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ऑनलाइन 24×7 टोकन सुविधा से धान खरीदी हुई सरल : 3100 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य और पारदर्शी व्यवस्था से बढ़ा किसानों का भरोसा

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में संचालित समर्थन मूल्य एवं कृषक उन्नति योजना किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का सशक्त माध्यम बन रही है। योजना के अंतर्गत 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जा रही धान खरीदी तथा धान उपार्जन केंद्रों पर लागू सरल, सुव्यवस्थित और पारदर्शी व्यवस्थाओं ने किसानों का भरोसा और आत्मविश्वास बढ़ाया है।

प्रदेशभर में ऑनलाइन 24×7 टोकन प्रणाली लागू होने से धान विक्रय की प्रक्रिया अधिक सहज और परेशानी-मुक्त हो गई है। किसान अब घर बैठे टोकन प्राप्त कर निर्धारित समय पर उपार्जन केंद्र पहुंच रहे हैं, जिससे भीड़, लंबी कतारों और अनावश्यक प्रतीक्षा की समस्या समाप्त हो गई है।

इसी क्रम में जांजगीर जिले के ग्राम सुकली के किसान भीम गोंड़ ने धान उपार्जन केंद्र पेंड्री में 116 क्विंटल धान का सफलतापूर्वक विक्रय किया। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन टोकन व्यवस्था के कारण पूरी प्रक्रिया आसान हो गई। निर्धारित समय पर केंद्र पहुंचते ही नमी परीक्षण, तौल और विक्रय की सभी प्रक्रियाएं सहजता और पारदर्शिता के साथ पूर्ण हुईं।

किसान भीम गोंड़ ने बताया कि समय पर भुगतान मिलने से किसानों का शासन की व्यवस्था पर विश्वास और मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि अब किसान अपनी उपज पूरे आत्मसम्मान और निश्चिंतता के साथ बेच पा रहे हैं, जो किसान-हितैषी सुशासन का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि शासन की पारदर्शी व्यवस्था और आधुनिक तकनीक के उपयोग से खेती अब केवल आजीविका का साधन नहीं रह गई है, बल्कि यह सम्मानजनक आय और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन रही है।

प्रदेश में धान खरीदी कार्य प्रशासनिक निगरानी और डिजिटल व्यवस्थाओं के साथ निरंतर संचालित किया जा रहा है, जिससे प्रत्येक पात्र किसान को समर्थन मूल्य का पूरा लाभ मिल रहा है और राज्य में कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है।


महासमुंद : सुचारू रूप से धान खरीदी व्यवस्था जारी

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महासमुंद। राज्य सरकार द्वारा किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने हेतु समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की जा रही है। इसी कड़ी में ग्राम झालखम्हरिया सेवा सहकारी समिति में सुव्यवस्थित धान खरीदी व्यवस्था के कारण किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा है। समिति में आफ लाइन और ऑनलाइन टोकन व्यवस्था नियमित रूप से लागू की गई है, जिससे धान विक्रय के दौरान न तो भीड़ है और न ही भगदड़ की स्थिति। किसान पूरी सुविधा और संतोष के साथ अपना धान विक्रय कर रहे हैं।

समिति प्रबंधक भोज राम साहू ने बताया कि आज कुल 24 किसानों के टोकन काटे गए, जिनके माध्यम से 1090 क्विंटल धान की खरीदी की गई। अब तक समिति में 27,482 क्विंटल धान की सफलतापूर्वक खरीदी हो चुकी है। वर्तमान में लगभग 50 प्रतिशत किसान धान विक्रय कर चुके हैं, जिसमें 535 किसान शामिल हैं। समिति में कुल 1077 किसान पंजीकृत हैं। धान उठाव की व्यवस्था भी सुचारू रूप से संचालित हो रही है। अब तक लगभग 50 प्रतिशत धान का उठाव हो चुका है और परिवहन या भंडारण में किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं है।

धान विक्रय के लिए पहुँचे युवा किसान देव कुमार साहू ने बताया कि उन्होंने ऑनलाइन टोकन के माध्यम से बिना किसी परेशानी के 105 कट्टा (लगभग 42 क्विंटल) धान विक्रय हेतु लाया है। उनकी लगभग 2 एकड़ कृषि भूमि है। उन्होंने कहा कि समिति में पर्याप्त मात्रा में हमाल उपलब्ध हैं, जिससे धान तौल एवं उठाव में समय की कोई बर्बादी नहीं होती। पूरी प्रक्रिया शासन के निर्देशानुसार सुव्यवस्थित ढंग से संचालित हो रही है।

समिति प्रबंधक ने यह भी बताया कि धान विक्रय के पश्चात किसानों के बैंक खातों में राशि का तत्काल अंतरण किया जा रहा है, जिससे किसानों में खुशी और संतोष दिखाई दे रहा है।

नगरीय निकायों में सभी सुविधाएं होंगी ऑनलाइन, यूपीआई से कर सकेंगे भुगतान

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन एवं उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव के दूरदर्शी नेतृत्व में राज्य में ई-गवर्नेस परियोजना के तहत शहरी प्रशासन को अधिक दक्ष, पारदर्शी और नागरिक केंद्रित बनाने का बड़ा फैसला लिया गया है। राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) प्रदेश के सभी 192 नगरीय निकायों में नागरिक सेवाओं को पूरी तरह ऑनलाइन उपलब्ध कराएगा। यह पहल "एक राज्य - एक प्लेटफार्म" और "डिजिटल छत्तीसगढ़" के लक्ष्य को साकार करेगा।

उप मुख्यमंत्री साव ने नगरीय प्रशासन विभाग की इस नई पहल के बारे में कहा कि ई-गवर्नेस परियोजना सुशासन के नए युग की शुरुआत होगी। इससे नागरिकों को सभी शहरी सेवाएँ घर बैठे, समय पर और पारदर्शी रूप से मिलेंगी। उन्होंने कहा कि यह सुविधा शासन को लोगों के और पास लाएगी और अब "शासन जनता के द्वार पर" की सोच धरातल पर दिखेगी।

एक पोर्टल पर नगरीय निकायों की कई सुविधाएं

परियोजना के तहत एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफार्म तैयार किया जाएगा, जिसमें नागरिक सेवा पोर्टल, मोबाइल एप्लीकेशन, भवन अनुमति प्रणाली, वित्तीय प्रबंधन प्रणाली, शिकायत निवारण मॉड्यूल, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली, मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली तथा निर्णय सहायता डैशबोर्ड जैसी प्रमुख सेवाएँ सम्मिलित होंगी। ये सभी मॉड्यूल क्लाउड आधारित डेटा सेंटर से संचालित होंगे, जिससे सभी नगरों का डेटा सुरक्षित, एकीकृत और रियल-टाइम में उपलब्ध रहेगा।

सभी कर ऑनलाइन जमा होंगे

ई-गवर्नेस प्रणाली से लोग अपने मोबाइल या कम्प्यूटर से प्रत्येक सेवा का लाभ ले सकेंगे। संपत्ति कर, जल कर, व्यापार कर और ठोस अपशिष्ट शुल्क जैसी सभी देनदारियाँ ऑनलाइन जमा की जा सकेंगी। नागरिकों को बैंक, यूपीआई, वॉलेट या नेट-बैंकिंग जैसे माध्यमों से त्वरित भुगतान की सुविधा मिलेगी, जिससे राज्य के राजस्व संग्रह में वृद्धि होगी।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि यह परियोजना आम लोगों को केंद्र में रखकर बनाई गई है और बेहतर प्रशासन की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने बताया कि ई-गवर्नेंस प्रणाली शुरू होने से पूरे राज्य के नगरीय निकायों का कामकाज एक जैसा और पारदर्शी होगा। फैसले अब तथ्यों और तकनीक के आधार पर लिए जाएंगे, जिससे लोगों को तेज़ और भरोसेमंद सेवाएं मिलेंगी।

साव ने कहा कि यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के “डिजिटल इंडिया” के विज़न पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन सरकार की मुहर है। इससे छत्तीसगढ़ में ऐसा सिस्टम बनेगा, जहां जनहित की सुविधाएं कागजों पर नहीं बल्कि डिजिटल माध्यम से घर बैठे भी मिलेंगी। नागरिकों को लगेगा कि सरकार सच में उनके द्वार पर है। उन्होंने कहा कि सेवाएं पारदर्शी होंगी, तकनीक जनकल्याण का साधन बनेगी और छत्तीसगढ़ डिजिटल सुशासन का एक आदर्श उदाहरण बनकर देश में नई पहचान बनाएगा।

एआई और डेटा एनालिटिक्स का भी उपयोग

ई-गवर्नेंस परियोजना में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डेटा एनालिटिक्स का भी उपयोग किया जाएगा। यह प्रणाली नागरिकों के शिकायतों के पैटर्न का विश्लेषण कर संभावित समस्याओं का पूर्वानुमान लगाएगी और अधिकारियों के प्रदर्शन का आंकलन करेगी। इससे नीतिगत निर्णयों में सटीकता आएगी और शहरी निकायों का संचालन "स्मार्ट गवर्नेस" के स्तर पर पहुंचेगा।

चालान के ऑनलाइन भुगतान के लिए केवल आधिकारिक वेबसाइट का ही करें उपयोग

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में आरटीओ ई-चालान से संबंधित ऑनलाइन ठगी के मामले सामने आ रहे हैं, जिसमें नकली ई-चालान भेजकर लोगों को ट्रैफिक नियम तोड़ने पर कार्रवाई का डर दिखाकर लिंक पर क्लिक करने के लिए मजबूर किया जाता है। इन फर्जी संदेशों के माध्यम से लोगों की व्यक्तिगत जानकारी और बैंक खाते से पैसे चुराए जा रहे हैं।

बेमेतरा स्थित क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध लिंक या एपीके फाइल पर क्लिक न करें। वास्तविक चालान की जानकारी केवल परिवहन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट https://echallan.parivahan.gov.in

(इचालान डॉट परिवहन डॉट जीओवी डॉट इन) पर ही प्राप्त करें। वेबसाइट पर जाकर पे ऑनलाइन विकल्प पर क्लिक कर चालान नंबर व कैप्चा कोड दर्ज कर तथा पंजीकृत मोबाइल नम्बर पर आए ओटीपी को डालकर चालान विवरण देखा जा सकता है।

परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि पुलिस एवं परिवहन प्रवर्तन अमले द्वारा जब भी ई-चालान जारी किया जाता है तो पंजीकृत मोबाइल नंबर पर केवल इसी आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से संदेश भेजे जाते हैं। विभाग ने लोगों से यह भी अपील की है कि किसी अज्ञात लिंक पर क्लिक न करें, किसी अनजान व्यक्ति को ऑनलाइन भुगतान न करें और अपने बैंक खाते से जुड़े लेन-देन को लेकर हमेशा सावधान रहें। यदि किसी प्रकार का फर्जी कॉल, संदेश या एप के जरिए धोखाधड़ी की कोशिश होती है तो उसकी शिकायत तुरंत नजदीकी पुलिस थाने में दर्ज कराएं।


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