Media24Media.com: #आदि कर्मयोगी अभियान

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परंपरा और तकनीक का संगम: जनजातीय कार्य मंत्रालय ने किया ‘आदि संस्कृति’ डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म का शुभारंभ

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नई दिल्ली, जनजातीय कार्य मंत्रालय ने आज ‘आदि संस्कृति’ का बीटा संस्करण लॉन्च किया – एक अभिनव डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म जो जनजातीय कला रूपों के संरक्षण, आजीविका संवर्धन और भारत की जनजातीय समुदायों को विश्व से जोड़ने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इस प्लेटफॉर्म का औपचारिक शुभारंभ जनजातीय कार्य मंत्रालय के राज्य मंत्री दुर्गादास उइके द्वारा राष्ट्रीय सम्मेलन ‘आदि कर्मयोगी अभियान’ के दौरान किया गया।

‘आदि संस्कृति’ को विश्व का पहला डिजिटल विश्वविद्यालय बनाने की परिकल्पना की गई है, जो जनजातीय समुदायों की संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण व संवर्धन के साथ-साथ जनजातीय शिल्पकारों के उत्पादों को वैश्विक स्तर पर पहुँचाने के लिए ऑनलाइन मार्केटप्लेस भी होगा। यह प्लेटफॉर्म तीन प्रमुख घटकों को एकीकृत करता है:

  1. आदि विश्वविद्यालया (डिजिटल ट्राइबल आर्ट अकादमी): वर्तमान में 45 पाठ्यक्रम, जिनमें जनजातीय नृत्य, चित्रकला, शिल्प, संगीत और लोककथाएँ शामिल।

  2. आदि संपदा (सामाजिक-सांस्कृतिक भंडार): 5 विषयों पर आधारित 5,000 से अधिक संकलित दस्तावेज़ – चित्रकला, नृत्य, वस्त्र एवं परिधान, शिल्पकृतियाँ और आजीविका।

  3. आदि हाट (ऑनलाइन मार्केटप्लेस): फिलहाल TRIFED से जुड़ा हुआ, आगे चलकर इसे जनजातीय शिल्पकारों के लिए एक समर्पित डिजिटल बाज़ार के रूप में विकसित किया जाएगा।

राज्य स्तरीय जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (TRIs) की सहभागिता

‘आदि संस्कृति’ को राज्य स्तरीय जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (TRIs) की साझेदारी से विकसित किया जा रहा है, ताकि स्थानीय भागीदारी, प्रामाणिकता और विविधता सुनिश्चित हो। पहले चरण में आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मेघालय, ओडिशा, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश के TRIs ने दस्तावेज़ीकरण, सामग्री संकलन और डिजिटल मैपिंग में योगदान दिया है।

शुभारंभ समारोह से विचार

दुर्गादास उइके ने अपने संबोधन में कहा कि मंत्रालय अनुसूचित जनजातियों के उत्थान और उनकी धरोहर के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने पहले लॉन्च किए गए ‘आदि वाणी’ (AI-आधारित जनजातीय भाषा अनुवादक) का उल्लेख किया और उम्मीद जताई कि ऐसे उपकरण लोकतांत्रिक संस्थानों में भी उपयोगी सिद्ध होंगे।

उन्होंने कहा, “शिक्षा से संपदा और फिर हाट तक – ‘आदि संस्कृति’ एक समग्र मंच है। यह जनजातीय समुदायों की संस्कृति, विरासत और कला रूपों का भंडार है। इसके माध्यम से अब कोई भी व्यक्ति जनजातीय संस्कृति और आजीविका के खजाने से सीधे जुड़ सकता है।”

अनंत प्रकाश पांडेय, संयुक्त सचिव, जनजातीय कार्य मंत्रालय ने कहा कि ‘आदि संस्कृति’ विकसित भारत @2047 की दिशा में सांस्कृतिक संरक्षण और जनजातीय सशक्तिकरण की एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने लोगों से पोर्टल का उपयोग करने और इसे और समृद्ध बनाने हेतु सुझाव देने का आग्रह किया।

आगे की राह

मंत्रालय ने पुष्टि की है कि ‘आदि संस्कृति’ को चरणबद्ध तरीके से विस्तारित किया जाएगा, जिसमें और अधिक पाठ्यक्रम, संग्रहण और बाज़ार से एकीकरण शामिल होगा। दीर्घकालिक लक्ष्य इसे एक जनजातीय डिजिटल विश्वविद्यालय में विकसित करना है, जो प्रमाणन, उन्नत अनुसंधान और नवाचारी शिक्षण पथ प्रदान करेगा।

संरक्षण, शिक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण को एक साथ लाते हुए, ‘आदि संस्कृति’ भारत के जनजातीय समुदायों की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित और प्रोत्साहित करने के साथ-साथ उन्हें डिजिटल ज्ञान अर्थव्यवस्था में सक्रिय भागीदार बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर है।


आदि कर्मयोगी अभियान : ग्राम सचिवों हेतु उन्मुखीकरण कार्यक्रम सम्पन्न

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 महासमुंद, जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार की महत्वाकांक्षी अभियान आदि कर्मयोगी अभियान अंतर्गत मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत हेमंत नंदनवार की अध्यक्षता में सोमवार को जिला पंचायत के सभाकक्ष में ग्राम सचिवों के लिए जिला स्तरीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें अभियान के बारे में सम्पूर्ण जानकारी एवं दिशा निर्देश दिया गया। साथ ही कार्यक्रम में योजना के उद्देश्य, कार्य का तरीका एवं परिणाम के सम्बन्ध में आवश्यक चर्चा भी किया गया। उन्मुखीकरण कार्यक्रम में जिले के पांचों जनपद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं समस्त ग्राम के सचिव मौजूद थे।

मुख्य कार्यपालन अधिकारी हेमंत नंदनवार ने कहा कि सभी सचिव इस अभियान हेतु अपने ग्राम के नोडल अधिकारी के रूप में काम करेंगे एवं सेवा प्रदायगी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। समस्त विभागों के साथ मिलकर अभिसरण की भावना से ग्रामों का विकास किया जाना अत्यंत आवश्यक है।

अभियान के सम्बन्ध में जानकारी देते हुए आदिवासी विकास विभाग से मास्टर ट्रेनर श्री निलेश खांडे ने बताया कि योजना का मुख्य उद्देश्य ग्राम स्तर पर एक ऐसे लीडरशिप टीम तैयार करना है जो अपने ग्राम के मूलभूत आवश्यकताओं को शासन तक उचित तरीके से रख पाएं। जिससे शासन-प्रशासन उसे सही तरीके से पूरा कर पाए, साथ ही सभी योजनाओं का लाभ अंतिम मील तक संतृप्त हो सके। इस अभियान के लिए महत्वपूर्ण कड़ी में आदि सेवा केंद्र है जो सभी धरती-आबा योजना अंतर्गत चयनित 308 ग्रामो में स्थापित किये जाएंगे। जिसके अंतर्गत एक सिंगल विंडो का संचालन ग्राम सचिव एवं रोजगार सहायक के माध्यम से किया जाएगा, जहाँ ग्रामीणों को अपने समस्या का समाधान मिल सके।

छत्तीसगढ़ में चलेगा “आदि कर्मयोगी अभियान”,17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक चलेगा यह अभियान

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर छत्तीसगढ़ में “आदि कर्मयोगी अभियान” 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2025 तक चलाया जाएगा। छत्तीसगढ़ सहित देशभर के अनेक राज्यों में संचालित हो रहे इस अभियान का उद्देश्य जनजातीय अंचलों में सेवा, समर्पण और सुशासन की भावना के साथ शासकीय योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि आदि कर्मयोगी अभियान के अंतर्गत जनजातीय परिवारों को मूलभूत सुविधाओं से लाभान्वित किया जाना है, अतः इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। इस अभियान के अंतर्गत राज्य के 28 जिलों, 128 विकासखंडों और 6,650 आदिवासी बहुल ग्रामों को शामिल किया गया है। अभियान के संचालन हेतु ग्राम स्तर पर 1,33,000 से अधिक कैडर (एनजीओ, स्वयंसेवी, पंचायत प्रतिनिधि, युवा एवं सेवाभावी संगठन) तैयार किए जाएंगे। ये कैडर आवास, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं से संबंधित योजनाओं के क्रियान्वयन तथा ग्राम विकास की योजना निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

अभियान के अंतर्गत प्रशिक्षण कार्यक्रम राज्य, जिला, ब्लॉक और ग्राम स्तर पर चरणबद्ध रूप से आयोजित किए जाएंगे। प्रत्येक चयनित ग्राम में “आदि सेवा केंद्र” की स्थापना की जाएगी, जो शासकीय सेवाओं की प्रदायगी और जनभागीदारी को प्रोत्साहित करने का केंद्र बनेगा। पूरे अभियान के दौरान ‘आदि सेवा केंद्र’ के माध्यम से ‘सेवा पर्व’ और ‘आदि कर्मयोगी सेवा अभियान’ का संचालन किया जाएगा। इस कार्य में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

आदिम जाति विकास तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास विभाग द्वारा निर्धारित विस्तृत दिशा-निर्देशों के अनुसार जिलों में एनजीओ, सीएसओ तथा स्थानीय वालंटियर्स का चयन कर उन्हें प्रशिक्षित किया जाएगा। साथ ही ग्रामों के “ट्राइबल विलेज विजन 2030” का निर्माण भी किया जाएगा। इस दौरान शिकायत निवारण शिविर, जनजागरूकता अभियान तथा “आदिवासी सेवा दिवस” का आयोजन किया जाएगा।


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