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आज से शुरू होने जा रहा है जनजातीय संस्कृति, परंपरा और लोकजीवन का जीवंत उत्सव ‘बस्तर पंडुम’

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रायपुर। छत्तीसगढ़ की जनजातीय पहचान, लोक संस्कृति और परंपराओं का सबसे बड़ा उत्सव ‘बस्तर पंडुम’ इस वर्ष 10 जनवरी 2026 से पूरे उत्साह और गरिमा के साथ प्रारंभ होने जा रहा है। यह आयोजन बस्तर अंचल की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, रहन-सहन, लोककला, पारंपरिक खान-पान, वेशभूषा, गीत-संगीत और नृत्य परंपराओं को एक मंच पर प्रस्तुत करने का अनूठा प्रयास है।

‘पंडुम’ शब्द का अर्थ ही उत्सव होता है और वास्तव में यह आयोजन बस्तर की आत्मा, उसकी सांस्कृतिक चेतना और सामुदायिक जीवन का जीवंत प्रतिबिंब है। बस्तर पंडुम केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही जनजातीय विरासत के संरक्षण और संवर्धन का सशक्त माध्यम बन चुका है।

इस वर्ष बस्तर पंडुम का आयोजन तीन चरणों में किया जाएगा। ग्राम पंचायत स्तर, विकासखंड एवं जिला स्तर, संभाग/राज्य स्तरीय समापन समारोह। इन चरणों के माध्यम से बस्तर संभाग के सुदूर अंचलों में निवासरत आदिवासी कलाकारों, शिल्पकारों, लोक गायकों और नृत्य दलों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। बस्तर पंडुम में माड़िया, मुरिया, गोंड, हल्बा, भतरा सहित विभिन्न जनजातियों के पारंपरिक लोकनृत्य प्रस्तुत किए जाएंगे। मांदर, ढोल, तिरिया, बांसुरी जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज पूरे वातावरण को उत्सवी रंग में रंग देगी।

कार्यक्रम के दौरान जनजातीय समाज की विशिष्ट वेशभूषा, प्राकृतिक रंगों से सजे परिधान, मनमोहक आभूषण और पारंपरिक श्रृंगार दर्शकों को आकर्षित करेंगे। यह आयोजन युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। बस्तर पंडुम में आदिवासी समाज के पारंपरिक व्यंजन, पेय पदार्थ, मोटे अनाज, कंद-मूल, साग-सब्ज़ी और औषधीय खाद्य पदार्थों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। इससे पारंपरिक पोषण ज्ञान और स्थानीय खाद्य संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा।

विभिन्न स्तरों पर आयोजित प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कलाकारों, समूहों और प्रतिभागियों को पुरस्कार राशि एवं प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा। यह पहल कलाकारों के मनोबल को बढ़ाने के साथ-साथ लोक कलाओं को जीवित रखने में सहायक सिद्ध हो रही है। बस्तर पंडुम के माध्यम से आदिवासी जीवन शैली, परंपरा, कला और सांस्कृतिक मूल्यों को संरक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है। यह आयोजन न केवल सांस्कृतिक पहचान को सशक्त करता है, बल्कि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति देता है। आज बस्तर पंडुम एक उत्सव भर नहीं, बल्कि बस्तर की पहचान, अस्मिता और गौरव का प्रतीक बन चुका है। देश-प्रदेश से आने वाले पर्यटक और संस्कृति प्रेमी इस उत्सव के माध्यम से बस्तर की आत्मा को करीब से जानने का अवसर प्राप्त करते हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 40.25 करोड़ रूपए लागत के विकास कार्यों का किया लोकार्पण और भूमिपूजन

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज विकासखंड कांसाबेल के ग्राम ढुढरुडांड में आयोजित अखिल भारतीय आदिवासी कंवर समाज विकास समिति के वार्षिकोत्सव कार्यक्रम में 40.25 करोड़ रूपए लागत के 18 विकासकार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया। इनमें 13.56 करोड़ रूपए की लागत से निर्मित 9 विकासकार्यों का लोकार्पण और 26.68 करोड़ 68 रुपए लागत के 9 विकासकार्यों का भूमिपूजन शामिल है। इस अवसर पर विधायक गोमती साय, पूर्व सांसद नन्द कुमार साय, पूर्व संसदीय सचिव भरत साय, जिला पंचायत सदस्य गेंद बिहारी सिंह सहित कंवर समाज के पदाधिकारी मौजूद थे।

मुख्यमंत्री साय ने पत्थलगांव विकासखण्ड में जिन नवनिर्मित कार्यों का भूमिपूजन किया उनमें 2.71 करोड़ रूपए लागत से ग्राम आमाटोली में 100 सीटर बालक छात्रावास भवन, 3.04 करोड़ रुपए लागत से ग्राम पंचायत पंगसुवा दर्रापारा तक सड़क, 2.35 करोड़ रुपए लागत से सराईटोला से बरपारा पहुंच मार्ग, 3.06 करोड़ लागत से पालीडीह बस्ती से लाखझार तक सड़क, 6.34 करोड़ लागत से कर्राजोर से होते हुए बरपारा, धनुपारा से काडरो पहुंच मार्ग, 2.73 करोड़ रुपए लागत से बंधनपुर से छातासराई तक पहुंच मार्ग, 2.16 करोड़ रुपए लागत से सूरजगढ़ के मिडिल स्कूल पक्की सड़क से लुडेग गौठान तक पहुंच मार्ग, 2.01 करोड़ लागत के तिलडेगा अटल चौक से आमाकानी पहुंच मार्ग और 2.25 करोड़ रुपए लागत से एस.टी.पी. निर्माण कार्य शामिल है।

इसी तरह जिन नवनिर्मित कार्यों का लोकार्पण किया उनमें विकासखण्ड कांसाबेल में 2.63 करोड़ रुपए लागत से कांसाबेल के कोरंगा बस्ती से ग्यारटोली पहुंच मार्ग, 1.07 करोड़ रुपए लागत से छुरीटोली से अलंगीझार पहुंच मार्ग, 1.97 करोड़ रुपए लागत से करंजटोली डाड़ीडिपा होते हुए चक्रधर नगर पहुंच मार्ग, 1.72 करोड़ रुपए की लागत से कोरंगा बस्ती से खैरवारटोली पहुंच मार्ग, 4.28 करोड़ रुपए की लागत से मुसकुटी से मुख्य मार्ग पहुंच मार्ग, 3 करोड़ रुपए की लागत से करंजटोली-रजौटी पहुचं मार्ग 1.23 करोड़ रुपए की लागत से घोघरा के चौक से फरसाटोली मेन रोड पहुंचमार्ग, 10 लाख रुपए की लागत से सीसी रोड, नक्टीमुंडा और 54.01 लाख रुपए की लागत से पत्थलगांव में अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस), कार्यालय भवन शामिल है।

आदिवासी परिवारों को शिक्षा, आजीविका, स्वास्थ्य और विकास के मिल रहे नए अवसर : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

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रायपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने केंद्र सरकार द्वारा संचालित ‘आदि कर्मयोगी अभियान’, ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ तथा ‘प्रधानमंत्री जनमन अभियान’ को जनजातीय समाज के उत्थान हेतु महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि ये सभी योजनाएँ देश के करोड़ों आदिवासी परिवारों को शिक्षा, आजीविका, स्वास्थ्य और विकास के नए अवसर प्रदान कर रही हैं। राष्ट्रपति मुर्मु आज अम्बिकापुर में आयोजित जनजातीय गौरव दिवस के कार्यक्रम को सम्बोधित कर रही थी।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत लोकतंत्र की जननी है, और इसकी झलक बस्तर की ‘मुरिया दरबार’ जैसी जनजातीय परंपराओं में भी दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा की जनजातीय विरासत अत्यंत समृद्ध और आपस में जुड़ी हुई है। उन्होंने बताया कि उनके कार्यकाल के दौरान राष्ट्रपति भवन में ‘जनजातीय दर्पण’ संग्रहालय की स्थापना की गई है, 

तथा वहां आदिवासी कला और संस्कृति को विशेष स्थान दिया गया है। राष्ट्रपति ने अपने सम्बोधन में छत्तीसगढ़ में जनजातीय गौरव पखवाड़ा मनाने, जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय बनाने और शासकीय योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ सरकार और मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय की प्रशंसा की। उन्होंने बताया कि दिल्ली में आयोजित ‘आदि कर्मयोगी’ राष्ट्रीय सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के आदिवासी विकास विभाग को उत्कृष्ट कार्य के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ है। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तथा उनकी पूरी टीम को बधाई दी। 

छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि जनजातीय गौरव दिवस अपनी पहचान, सांस्कृतिक विरासत और उन वीर पूर्वजों को स्मरण करने का दिन है, जिन्होंने जनजातीय इतिहास को गौरवशाली अध्यायों से भर दिया। समारोह में उपस्थित देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का सम्मान करते हुए राज्यपाल ने कहा कि एक साधारण परिवार से निकलकर राष्ट्र के सर्वाेच्च संवैधानिक पद तक पहुँचने की उनकी प्रेरक यात्रा पूरे भारत के लिए उदाहरण है।

भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने उनके व्यक्तित्व और संघर्ष के कई प्रेरक प्रसंगों को याद किया। उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा ने नशाखोरी, अन्याय और अंधविश्वास के खिलाफ साहसिक अभियान चलाया। उनके नेतृत्व में हुआ ‘उलगुलान’ ब्रिटिश शासन को चुनौती देने वाला ऐतिहासिक आंदोलन था, जिसने जनजातीय स्वाभिमान और अधिकारों की लड़ाई को नई दिशा दी।  उन्होंने कहा कि शहीद वीर नारायण सिंह, राजा गेंद सिंह, कंगला मांझी, वीर सीताराम कंवर और गुंडाधुर जैसे महानायकों ने अपने बलिदान और संघर्ष से स्वतंत्रता आंदोलन और जनजातीय गौरव को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया। उनका योगदान प्रदेश की स्मृतियों में सदा अमर रहेगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने उद्बोधन में कहा कि यह छत्तीसगढ़ का सौभाग्य है कि राष्ट्रपति जी ने अपने व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद इस समारोह में शामिल होकर प्रदेश की गरिमा बढ़ाई है। कुछ दिन पूर्व नक्सल पीड़ित परिवारों से राष्ट्रपति की भेंट का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने प्रत्येक पीड़ित से आत्मीयता से हाल-चाल जानकर अपनी ममतामयी छवि प्रस्तुत की। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ का इतिहास अत्यंत समृद्ध है और यहाँ के आदिवासी समाज ने देश की स्वतंत्रता में अमूल्य योगदान दिया है। हाल ही में 1 नवम्बर को आयोजित रजत महोत्सव में देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी भी उपस्थित थे और उन्होंने आजादी की लड़ाई से जुड़े आदिवासी महापुरुषों पर आधारित म्यूज़ियम का लोकार्पण किया। उन्होंने बताया कि जनजातीय विद्रोह के नायकों की स्मृति को सहेजने हेतु शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह-संग्रहालय का निर्माण किया गया है, जिसे राज्य स्थापना दिवस पर प्रधानमंत्री द्वारा जनता को समर्पित किया गया। यह देश का पहला जनजातीय संग्रहालय है, जिसमें डिजिटल माध्यम से जनजातीय गौरवगाथा को देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के करकमलों से आज जनजातीय विद्रोह के नायकों एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिवारजनों का सम्मान होना सभी के लिए गौरव का विषय है। साथ ही जनजाति एवं उपजनजाति प्रमुखों को भी सम्मानित किया गया, जो अपने ज्ञान और अनुभव से समाज को निरंतर जागरूक कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत प्रदेश के 53 विकासखंडों की 2,365 बसाहटों में तीव्र गति से विकास कार्य हो रहे हैं, इसी प्रकार, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत राज्य के 32 जिलों के 6,691 गांवों में विकास के कार्यों का लाभ दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि तेंदूपत्ता संग्राहकों की संग्रहण राशि 4,000 रुपये से बढ़ाकर 5,500 रुपये कर दी गई है तथा चरण पादुका वितरण पुनः प्रारंभ किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जी की दृढ़ इच्छाशक्ति से नक्सलवाद अब अंतिम चरण में है, और मार्च 2026 तक इसके समूल नष्ट होने के लक्ष्य की ओर प्रदेश तेजी से अग्रसर है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों के चलते नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास का उजाला पहुँचा है। आकर्षक पुनर्वास नीति के कारण कई भटके हुए लोग मुख्यधारा से जुड़कर सुखमय जीवन व्यतीत कर रहे हैं। नियद नेल्ला नार योजना के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है और सरकार की विभिन्न योजनाओं से जनजातीय समाज निरंतर लाभान्वित हो रहा है।

केंद्रीय राज्यमंत्री दुर्गादास उईके ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा केवल झारखंड या जनजाति समाज के नायक ही नहीं थे बल्कि पूरे भारतवर्ष के लिए स्वाभिमान, सम्मान, गौरव, गरिमा और सामाजिक न्याय के प्रतीक थे। उन्होंने अपने जीवन का हर क्षण जनहित और स्वतंत्रता के संघर्ष के लिए समर्पित किया। उन्होंने अपने समाज को संगठित किया, उन्हें आत्मसम्मान और स्वतंत्रता का पाठ पढ़ाया। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि बिरसा मुंडा केवल एक योद्धा नहीं बल्कि एक समाज सुधारक एवं आध्यात्मिक गुरु भी थे। उनका जीवन यह सिखाता है कि कोई भी व्यक्ति चाहे उसका जन्म किसी भी समाज में हुआ हो अगर उसके भीतर सच्ची लगन और आत्मबोध है तो वह इतिहास बदल सकता है। उन्होंने कहा कि आजादी के अमृत काल में देश भर के जनजाति समाज के महानायक, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, महापुरुषों को चिन्हित करके उन्हें इतिहास में उचित स्थान दिया जा रहा है। जनजाति समाज के महापुरुषों के जन्म स्थलों पर स्मारक बनाए जा रहे हैं। जनजाति समाज के लोग के पूजा स्थलों को चयनित कर उनका पुनरुत्थान किया जा रहा है।

आदिम जाति विकास विभाग मंत्री राम विचार नेताम ने कहा कि 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा जयंती के अवसर पर पूरे देश और प्रदेश में जनजातीय गौरव दिवस मनाया गया। उसी परिप्रेक्ष्य में आज का यह भव्य आयोजन संपन्न हो रहा है, जिसकी गरिमा राष्ट्रपति महोदया की उपस्थिति से कई गुना बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के प्रयासों और प्रेरणा से भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती से जनजातीय गौरव दिवस की परंपरा प्रारंभ हुई और आज उनकी 151वीं जयंती पर देशभर के जनजातीय समाज का पुनः एकत्रित होना अत्यंत महत्वपूर्ण है। जनजातीय समाज के गौरवपूर्ण इतिहास को स्मरण करना, उसे सुरक्षित रखना और भविष्य की दिशा को प्रेरित करना इसका मुख्य उद्देश्य है। 

नर्तक दल हुए पुरस्कृत

समारोह में राष्ट्रपति मुर्मु ने शहीद वीर नारायण सिंह लोक कला महोत्सव नृत्य प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले लिंगो गोटूल मांदरी नाचा पार्टी कोंडागांव एवं उत्तर छत्तीसगढ़ जनजातीय लोक कला महोत्सव (करम महोत्सव) प्रतियोगिता में  प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले जय माता दी करमा नृत्य पार्टी कांसाबेल के विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया। इस दौरान मुख्यमंत्री साय ने राष्ट्रपति को भगवान बिरसा मुंडा के साहस को प्रदर्शित और राज्यपाल ने भित्ती चित्रकला से जुड़े स्मृति चिन्ह भेंट किए। इस अवसर पर वित्त मंत्री ओमप्रकाश चौधरी, पर्यटन संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, वन मंत्री केदार कश्यप, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, सांसद चिंतामणी महाराज, विधायक  पुरंदर मिश्रा, विधायक किरण सिंह देव, महापौर अम्बिकापुर  मंजुषा भगत भी उपस्थित थी।

विशेष लेख : आदिवासी वीर नायकों को समर्पित है देश का पहला डिजिटल संग्रहालय

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रायपुर। आदिवासी नायक भगवान बिरसा मुंडा जहां देशभर के आदिवासियों के प्रेरणापूंज है। ठीक उसी प्रकार छत्तीसगढ़ में भी फिरंगियों के विरूद्ध बिगुल फूंकने का काम सोनाखान केे जमींदार वीर नारायण सिंह ने किया। उन्होंने फिरंगियों की दमन और शोषणकारी नीतियों के विरूद्ध विद्रोह का बिगुल फूंका का और उनसे लड़ते हुए शहीद हुए। उन्हें छत्तीसगढ़ का प्रथम शहीद माना जाता है।  

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शहीद वीर नारायण सिंह और फिरंगियों के विरूद्ध संघर्ष करने वाले आदिवासी नायकों की स्मृतियों को संजोने और भावी पीढ़ी तक उनके प्रेरणास्पद कार्यों को पहुंचाने के लिए नवा रायपुर में संग्रहालय बनाने का निर्णय लिया। मुख्यमंत्री के इस निर्णय से पूरा आदिवासी समाज गौरवान्वित है। 

प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने बताया कि नवा रायपुर के सेक्टर 24 में तैयार किया जा रहा है भव्य संग्रहालय अपने आप में अनूठा है। यह देश का पहला डिजिटल संग्रहालय है। लगभग 50 करोड़ रूपए की लागत से इस संग्रहालय को तैयार किया गया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ पर इस संग्र्रहालय का लोकार्पण करने जा रहे हैं। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने की शुरूआत की। उन्होंने जनजाति समाज को मुख्यधारा में शामिल करने के लिए देश का सबसे बड़ा अभियान पीएम जनमन और प्रधानमंत्री धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना शुरू की। इस अभियान के तहत जनजाति इलाकों में सभी प्रकार की मूलभूत सुविधाओं के साथ ही कंेद्र और राज्य सरकार की योजनाओं से उन्हें लाभान्वित किया जा रहा है। 

संग्रहालय में शहीद वीर नारायण सिंह का भव्य स्मारक भी बनाया गया है। साथ ही यहां छत्तीसगढ़ में आदिवासी विद्रोहों हल्बा विद्रोह, सरगुजा विद्रोह, भोपालपट्टनम, परलकोट, तारापुर, लिंगागिरी, कोई, मेरिया, मुरिया, रानी चौरिस, भूमकाल, सोनाखान विद्रोहों के साथ ही झंडा सत्याग्रह और जंगल सत्याग्रह की जीवंत झलक दिखाई गई है। इन विद्रोहों को अलग-अलग 14 सेक्टरों में बांटा गया है। अत्याधुनिक इस डिजिटल संग्रहालय में आगतुंकों के लिए वीएफएक्स टेक्नोलॉजी, प्रोजेक्शन, डिजिटल स्क्रीन, मोबाइल पर क्यूआर कोड स्कैन की सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। 

संग्रहालय के प्रवेश द्वार पर सरगुजा कलाकारों की नक्काशीदार पैनल, 1400 वर्ष पुराने साल-महुआ और साजा वृक्ष की प्रतिकृति जिसकी पत्तियों पर 14 विद्रोहों की डिजिटल कहानी उकेरी गई है। यह वृक्ष मोशन फिल्मों की तरह पूरे विद्रोहो की कहानी बतलाती प्रतीत होगी। इस संग्रहालय में सेल्फी पॉइंट, दिव्यांग सुविधाएं, सीनियर सिटीजन के लिए विशेष इंतजाम, ट्राइबल आर्ट से सजा फर्श, भगवान बिरसा मुंडा, शहीद गैंदसिंह और रानी गाइडल्यू की मूर्तियां भी लगाई गई है, जो लोगों के लिए प्रेरणाप्रद होंगे।  

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय कहते हैं कि यह संग्रहालय छत्तीसगढ़ जनजातीय संस्कृति का वैश्विक केंद्र बनेगा। यहां आने वाले लोगों को आदिवासी वीर नायकों की शौर्य गाथा से गर्व की अनुभूति होगी। यह आदिवासी समाज की पूर्वजों की स्मृति है और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है। 

जगदलपुर में धुरवा समाज के संभाग स्तरीय नुआखाई मिलन समारोह एवं नवनिर्मित सामाजिक भवन

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य सरकार जनजातीय समाज के समग्र विकास के लिए कटिबद्ध है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आदिवासी बहुल गांवों के विकास में किसी प्रकार की कमी न हो, धन की कोई समस्या न हो—इस दृष्टि से धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना शुरू की है। इस योजना के लिए 80 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र विशेष पिछड़ी जनजातियों के उत्थान हेतु प्रधानमंत्री जनमन योजना प्रारंभ की गई है, जिससे इन विशेष पिछड़ी जनजातियों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सकारात्मक प्रयास हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इन सभी सार्थक प्रयासों से जनजातीय क्षेत्रों में विकास की गंगा बहेगी और हमारे जनजातीय समुदाय निरंतर प्रगति के मार्ग पर अग्रसर होंगे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने यह बात जगदलपुर के वन विद्यालय परिसर में धुरवा समाज के संभाग स्तरीय नुआखाई मिलन समारोह और नवनिर्मित सामाजिक भवन "ओलेख" के लोकार्पण कार्यक्रम में कही। इस अवसर पर उन्होंने धुरवा समाज हेतु 05 स्थानों पर पंद्रह-पंद्रह लाख रुपए की लागत से डोम निर्माण के लिए कुल 75 लाख रुपए की घोषणा की। साथ ही, धुरवा समाज के 36 सरपंचों द्वारा ग्राम पंचायतों के विकास हेतु प्रस्तुत प्रस्तावों को भी स्वीकृति प्रदान करने का आश्वासन दिया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रतीकात्मक गुड़ी में बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी की पूजा-अर्चना की और धुरवा समाज के नवनिर्मित सामाजिक भवन "ओलेख" का लोकार्पण किया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने धुरवा समाज के वीर नायक शहीद गुंडाधुर को नमन करते हुए कहा कि आज का यह ऐतिहासिक नुआखाई मिलन समारोह हमारी समृद्ध संस्कृति और परंपराओं का संवाहक है। यह हमारे जनजातीय समाज की महान परंपरा है कि हम किसी भी अनाज या फल को ग्रहण करने से पूर्व अपने देवी-देवताओं की पूजा कर उन्हें अर्पित करते हैं और फिर ग्रहण करते हैं। यह परंपरा आज भी कायम है और आने वाली पीढ़ियों तक इसे बनाए रखा जाएगा।

मुख्यमंत्री साय ने धुरवा समाज को सामाजिक भवन "ओलेख" के लोकार्पण की बधाई देते हुए कहा कि यह नवीन भवन समाज के विकास की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा और समाज के सभा-सम्मेलनों के लिए काम आएगा।

उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माता, पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी के योगदान को याद करते हुए कहा कि अटलजी ने जनजातीय समुदाय के कल्याण को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार में पृथक से जनजातीय कार्य मंत्रालय का गठन किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ रजत जयंती वर्ष की बधाई देते हुए कहा कि अटलजी का जन्मशताब्दी वर्ष अटल निर्माण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने आदिवासी बहुल बस्तर और सरगुजा संभाग के विकास के लिए विशेष आदिवासी क्षेत्र विकास प्राधिकरण की भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने इन क्षेत्रों के विकास की चिंता करते हुए दोनों विशेष आदिवासी क्षेत्र विकास प्राधिकरणों का गठन किया था, जिससे योजनाओं के अतिरिक्त भी इन इलाकों में आवश्यक विकास कार्य सुनिश्चित किए जा सकें।

उन्होंने कहा कि हमारी सरकार बस्तर संभाग के माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से सड़कों, पुल-पुलियों, बिजली और पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ ही आवास और राशन जैसी मूलभूत सुविधाएं प्रदान कर रही है। हर पात्र व्यक्ति को जनहितकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने की दिशा में हम पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रहे हैं।

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने धुरवा समाज के सदस्यों को नुआखाई मिलन समारोह की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि समाज का यह समन्वित प्रयास नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि जब हम अपने पूर्वजों की परंपराओं का निर्वहन करते हुए उन्हें निरंतर संजोए रखते हैं, तो समाज की एकता और संस्कृति मजबूत होती है।

कार्यक्रम को वन मंत्री केदार कश्यप, सांसद बस्तर महेश कश्यप और विधायक जगदलपुर किरण देव ने भी संबोधित करते हुए धुरवा समाज को नुआखाई मिलन समारोह की शुभकामनाएं दीं।

आरंभ में धुरवा समाज के संभागीय अध्यक्ष पप्पू नाग ने स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत किया और समाज की गतिविधियों से अवगत कराया। समाज के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री का पारंपरिक छतड़ी, धुरवा तुवाल एवं कोटी सहित तीर-धनुष भेंट कर आत्मीय स्वागत किया। अन्य अतिथियों का भी पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया।

इस अवसर पर चित्रकोट विधायक विनायक गोयल, दंतेवाड़ा विधायक चैतराम आटामी, छत्तीसगढ़ ब्रेवरेज कॉरपोरेशन के अध्यक्ष श्रीनिवास राव मद्दी, जगदलपुर के महापौर संजय पांडेय सहित अन्य जनप्रतिनिधि, कमिश्नर बस्तर डोमन सिंह, आईजी सुंदरराज पी, कलेक्टर हरिस एस, पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा तथा समूचे बस्तर संभाग से आए धुरवा समाज के पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित थे।


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