृष्टि से समान थे। नई गाइडलाइन में इस विसंगति को समाप्त करते हुए दोनों क्षेत्रों में एक समान दर लागू कर दी गई है।

इसी तरह, नगर पालिका परिषद चांपा के महादेव वार्ड में 20 मीटर भीतर स्थित संपत्ति के लिए दो अलग-अलग दरें 12,480 तथा 7,880 रुपये निर्धारित थीं, जिससे पंजीयन के समय Rate Overlapping की समस्या आती थी। अब इन कंडिकाओं को एकीकृत कर एक समान दर निर्धारित कर दी गई है।

ग्रामीण क्षेत्रों में भी मार्गों के आमने-सामने स्थित भूमि के दरों में असमानता एक बड़ी समस्या थी। नई गाइडलाइन में ग्रामों का समूहीकरण कर समान महत्व वाले ग्रामों के लिए समान दरें लागू की गई हैं। मुख्य मार्ग से लगते दोनों ओर के गांवों को एक जैसा दर प्रदान करने से किसानों को अधिग्रहण या विक्रय के समय वास्तविक मूल्य का लाभ मिलेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में वर्गमीटर दर समाप्त कर अभिविन्यास आधारित दर लागू की गई है, जिससे मूल्यांकन अधिक सरल और पारदर्शी होगा।

नई गाइडलाइन दरों को लागू करने का प्रमुख उद्देश्य किसानों और आम जनता को उनका वास्तविक अधिकार देना है। पुरानी दरों के कारण कई मामलों में किसानों को भूमि अधिग्रहण में कम मुआवजा मिलता था और खरीदारों को भी हाउसिंग लोन कम राशि में स्वीकृत होता था। नई दरें इन समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करती हैं।

राज्य सरकार का मानना है कि दरों का यह संतुलित और तर्कसंगत पुनरीक्षण रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाएगा, काले धन पर रोक लगाएगा और पंजीयन प्रक्रिया को विवाद रहित बनाएगा। नई गाइडलाइन दरें न केवल संपत्ति बाजार को व्यवस्थित करेंगी, बल्कि पूरे प्रदेश में विकास की गति को भी बढ़ावा देंगी।


किसानों के लिए जरूरी खबर - जिनके खसरे एग्रीस्टेक पोर्टल आईडी में लिंक नहीं, वे समितियों में जाकर करवा सकते हैं अपडेट

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रायपुर। धान खरीदी के संबंध में किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रावधान शासन द्वारा एग्री स्टेक पोर्टल में किया गया है। जिसके तहत एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीकृत एक से अधिक खसरे वाले ऐसे किसान जिनके सभी खसरों में से कुछ खसरे पोर्टल में उनके एग्रीस्टेक आईडी में प्रदर्शित नहीं हो रहे हैं या लिंक होना शेष रह गए हैं, ऐसे खसरों की पहचान कर समितिवार सूची बनाई गई है, तथा उसे समितियों के बाहर चस्पा किया गया है। 

किसानों से आग्रह किया जाता है कि वे समितियों में जाकर अपने छूटे हुए खसरों का मिलान कर उसे पोर्टल में लिंक करवा सकते हैं। इसके लिए किसान समितियों के किसान सहायता केंद्र में सुबह 09 से 05 तक समितियों में जाकर वहां के ऑपरेटर अथवा ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं। खाद्य अधिकारी कबीरधाम ने बताया कि खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में धान खरीदी हेतु भारत सरकार, कृषि मंत्रालय के एग्रीस्टेक पोर्टल में किसान पंजीयन अनिवार्य किया गया है।

एग्रीस्टेक पोर्टल में किसान को प्राप्त फार्मर आईडी के साथ उनके फॉर्म आई डी (खसरे) को लिंक किया जाना है। वर्तमान में एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीकृत कृषक के ऐसे खसरे जो यूनीफाइड फार्मर पोर्टल में पंजीकृत थे वो कैरी फारवर्ड हो गए है परंतु वो समस्त खसरे एग्रीस्टेक में फार्मर आईडी के साथ लिंक नही है, उनमें से कुछ खसरे लिंक होने रह गए हैं। इन समस्त छुटे हुए खसरों को एग्रीस्टेक पोर्टल में माध्यम से जोड़ा जाना है ताकि समिति स्तर पर ये सभी खसरे खरीदी हेतु उपलब्ध हो सके। कबीरधाम जिले पंजीकृत किसानों के ऐसे 34 हजार 566 खसरे हैं जो किसानों के एग्री स्टेक आईडी में लिंक होने शेष हैं। इन्हें लिंक कराने की प्रक्रिया किसान स्वयं समिति में जाकर करवा सकते हैं। इसके लिए कोई समय सीमा निर्धारित है।


जनता के हित में छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा निर्णय – शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की गाइडलाइन दरों का वैज्ञानिक पुनरीक्षण, किसानों और आम नागरिकों को मिलेगा सीधा लाभ उत्पन्न न हों।

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के दूरदर्शी नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने पूरे राज्य के लिए गाइडलाइन दरों का व्यापक, वैज्ञानिक और तर्कसंगत पुनरीक्षण करते हुए ऐतिहासिक कदम उठाया है। यह निर्णय जनता के हित, पारदर्शिता, उचित बाजार मूल्यांकन और नागरिकों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

गाइडलाइन नियम 2000 के अनुसार दरों का प्रतिवर्ष पुनरीक्षण आवश्यक है, परंतु वर्ष 2017-18 के बाद से दरों में किसी प्रकार का संशोधन नहीं हुआ था। इस कारण वास्तविक बाजार मूल्य और गाइडलाइन दरों में भारी अंतर पैदा हो गया था—जिसका प्रतिकूल प्रभाव किसानों, भूमिस्वामियों, संपत्ति धारकों और आम नागरिकों पर पड़ रहा था।

राज्य में गाइडलाइन दरों के पिछले ढांचे नगरीय क्षेत्रों में दरों में भारी विसंगतियाँ थीं। एक ही सड़क, वार्ड या आसपास के क्षेत्रों में अनुपातहीन अंतर दिखाई देता था। एक ही सड़क पर स्थित संपत्तियों की दरें अलग-अलग थीं, जिससे नागरिकों को वास्तविक मूल्यांकन में कठिनाई होती थी। ग्रामीण क्षेत्रों में भी एक ही मार्ग पर स्थित गाँवों की दरों में अतार्किक भिन्नता थी, जिससे किसानों को मुआवज़ा और बैंक लोन में नुकसान होता था। पिछले सात वर्षों में बने नए हाईवे, कॉलोनी, औद्योगिक क्षेत्र आदि की दरें निर्धारित नहीं थीं, जिससे नागरिकों को संपत्ति मूल्य जानने में कठिनाई हो रही थी।

वाणिज्यिक कर (पंजीयन) मंत्री ओ पी चौधरी के दिशानिर्देश पर गाइडलाइन दरों को पुर्ननिर्धारित करते हुए पूरी प्रक्रिया को वैज्ञानिक, पारदर्शी और जनसुलभ बनाया गया है। नगरीय क्षेत्रों में गाइडलाइन को रोड-वाइज तैयार किया गया है, ताकि एक सड़क और समान परिस्थितियों वाले क्षेत्रों की दरें समान हों। अत्यधिक कंडिकाओं को समायोजित कर संख्या कम की गई, ताकि नागरिकों को मूल्य समझने में सरलता हो। ग्रामीण क्षेत्रों में सभी गाँवों की दरों को नक्शे में प्रविष्ट कर, समान मार्ग और समान परिस्थितियों वाले गाँवों की दरें यथासंभव समान और तर्कसंगत की गईं।वर्तमान दरों की वैज्ञानिक मैपिंग कर रैशनलाइज़्ड बेस रेट तैयार किए गए और इन्हीं के आधार पर नई दरें प्रस्तावित की गईं है।

नवीन दरें – जनता को सीधा लाभ

नगरीय क्षेत्रों में लगभग 20% की तर्कसंगत वृद्धि की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के हित में दरों में 50% से 300% तक वृद्धि की गई है—जिससे किसानों को भूमि अधिग्रहण आदि में 3 गुना तक अधिक मुआवज़ा मिलेगा।

नवीन दरों से किसानों/भूमिस्वामियों को उनकी भूमि का अधिक एवं न्यायसंगत मुआवज़ा प्राप्त होगा। संपत्ति के विरुद्ध बैंक से अधिक राशि का लोन स्वीकृत होगा। आम नागरिकों के लिए अपनी संपत्ति की गाइडलाइन दर स्पष्ट और समझने में आसान होगी।

वाणिज्यिक कर (पंजीयन) मंत्री ओ. पी. चौधरी ने कहा कि गाइडलाइन दरों का यह व्यापक और वैज्ञानिक पुनरीक्षण जनता के हितों को सर्वोपरि रखते हुए पूरी पारदर्शिता के साथ किया गया है। उन्होंने कहा कि 2017-18 के बाद दरों में संशोधन न होने से राज्य में वास्तविक बाजार मूल्य और गाइडलाइन दरों में गंभीर असंतुलन पैदा हो गया था, जिससे किसान, भूमिस्वामी और सामान्य नागरिक प्रतिकूल रूप से प्रभावित हो रहे थे। नई गाइडलाइन दरें रोड-वाइज और वैज्ञानिक मैपिंग के आधार पर तैयार की गई हैं, ताकि हर क्षेत्र में दरें तर्कसंगत, समान और समझने में सरल हों। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में 50% से 300% तक की वृद्धि किसानों को उचित मुआवज़ा और अधिक बैंक लोन प्राप्त करने में बड़ा लाभ देगी, जबकि नगरीय क्षेत्रों में 20% की तार्किक वृद्धि मूल्य-विसंगतियाँ दूर करेगी। चौधरी ने कहा कि विभाग भविष्य में भी विकास, नई बसाहटों, बाजार प्रवृत्तियों और क्षेत्रीय आवश्यकताओं के आधार पर नियमित समीक्षा करता रहेगा, ताकि किसी भी नागरिक को उनकी संपत्ति के वास्तविक मूल्य से वंचित न होना पड़े।

उल्लेखनीय है कि लंबे अंतराल के बाद गाइडलाइन दरों का यह व्यापक और महत्त्वपूर्ण संशोधन किया गया है। भविष्य में भी विभाग द्वारा जिले स्तर पर उस क्षेत्र में हो रहे विकास, नए निर्माण, क्षेत्रीय परिस्थितियों, बाजार प्रवृत्तियों तथा नई बसाहटों/कॉलोनियों के विस्तार का नियमित आकलन किया जाता रहेगा। इसी आधार पर गाइडलाइन दरों में समय-समय पर आवश्यक, तर्कसंगत और जनहितकारी संशोधन किए जाते रहेंगे, ताकि नागरिकों को उनकी संपत्ति के वास्तविक मूल्य का लाभ निर्बाध रूप से मिलता रहे और किसी भी प्रकार की मूल्य-विसंगतियाँ उत्पन्न न हों।

"गाइडलाइन दरों का वैज्ञानिक और तर्कसंगत पुनरीक्षण राज्य के किसानों, भूमिस्वामियों और आम नागरिकों के हित में उठाया गया अत्यंत महत्त्वपूर्ण कदम है। पिछले कई वर्षों से दरों में संशोधन न होने के कारण वास्तविक बाजार मूल्य और गाइडलाइन दरों में बड़ा अंतर पैदा हो गया था। नई दरें न केवल न्यायसंगत मूल्यांकन सुनिश्चित करेंगी, बल्कि किसानों को भूमि अधिग्रहण में अधिक मुआवज़ा, नागरिकों को संपत्ति का सही मूल्य और बैंक से अधिक ऋण प्राप्त करने में भी सहायता प्रदान करेंगी। शासन की मंशा स्पष्ट है—हर नागरिक को उसकी संपत्ति का उचित मूल्य मिले और किसी भी प्रकार की विसंगतियाँ या भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो। यह निर्णय प्रदेश के आर्थिक परिवेश को अधिक पारदर्शी, संतुलित और जनहितकारी बनाएगा।" - मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय

समर्थन मूल्य पर धान खरीदी प्रारंभ: पहले दिन 19464 क्विंटल धान का उपार्जन

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रायपुर। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत प्रदेश के किसानों से समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन का शुभारंभ किया गया। उपार्जन केन्द्रों में धान बेचने आए किसानों का स्वागत तिलक एवं पुष्प भेंट कर आत्मीयता से किया गया। खरीदी केन्द्रों का माहौल आज उत्सव और गहमा–गहमी से भरा दिखाई दिया। मौके पर उपस्थित किसानों के चेहरे पर उत्साह, संतोष और शासन के प्रति आभार स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुआ। विभिन्न जिलों में जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में कांटा- बांट एवं धान की पूजा-अर्चना कर तौल प्रक्रिया का विधिवत आरंभ किया गया।

प्रदेश में आज कुल 195 उपार्जन केन्द्रों में 19464 क्विंटल धान का उपार्जन किसानों से किया गया। शासन द्वारा राज्य के 2,739 उपार्जन केन्द्रों में खरीदी संचालन के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ पूर्ण कर ली गई हैं। उल्लेखनीय है कि सहकारी समितियों के कर्मचारियों द्वारा आंशिक रूप से अवैध हड़ताल पर जाने से उपार्जन प्रभावित होने की संभावना उत्पन्न हुई थी, जिसे शासन के निर्देश पर विपणन संघ द्वारा आउटसोर्सिंग के माध्यम से 2,739 डेटा एंट्री ऑपरेटरों की व्यवस्था कर सुचारू रूप से धान उपार्जन सुनिश्चित किया गया। कई जिलों में सहकारिता विभाग के कर्मचारियों ने भी धान उपार्जन की जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए खरीदी कार्य को निरंतर बनाए रखा।

शासन द्वारा धान खरीदी में संलग्न कर्मचारियों को अत्यावश्यक सेवा संधारण तथा विच्छिन्नता निवारण अधिनियम 1979 (ESMA) के तहत अधिसूचित कर तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है, जिससे उपार्जन प्रक्रिया निर्बाध रूप से संचालित रहे।

इस वर्ष धान उपार्जन को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी एवं किसान–उन्मुख बनाने के लिए उपार्जन केन्द्रों में ऑनलाइन टोकन एवं तुंहर टोकन प्रणाली को व्यापक रूप से लागू किया गया है। आज प्रदेश में जारी हुए कुल 2,029 टोकन में से 1,912 किसानों द्वारा तुंहर टोकन के माध्यम से आवेदन किया गया। इसके अतिरिक्त, किसान समिति स्तर पर भी टोकन हेतु आवेदन कर सकते हैं। लघु एवं सीमांत किसानों को अधिकतम 02 टोकन, तथा दीर्घ किसानों को अधिकतम 03 टोकन की सुविधा प्रदान की गई है।

किसानों के विश्राम हेतु छाया, पीने के पानी तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था सभी उपार्जन केन्द्रों में उपलब्ध कराई गई है। जिला अधिकारियों को किसानों की सुविधा और खरीदी संचालन से संबंधित आवश्यक प्रबंध सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रत्येक उपार्जन केन्द्र में केंद्र प्रभारी के अतिरिक्त नोडल अधिकारी की भी ड्यूटी लगाई गई है, जिनके नाम और फोन नंबर केन्द्रों में प्रदर्शित कर दिए गए हैं। किसी भी प्रकार की असुविधा की स्थिति में किसान नोडल अधिकारी से तुरंत संपर्क कर सकते हैं, और समस्याओं का समाधान तत्काल किया जा रहा है। इसके साथ ही प्रदेश स्तर पर हेल्पलाइन 1800 233 3663 के माध्यम से भी शिकायतें एवं जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।

इस वर्ष धान खरीदी पूर्णतः आधार-आधारित है, जिसके अंतर्गत किसानों को बायोमेट्रिक पहचान के माध्यम से धान विक्रय करने की सुविधा दी गई है। प्रक्रिया को अधिक दक्ष एवं पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से खाद्य विभाग द्वारा राज्य स्तरीय उड़नदस्ते गठित किए गए हैं, जो सतत् औचक निरीक्षण करते हुए उपार्जन में संभावित अनियमितताओं पर नियंत्रण रखेंगे तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।

सभी उपार्जन केन्द्रों में स्थानीय स्तर पर निगरानी समितियों का गठन किया गया है तथा पीने के पानी, प्रसाधन, प्राथमिक उपचार पेटी आदि की व्यवस्थाएँ सुचारू रूप से उपलब्ध हैं। धान की तौल इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीनों से की जा रही है, ताकि किसानों को उनके हर एक दाने का उचित मूल्य मिल सके।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सभी कलेक्टरों एवं धान उपार्जन से संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसानों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उपार्जन कार्य को व्यवस्थित, समयबद्ध और पारदर्शी रूप से संचालित किया जाए।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश के किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का सिलसिला शुरू

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का महाअभियान आज से औपचारिक रूप से शुरू हो गया है। यह अभियान राज्य के सभी जिलों में 31 जनवरी तक चलेगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में धान खरीदी के लिए सम्पूर्ण चाक-चौबंद और पारदर्शी व्यवस्था की गई है।

समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए इस साल राज्य में 2739 धान खरीदी केंद्र बनाए गए हैं, जहां किसानों के लिए सभी आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं। वहीं, भुगतान की सुविधा सुगम बनाने हेतु माइक्रो एटीएम भी स्थापित किए गए हैं। खरीदी के पहले दिन प्रदेश में 18639 क्विंटल धान की खरीदी की गई।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश के सभी किसानों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि किसानों की मेहनत से ही प्रदेश में समृद्धि और खुशहाली का वातावरण निर्मित हुआ है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार खेती-किसानी को बढ़ावा देने के लिए निष्ठा, संवेदनशीलता और सजगता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि धान खरीदी को पूरी तरह व्यवस्थित, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से संचालित किया जाएगा। किसानों की किसी भी प्रकार की असुविधा को रोकने के लिए सभी जिलों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। इस वर्ष धान खरीदी को तकनीक-सक्षम बनाते हुए तुँहर टोकन ऐप, जीपीएस आधारित परिवहन, सतर्क ऐप और कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर जैसी व्यवस्थाएँ मजबूत की गई हैं।

धान खरीदी के पहले दिन राज्यभर के खरीदी केंद्रों में किसानों का स्वागत फूल-मालाओं के साथ किया गया। विभिन्न जिलों में मंत्रिगणों, सांसदों, विधायकों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने धान खरीदी का विधिवत् शुभारंभ किया। उपमुख्यमंत्री अरूण साव ने बिलासपुर जिले के सेंदरी धान खरीदी केंद्र में खरीदी की शुरुआत की, वहीं उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कबीरधाम जिले के महाराजपुर धान खरीदी केंद्र में धान खरीदी का शुभारंभ किया।

इसी प्रकार, खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने सूरजपुर जिले के चंद्रपुर धान खरीदी केंद्र में विधि-विधान के साथ खरीदी प्रारंभ की और किसानों का फूल-मालाओं से अभिनंदन किया। कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री रामविचार नेताम ने बलरामपुर जिले के डौरा-कोचली धान खरीदी केंद्र में पहुँचकर किसानों का आत्मीय स्वागत करते हुए खरीदी प्रक्रिया की शुरुआत की।

सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने बस्तर जिले के पल्ली धान खरीदी केंद्र में पूजा-अर्चना कर खरीदी अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया। इसी क्रम में राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कांकेर जिले के मालगांव धान खरीदी केंद्र में इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीन और किसानों द्वारा लाए गए धान की पारंपरिक रीति से पूजा-अर्चना कर खरीदी का आरंभ किया। कौशल विकास मंत्री गुरू खुशवंत साहेब ने महासमुंद जिले के झालखमरिया धान खरीदी केंद्र में धान खरीदी की औपचारिक शुरुआत की।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि हर किसान बिना किसी परेशानी के अपना धान बेच सके, समय पर भुगतान पाए और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी एवं सम्मानजनक हो। आज प्रदेशभर में जिस उत्साह और विश्वास के साथ किसानों ने खरीदी केंद्रों का रुख किया, वह छत्तीसगढ़ की कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था की मजबूती का प्रतीक है। आगामी दिनों में खरीदी प्रक्रिया और अधिक सुगमता के साथ चले, इसके लिए सभी जिला प्रशासन सतर्क और प्रतिबद्ध हैं। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि सरकार का ध्येय केवल धान खरीदना नहीं, बल्कि किसान के श्रम का सम्मान सुनिश्चित करना है और यही भावना इस पूरे अभियान की सबसे बड़ी शक्ति है।

किसानों का सम्मान और 31 सौ रुपए समर्थन मूल्य देने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य : कैबिनेट मंत्री गजेन्द्र यादव

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रायपुर। किसानों के सम्मान और हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने वाली छत्तीसगढ़ सरकार ने आज धान खरीदी खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 का ऐतिहासिक शुभारंभ किया। स्कूल शिक्षा, ग्रामोद्योग, विधि एवं विधायी कार्य विभाग के मंत्री गजेन्द्र यादव आज रायगढ़ जिले के पुसौर विकासखण्ड स्थित ग्राम कोड़ातराई पहुंचे, जहाँ उन्होंने धान उपार्जन केंद्र में धान खरीदी सीजन का विधिवत शुभारंभ किया। मंत्री यादव ने इलेक्ट्रॉनिक वजन मशीन का पूजन किया और अन्न माता के प्रतीक के रूप में किसानों द्वारा लाए गए धान का विधि-विधान से पूजन कर शुभकामनाएँ दीं।

कैबिनेट मंत्री  यादव ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों के गौरव और भविष्य को सुरक्षित करते हुए धान का समर्थन मूल्य 3,100 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है, जो पूरे देश में सबसे अधिक है और यह गौरव छत्तीसगढ़ को किसानों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के कारण प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि किसानों का सम्मान हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। देश में सबसे अधिक समर्थन मूल्य देकर किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने वाला पहला राज्य छत्तीसगढ़ है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में किसानों की जरूरतों, समस्याओं और आकांक्षाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। किसान समृद्ध होंगे तो छत्तीसगढ़ और भारत दोनों विकसित बनेंगे।

मंत्री यादव ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य है कि प्रत्येक किसान आर्थिक रूप से सक्षम, आधुनिक कृषि तकनीक से सशक्त और आत्मनिर्भर बने। सरकार किसानों को खाद, बीज, ऋण, कृषि उपकरण, प्रशिक्षण और डिजिटल सुविधाएँ सरलता से उपलब्ध करा रही है, ताकि खेती अधिक उत्पादक और लाभकारी हो सके। उन्होंने कहा कि आज अपने गृह क्षेत्र से लगभग 300 किलोमीटर की दूरी तय कर रायगढ़ पहुंचना उनके लिए सौभाग्य की बात है, क्योंकि वे यहां के मेहनतकश किसानों से सीधे संवाद कर उनकी स्थिति, आवश्यकताओं और उम्मीदों को नजदीक से समझ पा रहे हैं।

रायगढ़ जिले में धान खरीदी की प्रक्रिया आज से शुरू होकर 31 जनवरी 2026 तक चलेगी। जिले के सभी पंजीकृत और पात्र किसान निर्धारित उपार्जन केंद्रों में प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान विक्रय कर सकेंगे। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने बताया कि खरीदी प्रक्रिया को सुचारू और पारदर्शी बनाने के लिए सभी व्यवस्थाएँ पूरी कर ली गई हैं। कर्मचारियों का प्रशिक्षण संपन्न हो चुका है, केंद्रवार अधिकारियों की ड्यूटी लगा दी गई है और धान उपार्जन केंद्रों में आवश्यक सभी सुविधाएँ सुनिश्चित कर दी गई हैं। जिले में कुल 105 उपार्जन केंद्रों के माध्यम से धान खरीदा जाएगा, जिनमें 15 केंद्रों को संवेदनशील और 4 केंद्रों को अति-संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। अवैध धान की आवाजाही रोकने के लिए 24 चेकपोस्ट स्थापित किए गए हैं, जहाँ तीन पालियों में टीमें तैनात रहकर लगातार जांच और निगरानी कर रही हैं। धान खरीदी प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाने और किसानों को पारदर्शी सुविधा प्रदान करने के लिए “तुंहर टोकन” मोबाइल ऐप लागू किया गया है। इस ऐप में प्रतिदिन सुबह 8 बजे टोकन उपलब्ध होंगे और सोसायटी संचालक सुबह 9.30 बजे से टोकन जारी कर सकेंगे। टोकन सात दिनों तक वैध रहेंगे और आधार आधारित ओटीपी प्रमाणीकरण अनिवार्य किया गया है, जिससे बिना किसान की सहमति कोई टोकन जारी नहीं हो सकेगा।

अब किसानों को ऋण पुस्तिका लाने की जरूरत नही

राज्य शासन ने किसानों के लिए एक और बड़ी राहत दी है। अब किसानों को उपार्जन केंद्र में ऋण पुस्तिका लाने की आवश्यकता नहीं है। एग्रीस्टेक पोर्टल के माध्यम से किसान का संपूर्ण डेटा स्वचालित रूप से सत्यापित हो जाएगा, जिससे खरीदी प्रक्रिया और तेज व पारदर्शी बनेगी। इस वर्ष संस्थागत पंजीयन, भूमिहीन श्रेणी, डुबान क्षेत्र, वन अधिकार पट्टा धारक और ग्राम कोटवार वर्ग को विशेष अनुमति प्रदान की गई है। खरीदी की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में जमा होगी।

कार्यक्रम के दौरान किसान बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और सरकार की किसान हितैषी नीतियों की सराहना की। इस अवसर पर जिला पंचायत उपाध्यक्ष दीपक सिदार, जिला पंचायत सदस्य सुषमा खलखो, गोपाल अग्रवाल, ब्रजेश गुप्ता, लक्ष्मी जीवन पटेल, रजनी राठिया, जनपद अध्यक्ष हेमलता चौहान, अरुण धर दीवान, विकास केडिया, पवन शर्मा, पावन अग्रवाल, जतिन साव, सतीश बेहरा, अशोक अग्रवाल, ज्योति भगत, साहनू पैकरा, मानी मोहित सतपथी, महेश उरांव, संजय अग्रवाल, शैलेश माली, जैमिनी गुप्ता, कमल पटेल सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी और पंजीकृत किसान उपस्थित थे। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी तथा पुलिस अधीक्षक दिव्यांग पटेल ने कैबिनेट मंत्री यादव का आत्मीय स्वागत किया।

महासमुंद : जिले में आज से धान खरीदी शुरू, झालखम्हरिया केंद्र में कैबिनेट मंत्री खुशवंत साहेब एवं विधायक द्वय योगेश्वर राजू सिन्हा, एवं संपत अग्रवाल की उपस्थिति में हुआ शुभारंभ

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रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर धान खरीदी 15 नवंबर 2025 से पूरे प्रदेश में विधिवत रूप से शुरू कर दिया गया है। इसी क्रम में जिला महासमुंद के धान खरीदी केंद्र झालखमहरिया में आज खरीदी कार्य का औपचारिक शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में केबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि आज किसानों के लिए उत्सव का दिन है। हमारा राज्य किसानों से ही समृद्ध है।यहां तक कि अयोध्या में राम लला के लिए भोग यही छत्तीसगढ़ से चांवल भेजा गया था। 

आज से धान खरीदी की शुरुवात हो गई है पिछले साल भी रिकॉर्ड धान खरीदी किया गया था, इस साल भी रिकॉर्ड धान खरीद की जाएगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मंशानुरप धान खरीदी की जा रही है। किसानों को बोनस एवं सभी समितियों में एटीम की सुविधा कराई जा रही है। ताकि किसानो को किसी प्रकार की समस्या न हो। अधिकारी कर्मचारी भी पूरी जिम्मेदारी के साथ कार्य कर रहे है। हमारी सरकार किसानों की हितों का पूरा ध्यान रख रही है। उन्होंने कहा कि आज राज्य को 25 वर्ष पूरे हो गए है। आज राज्य प्रगति पथ पर अग्रसर है। तकनीकी रूप से भी क्षमता बढ़ी है। आने वाला 2047 तक राज्य को विकसित बनाना है। हमारा राज्य देश का पहला विकसित राज्य बनेगा। उन्होंने किसानों को बधाई दी।

इस अवसर पर महासमुंद विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा एवं विधायक बसना संपत अग्रवाल विशेष रूप से उपस्थित रहे। उनकी मौजूदगी में गांव के कृषक दुर्गेश साहू के 40 क्विंटल धान की तुलाई कर खरीदी प्रक्रिया की शुरुआत की गई। इससे केंद्र में खरीदी का वातावरण और अधिक उत्साहपूर्ण हो गया। धान खरीदी केंद्र में किसानों की सुविधा, पारदर्शिता और सुचारु व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु सभी व्यवस्थाएं पूर्ण कर ली गई हैं। प्रशासनिक अमले एवं समिति के कर्मचारियों द्वारा यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि हर किसान को समय पर, व्यवस्थित और बिना किसी परेशानी के धान बेचने की सुविधा मिले। 

विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा ने कहा कि इस जिले में पूरे राज्य में सबसे अधिक धान खरीदी की जाती है। सिंचाई क्षमता को बढ़ाने कार्य जारी है। सिकासेर और सिरपुर बैराज का काम भी पूर्ण हो गया है। इससे सिंचाई क्षमता में वृद्धि होगी। उन्होंने विश्वाश व्यक्त किया कि इस वर्ष भी धान खरीदी में जिला इतिहास दर्ज करेगा।

बसना के विधायक संपत अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मंशानुरूप धान खरीदी कि जा रही है। लक्ष्य के अनुरूप खरीदी कि जा रही है। सुचारू रूप से धान खरीदी जा रही है। किसानों को किसी तरह परेशानी नहीं होगी। इस बात का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। यहां के किसानों का लाभ हो ,यह सुनिश्चित हो। अवैध धान की खरीदी बिक्री में नजर रखे और प्रशासन का सहयोग करें। आइए इसे एक उत्सव के रूप में मनाएं।

कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने कहा कि जिले में 130 समिति के 182 उपार्जन केंद्रों में खरीदी की जा रही है।किसानों को किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होगी। आज 34 समितियों में 50 किसानों का टोकन कट गया है। आज शाम 5 बजे तक टोकन काट सकते है और धान खरीदी की जा सकती है। यहां जिले में 16 चेक पोस्ट स्थापित किए गए है। अभी तक 23 प्रकरण दर्ज किए गया है जिसमें 3000 किवंटल अवैध धान जप्त की गई है।

इस अवसर पर नगर पालिका उपाध्यक्ष देवी चंद राठी, जनपद सदस्य विजय लक्ष्मी जांगड़े, संदीप दीवान,पीयूष साहू,प्रकाश शर्मा,राहुल चंद्राकर, पंकज चंद्राकर, संदीप घोष, सरपंच अनेश्वरी चंद्राकर , ग्रामीण अध्यक्ष श्याम साकरकर,अपर कलेक्टर रवि साहू, एसडीएम अक्षा गुप्ता,आसपास के किसान बड़ी संख्या में मौजूद थे।



कुनकुरी क्षेत्र के किसानों को मिली बड़ी सौगात, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ईब व्यपवर्तन योजना के जीर्णोद्धार हेतु 37 करोड़ 9 लाख रुपए की दी मंजूरी

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने किसानों के हित में एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। जशपुर जिले के विकासखंड कुनकुरी की ईब व्यपवर्तन योजना के मरम्मत एवं जीर्णोद्धार कार्य के लिए राज्य शासन ने 37 करोड़ 09 लाख 63 हजार रुपए की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की है।

इस निर्णय से कुनकुरी क्षेत्र के हजारों किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। योजना पूर्ण होने पर 3,323 हेक्टेयर के विरुद्ध 1,453 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे फसलों की उत्पादकता बढ़ेगी और किसानों की आय में वृद्धि होगी।

कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस योजना के जीर्णोद्धार से कृषि योग्य भूमि की सिंचाई क्षमता में व्यापक सुधार होगा। लंबे समय से किसान इस योजना की मरम्मत की मांग कर रहे थे, जिसे मुख्यमंत्री साय ने पूरा कर दिया है।

कुनकुरी क्षेत्र के किसानों ने इस निर्णय के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ईब व्यपवर्तन योजना के पुनर्जीवन से अब उनकी खेती और भी सशक्त होगी तथा उन्हें सिंचाई के लिए वर्षा पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

अपनी कर्मठता और दृढ़ इच्छाशक्ति से लौहपुरुष बने सरदार पटेल : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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रायपुर। देश के प्रथम उप प्रधानमंत्री एवं गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल अपनी कर्मठता और दृढ़ इच्छाशक्ति से लौहपुरुष बने। आज़ादी के बाद के कठिन हालातों में उन्होंने अपनी सूझबूझ और फौलादी इरादों से 562 रियासतों का भारत में विलय कर अखंड भारत का निर्माण किया। किसानों के संघर्ष और स्वतंत्रता आंदोलन में उनका योगदान अमूल्य रहा है। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय एकता दिवस कार्यक्रम में यह बात कही। यह कार्यक्रम खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा रायपुर स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में आयोजित किया गया।इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री एवं खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव, कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब तथा विधायक राजेश मूणत उपस्थित थे। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सरदार पटेल की 150वीं जयंती पर उनके महान योगदान का स्मरण करते हुए कहा कि “सरदार पटेल ने अपनी विराट सोच और अटूट इच्छाशक्ति से टुकड़ों में बंटी रियासतों को एक सूत्र में पिरोकर अखंड भारत का निर्माण किया।” सरदार पटेल का जीवन राष्ट्र की एकता, अखंडता और समर्पण का प्रतीक है। उनकी 150वीं जयंती पर आज पूरे देश में अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गुजरात के केवड़िया में आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य को भी आमंत्रित किया गया है, जहाँ राज्य का विशेष स्टॉल भी लगाया गया है। उन्होंने कहा कि ‘रन फॉर यूनिटी’ केवल देश की एकता और अखंडता का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह फिटनेस और सामूहिक ऊर्जा का भी संदेश देता है। 

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने राष्ट्रीय एकता दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि “सरदार वल्लभभाई पटेल ने देश की आज़ादी और किसानों के अधिकारों के लिए ब्रिटिश हुकूमत के विरुद्ध कठोर संघर्ष किया।” उनके योगदान को रेखांकित करने के लिए ही उनकी जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल ने स्वतंत्र भारत के प्रथम उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के रूप में ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की अवधारणा को साकार किया।

उप मुख्यमंत्री साव ने घोषणा की कि राज्य के सभी संभागीय मुख्यालयों में सरदार पटेल की भव्य प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। इसके लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा संबंधित नगरीय निकायों को 50-50 लाख रुपये की राशि प्रदान की जाएगी।

मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम में स्वतंत्रता सेनानियों के परिजनों को शाल एवं श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया। उन्होंने प्रतिभागियों द्वारा बनाए गए रंगोली और चित्रों का अवलोकन किया तथा उपस्थित जनों को स्वदेशी अपनाने और भारत में निर्मित वस्तुओं के उपयोग की शपथ दिलाई।

राष्ट्रीय एकता दिवस के उपलक्ष्य में खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा रन फॉर यूनिटी के साथ ही महाविद्यालयीन छात्र-छात्राओं के लिए रंगोली, चित्रकला, भाषण एवं काव्य पाठ प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री l साय ने रंगोली, चित्रकला, भाषण और काव्य पाठ प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किया तथा रन फॉर यूनिटी के प्रतिभागियों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने ‘बस्तर ओलंपिक’ के प्रचार रथ को भी हरी झंडी दिखाई। यह प्रचार रथ बस्तर संभाग के सभी जिलों में पहुंचकर बस्तर ओलंपिक का प्रचार-प्रसार करेगा

कार्यक्रम में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव  यशवंत कुमार ने अपने स्वागत भाषण में सरदार पटेल की 150वीं जयंती पर आयोजित ‘सरदार@150 यूनिटी मार्च’ के तहत आयोजित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ये कार्यक्रम आगामी डेढ़ महीनों तक निरंतर जारी रहेंगे।

इस अवसर पर खेल एवं युवा कल्याण विभाग की संचालक तनूजा सलाम, स्वतंत्रता सेनानियों के परिजन, विभागीय अधिकारी, खिलाड़ी तथा महाविद्यालयीन छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित थे।


जीएसटी बचत उत्सव : ट्रैक्टर खरीदी में किसानों को मिली बड़ी राहत – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज जीएसटी बचत उत्सव के बीच औचक निरीक्षण पर देवपुरी स्थित ट्रैक्टर शोरूम पहुंचे। साय ने यहां किसानों से आत्मीय संवाद कर जीएसटी कटौती पर उनकी प्रतिक्रिया और खरीदी में हुई बचत की जानकारी ली। मुख्यमंत्री साय ने शोरूम में ट्रैक्टर और हार्वेस्टर खरीदने आए किसानों को चाबी सौंपकर शुभकामनाएं दीं।

धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में किसानों को मिला जीएसटी सुधार का लाभ

मुख्यमंत्री साय ने अभनपुर के बिरोदा निवासी रवि कुमार साहू को उनके नए हार्वेस्टर की चाबी सौंपी। इस अवसर पर खुशी व्यक्त करते हुए रवि साहू ने कहा, "मैने सपने में भी नहीं सोच था कि मैं नया हार्वेस्टर खरीदूंगा। मैं सेकेंड हैंड हार्वेस्टर खरीदने के बारे में सोच रहा था। जीएसटी उत्सव में नए हार्वेस्टर खरीद पर मुझे पूरे 2 लाख रुपए की बचत हुई है। 

किसानों की चिंता का समाधान हमारे संवेदनशील प्रधानमंत्री मोदी जी और किसानहितैषी मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी ही कर सकते हैं। मुख्यमंत्री जी ने स्वयं मुझे मेरे नए हार्वेस्टर की चाबी सौंपी और मुझसे बेहद आत्मीयता से संवाद किया। मैंने उन्हें बताया कि मेरे पास दो एकड़ खेत है और अब हार्वेस्टर आने से मैं गांव में साझेदारी से और अधिक खेती कर पाऊंगा।” रवि ने जीएसटी में कटौती के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार जताया।

मुख्यमंत्री साय ने अभनपुर कोलर से आए वरिष्ठ किसान  ज्ञानिक राम साहू को उनके नए ट्रैक्टर की चाबी सौंपी। मुख्यमंत्री से संवाद करते हुए साहू ने बताया कि जीएसटी में कटौती के बाद नए ट्रैक्टर की खरीदी पर उन्हें पूरे 60 हजार रुपए की बचत हुई है। उन्होंने कहा कि इस बचत से उनका परिवार त्योहार को और अच्छे से मना सकेगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जीएसटी बचत उत्सव के बीच ट्रैक्टर शोरूम पहुंचकर किसानों से किया आत्मीय संवाद

ट्रैक्टर शो रूम के प्रोप्राइटर अशोक अग्रवाल ने मुख्यमंत्री से संवाद में बताया कि जीएसटी में कटौती के कारण बिक्री में इज़ाफ़ा हो रहा है और ग्राहकों का उत्साह बढ़ा है। उन्होंने कहा, “पहले जो ट्रैक्टर 10.25 लाख रुपए का आता था, वह अब 9.75 लाख रुपए में उपलब्ध है, जिससे किसानों को 50 हजार रुपए की बचत हो रही है। इसी तरह 7.62 लाख का ट्रैक्टर अब 7.21 लाख और 6.51 लाख का ट्रैक्टर अब 6.11 लाख रुपए में मिल रहा है। कीमतों में कटौती और फेस्टिवल डिस्काउंट से किसानों की बड़ी बचत हो रही है। जीएसटी दर घटने के बाद हार्वेस्टर भी सस्ते हो गए हैं।”

जीएसटी कटौती से बाइक खरीदी में 7 हजार की बचत

इसके बाद मुख्यमंत्री साय देवपुरी के बजाज बाइक शोरूम पहुंचे और यहां मौजूद ग्राहकों से जीएसटी कटौती पर आत्मीय चर्चा की। उन्होंने बाइक खरीदने आए संतोषी नगर निवासी श्री एम.डी. गुलाब को उनकी नई बाइक की चाबी सौंपी। गुलाब ने बताया कि जीएसटी में कटौती के बाद बाइक खरीदने पर उन्हें 7 हजार रुपए की बचत हुई है। उन्होंने कहा, “मैंने बजाज प्लेटिना 110 सीसी बाइक खरीदी है, जिसकी पहले कीमत 89,000 रुपए थी, जो अब मुझे 82,000 रुपए में मिली।”

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में लागू जीएसटी 2.0 ने आम जनता, किसानों और उपभोक्ताओं को वास्तविक राहत दी है। ट्रैक्टर, हार्वेस्टर और अन्य कृषि यंत्रों की कीमतों में आई कमी से किसानों को सीधा लाभ हो रहा है, जिससे उनकी खेती-किसानी और जीवनयापन और सुगम होगा।

उन्होंने कहा कि इस जीएसटी बचत उत्सव से उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ कम हुआ है और त्यौहारी सीजन में परिवारों की खुशियाँ बढ़ी हैं। यह सुधार न केवल आर्थिक गतिविधियों को गति दे रहा है बल्कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में उत्साह और समृद्धि का नया वातावरण भी बना रहा है।


सीसरिंगा से महलंग सहसपुर मार्ग के लिए 6.91 करोड़ की मंजूरी

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शी सोच और विकास के प्रति प्रतिबद्धता का परिणाम है कि जशपुर जिले को एक और बड़ा तोहफ़ा मिला है। राज्य सरकार ने सीसरिंगा से महलंग होकर सहसपुर तक 6.5 किलोमीटर लंबे सड़क निर्माण कार्य के लिए 6 करोड़ 91 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वी🍨कृति प्रदान की है।

बरसात में कीचड़ भरे रास्ते और गर्मियों में धूल से परेशान ग्रामीणों को अब सुविधा और सुरक्षित परिवहन की सौगात मिलेगी। स्कूली बच्चों, मरीजों और किसानों को होने वाली समस्याएं काफी हद तक समाप्त हो जाएंगी। नई सड़क के बनने से क्षेत्र में सुगम आवागमन एवं स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान होगी। किसानों की फसलें और ग्रामीण उत्पाद अब तेजी से बाजार तक पहुंच पाएंगे। इसके साथ ही व्यापार और रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे।

राज्य शासन के द्वारा दी गई इस स्वीकृति से क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों में खुशी की लहर है। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को धन्यवाद देते हुए कहा कि इस सड़क से विकास की गति तेज होगी और जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आएगा।


उन्नत और किफायती उर्वरक तकनीकों से किसानों को जोड़ने चल रहा है अभियान

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रायपुर। नैनो यूरिया और नैनो डीएपी जैसे नैनो उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। किसानों के बीच इनके इस्तेमाल को बढ़ाने के लिए जागरूकता शिविर, वेबिनार, क्षेत्रीय प्रदर्शन, किसान सम्मेलन और क्षेत्रीय भाषाओं में फिल्में बनाई जा रही हैं । नैनो यूरिया के पत्तियों पर छिड़काव को आसान बनाने के लिए किसान ड्रोन, बैटरी चालित स्प्रेयर जैसे नए उपकरण भी किसानों तक पहुंचाए जा रहे हैं। ग्राम स्तर के उद्यमियों को प्रशिक्षण देकर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में कस्टम हायरिंग छिड़काव सेवाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है।

किसानों को उन्नत और किफायती उर्वरक तकनीक से जोड़ने के लिए जिले में नैनो यूरिया छिड़काव का प्रदर्शन कृषि विभाग के अधिकारियों और विशेषज्ञों द्वारा किसानों के खेत में पहुंचकर किया जा रहा है। कलेक्टर और कृषि विभाग रायगढ़ के मार्गदर्शन में किसानों के लिए यह जागरूकता कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसके तहत विकासखंड रायगढ़ में किसानों के खेतों में ट्रायल के रूप में नैनो यूरिया का प्रदर्शन किया गया।

ग्राम कोड़तराई में कृषक परमेश्वर पटेल, झारगुड़ा में कृषक हरकेश्वर पटेल तथा पंझर में कृषक नरेन्द्र पटेल के धान की फसल पर एक-एक एकड़ भूमि में नैनो यूरिया छिड़काव का प्रदर्शन किया गया। आने वाले दिनों अन्य किसानों के खेतों में भी यह प्रदर्शन किया जाएगा। इस दौरान हितग्राही किसान के साथ गांव के अन्य किसानों को भी इस प्रदर्शन के अवलोकन में शामिल किया जाता है।

उप संचालक कृषि ने बताया कि यह पहल न सिर्फ रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता को कम करेगी, बल्कि किसानों की उत्पादन लागत घटाकर अधिक लाभ दिलाने में भी सहायक सिद्ध होगी। इस दौरान किसानों को नैनो यूरिया के प्रयोग की विधियों एवं लाभों की विस्तृत जानकारी दी गई। किसान ड्रोन, मोटर, बैटरी, नेपसेक स्प्रेयर के माध्यम से नैनो यूरिया का छिड़काव कर सकते हैं। कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, इफको के प्रतिनिधि और स्थानीय कृषकगण उपस्थित रहे।

किसानों ने समझा नैनो यूरिया छिड़काव का तरीका कहा -यह किफायती और सुविधाजनक

प्रदर्शन के दौरान उपस्थित किसानों ने नैनो यूरिया के छिड़काव का तरीका समझा। बेसल डोज के बाद फर्स्ट और सेकंड स्प्रे के लिए नैनो यूरिया के उपयोग के संबंध में परमेश्वर पटेल ने कहा कि यह पारंपरिक यूरिया की तुलना में काफी सस्ता है। यह कम मात्रा में भी बेहतर परिणाम देता है। बॉटल में पैकेजिंग होने के कारण खेतों तक लाने ले जाने ले जाने व छिड़काव में सुविधाजनक है। इसके छिड़काव से पौधों पर असर जल्दी और एक समान दिखता है। पौधों की बढ़वार भी संतुलित होती है।

नवंबर-दिसंबर में पूरे जिले चलेगा व्यापक अभियान

उप संचालक कृषि रायगढ ने बताया कि अभी चिन्हांकित स्थानों में नैनो यूरिया के छिड़काव का प्रदर्शन चल रहा है। आगामी नवंबर और दिसंबर में यह प्रदर्शन अभियान पूरे जिले में व्यापक स्तर पर चलाया जाएगा। इसके लिए सभी आरएईओ अपने प्रभार क्षेत्र के गांवों में किसानों को नैनो यूरिया छिड़काव का प्रदर्शन कर उपयोग की विधि और फसल को होने वाले लाभ से अवगत कराएंगे। इसके साथ ही आगामी विकसित कृषि संकल्प यात्रा के अंतर्गत इसकी जानकारी किसानों को दी जाएगी।


एग्रीस्टेक और एकीकृत किसान पोर्टल में होगा किसानों का पंजीकरण

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रायपुर। खाद्य मंत्री दयालदास बघेल की अध्यक्षता में धान खरीदी एवं कस्टम मिलिंग की नीति निर्धारण से संबंधित निर्णय लेने हेतु गठित मंत्रिमंलीय उप समिति की बैठक आज मंत्रालय महानदी भवन में संपन्न हुई। बैठक में कृषि मंत्री  रामविचार नेताम, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी तथा राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा उपस्थित थे।

बैठक में आगामी खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में पंजीकृत किसानों से भारत सरकार द्वारा घोषित समर्थन मूल्य पर धान खरीदी किए जाने के लिए समुचित एवं पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। खरीफ वर्ष 2025-26 में किसानों का पंजीकरण एग्रीस्टेक पोर्टल के साथ-साथ एकीकृत किसान पोर्टल में किया जाएगा। किसान पंजीकरण का कार्य निर्धारित समय-सीमा में संपन्न करने हेतु व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश भी दिए गए।

बैठक में यह भी निर्देशित किया गया कि किसानों को उनके द्वारा समर्थन मूल्य पर बेचे गए धान का भुगतान समय पर प्राप्त हो, इसके लिए आवश्यक प्रबंध किए जाएँ। धान उपार्जन के लिए आवश्यक नये एवं पुराने जूट बारदाने की व्यवस्था समयानुसार सुनिश्चित करने की जानकारी दी गई। धान की रिसाइक्लिंग रोकने हेतु प्रभावी प्रबंध करने और सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध धान की रोकथाम के लिए विशेष जाँच दल गठित करने के निर्देश दिए गए। इसी प्रकार, उपार्जित धान की मिलिंग हेतु आवश्यक तैयारियाँ करने पर भी बल दिया गया।

इस अवसर पर बैठक में सचिव खाद्य विभाग रीना बाबा साहेब कंगाले, सचिव वित्त विभाग मुकेश बंसल, सचिव वाणिज्य एवं उद्योग विभाग रजत कुमार, प्रबंध संचालक छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ  किरण कौशल, संयुक्त सचिव कृषि विभाग  राहुल देव तथा प्रबंध संचालक अपेक्स बैंक के. एन. कांडे उपस्थित थे।


उर्वरक निरीक्षक बागबाहरा द्वारा दो उर्वरक विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी

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महासमुंद। कलेक्टर विनय लंगेह के मार्गदर्शन एवं उप संचालक कृषि महासमुंद एफ.आर. कश्यप के निर्देशानुसार किसानों को सही समय पर खाद उपलब्ध कराने हेतु लागतार कृषि विभाग द्वारा लगातार निगरानी रखी जा रही है एवं अनुचित स्टॉक रखने पर निजी दुकानों में कार्रवाई भी की जा रही है।

इसी कड़ी में आज उर्वरक निरीक्षक बागबाहरा जी.पी. शरणागत द्वारा बागबाहरा क्षेत्र के उर्वरक विक्रेताओं का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान दो केंद्रों में अनियमितताएं पाई गईं।

औचक निरीक्षण में हरि कृषि केन्द्र, बागबाहरा के पी.ओ.एस. स्टॉक एवं भौतिक स्टॉक में अंतर पाया गया। वहीं जय दुर्गा कृषि केन्द्र, बागबाहरा द्वारा स्कंध पंजी का संधारण नहीं किया गया था तथा मासिक प्रगति प्रतिवेदन भी उपलब्ध नहीं कराया गया। इन अनियमितताओं पर दोनों विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी कर 3 दिवस के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। निर्धारित समयावधि में उचित जवाब प्रस्तुत नहीं करने पर नियमानुसार आगे की कार्यवाही की जाएगी।

उर्वरक निरीक्षक जी.पी. शरणागत ने बताया कि किसानों को उचित मूल्य एवं निर्धारित मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिले में उर्वरक दुकानों का निरीक्षण लगातार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नियमों का पालन नहीं करने वाले विक्रेताओं के विरुद्ध नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।

उप संचालक कृषि एफ.आर. कश्यप ने जिले के समस्त कृषकों से अपील की है कि वे उर्वरक विक्रेताओं से खरीद के समय अनिवार्य रूप से बिल प्राप्त करें। यदि कहीं भी उर्वरक की कालाबाजारी अथवा अनियमितता पाई जाती है तो उसकी शिकायत तत्काल संबंधित वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी अथवा कृषि विभाग को करें

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